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बुधवार, 8 अक्तूबर 2014

नोबेल पाने वाले पाँचवें दम्पति : मोजर दम्पति ने खोज दिमाग का 'जीपीएस' सिस्टम

साहित्य-कला-संस्कृति में ऐसे तमाम दम्पति हैं, जो ऊँचाइयों को छू रहे हैं।  पर विज्ञानं के क्षेत्र में ऐसे दम्पति विरले ही देखने को मिलते हैं। इस बार चिकित्सा क्षेत्र के नोबेल पुरस्कार के लिए आपको अपने इर्द-गिर्द के माहौल की पल-पल की जानकारी देने वाले दिमाग की जटिल संचालन प्रणाली यानी एक तरह के जीपीएस सिस्टम के अध्ययन के लिए तीन वैज्ञानिकों ब्रिटिश अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन ओ कीफ के साथ नॉर्वे के दंपति एडवर्ड मोजर व मेई-ब्रिट मोजर को  यह प्रतिष्ठित पुरस्कार देने का ऐलान किया गया। वैसे मेई ब्रिट मोजर नोबेल पाने वाली 45 वीं महिला हैं। पुरस्कार के ऐलान के साथ ही मोजर दम्पति नोबेल पाने वाले पाँचवें  दम्पति बन गए हैं। दम्पत्तियों के इस क्लब में महान वैज्ञानिक दम्पति मेरी क्यूरी व पियरे क्यूरी एवं अल्वा मिर्डल व गुन्नार मिर्डल शामिल हैं। दंपति का मानना है कि शादी ने पुरस्कार जीतने में अहम भूमिका निभाई।

पुरस्कार का ऐलान करते हुए ज्यूरी ने कहा, ‘दिमाग की उस जीपीएस प्रणाली की खोज के लिए तीनों को पुरस्कार के लिए चुना गया है, जो हमें अपने इर्द-गिर्द के माहौल के प्रति सजग रहने को संभव बनाता है। कीफ और मोजर दंपति ने उस समस्या का हल ढूंढ निकाला है, जिस पर सदियों से दार्शनिकों और वैज्ञानिकों का कब्जा था। जैसे कि हमारा दिमाग हमारे चारों ओर के माहौल का खाका कैसे तैयार करता है और इस जटिल वातावरण के बीच हम अपना रास्ता कैसे तलाशते हैं?’ पुरस्कार के तहत विजेताओं को अस्सी लाख स्वीडिश क्रोनर (11 लाख अमेरिकी डॉलर यानी पौने सात करोड़ रुपये) दिए जाएंगे। पुरस्कार राशि का आधा हिस्सा जहां कीफ को, वहीं बाकी आधा हिस्सा मोजर दंपति को दिया जाएगा। पिछले साल यह पुरस्कार तीन अमेरिकियों को कोशिकाओं की परिवहन प्रणाली के अध्ययन के लिए दिया गया था। वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर हर साल की तरह दस दिसंबर को दिया जाएगा।

यूनिवर्सिटी आफ लंदन में सैन्सबरी वेलकम सेंटर इन न्यूरल सर्किट एंड बिहैवियर के निदेशक कीफ ने 1971 में पहली बार दिमाग के इस जीपीएस के एक सिरे की खोज की थी। उन्होंने दिमाग के हिप्पोकैंपस वाले हिस्से में खास किस्म की तंत्रिका कोशिकाओं का पता लगाया। प्रयोग के दौरान लैब में जब एक चूहे को किसी खास जगह पर रखा गया, तो उसका हिप्पोकैंपस वाला यह हिस्सा खास तौर पर सक्रिय हो उठा। कीफ ने इन्हें प्लेस सेल या स्थान कोशिका का नाम दिया। इससे चूहे के दिमाग में कमरे के भीतर उसे जहां रखा गया था, उस जगह का नक्शा बन गया।

2005 में दंपति मेई ब्रिट और एडवर्ड मोजर ने दिमाग की जीपीएस के एक और प्रमुख हिस्से की खोज की। उन्होंने खास तंत्रिका कोशिकाओं का पता लगाया, जो समन्वय प्रणाली के तहत काम करती हैं। ये कोशिकाएं जीव की स्थिति और उसको रास्ता तलाशने में मदद करती हैं। पता चला कि दिमाग में मौजूद प्लेस सेल को कॉर्टेक्स की खास कोशिकाएं सक्रिय करती हैं। मोजर दंपति ने इन्हें ग्रिड सेल नाम दिया। दिमाग में इनका जाल बिछा होता है जैसे शहर में सड़कों का। दंपति का मानना है कि शादी ने पुरस्कार जीतने में अहम भूमिका निभाई।

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