आपका समर्थन, हमारी शक्ति

सोमवार, 13 जून 2011

कन्या-भ्रूण की हत्या कहाँ तक वैध ??

कन्याओं के प्रति विरक्ति सिर्फ भारत में हो, ऐसा नहीं है. यह रोग अन्य देशों में भी है. जो भारतीय अच्छी शिक्षा-दीक्षा पाकर विदेशों में बस गए, अभी भी अपनी रुढी मानसिकता से छुटकारा नहीं पा पा रहे हैं. तभी तो उनके लिए भी बेटा-बेटी का भेद बना हुआ है. गर्भ में बेटी के आते ही उसे ख़त्म कर देने में उनकी आत्मा कचोटती नहीं.


यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अमेरिका में भारतीय मूल की महिलाएं पुत्र की चाह में कन्या भ्रूण हत्या करा रही हैं। अध्ययन के मुताबिक महिलाएं कृत्रिम प्रजनन तकनीक इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के दौरान सिर्फ नर भ्रूण को प्रत्यारोपित करा रही हैं। वह कन्या भ्रूण का गर्भपात करा देती हैं।

शोधकर्ताओं ने कैलिफोर्निया, न्यूजर्सी और न्यूयार्क में 65 आप्रवासी भारतीय महिलाओं का साक्षात्कार लिया, जिन्होंने सितंबर 2004 से दिसंबर 2009 के बीच लिंग परीक्षण कराकर कन्या भ्रूण हत्याएं की। गौरतलब है कि भारत के विपरीत अमेरिका में लिंग निर्धारण वैध है। पर इस वैधता की आड में कन्या-भ्रूण की हत्या कहाँ तक वैध है, यह एक बड़ा सवाल जरुर है ??

एक टिप्पणी भेजें