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बुधवार, 28 अगस्त 2013

'ब्लॉग' बनाम 'फेसबुक' की बहस के बीच एक बार फिर से 'अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन'


फेसबुक के उद्भव ने हिंदी-ब्लागिंग को दोराहे पर खड़ा कर दिया। तमाम लोगों ने फेसबुक को हिंदी ब्लागिंग के समक्ष खतरे से जोड़ दिया। तमाम ब्लागर्स फेसबुक पर न सिर्फ सक्रिय हुए, बल्कि उसी में रमते गए। एक बार फिर से वही सवाल-जवाब कि हिंदी ब्लोग्स पर गंभीर  पोस्ट नहीं आती हैं और यदि आती भी हैं तो उन्हें उचित रिस्पांस (टिप्पणियां) नहीं मिलता। फेसबुक के लाइक और कमेंट्स की बहार ने कईयों को हिंदी ब्लागिंग से फेसबुकिया बना दिया। कम शब्दों में फेसबुक स्टेटस अपडेट कर शाम ताक वाह-वाही मिलने के क्रम ने कईयों को दिग्भ्रमित भी कर दिया। तमाम चर्चित ब्लॉग एक लम्बे समय से अपडेट नहीं हुए हैं। धडाधड बनने वाले कम्युनिटी ब्लॉगों पर सामान्यतया एक ही पोस्ट दिखती हैं। जो कल तक ब्लॉग को देखे बिना बिस्तर पर सोने नहीं जाते थे, उनके लिए ब्लॉग 'अतीत' का स्वप्न बनकर रह गया। 


पर इन सबके बीच भी हिंदी ब्लागिंग से गंभीर रूप से जुड़े हुए लोगों की संख्या कम नहीं हुई। आज भी ब्लॉग पर पोस्ट आती हैं, पढ़ी जाती हैं, चर्चा का विषय बनती हैं, अख़बार इन्हें अपने स्तंभों में ससम्मान स्थान देते हैं। यही क्यों फेसबुक पर नेटवर्क ब्लागिंग के माध्यम से भी ब्लागर्स वहां अपने को अपडेट कर रहे हैं और अपने ब्लॉग-पाठकों की संख्या बढ़ा रहे हैं। सही रूप में देखा जाये तो ब्लॉग और फेसबुक एक दुसरे के विरोधी न होकर परस्पर-पूरक हैं, पर कई लोग इस बात को बिना समझे अभिव्यक्ति के इन दोनों माध्यमों को प्रतिदंधी बनाकर खड़ा कर देते हैं। ...कई ब्लागर्स तो इसी भ्रम में फेसबुक की तरफ उन्मुख हुए, और अपने ब्लॉग को एक लम्बे समय से अपडेट करना भूल ही गए।

 ब्लॉग बनाम फेसबुक का जिक्र इसलिए भी समीचीन लगा, जब एक बार फिर से अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन के बहाने ब्लॉग की चर्चा होने लगी। आज भी हिंदी ब्लागिंग में ऐसे लोग हैं, जो इस माध्यम को  उसकी ऊँचाइयों तक पहुँचाना चाहते हैं। बिना किसी लाग-लपेट के लगातार तीसरे साल इस बार अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन का आयोजन आगामी 13-14 सितंबर 2013 को काठमाण्डू में किया जा रहा है और इसके पीछे हैं लखनवी तहजीब से जुड़े रवीन्द्र प्रभात। सौभाग्यवश हिंदी ब्लागिंग 2013 में अपने दस साल पूरा कर चुका  है, ऐसे में इस सम्मलेन की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। इस अवसर पर हिंदी और नेपाली ब्लॉग से जुड़े तमाम लोगों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है।  परिकल्पना (http://www.parikalpnaa.com/)  पर इसे जाकर विस्तृत रूप में देखा जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन, काठमांडू इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि कईयों ने हिंदी ब्लॉग को गुजरे ज़माने की चीज  बताते हुए और इसे फेसबुक से तुलना करके, इसे हाशिये पर धकेलना का प्रयास किया, ऐसे में इस प्रकार का  सम्मलेन न सिर्फ हिंदी ब्लागिंग से जुड़े लोगों के बीच स्फूर्ति का कार्य करेगा, बल्कि उन्हें एक साथ मिल-बैठकर नए माध्यमों और चुनौतियों के बीच हिंदी ब्लागिंग का सुनहरा भविष्य सुनिश्चित करने का भी भरपूर अवसर देगा .....!! 

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