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सोमवार, 30 जुलाई 2012

इस बार इलाहाबाद में जन्म-दिन सेलिब्रेशन...

आखिर फिर से हमारा जन्मदिन आ गया. साल में एक ही बार तो आता है, पर मजबूर कर जाता है एक गहन विश्लेषण के लिए कि क्या खोया-क्या पाया इस एक साल में...और फिर दुगुने उत्साह के साथ लग जाती हूँ आने वाले दिनों के लिए. पिछला जन्म-दिन पोर्टब्लेयर में सेलिब्रेट किया था तो इस बार इलाहाबाद में हूँ. यह भी एक अजीब संयोग है. वहां बंगाल की खाड़ी थी और यहाँ गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती का अद्भुत संगम. आखिर गंगा जी भी तो बंगाल की खाड़ी में ही जाकर मिलती हैं. हमें तो दोनों जगह रहने और अपना जन्म-दिन मनाने का सु-अवसर मिल रहा है. सौभाग्यवश आज हमारे साथ हमारे पूजनीय श्वसुर जी भी हैं. यह पहला अवसर है जब वे हमारे जन्म-दिन पर हमारे साथ हैं. पिछले जन्म-दिन पर हमने अपने बाल-गीत संग्रह 'चाँद पर पानी' की चर्चा की थी, वह भी प्रकाशित होकर हाथ में आ चुकी है. अपनी पहली कृति देखना भला किसी नहीं अच्छा लगता।
आज रेनी-डे के चलते बिटिया अक्षिता (पाखी) का स्कूल भी बंद है, सो मस्ती ही मस्ती. अब तो अपूर्वा भी चीजों को समझने लगी है. हमारी खुशियों में शरीक होने लगी है. पतिदेव कृष्ण कुमार जी के क्या कहने, वह कल सन्डे से ही हमारा बर्थ-डे सेलिब्रेट कर रहे हैं. कल दिन भर मस्ती की और फिर कान्हा-श्याम में 'जन्नत' का डिनर. ..वाह !..अभी तो आज पूरा दिन बाकी है, देखिये क्या-क्या करते हैं.बाहर झांक रही हूँ, इन्द्र देवता कुछ शांत-शांत से दिख रहे हैं. लगता है आज दिन खुशनुमा रहेगा.

ब्लागिंग जगत में आप सभी के स्नेह से सदैव अभिभूत रही हूँ. जीवन के हर पड़ाव पर आप सभी की शुभकामनाओं और स्नेह की धार बनी रहेगी, इसी विश्वास के साथ.... !!
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