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शुक्रवार, 19 जून 2015

देश की पहली शत प्रतिशत नेत्रहीन महिला आईएफएस ऑफिसर बनी बेनो जेफाइन

मन में हौसला हो तो कुछ भी असंभव नहीं है।  इसे सच कर दिखाया है चेन्नई की  25 वर्षीय बेनो जेफाइन ने। बेनो जेफाइन 69 साल पुरानी भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की परीक्षा पास करने वाली पहली शत प्रतिशत दृष्टिहीन छात्रा हैं।  उन्होंने 2013-14 सिविल सेवा परीक्षा में 343 रैंक प्राप्त किया है।

 वर्तमान में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में प्रॉबेशनरी ऑफिसर (पीओ) के तौर पर कार्यरत  बीनो जेफाइन अपने पिता ल्यूक एंथनी चार्ल्स के साथ रहती है जो कि एक रेलवे अधिकारी हैं। उनकी माँ एक गृहिणी है। उनके भाई, ब्रूनो जेवियर, कनाडा में एक इंजीनियर के रूप में काम करता है। इस मुकाम तक पहुँचने के लिये बीनो ने ब्रेल पर अपनी निर्भरता छोड़कर जॉब एक्सेस विद स्पीच (JAWS) नाम के सॉफ्टवेयर की मदद ली। इस सॉफ्टवेयर की मदद से दृष्टिबाधित लोग कंप्यूटर स्क्रीन पढ़ सकते हैं। इस सॉफ्टवेयर को स्मार्टफोन से भी एक्सेस किया जा सकता है। बीनो को उनकी मां किताबें और अखबार पढ़कर सुनाया करती थीं। 

अपने नाम के पीछे छुपे हुए राज को वह कुछ यूँ खोलती हैं कि बेनो का मतलब होता है  भगवान की बेटी और जेफाइन मतलब होता है छिपा हुआ खजाना। वाकई उन्होंने अपने नाम को सच कर दिखाया। बेनो का बचपन सामान्य तरीके से बीता। उनके परिवार में किसी ने भी कभी उन्हें विकलांग होने का अहसास नहीं दिलाया।  लिटिल फ्लावर कॉन्वेंट स्कूल से उनकी आरम्भिक शिक्षा आरम्भ हुई तो अध्यापकों ने  हर मोड़ पर सहयोग किया।  बचपन में बहुत बोलने वाली बेनो ने अपनी पहली स्पीच यूकेजी में जवाहरलाल नेहरू के ऊपर दी थी और  प्रथम पुरस्कार हासिल किया था। शुरुआती दिनों में,  बेनो को जो भी बोलना होता था, वह उसे पहले से कॉपी में लिख देती थी फिर उसे याद करती थी।  छठीं कक्षा में आने के बाद उन्होंने एक्सटेम्पोर बोलना शुरू कर दिया।  पढ़ाई के साथ-साथ बेनो को सदैव से बहुत पसंद है।  स्कूल के बाद,  अंग्रेजी साहित्य में अपनी डिग्री प्राप्त करने के लिए बेनो ने स्टेला मैरिस कॉलेज में दाखिला  लिया और लोयोला कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। एक अंधे स्कूल से सामान्य कॉलेज जाने में बेनो को कोई परेशानी नहीं हुई क्योंकि घर पर या बाहर किसी ने भी उनके साथ अंधों के जैसा बर्ताव नहीं किया था। इससे उन्हें एक सामान्य जीवन जीने का अत्मविश्वास मिला।

पूर्व राजनायिकों ने नेत्रहीन कैंडिडेट्स को आईएफस में भर्ती देने का फैसला लिया, जिसका फायदा बीनो को मिला। पूर्व राजनायिक टी.पी. श्रीनिवासन कहते हैं, 'यह एक अच्छा और उदार फैसला है। बीनो को अपनी ड्यूटी निभाने में कुछ दिक्कतें जरूर होंगी लेकिन उसने अब तक बहुत अच्छा परफॉर्म किया है। मुझे यकीन है कि वह यहां भी शानदार प्रदर्शन करेगी। वैसे भी आईएएस अधिकारियों को जितना फील्ड वर्क करने की जरूरत होती है उतनी आईएफएस अधिकारियों को नहीं। आईएफएस अधिकारियों को स्टडी और अनैलेसिस करने में गाइडेंस देना होता है।'


बेनो  जेफाइन को केंद्र सरकार से नियुक्ति आदेश मिल चुका है। उन्हें 60 दिन के भीतर कामकाज संभालना है। जेफाइन ने कहा कि उन्हें बताया गया कि नरेंद्र मोदी सरकार की प्रोत्साहित करने वाली नीति से उन्हें उनकी नियुक्ति में आने वाले किसी संभावित प्रक्रियात्मक विलंब को पार पाने में मदद मिली। उन्होंने प्रधामंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा, मुझे बताया गया कि मैं यद्यपि आईएफएस के लिए पात्र थी लेकिन पूरी तरह से दृष्टिहीन को इससे पहले यह पद नहीं दिये गए। फिलहाल इस उपलब्धि के बाद हर संस्थान जेफाइन को प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में बुला रहा है और अपने विद्यार्थियों को उनसे रूबरू करा रहा है, शायद बेनो  जेफाइन कईयों के लिये मिसाल साबित हों। हो सकता है उनकी आँखों में रोशनी न हो, पर यदि मन में जज्बा और आँखों में सपने देखने का साहस हो तो कोई भी मंजिल आसान जरूर बन जाती है !!
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