<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413</id><updated>2012-01-27T08:16:17.113+05:30</updated><category term='चित्रों में'/><category term='फ़िल्मी दुनिया'/><category term='मेरा परिवार'/><category term='स्वतंत्रता आन्दोलन'/><category term='यात्रा'/><category term='पुनरावृत्ति'/><category term='राष्ट्रीय बालिका दिवस'/><category term='नवरात्र-दशहरा'/><category term='कजरी के बोल'/><category term='विवाह की वर्षगाँठ'/><category term='महिला दिवस'/><category term='वैवाहिक वर्षगांठ'/><category term='सम्मान-उपलब्धि'/><category term='कविता'/><category term='वसंत'/><category term='विश्व जनसंख्या दिवस'/><category term='ब्लागिंग की 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term='बाल-कविता'/><category term='सफरनामा'/><category term='सोचें-विचारें'/><title type='text'>शब्द-शिखर</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' 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href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/208359775936304474'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2012/01/blog-post_26.html' title='गणतंत्र दिवस की बधाईयाँ'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/S15JwYPPwTI/AAAAAAAAATk/gqn-u4crXbE/s72-c/trpb6%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-8331727533598125062</id><published>2012-01-17T16:44:00.000+05:30</published><updated>2012-01-17T16:44:31.090+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जानकारी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सम्मान-उपलब्धि'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चर्चा में ब्लॉग/आकांक्षा'/><title type='text'>आकांक्षा यादव को मानद डाक्टरेट की उपाधि</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-zBlzExyj62k/TxVUT_EyqnI/AAAAAAAAAXE/GJiCgg6tpcA/s1600/KK-Akanksha%2Byadav.JPG"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 214px; FLOAT: left; HEIGHT: 320px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5698553605833009778" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-zBlzExyj62k/TxVUT_EyqnI/AAAAAAAAAXE/GJiCgg6tpcA/s320/KK-Akanksha%2Byadav.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार के सोलहवें महाधिवेशन में युवा कवयित्री, साहित्यकार एवं चर्चित ब्लागर आकांक्षा यादव को मानद डाक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की उपाधि से विभूषित किया गया। आकांक्षा यादव को मानद डाक्टरेट की इस उपाधि के लिए उनकी सुदीर्घ हिंदी सेवा, सारस्वत साधना, शैक्षिक प्रदेयों, राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में महनीय शोधपरक लेखन के द्वारा प्राप्त प्रतिष्ठा के आधार पर अधिकृत किया गया। उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में उज्जैन विश्वविद्यालय के कुलपति ने यह उपाधि प्रदान की।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गौरतलब है कि आकांक्षा यादव की रचनाएँ देश-विदेश की शताधिक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित हो रही हैं। नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रूचि रखने वाली आकांक्षा यादव के लेख, कवितायें और लघुकथाएं जहाँ तमाम संकलनों /पुस्तकों की शोभा बढ़ा रहे हैं, वहीं आपकी तमाम रचनाएँ आकाशवाणी से भी तरंगित हुई हैं। पत्र-पत्रिकाओं के साथ-साथ इंटरनेट पर भी सक्रिय आकांक्षा यादव की रचनाएँ तमाम वेब/ई-पत्रिकाओं और ब्लॉगों पर भी पढ़ी-देखी जा सकती हैं। व्यक्तिगत रूप से ‘शब्द-शिखर’(http://shabdshikhar.blogspot.com) और युगल रूप में ‘बाल-दुनिया’ (http://balduniya.blogspot.com),‘सप्तरंगी प्रेम’ (http://saptrangiprem.blogspot.com) व ‘उत्सव के रंग’ (http://utsavkerang.blogspot.com) ब्लॉग का संचालन करने वाली आकांक्षा यादव न सिर्फ एक साहित्यकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं, बल्कि सक्रिय ब्लागर के रूप में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। ’क्रांति-यज्ञ: 1857-1947 की गाथा‘ पुस्तक का कृष्ण कुमार यादव के साथ संपादन करने वाली आकांक्षा यादव के व्यक्तित्व-कृतित्व पर वरिष्ठ बाल साहित्यकार डा0 राष्ट्रबन्धु ने ‘बाल साहित्य समीक्षा‘ पत्रिका का एक अंक भी विशेषांक रुप में प्रकाशित किया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मूलतः उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और गाजीपुर जनपद की निवासी आकांक्षा यादव वर्तमान में अपने पतिदेव श्री &lt;a href="http://kkyadav.blogspot.com/"&gt;कृष्ण कुमार यादव &lt;/a&gt;के साथ अंडमान-निकोबार में रह रही हैं और वहां रहकर भी हिंदी को समृद्ध कर रही हैं। श्री यादव भी हिंदी की युवा पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर हैं और सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर पदस्थ हैं। एक रचनाकार के रूप में बात करें तो आकांक्षा यादव ने बहुत ही खुले नजरिये से संवेदना के मानवीय धरातल पर जाकर अपनी रचनाओं का विस्तार किया है। बिना लाग लपेट के सुलभ भाव भंगिमा सहित जीवन के कठोर सत्य उभरें यही आपकी लेखनी की शक्ति है। उनकी रचनाओं में जहाँ जीवंतता है, वहीं उसे सामाजिक संस्कार भी दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे पूर्व भी आकांक्षा यादव को विभिन्न साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। जिसमें भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’भारती ज्योति’, ‘एस0एम0एस0‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार, इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्था, बिजनौर द्वारा ‘साहित्य गौरव‘ व ‘काव्य मर्मज्ञ‘, श्री मुकुन्द मुरारी स्मृति साहित्यमाला, कानपुर द्वारा ‘साहित्य श्री सम्मान‘, मथुरा की साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘आसरा‘ द्वारा ‘ब्रज-शिरोमणि‘ सम्मान, मध्यप्रदेश नवलेखन संघ द्वारा ‘साहित्य मनीषी सम्मान‘ व ‘भाषा भारती रत्न‘, छत्तीसगढ़ शिक्षक-साहित्यकार मंच द्वारा ‘साहित्य सेवा सम्मान‘, देवभूमि साहित्यकार मंच, पिथौरागढ़ द्वारा ‘देवभूमि साहित्य रत्न‘, राजेश्वरी प्रकाशन, गुना द्वारा ‘उजास सम्मान‘, ऋचा रचनाकार परिषद, कटनी द्वारा ‘भारत गौरव‘, अभिव्यंजना संस्था, कानपुर द्वारा ‘काव्य-कुमुद‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ‘शब्द माधुरी‘, महिमा प्रकाशन, दुर्ग-छत्तीसगढ द्वारा ’महिमा साहित्य भूषण सम्मान’, अन्तर्राष्ट्रीय पराविद्या शोध संस्था,ठाणे, महाराष्ट्र द्वारा ‘सरस्वती रत्न‘, अन्तज्र्योति सेवा संस्थान गोला-गोकर्णनाथ, खीरी द्वारा ’श्रेष्ठ कवयित्री’ की मानद उपाधि, जीवी प्रकाशन, जालंधर द्वारा ’राष्ट्रीय भाषा रत्न’ इत्यादि शामिल हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार के इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों में कार्यरत हिन्दी सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वान, शिक्षक-साहित्यकार, पुरातत्वविद्, इतिहासकार, पत्रकार और जन-प्रतिनिधि शामिल थे। उक्त जानकारी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ के कुल सचिव डा. देवेंद्र नाथ साह ने दी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;दुर्गविजय सिंह ’दीप’&lt;br /&gt;उपनिदेशक - आकाशवाणी (समाचार)&lt;br /&gt;पोर्टब्लेयर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-8331727533598125062?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/8331727533598125062/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=8331727533598125062' title='6 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8331727533598125062'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8331727533598125062'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2012/01/blog-post_17.html' title='आकांक्षा यादव को मानद डाक्टरेट की उपाधि'/><author><name>Krishna Kr. Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04376997074873178876</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='25' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_y-fMVExInCw/TErGAbcYdYI/AAAAAAAAASE/P2gqLC3gCrg/S220/KKY.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-zBlzExyj62k/TxVUT_EyqnI/AAAAAAAAAXE/GJiCgg6tpcA/s72-c/KK-Akanksha%2Byadav.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-3374879953470711009</id><published>2012-01-03T15:45:00.000+05:30</published><updated>2012-01-03T15:45:01.033+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सम्मान-उपलब्धि'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मेरा परिवार'/><title type='text'>विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ द्वारा कृष्ण कुमार यादव को ’विद्यावाचस्पति’ की मानद उपाधि</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-kBMirLxz3i4/TwKB0QfCD5I/AAAAAAAABDg/dITjp4JpbTc/s1600/Krishna%2BKumar%2BYadav-Director%2BPostal%2BServices-.JPG"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 320px; FLOAT: right; HEIGHT: 240px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5693255613728034706" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-kBMirLxz3i4/TwKB0QfCD5I/AAAAAAAABDg/dITjp4JpbTc/s320/Krishna%2BKumar%2BYadav-Director%2BPostal%2BServices-.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार के सोलहवें महाधिवेशन (13-14 दिसंबर 2011) में युवा साहित्यकार एवं भारतीय डाक सेवा के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव को ’विद्यावाचस्पति’ की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। श्री यादव को यह उपाधि उनकी साहित्यिक रचनाशीलता एवं हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदान किया गया। उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में उज्जैन विश्वविद्यालय के कुलपति ने यह उपाधि प्रदान की। श्री कृष्ण कुमार यादव वर्तमान में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर कार्यरत हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लागिंग के क्षेत्र में भी चर्चित नाम श्री कृष्ण कुमार यादव की रचनाधर्मिता को देश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में देखा-पढ़ा जा सकता हैं। विभिन्न विधाओं में अनवरत प्रकाशित होने वाले श्री यादव की अब तक कुल 5 पुस्तकें- अभिलाषा (काव्य-संग्रह-2005), 'अभिव्यक्तियों के बहाने' व 'अनुभूतियाँ और विमर्श' (निबंध-संग्रह-2006 व 2007), India Post : 150 Glorious Years (2006) एवं 'क्रांति -यज्ञ : 1857-1947 की गाथा' (2007) प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रसिद्ध बाल साहित्यकार डा. राष्ट्रबन्धु द्वारा श्री यादव के व्यक्तित्व व कृतित्व पर ‘‘बाल साहित्य समीक्षा‘‘ पत्रिका का विशेषांक जारी किया गया है तो इलाहाबाद से प्रकाशित ‘‘गुफ्तगू‘‘ पत्रिका ने भी श्री यादव के ऊपर परिशिष्ट अंक जारी किया है। आपके व्यक्तित्व-कृतित्व पर एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर: कृष्ण कुमार यादव‘‘ (सं. डा. दुर्गाचरण मिश्र, 2009) भी प्रकाशित हो चुकी है। पचास से अधिक प्रतिष्ठित पुस्तकों/संकलनों में विभिन्न विधाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं व ‘सरस्वती सुमन‘ (देहरादून) पत्रिका के लघु-कथा विशेषांक (जुलाई-सितम्बर, 2011) का संपादन भी आपने किया है। आकाशवाणी लखनऊ, कानपुर व पोर्टब्लेयर और दूरदर्शन से आपकी कविताएँ, वार्ता, साक्षात्कार इत्यादि का प्रसारण हो चुका हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्री कृष्ण कुमार यादव ब्लागिंग में भी सक्रिय हैं और व्यक्तिगत रूप से &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-FTsfs2YnzE8/TwGV6Nkm93I/AAAAAAAAAHI/nfyNBah95VY/s1600/KKY%2B001.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 267px; FLOAT: right; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5692996231281178482" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-FTsfs2YnzE8/TwGV6Nkm93I/AAAAAAAAAHI/nfyNBah95VY/s400/KKY%2B001.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="http://kkyadav.blogspot.com/"&gt;शब्द सृजन की ओर &lt;/a&gt;(www.kkyadav.blogspot.com) व &lt;a href="http://dakbabu.blogspot.com/"&gt;डाकिया डाक लाया &lt;/a&gt;(www.dakbabu.blogspot.com) और युगल रूप में ‘&lt;a href="http://balduniya.blogspot.com/"&gt;बाल-दुनिया’ &lt;/a&gt;,‘&lt;a href="http://saptrangiprem.blogspot.com/"&gt;सप्तरंगी प्रेम’ &lt;/a&gt;व &lt;a href="http://utsavkerang.blogspot.com/"&gt;‘उत्सव के रंग’ &lt;/a&gt;ब्लॉगों के माध्यम से सक्रिय हैं। विभिन्न वेब पत्रिकाओं, ई पत्रिकाओं, और ब्लॉग पर प्रकाशित होने वाले श्री यादव की इंटरनेट पर &lt;a href="http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B5"&gt;’कविता कोश’ &lt;/a&gt;में भी काव्य-रचनाएँ संकलित हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे पूर्व श्री कृष्ण कुमार यादव को भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’महात्मा ज्योतिबा फुले फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘ व ‘’डाॅ0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ”काव्य शिरोमणि” एवं ”महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान”, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान‘‘, ‘‘महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान‘‘, मेधाश्रम संस्था, कानपुर द्वारा ‘‘सरस्वती पुत्र‘‘, सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु 50 से ज्यादा सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार के इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों में कार्यरत हिन्दी सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वान, शिक्षक-साहित्यकार, पुरातत्वविद्, इतिहासकार, पत्रकार और जन-प्रतिनिधि शामिल थे। उक्त जानकारी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ के कुल सचिव डा. देवेंद्र नाथ साह ने दी। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;- दुर्ग विजय सिंह 'दीप'&lt;br /&gt;उपनिदेशक-आकाशवाणी (समाचार)&lt;br /&gt;आल इण्डिया रेडियो, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-3374879953470711009?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/3374879953470711009/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=3374879953470711009' title='10 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3374879953470711009'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3374879953470711009'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2012/01/blog-post.html' title='विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ द्वारा कृष्ण कुमार यादव को ’विद्यावाचस्पति’ की मानद उपाधि'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-kBMirLxz3i4/TwKB0QfCD5I/AAAAAAAABDg/dITjp4JpbTc/s72-c/Krishna%2BKumar%2BYadav-Director%2BPostal%2BServices-.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>10</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-3082512957696424265</id><published>2012-01-02T18:31:00.000+05:30</published><updated>2012-01-02T18:31:28.072+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चर्चा में ब्लॉग/आकांक्षा'/><title type='text'>प्रिंट-मीडिया में शब्द-शिखर की 29वीं चर्चा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-xgmq3Hs1yRc/TwGf5YUkHxI/AAAAAAAABDU/s7JlZtSJe3M/s1600/blog-media-shabd-shikhar-Akanksha%2Byadav.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 341px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5693007212103081746" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-xgmq3Hs1yRc/TwGf5YUkHxI/AAAAAAAABDU/s7JlZtSJe3M/s400/blog-media-shabd-shikhar-Akanksha%2Byadav.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;नव-वर्ष पर 30 दिसंबर, 2001 को 'शब्द-शिखर' पर लिखी गई मेरी पोस्ट &lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/12/blog-post_30.html"&gt;'नव वर्ष के विविध रूप' &lt;/a&gt;को आज 2 जनवरी, 2011 को जनसत्ता के नियमित स्तम्भ 'समांतर' में 'संकल्प के सामने' शीर्षक से स्थान दिया है...आभार. समग्र रूप में प्रिंट-मीडिया में 29वीं बार मेरी किसी पोस्ट की चर्चा हुई है.. आभार !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे पहले शब्द-शिखर और अन्य ब्लॉग पर प्रकाशित मेरी पोस्ट की चर्चा दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला,राष्ट्रीय सहारा,राजस्थान पत्रिका, आज समाज, गजरौला टाईम्स, जन सन्देश, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, दस्तक, आई-नेक्स्ट, IANS द्वारा जारी फीचर में की जा चुकी है. आप सभी का इस समर्थन व सहयोग के लिए आभार! यूँ ही अपना सहयोग व स्नेह बनाये रखें !! &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://blogsinmedia.com/2012/01/%E0%A4%A8%E0%A4%B5-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D/"&gt;-साभार : BLogs in Media&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-3082512957696424265?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/3082512957696424265/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=3082512957696424265' title='8 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3082512957696424265'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3082512957696424265'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2012/01/29.html' title='प्रिंट-मीडिया में शब्द-शिखर की 29वीं चर्चा'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-xgmq3Hs1yRc/TwGf5YUkHxI/AAAAAAAABDU/s7JlZtSJe3M/s72-c/blog-media-shabd-shikhar-Akanksha%2Byadav.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-2902800739212759946</id><published>2011-12-30T18:41:00.000+05:30</published><updated>2011-12-30T18:43:09.621+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लेख'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नव वर्ष/ नव संवत्सर'/><title type='text'>नव वर्ष के विविध रूप</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-W5-dFHBCyRw/Tv24Js7xb8I/AAAAAAAABCw/quuuMxpylLs/s1600/Akanksha-Happy%2BNew%2BYear-Shabdshikhar.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 300px; FLOAT: left; HEIGHT: 290px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5691907980886372290" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-W5-dFHBCyRw/Tv24Js7xb8I/AAAAAAAABCw/quuuMxpylLs/s400/Akanksha-Happy%2BNew%2BYear-Shabdshikhar.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;मानव इतिहास की सबसे पुरानी पर्व परम्पराओं में से एक नववर्ष है। नववर्ष के आरम्भ का स्वागत करने की मानव प्रवृत्ति उस आनन्द की अनुभूति से जुड़ी हुई है जो बारिश की पहली फुहार के स्पर्श पर, प्रथम पल्लव के जन्म पर, नव प्रभात के स्वागतार्थ पक्षी के प्रथम गान पर या फिर हिम शैल से जन्मी नन्हीं जलधारा की संगीत तरंगों से प्रस्फुटित होती है। विभिन्न विश्व संस्कृतियाँ इसे अपनी-अपनी कैलेण्डर प्रणाली के अनुसार मनाती हैं। वस्तुतः मानवीय सभ्यता के आरम्भ से ही मनुष्य ऐसे क्षणों की खोज करता रहा है, जहाँ वह सभी दुख, कष्ट व जीवन के तनाव को भूल सके। इसी के तद्नुरुप क्षितिज पर उत्सवों और त्यौहारों की बहुरंगी झांकियाँ चलती रहती हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इतिहास के गर्त में झांकें तो प्राचीन बेबिलोनियन लोग अनुमानतः 4000 वर्ष पूर्व से ही नववर्ष मनाते रहे हैं, उस समय नव वर्ष का ये त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि भी मानी जाती थी। प्राचीन रोमन कैलेण्डर में मात्र 10 माह होते थे और वर्ष का शुभारम्भ 1 मार्च से होता था। बहुत समय बाद 713 ई0पू0 के करीब इसमें जनवरी तथा फरवरी माह जोड़े गये। सर्वप्रथम 153 ई0पू0 में 1 जनवरी को वर्ष का शुभारम्भ माना गया एवं 45 ई0पू0 में जब रोम के तानाशाह जूलियस सीजर द्वारा जूलियन कैलेण्डर का शुभारम्भ हुआ, तो यह सिलसिला बरकरार रहा। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला साल, यानि, ईसा पूर्व 46 ई0 को 445 दिनों का करना पड़ा था। 1 जनवरी को नववर्ष मनाने का चलन 1582 ई0 के ग्रेगेरियन कैलेण्डर के आरम्भ के बाद ही बहुतायत में हुआ। दुनिया भर में प्रचलित ग्रेगेरियन कैलेंडर को पोप ग्रेगरी अष्टम ने 1582 में तैयार किया था। ग्रेगरी ने इसमें लीप ईयर का प्रावधान भी किया था। ईसाईयों का एक अन्य पंथ ईस्टर्न आर्थोडाॅक्स चर्च रोमन कैलेंडर को मानता है। इस कैलेंडर के अनुसार नया साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। यही वजह है कि आर्थोडाॅक्स चर्च को मानने वाले देशों रुस, जार्जिया, येरुशलम और सर्बिया में नया साल 14 जनवरी को मनाया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज विभिन्न विश्व संस्कृतियाँ नव वर्ष अपनी-अपनी कैलेण्डर प्रणाली के अनुसार मनाती हैंै। हिब्रू मान्यताओं के अनुसार भगवान द्वारा विश्व को बनाने में सात दिन लगे थे। इस सात दिन के संधान के बाद नया वर्ष मनाया जाता है। यह दिन ग्रेगेरियन कैलेण्डर के मुताबिक 5 सितम्बर से 5 अक्टूबर के बीच आता है। इसी तरह इस्लाम के कैलेंडर को हिजरी साल कहते हैं। इसका नव वर्ष मोहर्रम माह के पहले दिन होता है। इस्लामी कैलेण्डर एक पूर्णतया चन्द्र आधारित कैलेंडर है, जिसके कारण इसके बारह मासों का चक्र 33 वर्षों में सौर कैलेण्डर को एक बार घूम लेता है। इसके कारण नर्व वर्ष प्रचलित ग्रेगेरियन कैलेण्डर में अलग-अलग महीनों में पड़़ता है। चीन का भी कैलेण्डर चन्द्र गणना पर आधारित है। चीनी कैलेण्डर के अनुसार प्रथम मास का प्रथम चन्द्र दिवस नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। यह प्रायः 21 जनवरी से 21 फरवरी के बीच पड़ता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत के भी विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है। भारत में नव वर्ष का शुभारम्भ वर्षा का संदेशा देते मेघ, सूर्य और चंद्र की चाल, पौराणिक गाथाओं और इन सबसे ऊपर खेतों में लहलहाती फसलों के पकने के आधार पर किया जाता है। इसे बदलते मौसमों का रंगमंच कहें या परम्पराओं का इन्द्रधनुष या फिर भाषाओं और परिधानों की रंग-बिरंगी माला, भारतीय संस्कृति ने दुनिया भर की विविधताओं को संजो रखा है। असम में नववर्ष बीहू के रुप में मनाया जाता है, केरल में पूरम विशु के रुप में, तमिलनाडु में पुत्थंाडु के रुप में, आन्ध्र प्रदेश में उगादी के रुप में, महाराष्ट्र में गुड़ीपड़वा के रुप में तो बांग्ला नववर्ष का शुभारंभ वैशाख की प्रथम तिथि से होता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ लगभग सभी जगह नववर्ष मार्च या अप्रैल माह अर्थात चैत्र या बैसाख के महीनों में मनाये जाते हैं। पंजाब में नव वर्ष बैशाखी नाम से 13 अप्रैल को मनाई जाती है। सिख नानकशाही कैलेण्डर के अनुसार 14 मार्च होला मोहल्ला नया साल होता है। इसी तिथि के आसपास बंगाली तथा तमिल नव वर्ष भी आता है। तेलगू नव वर्ष मार्च-अप्रैल के बीच आता है। आंध्र प्रदेश में इसे उगादी (युगादि=युग$आदि का अपभ्रंश) के रूप मंे मनाते हैं। यह चैत्र महीने का पहला दिन होता है। तमिल नव वर्ष विशु 13 या 14 अप्रैल को तमिलनाडु और केरल में मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल 15 जनवरी को नव वर्ष के रुप में आधिकारिक तौर पर भी मनाया जाता है। कश्मीरी कैलेण्डर नवरेह 19 मार्च को आरम्भ होता है। महाराष्ट्र में गुडी पड़वा के रुप में मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाता है, कन्नड़ नव वर्ष उगाडी कर्नाटक के लोग चैत्र माह के पहले दिन को मनाते हैं, सिंधी उत्सव चेटी चंड, उगाड़ी और गुडी पड़वा एक ही दिन मनाया जाता है। मदुरै में चित्रैय महीने में चित्रैय तिरुविजा नव वर्ष के रुप में मनाया जाता है। मारवाड़ी और गुजराती नव वर्ष दीपावली के दिन होता है, जो अक्टूबर या नवंबर में आती है। बंगाली नव वर्ष पोहेला बैसाखी 14 या 15 अप्रैल को आता है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में इसी दिन नव वर्ष होता है। वस्तुतः भारत वर्ष में वर्षा ऋतु की समाप्ति पर जब मेघमालाओं की विदाई होती है और तालाब व नदियाँ जल से लबालब भर उठते हैं तब ग्रामीणों और किसानों में उम्मीद और उल्लास तरंगित हो उठता है। फिर सारा देश उत्सवों की फुलवारी पर नववर्ष की बाट देखता है। इसके अलावा भारत में विक्रम संवत, शक संवत, बौद्ध और जैन संवत, तेलगु संवत भी प्रचलित हैं, इनमें हर एक का अपना नया साल होता है। देश में सर्वाधिक प्रचलित विक्रम और शक संवत हैं। विक्रम संवत को सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने की खुशी में 57 ईसा पूर्व शुरू किया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नववर्ष आज पूरे विश्व में एक समृद्धशाली पर्व का रूप अख्तियार कर चुका है। इस पर्व पर पूजा-अर्चना के अलावा उल्लास और उमंग से भरकर परिजनों व मित्रों से मुलाकात कर उन्हें बधाई देने की परम्परा दुनिया भर में है। अब हर मौके पर ग्रीटिंग कार्ड भेजने का चलन एक स्वस्थ परंपरा बन गयी है पर पहला ग्रीटिंग कार्ड भेजा था 1843 में हेनरी कोल ने। हेनरी कोल द्वारा उस समय भेजे गये 10,000 कार्ड में से अब महज 20 ही बचे हैं। आज तमाम संस्थायंे इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करती हैं और लोग दुगुने जोश के साथ नववर्ष में प्रवेश करते हैं। पर इस उल्लास के बीच ही यही समय होता है जब हम जीवन में कुछ अच्छा करने का संकल्प लें, सामाजिक बुराईयों को दूर करने हेतु दृढ़ संकल्प लें और मानवता की राह में कुछ अच्छे कदम और बढ़ायें।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;नव-वर्ष 2012 की आप सभी को अग्रिम शुभकामनाएं..!!&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/"&gt;-आकांक्षा यादव &lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-2902800739212759946?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/2902800739212759946/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=2902800739212759946' title='12 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2902800739212759946'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2902800739212759946'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/12/blog-post_30.html' title='नव वर्ष के विविध रूप'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-W5-dFHBCyRw/Tv24Js7xb8I/AAAAAAAABCw/quuuMxpylLs/s72-c/Akanksha-Happy%2BNew%2BYear-Shabdshikhar.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-8256819525894961810</id><published>2011-12-25T08:40:00.001+05:30</published><updated>2011-12-25T08:40:04.935+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><title type='text'>नव वर्ष के आगमन तक क्रिसमस उत्सव का माहौल</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TRShP2SVonI/AAAAAAAAA0s/8thZc41j1hU/s1600/christmas_bells.gif"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 313px; FLOAT: left; HEIGHT: 313px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5554241534097203826" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TRShP2SVonI/AAAAAAAAA0s/8thZc41j1hU/s400/christmas_bells.gif" /&gt;&lt;/a&gt;क्रिसमस त्यौहार बड़ा अलबेला है। यहाँ अंडमान में तो इसे खूब धूम धाम के साथ मनाया जाता है. यहाँ रहकर इस त्यौहार को इतने नजदीक से महसूस कर सकती हूँ. पूरी दुनिया में धूमधाम से मनाया जाने वाला क्रिसमस प्रभु ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला पर्व है। यह ईसाइयों के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है। इस दिन को बड़ा दिन भी कहते हैं. दुनिया भर के अधिकतर देशों में यह 25 दिसम्बर को मनाया जाता है, पर नव वर्ष के आगमन तक क्रिसमस उत्सव का माहौल कायम रखता है. उत्सवी परंपरा के अनुसार क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था। विभिन्न देश इसे अपनी परम्परानुसार मानते हैं. जर्मनी तथा कुछ अन्य देशों में क्रिसमस की पूर्व संध्या यानि 24 दिसंबर को ही इससे जुड़े समारोह शुरु हो जाते हैं जबकि ब्रिटेन और अन्य राष्ट्रमंडल देशों में क्रिसमस से अगला दिन यानि 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप में मनाया जाता है। कुछ कैथोलिक देशों में इसे सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहते हैं। आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च 6 जनवरी को क्रिसमस मनाता है, वहीँ पूर्वी परंपरागत गिरिजा जो जुलियन कैलेंडर को मानता है वो जुलियन वेर्सिओं के अनुसार 25 दिसम्बर को क्रिसमस मनाता है, जो ज्यादा काम में आने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर में 7 जनवरी का दिन होता है क्योंकि इन दोनों कैलेंडरों में 13 दिनों का अन्तर होता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्रिसमस शब्द का जन्म क्राईस्टेस माइसे अथवा ‘क्राइस्टस् मास’ शब्द से हुआ है। ऐसी मान्यता है कि पहला क्रिसमस रोम में 336 ई. में मनाया गया था। क्राइस्ट के जन्म के संबंध में नए टेस्टामेंट के अनुसार व्यापक रूप से स्वीकार्य ईसाई पौराणिक कथा है। इस कथा के अनुसार प्रभु ने मैरी नामक एक कुंवारी लड़की के पास गैब्रियल नामक देवदूत भेजा। गैब्रियल ने मैरी को बताया कि वह प्रभु के पुत्र को जन्म देगी तथा बच्चे का नाम जीसस रखा जाएगा। वह बड़ा होकर राजा बनेगा, तथा उसके राज्य की कोई सीमाएं नहीं होंगी। देवदूत गैब्रियल, जोसफ के पास भी गया और उसे बताया कि मैरी एक बच्चे को जन्म देगी, और उसे सलाह दी कि वह मैरी की देखभाल करे व उसका परित्याग न करे। जिस रात को जीसस का जन्म हुआ, उस समय लागू नियमों के अनुसार अपने नाम पंजीकृत कराने के लिए मैरी और जोसफ बेथलेहेम जाने के लिए रास्ते में थे। उन्होंने एक अस्तबल में शरण ली, जहां मैरी ने आधी रात को जीसस को जन्म दिया तथा उसे एक नांद में लिटा दिया। इस प्रकार प्रभु के पुत्र जीसस का जन्म हुआ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आजकल क्रिसमस पर्व धर्म की बंदिशों से परे पूरी दुनिया में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है.क्रिसमस के दौरान एक दूसरे को आत्मीयता के साथ उपहार देना, चर्च में समारोह, और विभिन्न सजावट करना शामिल है। सजावट के दौरान क्रिसमस ट्री, रंग बिरंगी रोशनियाँ, बंडा, जन्म के झाँकी और हॉली आदि शामिल हैं। क्रिसमस ट्री तो अपने वैभव के लिए पूरे विश्व में लोकप्रिय है। लोग अपने घरों को पेड़ों से सजाते हैं तथा हर कोने में मिसलटों को टांगते हैं। चर्च मास के बाद, लोग मित्रवत् रूप से एक दूसरे के घर जाते हैं तथा दावत करते हैं और एक दूसरे को शुभकामनाएं व उपहार देते हैं। वे शांति व भाईचारे का संदेश फैलाते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सेंट बेनेडिक्ट उर्फ सान्ता क्लाज़, क्रिसमस से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक परंतु कल्पित शख्सियत है, जिसे अक्सर क्रिसमस पर बच्चों के लिए तोहफे लाने के साथ जोड़ा जाता है. मूलत: यह लाल व सफेद ड्रेस पहने हुए, एक वृद्ध मोटा पौराणिक चरित्र है, जो रेन्डियर पर सवार होता है, तथा समारोहों में, विशेष कर बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह बच्चों को प्यार करता है तथा उनके लिए चाकलेट, उपहार व अन्य वांछित वस्तुएं लाता है, जिन्हें वह संभवत: रात के समय उनके जुराबों में रख देता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;आप सभी लोगों को क्रिसमस पर्व की हार्दिक शुभकामनायें !!&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-8256819525894961810?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/8256819525894961810/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=8256819525894961810' title='9 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8256819525894961810'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8256819525894961810'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/12/blog-post_25.html' title='नव वर्ष के आगमन तक क्रिसमस उत्सव का माहौल'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TRShP2SVonI/AAAAAAAAA0s/8thZc41j1hU/s72-c/christmas_bells.gif' height='72' width='72'/><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-6622784655897263360</id><published>2011-12-15T18:10:00.000+05:30</published><updated>2011-12-15T18:10:14.087+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नारी-जगत'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सम्मान-उपलब्धि'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नारी-सशक्तिकरण'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चर्चा में ब्लॉग/आकांक्षा'/><title type='text'>आकांक्षा यादव को भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 'डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2011‘</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-NW9DuQsHF1Q/Tunpy9evNiI/AAAAAAAAAWs/Un9H42ZBzQo/s1600/Akanksha-KKYadav.JPG"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 241px; FLOAT: left; HEIGHT: 320px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5686333066238178850" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-NW9DuQsHF1Q/Tunpy9evNiI/AAAAAAAAAWs/Un9H42ZBzQo/s320/Akanksha-KKYadav.JPG" /&gt;&lt;/a&gt; भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने युवा कवयित्री, साहित्यकार एवं चर्चित ब्लागर आकांक्षा यादव को ‘’डा0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2011‘‘ से सम्मानित किया है। आकांक्षा यादव को यह सम्मान साहित्य सेवा एवं सामाजिक कार्यों में रचनात्मक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। उक्त सम्मान भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 11-12 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित 27 वें राष्ट्रीय दलित साहित्यकार सम्मलेन में केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला द्वारा प्रदान किया गया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गौरतलब है कि आकांक्षा यादव की रचनाएँ देश-विदेश की शताधिक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित हो रही हैं. नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रूचि रखने वाली आकांक्षा यादव के लेख, कवितायेँ और लघुकथाएं जहाँ तमाम संकलनो / पुस्तकों की शोभा बढ़ा रहे हैं, वहीँ आपकी तमाम रचनाएँ आकाशवाणी से भी तरंगित हुई हैं. पत्र-पत्रिकाओं के साथ-साथ अंतर्जाल पर भी सक्रिय आकांक्षा यादव की रचनाएँ इंटरनेट पर तमाम वेब/ई-पत्रिकाओं और ब्लॉगों पर भी पढ़ी-देखी जा सकती हैं. व्यक्तिगत रूप से &lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/"&gt;‘शब्द-शिखर’ &lt;/a&gt;और युगल रूप में &lt;a href="http://balduniya.blogspot.com/"&gt;‘बाल-दुनिया’ &lt;/a&gt;, &lt;a href="http://saptrangiprem.blogspot.com/"&gt;‘सप्तरंगी प्रेम’ &lt;/a&gt;व &lt;a href="http://utsavkerang.blogspot.com/"&gt;‘उत्सव के रंग’ &lt;/a&gt;ब्लॉग का संचालन करने वाली आकांक्षा यादव न सिर्फ एक साहित्यकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं, बल्कि सक्रिय ब्लागर के रूप में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. 'क्रांति-यज्ञ: 1857-1947 की गाथा‘ पुस्तक का कृष्ण कुमार यादव के साथ संपादन करने वाली आकांक्षा यादव के व्यक्तित्व-कृतित्व पर वरिष्ठ बाल साहित्यकार डा0 राष्ट्रबन्धु जी ने ‘बाल साहित्य समीक्षा‘ पत्रिका का एक अंक भी विशेषांक रुप में प्रकाशित किया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मूलत: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और गाजीपुर जनपद की निवासी आकांक्षा यादव वर्तमान में अपने पतिदेव &lt;a href="http://www.blogger.com/profile/05702409969031147177"&gt;श्री कृष्ण कुमार यादव &lt;/a&gt;के साथ अंडमान-निकोबार में रह रही हैं और वहां रहकर भी हिंदी को समृद्ध कर रही हैं. श्री यादव भी हिंदी की युवा पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर हैं और सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर पदस्थ हैं. एक रचनाकार के रूप में बात करें तो सुश्री आकांक्षा यादव ने बहुत ही खुले नजरिये से संवेदना के मानवीय धरातल पर जाकर अपनी रचनाओं का विस्तार किया है। बिना लाग लपेट के सुलभ भाव भंगिमा सहित जीवन के कठोर सत्य उभरें यही आपकी लेखनी की शक्ति है। उनकी रचनाओं में जहाँ जीवंतता है, वहीं उसे सामाजिक संस्कार भी दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे पूर्व भी आकांक्षा यादव को विभिन्न साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। जिसमें भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’भारती ज्योति’, ‘‘एस0एम0एस0‘‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार, इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्था, बिजनौर द्वारा ‘‘साहित्य गौरव‘‘ व ‘‘काव्य मर्मज्ञ‘‘, श्री मुकुन्द मुरारी स्मृति साहित्यमाला, कानपुर द्वारा ‘‘साहित्य श्री सम्मान‘‘, मथुरा की साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘‘आसरा‘‘ द्वारा ‘‘ब्रज-शिरोमणि‘‘ सम्मान, मध्यप्रदेश नवलेखन संघ द्वारा ‘‘साहित्य मनीषी सम्मान‘‘ व ‘‘भाषा भारती रत्न‘‘, छत्तीसगढ़ शिक्षक-साहित्यकार मंच द्वारा ‘‘साहित्य सेवा सम्मान‘‘, देवभूमि साहित्यकार मंच, पिथौरागढ़ द्वारा ‘‘देवभूमि साहित्य रत्न‘‘, राजेश्वरी प्रकाशन, गुना द्वारा ‘‘उजास सम्मान‘‘, ऋचा रचनाकार परिषद, कटनी द्वारा ‘‘भारत गौरव‘‘, अभिव्यंजना संस्था, कानपुर द्वारा ‘‘काव्य-कुमुद‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ‘‘शब्द माधुरी‘‘, महिमा प्रकाशन, दुर्ग-छत्तीसगढ द्वारा ’महिमा साहित्य भूषण सम्मान’ , अन्तर्राष्ट्रीय पराविद्या शोध संस्था, ठाणे, महाराष्ट्र द्वारा ‘‘सरस्वती रत्न‘‘, अन्तज्र्योति सेवा संस्थान गोला-गोकर्णनाथ, खीरी द्वारा श्रेष्ठ कवयित्री की मानद उपाधि. जीवी प्रकाशन, जालंधर द्वारा 'राष्ट्रीय भाषा रत्न' इत्यादि शामिल हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दुर्गविजय सिंह 'दीप'&lt;br /&gt;उपनिदेशक- आकाशवाणी (समाचार)&lt;br /&gt;पोर्टब्लेयर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह.&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-6622784655897263360?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/6622784655897263360/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=6622784655897263360' title='10 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6622784655897263360'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6622784655897263360'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/12/2011.html' title='आकांक्षा यादव को भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा &apos;डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2011‘'/><author><name>Krishna Kr. Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04376997074873178876</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='25' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_y-fMVExInCw/TErGAbcYdYI/AAAAAAAAASE/P2gqLC3gCrg/S220/KKY.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-NW9DuQsHF1Q/Tunpy9evNiI/AAAAAAAAAWs/Un9H42ZBzQo/s72-c/Akanksha-KKYadav.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>10</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5966328702716229273</id><published>2011-12-04T14:33:00.003+05:30</published><updated>2011-12-04T15:02:18.330+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='व्यक्तित्व'/><title type='text'>देवानंद साहब का जाना...</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-ZotAJPXwLVA/Ttsv3YIhiuI/AAAAAAAABCY/TgJ8-HGq_AU/s1600/Devanand-Young.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 350px; FLOAT: left; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5682187983275526882" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-ZotAJPXwLVA/Ttsv3YIhiuI/AAAAAAAABCY/TgJ8-HGq_AU/s400/Devanand-Young.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; देवानंद साहब नहीं रहे। वह सही मायने में बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और अभिनेता, निर्देशक तथा निर्माता के रूप में उन्होंने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं. भारतीय सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देवानंद ने 1946 में फ़िल्मी दुनिया में क़दम रखा था और 88 साल की उम्र में इस सदाबहार नौजवान का ग्लैमर की दुनिया में 65 साल काम करने के बाद लंदन में दिल का दौरा पड़ने से इंतकाल हो गया.देवानंद के बारे में कहा जाता है कि वो कभी हार न मानने वाले लोगों में से थे और 88 वर्ष की उम्र में पूरे जोश के साथ नई फ़िल्म बनाने की तैयारी में लगे हुए थे. उनका सबसे बड़ा सशक्त पक्ष यह रहा कि उनकी उम्र कुछ भी रही हो, उन्होंने खुद को हमेशा युवा ही माना.सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का कोई मुकाबला नहीं था तथा सिनेमा में भी उन्होंने जिन मुद्दों को उठाया उनसे समाज में नए मापदंड स्थापित करने में मदद मिली। देवानंद हमेशा अपनी शर्तों पर जिए. देवानंद ने जिंदगी को कितनी खूबसूरती के साथ जिया, इसका अंदाजा उनकी आत्मकथा के शीर्षक 'रोमांसिंग विद लाइफ' से पता चलता है। 438 पृष्ठों की उनकी इस आत्मकथा का विमोचन खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था। देवानंद का मानना था की उनकी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ में उससे भी ज्यादा है जितना जमाना जानता है। पुस्तक में देवानंद ने अपनी युवावस्था, लाहौर, गुरदासपुर, फिल्मी दुनिया के संघर्ष, गुरुदत्त के साथ मित्रवत रिश्तों और सुरैया के साथ अपने संबंधों का उल्लेख किया है। इसके अलावा देवानंद ने अपने भाई विजय आनंद और चेतन आनंद के संबंध में भी इस किताब में लिखा है। एक बार उन्होंने कहा था कि रोमांस का मतलब महिलाओं के साथ हमबिस्तर होने से ही क्यों लगाया जाता है। इसके मायने किसी के हाथ को अपने हाथ में लेना और बात करना भी हो सकते हैं। यह उनकी जिन्दादिली ही थी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देवानंद का जन्म पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में 26 सितंबर, 1923 को हुआ था. उनका बचपन का नाम देवदत्त पिशोरीमल आनंद था. बचपन से ही उनका झुकाव अपने पिता के पेशे वकालत की ओर न होकर अभिनय की ओर था. उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में अपनी स्नातक की शिक्षा 1942 में लाहौर के मशहूर गवर्नमेंट कॉलेज से पूरी की. इस कॉलेज ने फिल्म और साहित्य जगत को बलराज साहनी, चेतन आनंद, बी.आर.चोपड़ा और खुशवंत सिंह जैसे शख्सियतें दी हैं. देव आनंद को अपनी पहली नौकरी मिलिट्री सेन्सर ऑफिस में एक लिपिक के तौर पर मिली जहां उन्हें सैनिकों द्वारा लिखी चिट्ठियों को उनके परिवार के लोगों को पढ़ कर सुनाना पड़ता था. इस काम के लिए देव आनंद को 165 रूपये मासिक वेतन के रूप में मिला करता था जिसमें से 45 रूपये वह अपने परिवार के खर्च के लिए भेज दिया करते थे. लगभग एक वर्ष तक मिलिट्री सेन्सर में नौकरी करने के बाद वह अपने बड़े भाई चेतन आनंद के पास मुंबई आ गए. चेतन आनंद उस समय भारतीय जन नाटय संघ इप्टा से जुड़े हुए थे. उन्होंने देव आनंद को भी अपने साथ इप्टा में शामिल कर लिया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देवानंद ने 1946 में फ़िल्मी दुनिया में क़दम रखा था और फ़िल्म थी -प्रभात स्टूडियो की 'हम एक हैं'. दुर्भाग्यवश यह फिल्म असफल ही रही. वर्ष 1948 में प्रदर्शित फिल्म “जिद्दी” देव आनंद के फिल्मी कॅरियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई. &lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-32duokckCb4/Tts9et0TxPI/AAAAAAAABCk/lDN_H5608N8/s1600/ziddi-Dewanand.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 343px; FLOAT: right; HEIGHT: 230px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5682202952762377458" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-32duokckCb4/Tts9et0TxPI/AAAAAAAABCk/lDN_H5608N8/s400/ziddi-Dewanand.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;इस फिल्म से वो बड़े अभिनेता के रुप में स्थापित हो गए. इसके बाद उन्हें कई फ़िल्में मिलीं. इस फिल्म की कामयाबी के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रख दिया और नवकेतन बैनर की स्थापना की. नवकेतन के बैनर तले उन्होंने वर्ष 1950 में अपनी पहली फिल्म 'अफसर' का निर्माण किया जिसके निर्देशन की जिम्मेदारी उन्होंने अपने बड़े भाई चेतन आनंद को सौंपी. इस फिल्म के लिए उन्होंने उस जमाने की जानी मानी अभिनेत्री सुरैया का चयन किया जबकि अभिनेता के रूप में देव आनंद खुद ही थे. इसके बाद देवानंद ने कई बेहतरीन फ़िल्में की और अपने अभिनय का लोहा मनवाया. इन फ़िल्मों में पेइंग गेस्ट, बाज़ी, ज्वेल थीप, सीआईडी, जॉनी मेरा नाम, टैक्सी ड्राइवर,फंटुश, नौ दो ग्यारह, काला पानी, अमीर गरीब, हरे रामा हरे कृष्णा और देस परदेस का नाम लिया जा सकता है. देवानंद केवल अभिनेता ही नहीं थे. उन्होंने फ़िल्मों का निर्देशन किया, फ़िल्में प्रोड्यूस भी कीं. नवकेतन फ़िल्म प्रोडक्शन के बैनर तले उन्होंने 35 से अधिक फ़िल्मों का निर्माण किया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देवानंद प्रख्यात उपन्यासकार आर.के. नारायण से काफी प्रभावित थे और उनके उपन्यास गाइड पर फिल्म बनाना चाहते थे. आर.के.नारायणन की स्वीकृति के बाद देव आनंद ने फिल्म गाइड का निर्माण किया जो देव आनंद के सिने कॅरियर की पहली रंगीन फिल्म थी. इस फिल्म के लिए देव आनंद को उनके जबर्दस्त अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिया गया. देवानंद को दो फ़िल्मफेयर पुरस्कार मिले. 1958 में फ़िल्म काला पानी के लिए और फिर 1966 में गाइड के लिए.गाइड ने फ़िल्मफेयर अवार्ड में पांच अवार्डों का रिकार्ड भी बनाया. इतना ही नहीं गाइड 1966 में भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए नामांकित भी हुई थी। आगे चलकर देवानंद ने नोबल पुरस्कार विजेता पर्ल बक के साथ मिलकर अंग्रेज़ी में भी गाइड का निर्माण किया था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देवानंद अपने काले कोट की वजह से भी काफी चर्चा में रहे. देवानंद अपने अलग अंदाज और बोलने के तरीके के लिए काफी मशहूर थे. उनके सफेद कमीज और काले कोट के फैशन को तो युवाओं ने जैसे अपना ही बना लिया था और इसी समय एक ऐसा वाकया भी देखने को मिला जब न्यायालय ने उनके काले कोट को पहन कर घूमने पर पाबंदी लगा दी. वजह थी कुछ लडकियों का उनके काले कोट के प्रति आसक्ति के कारण आत्महत्या कर लेना. दीवानगी में दो-चार लडकियों ने जान दे दी.देवानंद के जानदार और शानदार अभिनय की बदौलत परदे पर जीवंत आकार लेने वाली प्रेम कहानियों ने लाखों युवाओं के दिलों में प्रेम की लहरें पैदा कीं लेकिन खुद देवानंद इस लिहाज से जिंदगी में काफी परेशानियों से गुजरे। देवानंद सुरैया को कभी भुला नहीं पाए और अक्सर उन्होंने सुरैया को अपनी जिंदगी का प्यार कहा है। वह भी इस हकीकत के बावजूद कि उन्होंने बाद में अभिनेत्री कल्पना कार्तिक से विवाह कर लिया था। वर्ष 2005 में जब सुरैया का निधन हुआ तो देवानंद उन लोगों में से एक थे जो उनके जनाजे के साथ थे। अपनी आत्मकथा में भी देवानंद ने सुरैया के साथ अपने संबंधों का उल्लेख किया है। जीनत अमान के साथ भी उनके प्यार के चर्चे खूब रहे. देवानंद ने 'हरे रामा हरे कृष्णा' के ज़रिए ज़ीनत अमान की खोज की.अपनी आत्मकथा ‘रोमांसिंग विद लाइफ’ में उन्होंने लिखा कि वे जीनत अमान से बेहद प्यार करते थे और इसीलिए उन्हें अपनी फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में अभिनेत्री बनाया था। लेकिन देवानंद का यह प्यार परवान चढ़ने से पहले ही टूट गया, क्योंकि उन्होंने जीनत अमान को एक पार्टी में राजकपूर की बाहों में देख लिया था। गौरतलब है कि देवानंद ने कल्पना कार्तिक के साथ शादी की थी लेकिन उनकी शादी अधिक समय तक सफल नहीं हो सकी. दोनों साथ रहे लेकिन बाद में कल्पना ने एकाकी जीवन को गले लगा लिया.कई अभिनेत्रियों से उनके संबंधों को लेकर बातें उड़ीं, पर देवानंद अपनी ही धुन में मस्त व्यक्ति थे. टीना मुनीम,नताशा सिन्हा व एकता जैसी तमाम अभिनेत्रियों को मैदान में उतारने का श्रेय भी देवानंद को ही जाता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वर्ष 1970 में फिल्म प्रेम पुजारी के साथ देवानंद ने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रख दिया. हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से नकार दी गई बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन पर फिल्माया गया गीत- 'मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया, हर फिक्र को धुंए में उड़ाता चला गया' उनके जीवन के भी बहुत करीब था.इसके बाद वर्ष 1971 में फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा का भी निर्देशन किया जिसकी कामयाबी के बाद उन्होंने अपनी कई फिल्मों का निर्देशन भी किया. अभी सितम्बर 2011 में देवानंद जी की फिल्म चार्जशीट रिलीज हुई थी. फ़िल्मों में देवानंद के योगदान को देखते हुए उन्हें 1993 में फिल्मफेयर लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड दिया गया. उन्हें 2001 में पद्म भूषण और 2002 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;&lt;strong&gt;देवानंद साहब के जाने से हिंदी फिल्म जगत का एक महत्वपूर्ण युग ख़त्म हो गया....श्रद्धांजलि !!&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://kkyadav.blogspot.com/"&gt;&lt;strong&gt;- कृष्ण कुमार यादव&lt;/strong&gt; &lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5966328702716229273?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5966328702716229273/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5966328702716229273' title='11 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5966328702716229273'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5966328702716229273'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/12/blog-post.html' title='देवानंद साहब का जाना...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-ZotAJPXwLVA/Ttsv3YIhiuI/AAAAAAAABCY/TgJ8-HGq_AU/s72-c/Devanand-Young.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>11</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-4274878880307389353</id><published>2011-11-28T08:05:00.000+05:30</published><updated>2011-11-28T08:05:00.236+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='वैवाहिक वर्षगांठ'/><title type='text'>कृष्ण-आकांक्षा : आज हमारी शादी की सालगिरह है</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;28 नवम्बर का दिन हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है. &lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 229px; FLOAT: left; HEIGHT: 320px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5414256208227267762" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_2K8UDLclYQE/SyNNVd5W9LI/AAAAAAAAAXU/8I5OmjWXwW0/s320/02-5x7.JPG" /&gt; &lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;28 नवम्बर, 2004 (रविवार) को हम (&lt;a href="http://kkyadav.blogspot.com/"&gt;कृष्ण कुमार&lt;/a&gt;- &lt;a href="http://www.blogger.com/www.shabdshikhar.blogspot.com"&gt;आकांक्षा&lt;/a&gt;) जीवन के इस अनमोल पवित्र बंधन में बंधे थे. वक़्त कितनी तेजी से करवटें बदलता रहा, पता ही नहीं चला. सुख-दुःख के बीच सफलता के तमाम आयाम हमने छुए. कभी जिंदगी सरपट दौड़ती तो कई बार ब्रेक लग जाता। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;एक-दूसरे के साथ बिताये गए ये दिन हमारे लिए सिर्फ इसलिए नहीं महत्वपूर्ण हैं कि हमने जीवन-साथी के संबंधों का दायित्व प्रेमपूर्वक निभाया, बल्कि इसलिए भी कि हमने एक-दूसरे को समझा, सराहा और संबल दिया. यह हमारा सौभाग्य है कि हम दोनों साहित्य प्रेमी हैं और कई सामान रुचियों के कारण कई मुद्दों पर खुला संवाद भी कर लेते हैं। एक-दूसरे की रचनात्मकता को सपोर्ट करते हुए ही आज हम इस मुकाम पर हैं...!! &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;शादी की इस सालगिरह पर कल से ही तमाम मित्रजनों-सम्बन्धियों की शुभकामनायें तमाम माध्यमों से प्राप्त हो रही हैं...सभी का आभार. आप सभी का स्नेह बना रहे ....!! &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-4274878880307389353?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/4274878880307389353/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=4274878880307389353' title='22 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/4274878880307389353'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/4274878880307389353'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/11/blog-post_28.html' title='कृष्ण-आकांक्षा : आज हमारी शादी की सालगिरह है'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_2K8UDLclYQE/SyNNVd5W9LI/AAAAAAAAAXU/8I5OmjWXwW0/s72-c/02-5x7.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>22</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-8669412005078840580</id><published>2011-11-16T18:07:00.000+05:30</published><updated>2011-11-16T18:07:52.018+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाखी की दुनिया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सम्मान-उपलब्धि'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मेरा परिवार'/><title type='text'>बिटिया रानी अक्षिता (पाखी) को मिला 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;(बाल दिवस, 14 नवम्बर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में महिला और बाल विकास मंत्री माननीया कृष्णा तीरथ जी ने हमारी बिटिया अक्षिता (पाखी) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2011 से पुरस्कृत किया. अक्षिता इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिभा है.यही नहीं यह प्रथम अवसर था, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया गया.प्रस्तुत है इस पर एक रिपोर्ट-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-IZUom_IVdtc/TsOUxf5t8bI/AAAAAAAABXc/uaiILl-tpHc/s1600/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-1.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 283px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5675543533515043250" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-IZUom_IVdtc/TsOUxf5t8bI/AAAAAAAABXc/uaiILl-tpHc/s400/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-1.jpg" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज के आधुनिक दौर में बच्चों का सृजनात्मक दायरा बढ़ रहा है. वे न सिर्फ देश के भविष्य हैं, बल्कि हमारे देश के विकास और समृद्धि के संवाहक भी. जीवन के हर क्षेत्र में वे अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं. बेटों के साथ-साथ बेटियाँ भी जीवन की हर ऊँचाइयों को छू रही हैं. ऐसे में वर्ष 1996 से हर वर्ष शिक्षा, संस्कृति, कला, खेल-कूद तथा संगीत आदि के क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों हेतु हेतु महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' आरम्भ किये गए हैं। चार वर्ष से पन्द्रह वर्ष की आयु-वर्ग के बच्चे इस पुरस्कार को प्राप्त करने के पात्र हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वर्ष 2011 के लिए 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' 14 नवम्बर 2011 को विज्ञानं भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा प्रदान किये गए. विभिन्न राज्यों से चयनित कुल 27 बच्चों को ये पुरस्कार दिए गए, जिनमें मात्र 4 साल 8 माह की आयु में सबसे कम उम्र में पुरस्कार प्राप्त कर अक्षिता (पाखी) ने एक कीर्तिमान स्थापित किया. गौरतलब है कि इन 27 प्रतिभाओं में से 13 लडकियाँ चुनी गई हैं. सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय डाक सेवा के निदेशक और चर्चित लेखक, साहित्यकार, व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव एवं लेखिका व ब्लागर आकांक्षा यादव की सुपुत्री और पोर्टब्लेयर में कारमेल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में के. जी.- प्रथम की छात्रा अक्षिता (पाखी) को यह पुरस्कार कला और ब्लागिंग के क्षेत्र में उसकी विलक्षण उपलब्धि के लिए दिया गया है. इस अवसर पर जारी बुक आफ रिकार्ड्स के अनुसार- ''25 मार्च, 2007 को जन्मी अक्षिता में रचनात्मकता कूट-कूट कर भरी हुई है। ड्राइंग, संगीत, यात्रा इत्यादि से सम्बंधित उनकी गतिविधियाँ उनके ब्लाॅग ’पाखी की दुनिया (http://pakhi-akshita.blogspot.com/) पर उपलब्ध हैं, जो 24 जून, 2009 को आरंभ हुआ था। इस पर उन्हें अकल्पनीय प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। 175 से अधिक ब्लाॅगर इससे जुडे़ हैं। इनके ब्लाॅग 70 देशों के 27000 से अधिक लोगों द्वारा देखे गए हैं। अक्षिता ने नई दिल्ली में अप्रैल, 2011 में हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में 2010 का ’हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना का सर्वोत्कृष्ट पुरस्कार’ भी जीता है।इतनी कम उम्र में अक्षिता के एक कलाकार एवं एक ब्लाॅगर के रूप में असाधारण प्रदर्शन ने उन्हें उत्कृष्ट उपलब्धि हेतु 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, 2011' दिलाया।''इसके तहत अक्षिता को भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा 10,000 रूपये नकद राशि, एक मेडल और प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यही नहीं यह प्रथम अवसर था, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया गया. अक्षिता का ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) हिंदी के चर्चित ब्लॉग में से है और इस ब्लॉग का सञ्चालन उनके माता-पिता द्वारा किया जाता है, पर इस पर जिस रूप में अक्षिता द्वारा बनाये चित्र, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ और अक्षिता की बातों को प्रस्तुत किया जाता है, वह इस ब्लॉग को रोचक बनता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नन्हीं बिटिया अक्षिता (पाखी) को इस गौरवमयी उपलब्धि पर ढेरों प्यार और शुभाशीष व बधाइयाँ !!&lt;br /&gt;********************************************&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मंत्री जी भी अक्षिता (पाखी) के प्रति अपना प्यार और स्नेह न छुपा सकीं, कुछ चित्रमय झलकियाँ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-N9qst-HhKYY/TsOWuQOe7lI/AAAAAAAABX0/tpBXyNPkQw8/s1600/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-3.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 292px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5675545676790820434" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-N9qst-HhKYY/TsOWuQOe7lI/AAAAAAAABX0/tpBXyNPkQw8/s400/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-3.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-2ItIkwldq6E/TsOXnkJc4LI/AAAAAAAABYA/1ZG1r-SPnXo/s1600/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-4.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 288px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5675546661390966962" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-2ItIkwldq6E/TsOXnkJc4LI/AAAAAAAABYA/1ZG1r-SPnXo/s400/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-4.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-kab_PG4lNUI/TsOVmuntsYI/AAAAAAAABXo/OvcFv7kMj6M/s1600/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-2.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 290px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5675544447999127938" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-kab_PG4lNUI/TsOVmuntsYI/AAAAAAAABXo/OvcFv7kMj6M/s400/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-2.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-IZUom_IVdtc/TsOUxf5t8bI/AAAAAAAABXc/uaiILl-tpHc/s1600/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-1.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 283px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5675543533515043250" border="0" alt="" 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href="http://1.bp.blogspot.com/-rfDMtJUFhCY/TsOZpSvmVZI/AAAAAAAABYM/CJuGydBPP4I/s1600/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-5.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 276px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5675548890102125970" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-rfDMtJUFhCY/TsOZpSvmVZI/AAAAAAAABYM/CJuGydBPP4I/s400/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-5.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-8669412005078840580?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/8669412005078840580/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=8669412005078840580' title='15 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8669412005078840580'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8669412005078840580'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/11/blog-post_16.html' title='बिटिया रानी अक्षिता (पाखी) को मिला &apos;राष्ट्रीय बाल पुरस्कार&apos;'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-IZUom_IVdtc/TsOUxf5t8bI/AAAAAAAABXc/uaiILl-tpHc/s72-c/National%2BChild%2BAward-Akshita-Pakhi-Yadav-Krishna%2BTirth-Vigyan%2BBhavan-Delhi-1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>15</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5037711745194593978</id><published>2011-11-03T08:01:00.000+05:30</published><updated>2011-11-03T08:01:00.218+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बाल-कविता'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बाल-दुनिया'/><title type='text'>बन्दर की सगाई</title><content type='html'>&lt;div align="center"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-SapcvzXTqlE/TqZyyJgyVuI/AAAAAAAABBk/i8w9dyxwktQ/s1600/Monkey.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 168px; DISPLAY: block; HEIGHT: 191px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5667343386964809442" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-SapcvzXTqlE/TqZyyJgyVuI/AAAAAAAABBk/i8w9dyxwktQ/s400/Monkey.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;बन्दर की तय हुई सगाई,&lt;br /&gt;सबने खाई खूब मिठाई।&lt;br /&gt;कोयल गाये कू-कू-कू&lt;br /&gt;हाथी ने चिंघाड़ लगाई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ड्रम बाजे डम-डम-डम,&lt;br /&gt;भालू नाचा छम-छम-छम।&lt;br /&gt;चारों तरफ खुशहाली आई,&lt;br /&gt;जंगल में बज उठी शहनाई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पहन सुन्दर सी शेरवानी,&lt;br /&gt;बन्दर जी ने बांधा सेहरा।&lt;br /&gt;सभी लोग उतारें नजरें,&lt;br /&gt;खिल रहा बंदर का चेहरा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कार पर चढ़ बन्दर जी निकले,&lt;br /&gt;बाराती भी खूब सजे।&lt;br /&gt;सबने दावत खूब उड़ाई,&lt;br /&gt;धूमधाम से हुई विदाई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/"&gt;-- आकांक्षा यादव &lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5037711745194593978?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5037711745194593978/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5037711745194593978' title='7 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5037711745194593978'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5037711745194593978'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/11/blog-post.html' title='बन्दर की सगाई'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-SapcvzXTqlE/TqZyyJgyVuI/AAAAAAAABBk/i8w9dyxwktQ/s72-c/Monkey.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-7226565562496572226</id><published>2011-10-27T08:00:00.003+05:30</published><updated>2011-11-27T14:15:20.656+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपूर्वा (तान्या)'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जन्म-दिन'/><title type='text'>बेटी अपूर्वा (तान्या) एक साल की</title><content type='html'>&lt;div align="center"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-FNIo0IVi4HI/TqZ06ZVAGyI/AAAAAAAABB8/009QWMRXq8U/s1600/DSC00833.JPG"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5667345727672556322" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-FNIo0IVi4HI/TqZ06ZVAGyI/AAAAAAAABB8/009QWMRXq8U/s400/DSC00833.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;वक़्त की चाल भी कितनी तेज है. समय का पता ही नहीं चलता. देखते-देखते एक साल बीत गए और हमारी छोटी बेटी अपूर्वा(तान्या) एक साल की हो गई. जन्म हुआ बनारस में, परवरिश पोर्टब्लेयर में और अपने पहले जन्म-दिन पर हवाई जहाज से कोलकात्ता से लखनऊ..यानी जन्मदिन भी हवाई जहाज में ही मनेगा और फिर शाम को लखनऊ में डिनर !!&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-mSX5UytTeBY/TqZzuTVvWAI/AAAAAAAABBw/NWlpX5dszZE/s1600/DSC00830.JPG"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5667344420394981378" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-mSX5UytTeBY/TqZzuTVvWAI/AAAAAAAABBw/NWlpX5dszZE/s400/DSC00830.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;...बेटी अपूर्वा को आपके शुभाशीर्वाद और स्नेह की भी आकांक्षा !!&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-7226565562496572226?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/7226565562496572226/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=7226565562496572226' title='10 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/7226565562496572226'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/7226565562496572226'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/10/blog-post_27.html' title='बेटी अपूर्वा (तान्या) एक साल की'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-FNIo0IVi4HI/TqZ06ZVAGyI/AAAAAAAABB8/009QWMRXq8U/s72-c/DSC00833.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>10</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-2465648443165219953</id><published>2011-10-25T12:30:00.000+05:30</published><updated>2011-10-25T12:31:28.767+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जानकारी'/><title type='text'>दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा क्यों ??</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TL62r1kecqI/AAAAAAAAAw8/fXJVFHHP84s/s1600/diwali+11.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; DISPLAY: block; HEIGHT: 313px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5530058256688247458" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TL62r1kecqI/AAAAAAAAAw8/fXJVFHHP84s/s320/diwali+11.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;दीपावली को दीपों का पर्व कहा जाता है और इस दिन ऐश्वर्य की देवी माँ लक्ष्मी एवं विवेक के देवता व विध्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली मूलतः यक्षों का उत्सव है। दीपावली की रात्रि को यक्ष अपने राजा कुबेर के साथ हास-विलास में बिताते व अपनी यक्षिणियों के साथ आमोद-प्रमोद करते। दीपावली पर रंग-बिरंगी आतिशबाजी, लजीज पकवान एवं मनोरंजन के जो विविध कार्यक्रम होते हैं, वे यक्षों की ही देन हैं। सभ्यता के विकास के साथ यह त्यौहार मानवीय हो गया और धन के देवता कुबेर की बजाय धन की देवी लक्ष्मी की इस अवसर पर पूजा होने लगी, क्योंकि कुबेर जी की मान्यता सिर्फ यक्ष जातियों में थी पर लक्ष्मी जी की देव तथा मानव जातियों में। कई जगहों पर अभी भी दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ कुबेर की भी पूजा होती है। गणेश जी को दीपावली पूजा में मंचासीन करने में शैव-सम्प्रदाय का काफी योगदान है। ऋद्धि-सिद्धि के दाता के रूप में उन्होंने गणेश जी को प्रतिष्ठित किया। यदि तार्किक आधार पर देखें तो कुबेर जी मात्र धन के अधिपति हैं जबकि गणेश जी संपूर्ण ऋद्धि-सिद्धि के दाता माने जाते हैं। इसी प्रकार लक्ष्मी जी मात्र धन की स्वामिनी नहीं वरन् ऐश्वर्य एवं सुख-समृद्धि की भी स्वामिनी मानी जाती हैं। अतः कालांतर में लक्ष्मी-गणेश का संबध लक्ष्मी-कुबेर की बजाय अधिक निकट प्रतीत होने लगा। दीपावली के साथ लक्ष्मी पूजन के जुड़ने का कारण लक्ष्मी और विष्णु जी का इसी दिन विवाह सम्पन्न होना भी माना गया हैै।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;ऐसा नहीं है कि दीपावली का सम्बन्ध सिर्फ हिन्दुओं से ही रहा है वरन्&lt;/span&gt; दीपावली के दिन ही भगवान महावीर के निर्वाण प्राप्ति के चलते जैन समाज दीपावली को निर्वाण दिवस के रूप में मनाता है तो सिक्खों के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर की स्थापना एवं गुरू हरगोविंद सिंह की रिहाई दीपावली के दिन होने के कारण इसका महत्व सिक्खों के लिए भी बढ़ जाता है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस को आज ही के दिन माँ काली ने दर्शन दिए थे, अतः इस दिन बंगाली समाज में काली पूजा का विधान है। यह महत्वपूर्ण है कि दशहरा-दीपावली के दौरान पूर्वी भारत के क्षेत्रों में जहाँ देवी के रौद्र रूपों को पूजा जाता है, वहीं उत्तरी व दक्षिण भारत में देवी के सौम्य रूपों अर्थात लक्ष्मी, सरस्वती व दुर्गा माँ की पूजा की जाती है। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#993300;"&gt;सभी ब्लागर्स को दीप-पर्व पर अनंत शुभकामनाएं. आप सब ऐसे ही ब्लागिंग में नित रचनात्मक दीये जलाते रहें !!&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/"&gt;-आकांक्षा यादव&lt;br /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-2465648443165219953?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/2465648443165219953/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=2465648443165219953' title='14 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2465648443165219953'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2465648443165219953'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/10/blog-post_25.html' title='दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा क्यों ??'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TL62r1kecqI/AAAAAAAAAw8/fXJVFHHP84s/s72-c/diwali+11.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>14</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-972367332914951962</id><published>2011-10-19T09:15:00.000+05:30</published><updated>2011-10-19T09:15:16.329+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चर्चा में ब्लॉग/आकांक्षा'/><title type='text'>'शब्द शिखर' पर विराजने की 'आकांक्षा' : जनसंदेश टाइम्स में चर्चा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-T5jy79PxWBs/Tp4_gyitN9I/AAAAAAAABBY/m6yVx3c8sUo/s1600/Akanksha%2BYadav-blog-media-shabd-shikhar.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 287px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5665035213834368978" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-T5jy79PxWBs/Tp4_gyitN9I/AAAAAAAABBY/m6yVx3c8sUo/s400/Akanksha%2BYadav-blog-media-shabd-shikhar.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;(&lt;span style="color:#660000;"&gt;'शब्द-शिखर' ब्लॉग की चर्चा डा. जाकिर अली रजनीश जी ने जनसंदेश टाइम्स में अपने साप्ताहिक स्तम्भ 'ब्लॉग वाणी' के तहत 'शब्द शिखर पर विराजने की आकांक्षा' शीर्षक के तहत 12 अक्टूबर 2011 को विस्तारपूर्वक की है.रजनीश जी को धन्यवाद. बेहद खूबसूरती से उन्होंने इसे प्रस्तुत किया है.इसे आप भी पढ़ सकते हैं)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;धरती पर पाए जाने वाले सभी जीवों में मनुष्‍य ही वह प्राणी है, जिसके पास सोच-विचार करने और उसे अभिव्‍यक्‍त करने की शक्ति पाई जाती है। यही कारण है कि विचारशील व्‍यक्ति सिर्फ अपनी क्षुधापूर्ति पर ध्‍यान नहीं देता, वह अपनी रोजी-रोटी के साथ-साथ समाज के बारे में भी चिंतन करता है। विद्वानों ने इस वैचारिक प्रस्‍फुटन को स्‍वत: स्‍फूर्त माना है। लेकिन इसके साथ ही साथ यह भी तय है कि परिस्थितियाँ और माहौल भी इस भाव के प्रकटीकरण में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही&lt;br /&gt;कारण है कि जबसे वैचारिक आदान-प्रदान के रूप में ब्‍लॉग का माध्‍यम सामने आया है, ऐसे विचारकों की संख्‍या में अ‍भूतपूर्व वृद्धि हुई है। इस वृद्धि को अगर वैचारिक विस्‍फोट का नाम दिया जाए, तो शायद अतिश्‍योक्ति नहीं होगी। कारण जहाँ इस माध्‍यम ने लेखकों की एक ऐसी जमात को सामने लाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो किसी संकोच की वजह से कभी अपनी रचनाओं को लोगों के सामने नहीं ला सके, वहीं इसने उन रचनाकारों की झिझक को भी तोड़ने में सफलता अर्जित की है, जो बार-बार के रचना-प्रेषण और सम्‍पादकीय दया दृष्टि को लेकर सहज नहीं रह पाते थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रचनाकारों की इन दो श्रेणियों के के अतिरिक्‍त ब्‍लॉग जगत में लेखकों की एक तीसरी श्रेणी भी सक्रिय है, जो ब्‍लॉग जगत से इतर भी अपनी लेखनी के लिए जानी जाती है और ब्‍लॉग जगत में भी अपनी अपनी साहित्यिक प्रतिभा के कारण पहचानी जाती है। आकाँक्षा यादव इसी श्रेणी की एक प्रतिभा सम्‍पन्‍न रचनाकार हैं। वे जिस तरह देश-विदेश की सभी चर्चित पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं, उसी तरह से ब्‍लॉग जगत में भी अपनी सक्रियता के नए आयाम स्‍थापित करती नजर आती हैं। उनके इस वैचारिक और साहित्यिक चिंतन को उनके ब्‍लॉग ‘शब्द-शिखर’ (&lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/"&gt;http://shabdshikhar.blogspot.com&lt;/a&gt;) पर सहज रूप में देखा-परखा जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में जन्‍मीं आकाँक्षा वर्तमान में पोर्टब्‍लेयर शहर में अवस्थित हैं। पेशे से वे कॉलेज में प्रवक्‍ता हैं, पर मुख्‍य रूप से वे एक रचनाधर्मी के रूप में जानी जाती हैं और अपनी रचनाओं में जीवंतता के साथ-साथ सामाजिक संस्कार के रंग भरने के लिए पहचानी जाती हैं। उनका मानना है कि लेखनी में बिना लाग-लपेट के सुलभ भाव-भंगिमा सहित जीवन के कठोर सत्य भी उभरने चाहिए। यही उसकी सार्थकता है। यही कारण है कि उनकी लेखनी किसी एक क्षेत्र अथवा सीमा में बंध कर नहीं रहती। वे मानव-मात्र को छूने वाले सभी सहज विषयों पर चिंतन करती पाई जाती हैं और शायद यही कारण है कि वे अपनी इस साहित्यिक सक्रियता के लिए दजर्नाधिक साहित्यिक संस्‍थाओं से पुरस्‍कृत एवं सम्‍मानित होने का गौरव भी प्राप्‍त कर चुकी हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आकाँक्षा एक आधुनिक युग की महिला हैं। वे महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिये जाने की पक्षधर हैं और लड़कियों पर पक्षपात के कारण लगाए जाने वाली मानसिकता की सख्‍त आलोचक भी हैं। यही कारण है कि वे ईव-टीजिंग जैसे ज्‍वलंत विषय पर लड़कियों पर सारा दोष मढ़ने की मानसिकता को साहस के साथ बेपर्दा करती हैं और स्‍वस्‍थ समाज के लिए स्‍वस्‍थ मानसिकता की आवश्‍यकता पर बल देती हैं। वे एक ओर जहाँ समाज के विभिन्‍न वर्गों में पाई जाने वाले विकृतियों को अपनी रचनाओं में उकेरती हैं, वहीं ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ की सीमा को तोड़ती हुई शिक्षक वर्ग की कमजोरियों को भी समान रूप से प्रदर्शित करने में झिझक महसूस नहीं करती हैं। उनका मानना है कि यदि शिक्षक अपनी भूमिका व कर्तव्यों पर पुनर्विचार कर सकें तो शायद वे बदलते प्रतिमानों के साथ अपनी भूमिका को ज्‍यादा सशक्त बना सकेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आकाँक्षा समाज में सिर्फ बुरा देखने वाली कोई अतिरेकी आलोचक नहीं हैं। वे लोक की परम्‍परा से निकली हुई एक ऐसी पारखी हैं, जो अपने चारों ओर पसरी जिंदगी में शुभ और सार्थक चीजों को बढ़ावा देना भी अपना फर्ज समझती हैं। यही कारण है कि चाहे हमारी संस्‍कृति में व्‍याप्‍त मानवीय मूल्‍य हों, अथवा हमारे समाज में चारों ओर फैले प्रेरक एवं सकारात्‍मक पहलू, वे एक जौहरी की तरह कदम-कदम पर उनकी पहचान करती चलती हैं और अपनी लेखनी के द्वारा उन्‍हें बड़ी कुशलता से अपने ब्‍लॉग पर परोसती जाती हैं। उनकी यह सजग दृष्टि जहाँ उनकी साँस्‍कृतिक समझ को व्‍याख्‍यायित करती है, वहीं उनके ब्‍लॉग में विविधता का ऐसा रंग भरती है, जो पाठकों को सहज रूप से आकर्षित करता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कविता, कहानी, नाटक, समीक्षा, संस्‍मरण जैसी विधाओं में अपने के सहज महसूस करने वाली आकाँक्षा वास्‍तव एक बहुआयामी रचनाकार हैं। एक ओर जहाँ वे आधुनिक युग की नारियों को समय की विद्रूपताओं के साथ चलने की राह दिखाती हैं, वहीं वे बाल साहित्‍य की सार्थक रचनाओं का प्रणयन कर बच्‍चों की भी सच्‍ची दोस्‍त बन जाती हैं। उनकी लेखनी की यह विविधता ‘शब्‍द-शिखर’ को पठनीय बनाती है और ब्‍लॉग जगत की भीड़ में उन्‍हें एक खास पहचान दिलाती है। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href="http://za.samwaad.com/2011/10/blog-post_12.html"&gt;डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’&lt;br /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;(इसे &lt;a href="http://blogsinmedia.com/2011/10/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%b6/"&gt;Hindi BLogs in Media &lt;/a&gt;और &lt;a href="http://za.samwaad.com/2011/10/blog-post_12.html"&gt;'मेरी दुनिया मेरे सपने' &lt;/a&gt;पर भी देखें)&lt;br /&gt;*********************************************************************&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;इससे पहले शब्द-शिखर और अन्य ब्लॉग पर प्रकाशित मेरी पोस्ट की चर्चा दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला,राष्ट्रीय सहारा,राजस्थान पत्रिका, आज समाज, गजरौला टाईम्स, जन सन्देश, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, दस्तक, आई-नेक्स्ट, IANS द्वारा जारी फीचर में की जा चुकी है. &lt;strong&gt;समग्र रूप में प्रिंट-मीडिया में 28वीं बार मेरी किसी पोस्ट की चर्चा हुई है.&lt;/strong&gt;आप सभी का इस समर्थन व सहयोग के लिए आभार! यूँ ही अपना सहयोग व स्नेह बनाये रखें !! &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-972367332914951962?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/972367332914951962/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=972367332914951962' title='7 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/972367332914951962'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/972367332914951962'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/10/blog-post_19.html' title='&apos;शब्द शिखर&apos; पर विराजने की &apos;आकांक्षा&apos; : जनसंदेश टाइम्स में चर्चा'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-T5jy79PxWBs/Tp4_gyitN9I/AAAAAAAABBY/m6yVx3c8sUo/s72-c/Akanksha%2BYadav-blog-media-shabd-shikhar.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-7406657513046161110</id><published>2011-10-12T17:01:00.001+05:30</published><updated>2011-10-12T17:02:22.103+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='डाकिया डाक लाया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><title type='text'>2009 ईसा पूर्व में लिखा गया दुनिया का पहला पत्र</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-7DItAwsQ7Hk/TpV6Tns0AXI/AAAAAAAAAWM/Z7fIu8wtBnc/s1600/letters2.gif"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 223px; FLOAT: left; HEIGHT: 320px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5662566583981310322" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-7DItAwsQ7Hk/TpV6Tns0AXI/AAAAAAAAAWM/Z7fIu8wtBnc/s320/letters2.gif" /&gt;&lt;/a&gt;हममें से हर किसी ने अपने जीवन में किसी न किसी रूप में पत्र लिखा होगा। पत्रों का अपना एक भरा-पूरा संसार है। दुनिया की तमाम मशहूर शख्सियतों ने पत्र लिखे हैं- फिर चाहे वह नेपोलियन हों, अब्राहम लिंकन, क्रामवेल, बिस्मार्क या बर्नाड शा हों। महात्मा गाँधी तो रोज पत्र लिखा करते थे. अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा को आज भी रोज 4000 से ज्यादा पत्र प्राप्त होते हैं.आज ये पत्र एक धरोहर बन चुके हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसे में यह जानना अचरज भरा लगेगा कि &lt;span style="color:#000099;"&gt;दुनिया का सबसे पुराना पत्र बेबीलोन के खंडहरों से मिला था, जो कि मूलत: एक प्रेम-पत्र था. बेबीलोन की किसी युवती का प्रेमी अपनी भावनाओं को समेटकर उससे जब अपने दिल की बात कहने बेबीलोन तक पहुँचा तो वह युवती तब तक वहां से जा चुकी थी। वह प्रेमी युवक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाया और उसने वहीं मिट्टी के फर्श पर खोदते हुए लिखा-&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;''मैं तुमसे मिलने आया था, तुम नहीं मिली।''&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह छोटा सा संदेश विरह की जिस भावना से लिखा गया था, उसमें कितनी तड़प शामिल थी। इसका अंदाजा सिर्फ वह युवती ही लगा सकती थी जिसके लिये इसे लिखा गया। भावनाओं से ओत-प्रोत यह पत्र 2009 ईसा पूर्व का है और आज हम वर्ष 2011 में जी रहे हैं. ...तो आइये पत्रों के इस सफर का स्वागत करते हैं और अपने किसी को एक खूबसूरत पत्र लिखते हैं !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href="http://dakbabu.blogspot.com/"&gt;- कृष्ण कुमार यादव&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-7406657513046161110?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/7406657513046161110/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=7406657513046161110' title='13 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/7406657513046161110'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/7406657513046161110'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/10/2009.html' title='2009 ईसा पूर्व में लिखा गया दुनिया का पहला पत्र'/><author><name>Krishna Kr. Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04376997074873178876</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='25' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_y-fMVExInCw/TErGAbcYdYI/AAAAAAAAASE/P2gqLC3gCrg/S220/KKY.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-7DItAwsQ7Hk/TpV6Tns0AXI/AAAAAAAAAWM/Z7fIu8wtBnc/s72-c/letters2.gif' height='72' width='72'/><thr:total>13</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-6992420761938568755</id><published>2011-10-06T11:15:00.000+05:30</published><updated>2011-10-06T11:15:56.559+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नवरात्र-दशहरा'/><title type='text'>अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है दशहरा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TLQJefLVJqI/AAAAAAAAAv8/1mDzrTv-TNY/s1600/Burning+Ravan.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 400px; FLOAT: left; HEIGHT: 232px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5527053062060189346" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TLQJefLVJqI/AAAAAAAAAv8/1mDzrTv-TNY/s400/Burning+Ravan.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;दशहरा पर्व भारतीय संस्कृति में सबसे ज्यादा बेसब्री के साथ इंतजार किये जाने वाला त्यौहार है। दशहरा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द संयोजन "दश" व "हरा" से हुयी है, जिसका अर्थ भगवान राम द्वारा रावण के दस सिरों को काटने व तत्पश्चात रावण की मृत्यु रूप मंे राक्षस राज के आंतक की समाप्ति से है। यही कारण है कि इस दिन को विजयदशमी अर्थात अन्याय पर न्याय की विजय के रूप में भी मनाया जाता है। दशहरे से पूर्व हर वर्ष शारदीय नवरात्र के समय मातृरूपिणी देवी नवधान्य सहित पृथ्वी पर अवतरित होती हैं- क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी व सिद्धिदात्री रूप में मांँ दुर्गा की लगातार नौ दिनांे तक पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के अंतिम दिन भगवान राम ने चंडी पूजा के रूप में माँ दुर्गा की उपासना की थी और मांँ ने उन्हें युद्ध में विजय का आशीर्वाद दिया था। इसके अगले ही दिन दशमी को भगवान राम ने रावण का अंत कर उस पर विजय पायी, तभी से शारदीय नवरात्र के बाद दशमी को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है और आज भी प्रतीकात्मक रूप में रावण-पुतला का दहन कर अन्याय पर न्याय के विजय की उद्घोषणा की जाती हेै।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दशहरे की परम्परा भगवान राम द्वारा त्रेतायुग में रावण के वध से भले ही आरम्भ हुई हो, पर द्वापरयुग में महाभारत का प्रसिद्ध युद्ध भी इसी दिन आरम्भ हुआ था। पर विजयदशमी सिर्फ इस बात का प्रतीक नहीं है कि अन्याय पर न्याय अथवा बुराई पर अच्छाई की विजय हुई थी बल्कि यह बुराई में भी अच्छाई ढूँढ़ने का दिन होता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;&lt;a href="http://www.kkyadav.blogspot.com/"&gt;कृष्ण कुमार यादव&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;आप सभी को विजयदशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें !!&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-6992420761938568755?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/6992420761938568755/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=6992420761938568755' title='12 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6992420761938568755'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6992420761938568755'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/10/blog-post.html' title='अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है दशहरा'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TLQJefLVJqI/AAAAAAAAAv8/1mDzrTv-TNY/s72-c/Burning+Ravan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5671758106492892786</id><published>2011-09-29T10:17:00.000+05:30</published><updated>2011-09-29T10:17:57.355+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नवरात्र-दशहरा'/><title type='text'>जगप्रसिद्ध है बंगाल की दुर्गा पूजा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TLQAmTP_h4I/AAAAAAAAAvc/P14ZtBoty0w/s1600/15-durga-puja200.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 200px; FLOAT: left; HEIGHT: 150px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5527043300692821890" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TLQAmTP_h4I/AAAAAAAAAvc/P14ZtBoty0w/s400/15-durga-puja200.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;नवरात्र आरंभ हो चुका है. देवी-माँ की मूर्तियाँ सजने लगी हैं. चारों तरफ भक्ति-भाव का बोलबाला है. दशहरे की उमंग अभी से दिखाई देने लगी है. नवरात्र और दशहरे की बात हो और बंगाल की दुर्गा-पूजा की चर्चा न हो तो अधूरा ही लगता है। वस्तुतः दुर्गापूजा के बिना एक बंगाली के लिए जीवन की कल्पना भी व्यर्थ है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बंगाल में दशहरे का मतलब रावण दहन नहीं बल्कि दुर्गा पूजा होती है, जिसमें माँ दुर्गा को महिषासुर का वध करते हुए दिखाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार नौवीं सदी में बंगाल में जन्मे बालक व दीपक नामक स्मृतिकारों ने शक्ति उपासना की इस परिपाटी की शुरूआत की। तत्पश्चात दशप्रहारधारिणी के रूप में शक्ति उपासना के शास्त्रीय पृष्ठाधार को रघुनंदन भट्टाचार्य नामक विद्वान ने संपुष्ट किया। बंगाल में प्रथम सार्वजनिक दुर्गा पूजा कुल्लक भट्ट नामक धर्मगुरू के निर्देशन में ताहिरपुर के एक जमींदार नारायण ने की पर यह समारोह पूर्णतया पारिवारिक था। बंगाल के पाल और सेनवशियों ने दूर्गा-पूजा को काफी बढ़ावा दिया। प्लासी के युद्ध (1757) में विजय पश्चात लार्ड क्लाइव ने ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु अपने हिमायती राजा नव कृष्णदेव की सलाह पर कलकत्ते के शोभा बाजार की विशाल पुरातन बाड़ी में भव्य स्तर पर दुर्गा-पूजा की। इसमें कृष्णानगर के महान चित्रकारों और मूर्तिकारों द्वारा निर्मित भव्य मूर्तियाँ बनावाई गईं एवं वर्मा और श्रीलंका से नृत्यांगनाएं बुलवाई गईं। लार्ड क्लाइव ने हाथी पर बैठकर इस समारोह का आनंद लिया। राजा नवकृष्ण देव द्वारा की गई दुर्गा-पूजा की भव्यता से लोग काफी प्रभावित हुए व अन्य राजाओं, सामंतों व जमींदारांे ने भी इसी शैली में पूजा आरम्भ की। सन् 1790 मंे प्रथम बार राजाओं, सामंतो व जमींदारांे से परे सामान्य जन रूप में बारह ब्राह्मणांे ने नदिया जनपद के गुप्ती पाढ़ा नामक स्थान पर सामूहिक रूप से दुर्गा-पूजा का आयोजन किया, तब से यह धीरे-धीरे सामान्य जनजीवन में भी लोकप्रिय होता गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बंगाल के साथ-साथ बनारस की दुर्गा पूजा भी जग प्रसिद्ध है। इसका उद्भव प्लासी के युद्ध (1757) पश्चात बंगाल छोड़कर बनारस में बसे पुलिस अधिकारी गोविंदराम मित्र (डी0एस0 पी0) के पौत्र आनंद मोहन ने 1773 में बनारस के बंगाल ड्यौड़ी मंे किया। प्रारम्भ में यह पूजा पारिवारिक थी पर बाद मे इसने जन-समान्य में व्यापक स्थान पा लिया। आज दुर्गा पूजा दुनिया के कई हिस्सों में आयोजित की जाती है। लंदन में प्रथम दुर्गा पूजा उत्सव 1963 में मना, जो अब एक बड़े समारोह में तब्दील हो चुका है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://kkyadav.blogspot.com/"&gt;-कृष्ण कुमार यादव &lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5671758106492892786?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5671758106492892786/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5671758106492892786' title='8 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5671758106492892786'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5671758106492892786'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/09/blog-post_29.html' title='जगप्रसिद्ध है बंगाल की दुर्गा पूजा'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TLQAmTP_h4I/AAAAAAAAAvc/P14ZtBoty0w/s72-c/15-durga-puja200.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-3060263429357397868</id><published>2011-09-22T16:19:00.000+05:30</published><updated>2011-09-22T16:19:00.059+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कविता'/><title type='text'>महँगाई का हाल</title><content type='html'>मँहगी सब्जी, मँहगा आटा&lt;br /&gt;भूल गए सब दाल&lt;br /&gt;मँहगाई ने कर दिया&lt;br /&gt;सबका हाल बेहाल।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दूध सस्ता, पानी मँहगा&lt;br /&gt;पेप्सी-कोला का धमाल&lt;br /&gt;रोटी छोड़ ब्रेड खाओ&lt;br /&gt;बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कमाल।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नेता-अफसर मौज उड़ाएं&lt;br /&gt;चलें बगुले की चाल&lt;br /&gt;गरीबी व भुखमरी बढ़े&lt;br /&gt;ऐसा मँहगाई का जाल ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संसद में होती खूब बहस&lt;br /&gt;सेठ होते कमाकर लाल&lt;br /&gt;नेता लोग खूब चिल्लायें&lt;br /&gt;विपक्ष बनाए चुनावी ढाल।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जनता रोज पिस रही&lt;br /&gt;धंस गए सबके गाल&lt;br /&gt;मँहगाई का ऐसा कुचक्र&lt;br /&gt;हो रहे सब हलाल।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/"&gt;- आकांक्षा यादव &lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-3060263429357397868?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/3060263429357397868/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=3060263429357397868' title='13 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3060263429357397868'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3060263429357397868'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/09/blog-post_22.html' title='महँगाई का हाल'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><thr:total>13</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-190216654342066645</id><published>2011-09-05T12:55:00.000+05:30</published><updated>2011-09-05T12:56:10.416+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='शिक्षक दिवस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपनी बात'/><title type='text'>शिक्षकों की भूमिका व कर्तव्यों पर पुनर्विचार</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-kFsKYBtkngo/TmR5ChsOi5I/AAAAAAAABAk/Aaw_O_Uh0Yw/s1600/teachers.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 400px; FLOAT: left; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5648772916940016530" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-kFsKYBtkngo/TmR5ChsOi5I/AAAAAAAABAk/Aaw_O_Uh0Yw/s400/teachers.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; भारतीय संस्कृति का एक सूत्र वाक्य है-‘तमसो मा ज्योतिर्गमय।‘ अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने की इस प्रक्रिया में शिक्षा का बहुत बड़ा योगदान है। भारतीय परम्परा में शिक्षा को शरीर, मन और आत्मा के विकास द्वारा मुक्ति का साधन माना गया है। शिक्षा मानव को उस सोपान पर ले जाती है जहाँ वह अपने समग्र व्यक्तित्व का विकास कर सकता है। भारत में गुरू-शिष्य की लम्बी परंपरा रहीे है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;गुरुब्रह्म गुरूर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरः।&lt;br /&gt;गुरूः साक्षात परब्रह्म, तस्मैं श्री गुरूवे नमः।।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्राचीनकाल में राजकुमार भी गुरूकुल में ही जाकर शिक्षा ग्रहण करते थे और विद्यार्जन के साथ-साथ गुरू की सेवा भी करते थे। राम-विश्वामित्र, कृष्ण-संदीपनी, अर्जुन-द्रोणाचार्य से लेकर चंद्रगुप्त मौर्य-चाणक्य एवं विवेकानंद-रामकृष्ण परमहंस तक शिष्य-गुरू की एक आदर्श एवं दीर्घ परम्परा रही है। उस एकलव्य को भला कौन भूल सकता है, जिसने द्रोणाचार्य की मूर्ति स्थापित कर धनुर्विद्या सीखी और गुरूदक्षिणा के रूप में द्रोणाचार्य ने उससे उसके हाथ का अंगूठा ही माँग लिया था। श्री राम और लक्ष्मण ने महर्षि विश्वामित्र, तो श्री कृष्ण ने गुरू संदीपनी के आश्रम में रहकर शिक्षा ग्रहण की और उसी की बदौलत समाज को आतातायियों से मुक्त भी किया। गुरूवर द्रोणाचार्य ने पांडव-पुत्रों विशेषकर अर्जुन को जो शिक्षा दी, उसी की बदौलत महाभारत में पांडव विजयी हुए। गुरूवर द्रोणाचार्य स्वयं कौरवों की तरफ से लड़े पर कौरवों को विजय नहीं दिला सके क्योंकि उन्होंने जो शिक्षा पांडवों को दी थी, वह उन पर भारी साबित हुई। गुरू के आश्रम से आरम्भ हुई कृष्ण-सुदामा की मित्रता उन मूल्यों की ही देन थी, जिसने उन्हें अमीरी-गरीबी की खाई मिटाकर एक ऐसे धरातल पर खड़ा किया जिसकी नजीर आज भी दी जाती है। विश्व-विजेता सिकंदर के गुरू अरस्तू को भला कौन भुला सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने तो अपने पुत्र की शिक्षिका को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि उसकी शिक्षा में उनका पद आड़े नहीं आना चाहिए। उन्होंने शिक्षिका से अपने पुत्र को सभी शिक्षाएं देने का अनुरोध किया जो उसे एक अच्छा व्यक्ति बनाने में सहायता करती हों।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वस्तुतः शिक्षक उस प्रकाश-स्तम्भ की भांति है, जो न सिर्फ लोगों को शिक्षा देता है बल्कि समाज में चरित्र और मूल्यों की भी स्थापना करता है। शिक्षा का रूप चाहे जो भी हो पर उसके सम्यक अनुपालन के लिए शिक्षक का होना निहायत जरूरी है। शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं बल्कि चरित्र विकास, अनुशासन, संयम और तमाम सद्गुणों के साथ अपने को अप-टू-डेट रखने का माध्यम भी है। कहते हैं बच्चे की प्रथम शिक्षक माँ होती है, पर औपचारिक शिक्षा उसे शिक्षक के माध्यम से ही मिलती है। प्रदत शिक्षा का स्तर ही व्यक्ति को समाज में तदनुरूप स्थान और सम्मान दिलाता है। शिक्षा सिर्फ अक्षर-ज्ञान या डिग्रियों का पर्याय नहीं हो सकती बल्कि एक अच्छा शिक्षक अपने विद्यार्थियों का दिलो-दिमाग भी चुस्त-दुरुस्त बनाकर उसे वृहद आयाम देता है। शिक्षक का उद्देश्य पूरे समाज को शिक्षित करना है। शिक्षा एकांगी नहीं होती बल्कि व्यापक आयामों को समेटे होती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आजादी के बाद इस गुरू-शिष्य की दीर्घ परम्परा में तमाम परिवर्तन आये। 1962 में जब डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के राष्ट्रपति के रूप में पदासीन हुए तो उनके चाहने वालों ने उनके जन्मदिन को “शिक्षक दिवस” के रूप में मनाने की इच्छा जाहिर की। डा0 राधाकृष्णन ने कहा कि- ”मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने के निश्चय से मैं अपने को काफी गौरवान्वित महसूस करूँगा।” तब से लेकर हर 5 सितम्बर को “शिक्षक दिवस” के रूप में मनाया जाता है। डा0 राधाकृष्णन ने शिक्षा को एक मिशन माना था और उनके मत में शिक्षक होने का हकदार वही है, जो लोगों से अधिक बुद्धिमान व विनम्र हों। अच्छे अध्यापन के साथ-साथ शिक्षक का अपने छात्रों से व्यवहार व स्नेह उसे योग्य शिक्षक बनाता हैै। मात्र शिक्षक होने से कोई योग्य नहीं हो जाता बल्कि यह गुण उसे अर्जित करना होता है। डा0 राधाकृष्णन शिक्षा को जानकारी मात्र नहीं मानते बल्कि इसका उद्देश्य एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है। शिक्षा के व्यवसायीकरण के विरोधी डा0 राधाकृष्णन विद्यालयों को ज्ञान के शोध केंद्र, संस्कृति के तीर्थ एवं स्वतंत्रता के संवाहक मानते थे। यह डा0 राधाकृष्णन का बड़प्पन ही था कि राष्ट्रपति बनने के बाद भी वे वेतन के मात्र चौथाई हिस्से से जीवनयापन कर समाज को राह दिखाते रहे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वर्तमान परिपे्रक्ष्य में देखें तो गुरू-शिष्य की परंपरा कहीं न कहीं कलंकित हो रही है। आए दिन शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के साथ एवं विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों के साथ दुव्र्यवहार की खबरें सुनने को मिलती हैं। जातिगत भेदभाव प्राइमरी स्तर के स्कूलों में आम बात है। यही नहीें तमाम शिक्षक अपनी नैतिक मर्यादायें तोड़कर छात्राओं के साथ अश्लील कार्यों में लिप्त पाये गये। आज न तो गुरू-शिष्य की परंपरा रही और न ही वे गुरू और शिष्य रहे। व्यवसायीकरण ने शिक्षा को धंधा बना दिया है। संस्कारों की बजाय धन महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में जरूरत है कि गुरू और शिष्य दोनों ही इस पवित्र संबंध की मर्यादा की रक्षा के लिए आगे आयें ताकि इस सुदीर्घ परंपरा को सांस्कारिक रूप में आगे बढ़ाया जा सके।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज शिक्षा को हर घर तक पहुँचाने के लिए तमाम सरकारी प्रयास किए जा रहे है, पर इसी के साथ शिक्षकों की मनःस्थिति के बारे में भी सोचने की जरूरत है। शिक्षकों को भी वह सम्मान मिलना चाहिए, जिसके वे हकदार हैं। शिक्षक, शिक्षा (ज्ञान) और विद्यार्थी के बीच एक सेतु का कार्य करता है और यदि यह सेतु ही कमजोर रहा तो समाज को खोखला होने में देरी नही लगेगी। देश का शायद ही ऐसा कोई प्रांत हो, जहाँ विद्यार्थियों के अनुपात में अध्यापकों की नियुक्ति हो, फिर शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरे ? अभी भी देश में छात्र शिक्षक अनुपात 32: 1 है, जबकी 324 ऐसे जिले हैं जिनमें छात्र शिक्षक अनुपात 3: 1 से कम है। देश में नौ फीसदी स्कूल ऐसे हैं जिनमें केवल एक शिक्षक हैं तो 21 फीसदी ऐसे शिक्षक हैं जिनके पास पेशेवर डिग्री तक नहीं है। मतगणना-जनगणना से लेकर अन्य तमाम कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी भी उन्हें मूल शिक्षण कार्य से विरत रखती है। ऐसे में जब शिक्षा की नींव ही कमजोर होगी, तो विद्यार्थियों का उन्नयन कैसे होगा, यह एक गंभीर समस्या है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;‘शिक्षक दिवस‘ एक अवसर प्रदान करता है जब हम समग्र रूप में शिक्षकों की भूमिका व कर्तव्यों पर पुनर्विचार कर सकें और बदलते प्रतिमानों के साथ उनकी भूमिका को और भी सशक्त रूप दे सकें।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;(शिक्षक-दिवस पर आकाशवाणी, पोर्टब्लेयर द्वारा प्रस्तुत &lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/"&gt;आकांक्षा यादव &lt;/a&gt;की वार्ता)&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-190216654342066645?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/190216654342066645/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=190216654342066645' title='11 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/190216654342066645'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/190216654342066645'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/09/blog-post_05.html' title='शिक्षकों की भूमिका व कर्तव्यों पर पुनर्विचार'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-kFsKYBtkngo/TmR5ChsOi5I/AAAAAAAABAk/Aaw_O_Uh0Yw/s72-c/teachers.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>11</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5695697209532555772</id><published>2011-09-01T08:00:00.000+05:30</published><updated>2011-09-01T08:00:00.190+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><title type='text'>महिमा अपरम्पार है भगवान गणेश की</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/SrffSlt1VxI/AAAAAAAAAPs/iLsE6KkqiU8/s1600-h/gnH_01a%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 320px; FLOAT: left; HEIGHT: 319px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5384017389999707922" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/SrffSlt1VxI/AAAAAAAAAPs/iLsE6KkqiU8/s320/gnH_01a%5B1%5D.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;भारतीय संस्कृति में भगवान गणेश को आदि देवता माना गया है.उनका पूजन किए बगैर कोई कार्य प्रारम्भ नहीं होता।गणपति विघ्नहर्ता हैं, इसलिए नौटंकी से लेकर विवाह की एवं गृह प्रवेश जैसी समस्त विधियों के प्रारंभ में गणेश पूजन किया जाता है।&lt;br /&gt;पत्र अथवा अन्य कुछ लिखते समय सर्वप्रथम॥ श्री गणेशाय नमः॥, ॥श्री सरस्वत्यै नमः॥, ॥श्री गुरुभ्यो नमः॥ ऐसा लिखने की प्राचीन पद्धति थी। ऐसा ही क्रम क्यों बना? किसी भी विषय का ज्ञान प्रथम बुद्धि द्वारा ही होता है व गणपति बुद्धि दाता हैं, इसलिए प्रथम '॥ श्री गणेशाय नमः ॥' लिखना चाहिए। विघ्न हरण करने वाले देवता के रूप में पूज्य गणेश जी सभी बाधाओं को दूर करने तथा मनोकामना को पूरा करने वाले देवता हैं। श्री गणेश निष्कपटता, विवेकशीलता, अबोधिता एवं निष्कलंकता प्रदान करने वाले देवता हैं। उनके ध्यानमात्र से व्यक्ति उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर होता है। जहाँ तक सामान्यजन का सवाल है, वह आज भी चरम आस्तिक भाव से 'ॐ गणानां त्वां गणपति गुं हवामहे' का पाठ करके सुरक्षा-समृद्धि का एक भाव पा लेता है, जो किसी भी देव की आराधना का शायद मूल कारण है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गणपति विवेकशीलता के परिचायक है। गणपति का वर्ण लाल है; उनकी पूजा में लाल वस्त्र, लाल फूल व रक्तचंदन का प्रयोग किया जाता है। हाथी के कान हैं सूपा जैसे सूपा का धर्म है 'सार-सार को गहि लिए और थोथा देही उड़ाय' सूपा सिर्फ अनाज रखता है। हमें कान का कच्चा नहीं सच्चा होना चाहिए। कान से सुनें सभी की, लेकिन उतारें अंतर में सत्य को। आँखें सूक्ष्म हैं जो जीवन में सूक्ष्म दृष्टि रखने की प्रेरणा देती हैं। नाक बड़ा यानि दुर्गन्ध (विपदा) को दूर से ही पहचान सकें। गणेशजी के दो दाँत हैं एक अखण्ड और दूसरा खण्डित। अखण्ड दांत श्रद्धा का प्रतीक है यानि श्रद्धा हमेशा बनाए रखना चाहिए। खण्डित दाँत है बुद्धि का प्रतीक इसका तात्पर्य एक बार बुद्धि भ्रमित हो, लेकिन श्रद्धा न डगमगाए। गणेश जी के आयुध औश्र प्रतीकों से अंकुश हैं, वह जो आनंद व विद्या की प्राप्ति में बाधक शक्तियों का नाश करता है। कमर से लिपटा नाग अर्थात विश्व कुंडलिनी और लिपटे हुए नाग का फन अर्थात जागृत कुंडलिनी. मूषक अर्थात्‌ रजोगुण, गणपति के नियंत्रण में है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मोदक गणेश जो को बहुत प्रिय है, पर सांसारिक दुनिया से परे इसका भी आध्यात्मिक भाव है.'मोद' यानी आनंद व 'क' का अर्थ है छोटा-सा भाग। अतः मोदक यानी आनंद का छोटा-सा भाग। मोदक का आकार नारियल समान, यानी 'ख' नामक ब्रह्मरंध्र के खोल जैसा होता है। कुंडलिनी के 'ख' तक पहुँचने पर आनंद की अनुभूति होती है। हाथ में रखे मोदक का अर्थ है कि उस हाथ में आनंद प्रदान करने की शक्ति है। 'मोदक मान का प्रतीक है, इसलिए उसे ज्ञानमोदक भी कहते हैं। आरंभ में लगता है कि ज्ञान थोड़ा सा ही है (मोदक का ऊपरी भाग इसका प्रतीक है।), परंतु अभ्यास आरंभ करने पर समझ आता है कि ज्ञान अथाह है। (मोदक का निचला भाग इसका प्रतीक है।) जैसे मोदक मीठा होता। वैसे ही ज्ञान से प्राप्त आनंद भी।'&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आजादी की लड़ाई के दौर में भी भगवान गणेश से प्राप्त अभय के वरदान से सज्जित होने की भावना ने समूचे स्वतंत्रता आंदोलन को एक नया आयाम दे दिया था। बाल गंगाधर तिलक ने स्वतंत्रता को राजनीतिक संदर्भों से उबारकर देश की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक-चेतना से जोड़ा था। सौ साल से भी अधिक काल से चली आ रही यह सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक चेतना की त्रिवेणी हर साल गणेशोत्सव के अवसर पर नए-नए रूपों में सामने आती है। लोकमान्य तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव की जो परंपरा शुरू की थी वह फल-फूल रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गणेशोत्सव धर्म, जाति, वर्ग और भाषा से ऊपर उठकर सबका उत्सव बन गया है । गणपति बप्पा मोरया का स्वर जब गूँजता है तो उसमें हिन्दुओं, मुसलमानों, सिखों, ईसाइयों की सम्मिलित आस्था का वेग होता है । किसी गोविंदा और किसी सलमान के घर में गणपति की एक जैसी आरती का होना कुल मिलाकर उस एकात्मकता का ही परिचय देता है जो हमारे देश की एक विशिष्ट पहचान है। साल-दर-साल गणेशोत्सव पर इस विशिष्टता का रेखांकित होना अपने आप में एक आश्वस्ति है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गणेशोत्सव के अवसर पर एक और महत्वपूर्ण तथ्य भी रेखांकित होना चाहिए- गणेश अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजगता एवं सक्रियता के देवता भी हैं । इसलिए जब हम गणपति की पूजा करते हैं तो इसका अर्थ स्वयं को उस चेतना से जोड़ना भी है जो जीवन को परिभाषित भी करती है और उसे अर्थवत्ता भी देती है। यह चेतना अपने अधिकारों की रक्षा के प्रति जागरूकता देती है और अपने कर्तव्यों को पूरा करने की प्रेरणा भी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5695697209532555772?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5695697209532555772/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5695697209532555772' title='14 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5695697209532555772'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5695697209532555772'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/09/blog-post.html' title='महिमा अपरम्पार है भगवान गणेश की'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/SrffSlt1VxI/AAAAAAAAAPs/iLsE6KkqiU8/s72-c/gnH_01a%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>14</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-4685155196842204598</id><published>2011-08-31T13:06:00.000+05:30</published><updated>2011-08-31T13:08:42.490+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लेख'/><title type='text'>बार-बार लौटकर आने वाली खुशी है ईद</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/SrepJoCf4vI/AAAAAAAAAPU/NLvHxggsyeQ/s1600-h/eid_21_15%5B1%5D.gif"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 320px; FLOAT: left; HEIGHT: 188px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5383957862376530674" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/SrepJoCf4vI/AAAAAAAAAPU/NLvHxggsyeQ/s320/eid_21_15%5B1%5D.gif" /&gt;&lt;/a&gt;यूं तो रमजान का पूरा महीना रहमत, मगफिरत और नर्क से छुटकारे का है, लेकिन जो लोग शराबी हैं, माता-पिता का कहना नहीं मानते हैं, आपस में लड़ते हैं और दिल में कीना रखते हैं, उनकी इस महीने में भी मगफिरत व बख्शिस नहीं होती है। हर्ष के मैदान में रोजेदारों को पुकार कर कहा जाता है कि उठो और जन्नत के आठ दरवाजों में से एक खास दरवाजे [रैय्यान] से जन्नत में दाखिल हो जाओ। यह वह दरवाजा है जिसमें मगफिरत व बख्शिस नहीं दिए जाने वाले प्रवेश नहीं कर सकते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रमजान वो महीना है जिसमें इंसानों की सारी मनुष्यता के लिए हिदायत बनाकर रौशनी हासिल करने के लिए कुरान नाजील फरमाया गया है। कुरान वो किताब है जिसके द्वारा इंसान सच और झूठ में, न्याय और अन्याय में, हक व बातिल में, कुर्फ में इमान में, इंसानियत और शैतानियत में फर्क करना सीखते हैं। रमजान के अंदर अल्लाह की तरफ से तमाम मुसलमानों के ऊपर रोजा फर्ज किया गया है। कुराण कहता है-ऐ इमान वालों, तुम पर जिस तरह रोजा फर्ज किया गया है ठीक उसी तरह उन्मतों पर भी रोजा फरमाया गया है ताकि तुम परहेजगार बन सको। रमजान का सबसे अहम अमल रोजा है। सूर्योदय के पूर्व से सूर्यास्त होने तक अपने बनाने वाले अल्लाह की एक इच्छा के अनुसार जायज खाने-पीने से और दिल की ख्वाइश से बच-बचाकर इंसान यह अभ्यास करता है कि वे पूरी जिंदगी में अपने अल्लाह के कहने के मुताबिक ही चले।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रमजान में रोजे के साथ-साथ रात में मुसलमान रोजाना तराबीह की बीस रकत नमाज में पूरा कुरान सुनते हैं। ये दुनिया भर की हर मज्जिद में अमल सुन्नत जानकर अदा की जाती है। इसकी फजीलत हदीस में आई है कि जो ईमान व ऐहतसाब के साथ ये नमाज तरबीह की अदा करेगा उसके पिछले तमाम गुनाहों को माफ कर दिया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आमतौर पर आम मुसलमान ईद की पूर्व रात को चांद की रात के नाम से जानते हैं लेकिन कुरान में इस रात की बड़ी अहमियत होती है। हदीस के अनुसार इसका अर्थ है कि फरिश्ते आसमान पर इस रात को बातें करते हैं कि लैलतुल जाइजा [इनाम की रात] यानी पूरे रमजान जो अल्लाह के बंदों ने दिनों में रोजा रखकर और रातों में तराबीह पढ़कर अपने अल्लाह का हुकूम पूरा किया है, आज की रात उन्हें इनाम और बदले में अल्लाहताला उनकी बख्शिस व मगफिरत फरमाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ईद अरबी शब्द है जिसका अर्थ है कि बार-बार लौटकर आने वाली खुशी। ईद में दो रकत नमाज वाजिब शुक्राने के तौर पर तमाम मुसलमान अदा करते हैं। वैसे मुसलमान से अल्लाहताला खुश हो जाते हैं और रमजान के दौरान अच्छी तरह नमाज अदा करने वाले रोजदार को अल्लाहताला से रजा व खुशी हासिल हो जाती है। इसी शुक्राने में ईद की नमाज अदा की जाती है। ईद वाले दिन सदक-ए-फितर हर साहिबे हैसियत मुसलमानों पर वाजिब है। अपने तमाम घर वालों की तरफ से पौने दो किलो गेहूं या उसकी कीमत के बराबर रकम गरीब, मिस्कीन, नादार में तकसीत कर दें ताकि हर मुसलमान खुशी और मुसर्रत के साथ ईद की खुशियों में अपना हिस्सा भी हासिल कर सकें। ईद के दिन आसमान में फरिश्ते आपस में बातें करते है कि अल्लाह ताला ने सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की उम्मत के साथ क्या मामला किया? उन्हें जबाव मिलता है, मेहनत करने वाले को उनकी पूरी-पूरी मजदूरी दे दी जाती है जो अल्लाह की रजा व खुशनुदी की शक्ल में उस दिन लोगों को अता की जाती है। &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पूरे महीने के रोजे के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करने और अपनी अदा अजरत अल्लाहताला से लेने के लिए ईद की नमाज अदा की जाती है क्योंकि अल्लाह ईद के दिन सारे रोजदारों की मगफिरत फरमाकर निजात का परवाना अताए फरमाता है। ईद की नमाज हमारे रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की सुन्नत है और हमसब पर वाजिब है। इस दिन एक दूसरे से मुहब्बत व प्यार एवं कौमी मकजहती और खुशी का इजहार किया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;[प्रस्तुति-ब्रजेश नंदन माधुर्य]&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-4685155196842204598?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/4685155196842204598/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=4685155196842204598' title='9 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/4685155196842204598'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/4685155196842204598'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/08/blog-post_31.html' title='बार-बार लौटकर आने वाली खुशी है ईद'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/SrepJoCf4vI/AAAAAAAAAPU/NLvHxggsyeQ/s72-c/eid_21_15%5B1%5D.gif' height='72' width='72'/><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-4245416543751601746</id><published>2011-08-22T08:00:00.000+05:30</published><updated>2011-08-22T08:00:01.682+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><title type='text'>श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/THzN3BpyxoI/AAAAAAAAAqA/aO8PbnuNiLk/s1600/bi_janmashtami_09_july_27_162505.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5511506389214873218" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 214px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/THzN3BpyxoI/AAAAAAAAAqA/aO8PbnuNiLk/s320/bi_janmashtami_09_july_27_162505.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;विगत पांच हजार वर्षों में श्रीकृष्ण जैसा अद्भुत व्यक्तित्व भारत क्या, विश्व मंच पर नहीं हुआ और न होने की संभावना है। यह सौभाग्य व पुण्य भारत भूमि को ही मिला है कि यहाँ एक से बढकर एक दिव्य पुरूषों ने जन्म लिया। इनमें श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व अनूठा, अपूर्व और अनुपमेय है। हजारों वर्ष बीत जाने पर भी भारत वर्ष के कोने-कोने में श्रीकृष्ण का पावन जन्मदिन अपार श्रद्धा, उल्लास व प्रेम से मनाया जाता है। श्रीकृष्ण अतीत के होते हुए भी भविष्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनका व्यक्तित्व इतना बहुआयामी है कि उन्हें पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है। मुमकिन है कि भविष्य में उन्हें समझा जा सकेगा। हमारे अध्यात्म के विराट आकाश में श्रीकृष्ण ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों व ऊंचाइयों पर जाकर भी गंभीर या उदास नहीं हैं। श्रीकृष्ण उस ज्योतिर्मयी लपट का नाम है जिसमें नृत्य है, गीत है, प्रीति है, समर्पण है, हास्य है, रास है, और है जरूरत पड़ने पर युद्ध का महास्वीकार। धर्म व सत्य के रक्षार्थ महायुद्ध का उद्घोष। एक हाथ में वेणु और दूसरे में सुदर्शन चक्र लेकर महाइतिहास रचने वाला दूसरा व्यक्तित्व नहीं हुआ संसार में।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कृष्ण ने कभी कोई निषेध नहीं किया। उन्होंने पूरे जीवन को समग्रता के साथ स्वीकारा है। प्रेम भी किया तो पूरी शिद्दत के साथ, मैत्री की तो सौ प्रतिशत निष्ठा के साथ और युद्ध के मैदान में उतरे तो पूरी स्वीकृति के साथ। हाथ में हथियार न लेकर भी विजयश्री प्राप्त की। भले ही वो साइड में रहे। सारथी की जिम्मेदारी संभाली पर कौन नहीं जानता कि अर्जुन के पल-पल के प्रेरणा स्त्रोत और दिशा निर्देशक कृष्ण थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अल्बर्ट श्वाइत्जर ने भारतीय धर्म की आलोचना में एक बात बड़ी मूल्यवान कही। वह यह कि भारत का धर्म जीवन निषेधक है। यह बात एकदम सत्य है, यदि कृष्ण का नाम भुला दिया जाए तो ओशो के शब्दों में कृष्ण अकेले दुख के महासागर में नाचते हुए एक छोटे से द्वीप हैं। यानी कि उदासी, दमन, नकारात्मकता और निंदा के मरूस्थल में नाचते-गाते मरू-उद्यान हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुछ लोग कहते हैं कि कृष्ण केवल रास रचैया भर थे। इन लोगों ने रास का अर्थ व मर्म ही नहीं समझा है। कृष्ण का गोपियों के साथ नाचना साधारण नृत्य नहीं है। संपूर्ण ब्राह्मांड में जो विराट नृत्य चल रहा है प्रकृति और पुरूष (परमात्मा) का, श्रीकृष्ण का गोपियों के साथ नृत्य उस विराट नृत्य की एक झलक मात्र है। उस रास का कोई सामान्य या सेक्सुअल मीनिंग नहीं है। कृष्ण पुरूष तत्व है और गोपिकाएं प्रकृति। प्रकृति और पुरूष का महानृत्य है यह। विराट प्रकृति और विराट पुरूष का महारस है यह, तभी तो हर गोपी को महसूस होता है कि कृष्ण उसी के साथ नृत्यलीन हैं। यह कोई मनोरंजन नहीं, पारमार्थिक है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कृष्ण एक महासागर हैं। वे कोई एक नदी या लहर नहीं, जिसे पकड़ा जा सके। कोई उन्हें बाल रूप से मानता है, कोई सखा रूप में तो कोई आराध्य के रूप में। किसी को उनका मोर मुकुट, पीतांबर भूषा, कदंब वृक्ष तले, यमुना के तट पर भुवनमोहिनी वंशी बजाने वाला, प्राण वल्लभा राधा के संग साथ वाला प्रेम रूप प्रिय है, तो किसी को उनका महाभारत का महापराक्रमी रणनीति विशारद योद्धा का रूप प्रिय है। एक ओर हैं-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;वंशीविभूषित करान्नवनीरदाभात्,&lt;br /&gt;पीताम्बरादरूण बिम्बफला धरोष्ठात्,&lt;br /&gt;पूर्णेंदु संुदर मुखादरविंदनेत्रात्,&lt;br /&gt;कृष्णात्परं किमपि तत्वमहं न जाने।।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;तो दूसरी ओर-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वस्तुतः श्रीकृष्ण पूर्ण पुरूष हैं। पूर्णावतार सोलह कलाओं से युक्त उनको योगयोगेश्वर कहा जाता है और हरि हजार नाम वाला भी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत है। राजनेताओं को उनकी विलक्षण राजनीति समझने की दरकार है और धर्म के प्रणेताओं, उपदेशकों को यह समझने की आवश्यकता है कि श्रीकृष्ण ने जीवन से भागने या पलायन करने या निषेध का संदेश कभी नहीं दिया। वे महान योगी थे तो ऋषि शिरोमणि भी। उन्होंने वासना को नहीं, जीवन रस को महत्व दिया। वे मीरा के गोपाल हैं तो राधा के प्राण बल्लभ और द्रोपदी के उदात्त सखा मित्र। वे सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान और सर्व का कल्याण व शुभ चाहने वाले हैं। अति रूपवान, असीम यशस्वी और सत् असत् के ज्ञाता हैं। जिसने भी श्रीकृष्ण को प्रेम किया या उनकी भक्ति में लीन हो गया, उसका जन्म सफल हो गया। धर्म, शौय और प्रेम के दैदीप्यमान चंद्रमा श्रीकृष्ण को कोटि कोटि नमन।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;यतो सत्यं यतो धर्मों यतो हीरार्जव यतः !&lt;br /&gt;ततो भवति गोविंदो यतः श्रीकृष्णस्ततो जयः !!&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#993300;"&gt;कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनायें और बधाइयाँ....&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सत्या सक्सेना&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-4245416543751601746?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/4245416543751601746/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=4245416543751601746' title='13 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/4245416543751601746'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/4245416543751601746'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/08/blog-post_22.html' title='श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/THzN3BpyxoI/AAAAAAAAAqA/aO8PbnuNiLk/s72-c/bi_janmashtami_09_july_27_162505.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>13</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-7614994899660026772</id><published>2011-08-15T07:00:00.001+05:30</published><updated>2011-08-15T07:00:01.857+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महत्वपूर्ण दिवस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्वतंत्रता आन्दोलन'/><title type='text'>क्या है आजादी का मतलब ??</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TGa1cSpoVVI/AAAAAAAAAnY/0Q0bp0zOK9g/s1600/863521.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 250px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5505287092154422610" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TGa1cSpoVVI/AAAAAAAAAnY/0Q0bp0zOK9g/s400/863521.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt; आज&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;स्वतंत्रता दिवस है. पर क्या वाकई हम इसका अर्थ समझते हैं या यह छलावा मात्र है. सवाल दृष्टिकोण का है. इसे समझने के लिए एक वाकये को उद्धृत करना चाहूँगीं-&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद प्रथम प्रधानमंत्री पं0 जवाहर लाल नेहरू इलाहाबाद में कुम्भ मेले में घूम रहे थे। उनके चारों तरफ लोग जय-जयकारे लगाते चल रहे थे। गाँधी जी के राजनैतिक उत्तराधिकारी एवं विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र के मुखिया को देखने हेतु भीड़ उमड़ पड़ी थी। अचानक एक बूढ़ी औरत भीड़ को तेजी से चीरती हुयी नेहरू के समक्ष आ खड़ी हुयी-’’नेहरू! तू कहता है देश आजाद हो गया है, क्योंकि तू बड़ी-बड़ी गाड़ियों के काफिले में चलने लगा है। पर मैं कैसे मानूं कि देश आजाद हो गया है? मेरा बेटा अंग्रेजों के समय में भी बेरोजगार था और आज भी है, फिर आजादी का फायदा क्या? मैं कैसे मानूं कि आजादी के बाद हमारा शासन स्थापित हो गया हैं।‘‘ नेहरू अपने चिरपरिचित अंदाज में मुस्कुराये और बोले-’’ माता! आज तुम अपने देश के मुखिया को बीच रास्ते में रोककर और ’तू‘ कहकर बुला रही हो, क्या यह इस बात का परिचायक नहीं है कि देश आजाद हो गया है एवं जनता का शासन स्थापित हो गया है।‘‘ इतना कहकर नेहरू जी अपनी गाड़ी में बैठे और आजादी के पहरूओं का काफिला उस बूढ़ी औरत के शरीर पर धूल उड़ाता चला गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आजादी की यही विडंबना है कि हम नेहरू अर्थात आजादी व लोकतंत्र के पहरूए एवं बूढ़ी औरत अर्थात जनता दोनों में से किसी को भी गलत नहीं कह सकते। दोनों ही अपनी जगहों पर सही हैं, अन्तर मात्र दृष्टिकोण का है। गरीब व भूखे व्यक्ति हेतु आजादी और लोकतंत्र का वजूद रोटी के एक टुकड़े में छुपा हुआ है तो अमीर व्यक्ति हेतु आजादी और लोकतंत्र का वजूद अपनी शानो-शौकत, चुनावों में अपनी सीट सुनिश्चित करने और अंततः मंत्री या किसी अन्य प्रतिष्ठित संस्था की चेयरमैनशिप पाने में है। यह एक सच्चायी है कि दोनों ही अपनी वजूद को पाने हेतु कुछ भी कर सकते हैं। भूखा और बेरोजगार व्यक्ति रोटी न पाने पर चोरी की राह पकड़ सकता है या समाज के दुश्मनों की सोहबत में आकर आतंकवादी भी बन सकता है। इसी प्रकार अमीर व्यक्ति धन-बल और भुजबल का प्रयोग करके चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित कर सकता है। यह दोनों ही लोकतान्त्रिक आजादी के दो विपरीत लेकिन कटु सत्य हैं। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;परन्तु इन दोनों कटु सत्यों के बीच आजादी कहाँ है, संभवतः यह आज भी एक अनुत्तरित प्रश्न है ?...फ़िलहाल &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !!&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-7614994899660026772?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/7614994899660026772/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=7614994899660026772' title='15 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/7614994899660026772'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/7614994899660026772'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/08/blog-post_15.html' title='क्या है आजादी का मतलब ??'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TGa1cSpoVVI/AAAAAAAAAnY/0Q0bp0zOK9g/s72-c/863521.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>15</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-244475997709780353</id><published>2011-08-13T08:00:00.001+05:30</published><updated>2011-08-13T12:02:45.427+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='व्यक्तित्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नारी-सशक्तिकरण'/><title type='text'>वृक्षों को रक्षा-सूत्र बाँधकर रक्षाबंधन मनाएं...</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_YnRqX5gYkC8/THE12-raxzI/AAAAAAAAAYM/bdXFxqnJ33s/s1600/rakshabandhan_rakhi_scraps15.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 400px; FLOAT: left; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5508243037905143602" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_YnRqX5gYkC8/THE12-raxzI/AAAAAAAAAYM/bdXFxqnJ33s/s400/rakshabandhan_rakhi_scraps15.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;आज रक्षाबंधन का पर्व है. यह सिर्फ भाई -बहन से जुड़ा नहीं बल्कि मानवता की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है. हममें से तमाम लोग अपने स्तर पर मानवता को बचने हेतु पर्यावरण संरक्षण में जुटे हुए हैं। इन्हीं में से एक हैं- जीवन के समानांतर ही जल, जमीन और जंगल को देखने वाली ग्रीन गार्जियन सोसाइटी की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुनीति यादव। पिछले कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही एवं छत्तीसगढ़ में एक वन अधिकारी के0एस0 यादव की पत्नी सुनीति यादव सार्थक पहल करते हुए वृक्षों को राखी बाँधकर वृक्ष रक्षा-सूत्र कार्यक्रम का सफल संचालन कर नाम रोशन कर रही हैं। इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें ‘महाराणा उदय सिंह पर्यावरण पुरस्कार, स्त्री शक्ति पुरस्कार 2002, जी अस्तित्व अवार्ड इत्यादि पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। सुनीति यादव द्वारा वृक्ष रक्षा-सूत्र कार्यक्रम चलाये जाने के पीछे एक रोचक वाकया है। वर्ष 1992 में उनके पति जशपुर में डी0एफ0ओ0 थे। वहां प्राइवेट जमीन में पांच बहुत ही सुन्दर वृक्ष थे, जिन्हें भूस्वामी काटकर वहां दुकान बनाना चाहता था। उसने इन पेड़ों को काटने के लिए जिलाधिकारी को आवेदन कर रखा था। अपने पति द्वारा जब यह बात सुनीति यादव को पता चली तो उनके दिमाग में एक विचार कौंध गया। राखी पर्व पर कुछ महिलाओं के साथ जाकर उन्होंने उन पांच वृक्षों की विधिवत पूजा की और रक्षा सूत्र बांध दिया। देखा-देखी शाम तक आस-पास के लोगों द्वारा उन वृक्षों पर ढेर सारी राखियां बंध गई। फिर भूस्वामी को इन वृक्षों का काटने का इरादा ही छोड़ना पड़ा और गांव वाले इन पेड़ों को पांच भाई के रूप में मानने लगे। इससे उत्साहित होकर सुनीति यादव ने हर गांव में एक या दो विशिष्ट वृक्षों का चयन कराया तथा वर्ष 1993 में राखी के पर्व पर 17000 से अधिक लोगों ने 1340 वृक्षों को राखी बांधकर वनों की सुरक्षा का संकल्प लिया और इस प्रकार वृक्ष रक्षा सूत्र कार्यक्रम चल निकला। बस्तर के कोंडागांव इलाके में वृक्ष रक्षा सूत्र अभियान के तहत एक वृक्ष को नौ मीटर की राखी बांधी गई।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;याद कीजिए 70 के दशक का चिपको आन्दोलन। सुनीति का मानना है कि चिपको आन्दोलन वन विभाग की नीतियों के विरूद्ध चलाया गया था जबकि वृक्ष रक्षा सूत्र वन विभाग एवं जनता का सामूहिक अभियान है, जिसे समाज के हर वर्ग का समर्थन प्राप्त है। यह सुनीति यादव की प्रतिबद्वता ही है कि वृक्ष रक्षा सूत्र कार्यक्रम अब देश के नौ राज्यों तक फैल चुका है। सुनीति इसे और भी व्यापक आयाम देते हुए ‘‘पौध प्रसाद कार्यक्रम‘‘ से जोड़ रही हैं। इसके लिए वे देश के सभी छोटे-बड़े धार्मिक प्रतिष्ठानों से सम्पर्क कर रही हैं कि वे भक्तों को प्रसाद के रूप में पौधे बांटे, ताकि वे उन पौधों को श्रद्धा के साथ लगायें, पालें-पोसें और बड़ा करें। यही नहीं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों, वनौषधियों के बीज पैकेट भी प्रसाद के रूप में बांटे जा रहे हैं। सुनीति यादव का मानना है कि वृक्ष भगवान के ही दूसरे रूप हैं। जब वह कहती हैं कि भगवान शिव की तरह वृक्ष सारा विषमयी कार्बन डाई आक्साइड पी जाते हैं और बदले में जीवन के लिए जरूरी आक्सीजन देते हैं, तो लोग दंग रह जाते हैं। सुनीति यादव का स्पष्ट मानना है कि-‘‘ईश्वर ने हम सभी को पृथ्वी पर किसी न किसी उद्देश्य के लिए भेजा है। आइए, उसके सपनों को साकार करें। धरती पर हरियाली को सुरक्षित रखकर हम जिन्दगी को और भी खूबसूरत बनाएंगे, कच्चे धागों से हरितिमा को बचाएंगे। ताज और मीनार हमारे किस काम के, जब पृथ्वी की धड़कन ही न बच सके। कल आने वाली पीढ़ी को हम क्या सौगात दे सकेंगे? आइए, रक्षाबंधन के इस पर्व पर हम भी ढेर सारे पौधे लगाएं और लगे हुए वृक्षों को रक्षा-सूत्र बंधकर उन्हें बचाएं।‘‘&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;आप सभी को रक्षा-बंधन पर्व पर ढेरों शुभकामनायें !!&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-244475997709780353?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/244475997709780353/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=244475997709780353' title='15 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/244475997709780353'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/244475997709780353'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/08/blog-post_13.html' title='वृक्षों को रक्षा-सूत्र बाँधकर रक्षाबंधन मनाएं...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_YnRqX5gYkC8/THE12-raxzI/AAAAAAAAAYM/bdXFxqnJ33s/s72-c/rakshabandhan_rakhi_scraps15.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>15</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-2039317947841163811</id><published>2011-08-10T08:00:00.000+05:30</published><updated>2011-08-10T08:00:00.831+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जन्म-दिन'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कविता'/><title type='text'>पहला प्यार...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-iOSKBjYkJ5Y/TkEs-Q3d6TI/AAAAAAAABAU/FAMH-rrE5A4/s1600/KKyadav-Akanksha-Tajmahal.jpg.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 301px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5638837656635697458" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-iOSKBjYkJ5Y/TkEs-Q3d6TI/AAAAAAAABAU/FAMH-rrE5A4/s400/KKyadav-Akanksha-Tajmahal.jpg.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;&lt;strong&gt;आज पतिदेव &lt;/strong&gt;&lt;a href="http://www.kkyadav.blogspot.com/"&gt;&lt;strong&gt;कृष्ण कुमार &lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;strong&gt;जी का जन्म-दिवस है. जन्म-दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई और प्यार.कभी यह कविता कृष्ण जी के लिए लिखी थी, आज फिर से-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;पहली बार&lt;br /&gt;इन आँखों ने महसूस किया&lt;br /&gt;हसरत भरी निगाहों को&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसा लगा&lt;br /&gt;जैसे किसी ने देखा हो&lt;br /&gt;इस नाजुक दिल को&lt;br /&gt;प्यार भरी आँखों से&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;न जाने कितनी&lt;br /&gt;कोमल और अनकही भावनायें&lt;br /&gt;उमड़ने लगीं दिल में&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक अनछुये अहसास के&lt;br /&gt;आगोश में समाते हुए&lt;br /&gt;महसूस किया प्यार को&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कितना अनमोल था&lt;br /&gt;वह अहसास&lt;br /&gt;मेरा पहला प्यार।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TGDvihDHFZI/AAAAAAAAAmw/NmpFJ3AEE0A/s1600/birthday16[1].jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 236px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5503662120912754066" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TGDvihDHFZI/AAAAAAAAAmw/NmpFJ3AEE0A/s400/birthday16%5B1%5D.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-2039317947841163811?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/2039317947841163811/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=2039317947841163811' title='36 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2039317947841163811'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2039317947841163811'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/08/blog-post_10.html' title='पहला प्यार...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-iOSKBjYkJ5Y/TkEs-Q3d6TI/AAAAAAAABAU/FAMH-rrE5A4/s72-c/KKyadav-Akanksha-Tajmahal.jpg.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>36</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-3016369729116941811</id><published>2011-08-07T08:01:00.000+05:30</published><updated>2011-08-07T08:01:00.204+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><title type='text'>फ्रेण्डशिप-डे: ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/SnQ2lKzM43I/AAAAAAAAALk/mwHdtNlyNIk/s1600-h/painting%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 240px; FLOAT: left; HEIGHT: 236px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5364973068287271794" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/SnQ2lKzM43I/AAAAAAAAALk/mwHdtNlyNIk/s400/painting%5B1%5D.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;मित्रता किसे नहीं भाती। यह अनोखा रिश्ता ही ऐसा है जो जाति, धर्म, लिंग, हैसियत कुछ नहीं देखता, बस देखता है तो आपसी समझदारी और भावों का अटूट बन्धन। कृष्ण-सुदामा की मित्रता को कौन नहीं जानता। ऐसे ही तमाम उदाहरण हमारे सामने हैं जहाँ मित्रता ने हार जीत के अर्थ तक बदल दिये। सिकन्दर-पोरस का संवाद इसका जीवंत उदाहरण है। मित्रता या दोस्ती का दायरा इतना व्यापक है कि इसे शब्दों में बांधा नहीं जा सकता। दोस्ती वह प्यारा सा रिश्ता है जिसे हम अपने विवेक से बनाते हैं। अगर दो दोस्तों के बीच इस जिम्मेदारी को निभाने में जरा सी चूक हो जाए तो दोस्ती में दरार आने में भी ज्यादा देर नहीं लगती। सच्चा दोस्त जीवन की अमूल्य निधि होता है। दोस्ती को लेकर तमाम फिल्में भी बनी और कई गाने भी मशहूर हुए-ये तेरी मेरी यारी/ये दोस्ती हमारी/भगवान को पसन्द है/अल्लाह को है प्यारी। ऐसे ही एक अन्य गीत है-ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे/छोड़ेंगे दम मगर/तेरा साथ न छोड़ेंगे। हाल ही में रिलीज हुई एक अन्य फिल्म के गीतों पर गौर करें- आजा मैं हवाओं में बिठा के ले चलूँ/ तू ही-तू ही मेरा दोस्त है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दोस्ती की बात पर याद आया कि आज ‘फ्रेण्डशिप-डे‘ है। यद्यपि मैं इस बात से इत्तफाक नहीं रखती कि किसी संबंध को दिन विशेष के लिए बांध दिया जाय, पर उस दिन को इन्ज्वाय करने में कोई हर्ज भी नहीं दिखता। फ्रेण्डशिप कार्ड, क्यूट गिफ्ट्स और फ्रेण्डशिप बैण्ड से इस समय सारा बाजार पटा पड़ा है। हर कोई एक अदद अच्छे दोस्त की तलाश में है, जिससे वह अपने दिल की बातें शेयर कर सके। पर अच्छा दोस्त मिलना वाकई एक मुश्किल कार्य है। दोस्ती की कस्में खाना तो आसान है पर निभाना उतना ही कठिन। आजकल तो लोग दोस्ती में भी गिरगिटों की तरह रंग बदलते रहते हैं। पर किसी शायर ने भी खूब लिखा है-दुश्मनी जमकर करो/लेकिन ये गुंजाइश रहे/कि जब कभी हम दोस्त बनें/तो शर्मिन्दा न हों।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिलहाल, फ्रेण्डशिप-डे की बात करें तो यह अगस्त माह के प्रथम रविवार को सेलीबे्रट किया जाता है। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 1935 में अगस्त माह के प्रथम रविवार को दोस्तों के सम्मान में ‘राष्ट्रीय मित्रता दिवस‘ के रूप में मनाने का फैसला लिया गया था। इस अहम दिन की शुरूआत का उद्देश्य प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उपजी कटुता को खत्म कर सबके साथ मैत्रीपूर्ण भाव कायम करना था। पर कालान्तर में यह सर्वव्यापक होता चला गया। दोस्ती का दायरा समाज और राष्ट्रों के बीच ज्यादा से ज्यादा बढ़े, इसके मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र संघ ने बकायदा 1997 में लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर विन्नी और पूह को पूरी दुनिया के लिए दोस्ती के राजदूत के रूप में पेश किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस फ्रेण्डशिप-डे पर बस यही कहूंगी कि सच्चा दोस्त वही होता है जो अपने दोस्त का सही मायनों में विश्वासपात्र होता है। अगर आप सच्चे दोस्त बनना चाहते हैं तो अपने दोस्त की तमाम छोटी-बड़ी, अच्छी-बुरी बातों को उसके साथ तो शेयर करो लेकिन लोगों के सामने उसकी कमजोरी या कमी का बखान कभी न करो। नही तो आपके दोस्त का विश्वास उठ जाएगा क्योंकि दोस्ती की सबसे पहली शर्त होती है विश्वास। हाँ, एक बात और। उन पुराने दोस्तों को विश करना न भूलें जो हमारे दिलों के तो करीब हैं, पर रहते दूरियों पर हैं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-3016369729116941811?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/3016369729116941811/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=3016369729116941811' title='17 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3016369729116941811'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3016369729116941811'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/08/blog-post_07.html' title='फ्रेण्डशिप-डे: ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/SnQ2lKzM43I/AAAAAAAAALk/mwHdtNlyNIk/s72-c/painting%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>17</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-8415828638101331288</id><published>2011-08-05T18:11:00.000+05:30</published><updated>2011-08-05T18:11:33.246+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><title type='text'>जरा सोचिए...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-kKh3E4cxuGk/TjvklDI7dTI/AAAAAAAABAM/WaVghzGyY4g/s1600/corruption2.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 240px; DISPLAY: block; HEIGHT: 186px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5637350683733357874" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-kKh3E4cxuGk/TjvklDI7dTI/AAAAAAAABAM/WaVghzGyY4g/s400/corruption2.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-dbSKQcD9ves/TjvkSxAl87I/AAAAAAAABAE/B6vKBVwYDpw/s1600/netaji.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 301px; DISPLAY: block; HEIGHT: 320px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5637350369628910514" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-dbSKQcD9ves/TjvkSxAl87I/AAAAAAAABAE/B6vKBVwYDpw/s400/netaji.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;जिस तरह से राजनीति में अपराधीकरण बढ़ रहा है और भ्रष्टाचार व अपराध के चलते धडाधड राजनेता जेल में जा रहे हैं. ऐसे स्थिति में आने वाला समय और भी ज्यादा संक्रमण काल का होगा. तब शायद ऐसे ही कुछ फार्म भरे जायेंगें.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;1. उम्मीदवार का नाम:————————–&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;2.वर्तमान पता:&lt;br /&gt;(१) जेल का नाम: ————————–&lt;br /&gt;(२) सेल नंबर:—————————-&lt;br /&gt;(३) कैदी नंबर ——————————&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;3.राजनैतिक पार्टी: ____________ _________&lt;br /&gt;* आप अभी तक जिन दलों में शामिल थे उनमें से केवल पिछले पांच दलों का नाम दें&lt;br /&gt;१ ———————– २ ———————– ३ ———————– ४ ————————- ५ ————————&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;4.राष्ट्रीयता { गोल चक्कर करे )&lt;br /&gt;१ इतालियन&lt;br /&gt;२ भारतीय&lt;br /&gt;३ पाकिस्तानी&lt;br /&gt;४ बांग्लादेसी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;5 पिछली पार्टी छोड़ने के कारण (एक या अधिक को सर्कल करें )&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;१-भीतरघात&lt;br /&gt;२- निष्कासित&lt;br /&gt;३-खरीद लिये गये&lt;br /&gt;४ कोई कुर्सी नहीं मिली&lt;br /&gt;५ घोटाले के कारण&lt;br /&gt;६ मलाई की कमी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;6.चुनाव लड़ने के लिए कारण (एक या अधिक को सर्कल करें ) :&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;१-पैसा बनाने के लिए&lt;br /&gt;२- अदालत के मुकदमे से बचने के लिए&lt;br /&gt;३- सत्ता का घोर दुरुपयोग करने के लिए&lt;br /&gt;४-गरीबो को मिटाने के लिए&lt;br /&gt;५-घोटाले करने के लिए&lt;br /&gt;६ मैं नहीं जानता&lt;br /&gt;(यदि आपका उत्तर ६ है तो अपनी विवेकशीलता के लिये एक गैर मान्यता प्राप्त गैर सरकारी रिश्वत खोर मनोचिकत्सक का प्रमाणपत्र संलग्न करें)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;7 आपको कितने साल का जन सेवा का अनुभव है?&lt;br /&gt;१ – 1-2 साल&lt;br /&gt;२ – 2-6 साल&lt;br /&gt;३ – 6-15 साल&lt;br /&gt;४ – 15 + साल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;8. आप के खिलाफ लंबित किसी भी आपराधिक मामले का विवरण दें (पूरी जानकारी देने के लिये आप जितने चाहे उतने अतिरिक्त पृष्ट जोड़ सकते हैं)&lt;br /&gt;——————————————————————————————————————————-&lt;br /&gt;9.आपने कितने वर्ष जेल में बिताए हैं?&lt;br /&gt;(कृप्या प्रश्न 7 से भ्रमित न हों)&lt;br /&gt;१ – 1-2 साल&lt;br /&gt;२ – 2-6 साल&lt;br /&gt;३ – 6-15 साल&lt;br /&gt;४ – 15- 20 साल&lt;br /&gt;५ – बीस साल से ज्यादा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;10.आप किसी वित्तीय घोटाले में शामिल हैं?&lt;br /&gt;१ -क्यों नहीं&lt;br /&gt;२ – बेशक&lt;br /&gt;३ – निश्चित रूप से&lt;br /&gt;४ -खानदानी धंधा&lt;br /&gt;५ -मैं इस सब से इनकार करता हूं&lt;br /&gt;६ – मुझे इसमें एक विदेशी हाथ दि&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;11. आपकी वार्षिक भ्रष्टाचार आय क्या है?&lt;br /&gt;१ -100-500 करोड़&lt;br /&gt;२ -500-1000 करोड़&lt;br /&gt;३ -कोई गिनती नहीं …&lt;br /&gt;(हवाला में डालर से की गयी कमाई को रुपयों में कनवर्ट करने के बाद शामिल करें)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;12. क्या आपके मन में भारत के लिए कोई भी विकास योजना है?&lt;br /&gt;उतर ————————————————————————————————————————————————–&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;13 नीचे दिये गये स्थान में अपनी उपलब्धियों का बखान करें:&lt;br /&gt;उत्तर ——————————————————————————————————————————–१४.इनमे से कोनसे धंधे में आपकी रूचि सबसे ज्यादा है .&lt;br /&gt;१.रिश्वेत लेने में ———————&lt;br /&gt;२.हेरा फैरी में ————————-&lt;br /&gt;३.हवाला के धंधे में ———————-&lt;br /&gt;४.दलाली करने में —————————&lt;br /&gt;५ सुपारी लेने में ———————&lt;br /&gt;६ अपहरण करने में ———————————–&lt;br /&gt;७.उपरोक्त सभी में ———————————–&lt;br /&gt;१५. आपने कितने गुंडे पाल रखे हे.&lt;br /&gt;उतर ——————————————–&lt;br /&gt;—————————————————-&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;यदि आप में ये सारी खूबिया है तो ही यह फॉर्म भर सकते है अन्यथा चुनाव आयोग आपका फॉर्म रद्द कर सकता है और यदि पेज कम पड़े तो सादे पेपर में लिख सकते हो और इसको भरने के बाद चुनाव अधिकारी को भारतीय डाक द्वारा भेज दे पत्ता आप को मालूम होगा !!&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;(यह फार्म एक सज्जन ने मेरे मेल पर भेजा था. आप भी गौर फरमाएं और सोचें की क्या वाकई हम इस स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं...??)&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चित्र साभार : गूगल महाराज&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-8415828638101331288?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/8415828638101331288/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=8415828638101331288' title='12 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8415828638101331288'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8415828638101331288'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/08/blog-post_05.html' title='जरा सोचिए...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-kKh3E4cxuGk/TjvklDI7dTI/AAAAAAAABAM/WaVghzGyY4g/s72-c/corruption2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-2849124778322666605</id><published>2011-08-01T11:53:00.000+05:30</published><updated>2011-08-01T11:54:23.460+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्लट-वाक'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नारी-जगत'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ईव-टीजिंग'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपनी बात'/><title type='text'>स्लट-वाक और बे-शर्म लोग</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-BWIUBWyj5Pc/TjZGKctyztI/AAAAAAAAA_8/ljKvxr1s1oE/s1600/untitled.bmp"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 318px; FLOAT: left; HEIGHT: 359px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5635769129021656786" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-BWIUBWyj5Pc/TjZGKctyztI/AAAAAAAAA_8/ljKvxr1s1oE/s400/untitled.bmp" /&gt;&lt;/a&gt;कनाडा की तर्ज पर भारत में भी स्लट-वाक निकला. नाम दिया गया बेशर्मी मोर्चा. कनाडा में एक कांस्टेबल ने टिपण्णी की कि महिलाओं के कपड़े उनके प्रति हो रहे अपराध के कारण हैं और तूफान मच गया. फिर तो इसके प्रति दुनिया भर में प्रतिरोध उठा. फिर तो इसके प्रति दुनिया भर में प्रतिरोध उठा की आखिर महिलाओं के कपड़ों में बे-शर्मी देख रहे लोग अपनी आँखों की बेशर्मी से क्यों मुँह चुरा रहे हैं ? आखिर बार-बार ये बे-शर्म निगाहें महिलाओं को सेक्स-आब्जेक्ट के रूप में ही क्यों देखना चाहती हैं ? खैर दिल्ली में निकले बेशर्मी-मोर्चा ने इस ओर लोगों का ध्यान खींचा है, और इसकी सफलता-असफलता और प्रासंगिकता को लेकर सवाल-जवाब खड़े हो सकते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर जहाँ तक भारत का सवाल है यहाँ महिलाओं के पहनावों और उसको लेकर कि जा रही टिप्पणियां नई नहीं हैं. लगभग हर लड़की को किसी-न-किसी रूप में इससे एक बार रु-ब-रु हुआ होना होगा. कभी परिवारजनों की टोका-टोकी तो कभी स्कूल में बंदिशें. अभी कुछ महीनों पूर्व जिलाधिकारी, लखनऊ ने राजधानी के छात्र-छात्राओं को स्कूल/कालेज यूनिफार्म में सार्वजनिक स्थानों यथा-सिनेमा घर, मॉल, पार्क, रेस्टोरेन्ट, होटलों में स्कूल/कालेज टाइम में स्कूली ड्रेस में जाने से प्रतिबन्धित कर दिया और यह भी कहा कि स्कूली ड्रेस में इन स्थानों पर पाये जाने पर छात्र-छात्राओं के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी। उनका कहना था कि छात्र छात्राएं स्कूल यूनिफार्म में स्कूल-कॉलेज छोड़कर घूमते पाए जाते हैं, जिससे अभद्रता छेड़खानी, अपराधी और आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं। यानी फिर से वही सवाल- ईव-टीजिंग और ड्रेस कोड.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कभी जींस पर प्रतिबन्ध तो कभी मॉल व थियेटर में स्कूली ड्रेस में घूमने पर प्रतिबन्ध. दिलोदिमाग में ख्याल उठने लगता है कि क्या यह सब हमारी संस्कृति के विपरीत है। क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर है कि वह ऐसी चीजों से प्रभावित होने लगती है? फिर तालिबानी हुक्म और इनमें अंतर क्या ? पहले लोग कहेंगें कि स्कूली यूनिफ़ॉर्म में न जाओ, फिर कहेंगे कि जींस में न जाओ... क्या इन सब फतवों से लड़कियां ईव-टीजिंग की पीड़ा से निजात पा लेंगीं। एक बार तो कानपुर के कई नामी-गिरामी कालेजों ने सत्र प्रारम्भ होने से पहले ही छात्राओं को उनके ड्रेस कोड के बारे में बकायदा प्रास्पेक्टस में ही फरमान जारी कर दिया कि वे जींस और टाप पहन कर कालेज न आयें। इसके पीछे निहितार्थ यह है कि अक्सर लड़कियाँ तंग कपड़ों में कालेज आती हैं और नतीजन ईव-टीजिंग को बढ़ावा मिलता है। स्पष्ट है कि कालेजों में मारल पुलिसिंग की भूमिका निभाते हुए प्रबंधन ईव-टीजिंग का सारा दोष लड़कियों पर मढ़ देता है। और यही कम पुलिस और प्रशासन के लोग भी करते हैं. अतः यह लड़कियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने को दरिंदों की निगाहों से बचाएं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्या अपने देश में राजधानियों और महानगरों की कानून-व्यवस्था इतनी बिगड़ चुकी है कि लडकियाँ घरों में कैद हो जाएँ. लड़कियों के दिलोदिमाग में उनके पहनावे को लेकर इतनी दहशत भर दी जा रही है कि वे पलटकर पूछती हैं-’’ड्रेस कोड उनके लिए ही क्यों ?'' अभी ज्यादा दिन नहीं बीते होंगे जब मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में एक स्कूल शिक्षक ने ड्रेस की नाप लेने के बहाने बच्चियों के कपड़े उतरवा लिए थे. फिर भी सारा दोष लड़कियों पर ही क्यों ? यही नहीं तमाम काॅलेजों ने तो टाइट फिटिंग वाले सलवार सूट एवं अध्यापिकाओं को स्लीवलेस ब्लाउज पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। शायद यहीं कहीं लड़कियों-महिलाओं को अहसास कराया जाता है कि वे अभी भी पितृसत्तात्मक समाज में रह रही हैं। देश में सत्ता शीर्ष पर भले ही एक महिला विराजमान हो, संसद की स्पीकर एक महिला हो, सरकार के नियंत्रण की चाबी एक महिला के हाथ में हो, लोकसभा में विपक्ष की नेता महिला हो, यहाँ तक कि तीन राज्यों में महिला मुख्यमंत्री है, पर इन सबसे बेपरवाह पितृसत्तात्मक समाज अपनी मानसिकता से नहीं उबर पाता।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सवाल अभी भी अपनी जगह है। क्या महिलाओं या लड़कियों का पहनावा ईव-टीजिंग का कारण हैं ? यदि ऐसा है तो माना जाना चाहिए कि पारंपरिक परिधानों से सुसज्जित महिलाएं ज्यादा सुरक्षित हैं। पर दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं है। ग्रामीण अंचलों में छेड़खानी व बलात्कार की घटनाएं तो किसी पहनावे के कारण नहीं होतीं बल्कि अक्सर इनके पीछे पुरुषवादी एवं जातिवादी मानसिकता छुपी होती है। बहुचर्चित भंवरी देवी बलात्कार भला किसे नहीं याद होगा? रोज बाबाओं के किस्से सामने आ रहे हैं कि किस तरह वह लोगों को अपने जाल में फंसकर उनका शोषण कर रहे हैं. घरेलू महिला अधिनियम के लागू होने के बाद भी घरेलू हिंसा में कमी नहीं आई है. बात-बात पर महिलाओं के प्रति अपशब्द, पुरुषों द्वारा सामान्य संवाद में भी उनके अंगों की लानत-मलानत क्या सिर्फ कपड़ों से उपजती है ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हाल ही में दिल्ली की एक संस्था ’साक्षी’ ने जब ऐसे प्रकरणों की तह में जाने के लिए बलात्कार के दर्ज मुकदमों के पिछले 40 वर्षों का रिकार्ड खंगाला तो पाया कि बलात्कार से शिकार हुई 70 प्रतिशत महिलाएं पारंपरिक पोशाक पहनीं थीं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक भारत में प्रति 51वें मिनट में एक महिला यौन शोषण का शिकार, हर 54वें मिनट पर एक बलात्कार और हर 102वें मिनट पर एक दहेज हत्या होती है। देश में बलात्कार के मामले 2005 में 18,349 के मुकाबले बढ़कर 2009 में 22,000 हो गए। महिलाओं के उत्पीड़न के मामले भी इस अवधि में 34,000 से बढ़कर 39,000 हो गए जबकि दहेज हत्याओं के मामले 2005 में 6,000 के मुकाबले 2009 में 9,000 हो गए। यही नहीं विश्व में सर्वाधिक बाल वेश्यावृत्ति भी भारत में है, जहाँ 4 लाख में अधिकतर लड़कियाँ हैं। क्या इन सब अपराधों का कारण महिलाएं या उनका पहनावा हैं ??&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;स्पष्ट है कि मारल-पुलिसिंग के नाम पर नैतिकता का समस्त ठीकरा लड़कियों-महिलाओं के सिर पर थोप दिया जाता है। समाज उनकी मानसिकता को विचारों से नहीं कपड़ों से तौलता है। कई बार तो सुनने को भी मिलता है कि लड़कियां अपने पहनावे से ईव-टीजिंग को आमंत्रण देती हैं। मानों लड़कियां सेक्स आब्जेक्ट हों। क्या समाज के पहरुये अपनी अंतरात्मा से पूछकर बतायेंगे कि उनकी अपनी बहन-बेटियाँ जींस-टाप य स्कूली स्कर्ट में होती हैं तो उनका नजरिया क्या होता है और जींस-टाप य स्कूली स्कर्ट में चल रही अन्य लड़की को देखकर क्या सोचते हैं। यह नजरिया ही समाज की प्रगतिशीलता को निर्धारित करता है। जरूरत है कि समाज अपना नजरिया बदले न कि तालिबानी फरमानों द्वारा लड़कियों की चेतना को नियंत्रित करने का प्रयास करें। तभी एक स्वस्थ मानसिकता वाले स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;किसी भी सभ्य समाज में लड़कियों/महिलाओं के प्रति अपशब्द, बात-बात पर उनकी लानत-मलानत, उनको सेक्स आब्जेक्ट मानने की प्रवृत्ति, आपसी संवाद में भी महिलाओं को घसीटना और उनके साथ दुष्कर्म जैसे घटनाएँ न सिर्फ आपत्तिजनक हैं बल्कि अपराध है. जरुरत सच्चाई को स्वीकार कर उसका हल निकालने की है. मात्र शोशेबाजी से कोई हल नहीं निकलने वाला और न ही महिलाओं के कपड़ों को उनके प्रति बढ़ रहे अपराध का कारण माना जा सकता है. समाज और प्रशासन अपनी कमजोरियों को छुपाने के लिए कब तक महिलाओं पर प्रश्नचिन्ह लगता रहेगा ?? &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-2849124778322666605?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/2849124778322666605/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=2849124778322666605' title='27 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2849124778322666605'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2849124778322666605'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/08/blog-post.html' title='स्लट-वाक और बे-शर्म लोग'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-BWIUBWyj5Pc/TjZGKctyztI/AAAAAAAAA_8/ljKvxr1s1oE/s72-c/untitled.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>27</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-6615913251993648176</id><published>2011-07-29T16:00:00.001+05:30</published><updated>2011-07-29T16:00:01.622+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मेरा जन्मदिन'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जन्म-दिन'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अंडमान से'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपनी बात'/><title type='text'>फिर से हाज़िर...</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-YaFOb-Uj1-0/TjEItkc4qRI/AAAAAAAAA_0/z9p-S8c44QY/s1600/kk-akanksha%2Byadav.JPG"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 214px; FLOAT: left; HEIGHT: 320px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5634294187789166866" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-YaFOb-Uj1-0/TjEItkc4qRI/AAAAAAAAA_0/z9p-S8c44QY/s320/kk-akanksha%2Byadav.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;लीजिए जी, हमारा जन्मदिन फिर से हाज़िर हो गया. &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;कल 30 जुलाई को हम अपना जन्म-दिन सेलिब्रेट करेंगें. &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;वैसे, अभी तो पिछले साल ही मनाया था, पर यह तो पीछा ही नहीं छोड़ता. हर साल आ जाता है यह बताने के लिए आपकी उम्र एक साल और कम हो गई. फिर से मजबूर कर देता है पीछे मुड़कर देखने के लिए कि इस एक साल में क्या खोया-क्या पाया ? फ़िलहाल हमारी छोटी बिटिया तान्या (तन्वी, आइमा, अस्मिता भी कहते हैं...) पहली बार हमारे जन्म-दिन पर शरीक हो रही हैं. अच्छा लगता है उसका बचपना. अभी तो 27 जुलाई को 9 माह की हुई है. अभी तो सारा समय उसी के साथ निकल जाता है. कुछ ज्यादा लिखना-पढना भी नहीं हो पा रहा है. इस बीच यह प्रयास जरूर रहा है कि बाल-गीतों पर मेरी पहली पुस्तक शीघ्र प्रकाशित होकर हाथ में आ जाए. इस बीच हमारे (आकांक्षा-कृष्ण कुमार) व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी एक प्रकाशन ने पुस्तक जारी करने की योजना बनाई है. वह भी कार्य प्रगति पर है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;...कल हमारा जन्म-दिन है. सबसे अच्छी बात यह है कि शनिवार के चलते &lt;a href="http://kkyadav.blogspot.com/"&gt;कृष्ण कुमार जी&lt;/a&gt; का आफिस नहीं है और &lt;a href="http://pakhi-akshita.blogspot.com/"&gt;बिटिया पाखी &lt;/a&gt;का स्कूल भी बंद है. अंडमान में बारिश भी जोरों पर है, सो बाहर किसी द्वीप पर निकलने का भी स्कोप नहीं है. तो फिर पोर्टब्लेयर में ही जन्म-दिन सेलिब्रेट करेंगें...घूमेंगें-फिरेंगें, पार्टी करेंगें, केक काटेंगें और सपरिवार मस्ती करेंगें.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-HD74HjFWgUo/TjEHnI1LbkI/AAAAAAAAA_s/HsxzaXA4pLY/s1600/Birthday-Cake-kk-Akanksha%2BYadav.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; DISPLAY: block; HEIGHT: 291px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5634292977784024642" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-HD74HjFWgUo/TjEHnI1LbkI/AAAAAAAAA_s/HsxzaXA4pLY/s400/Birthday-Cake-kk-Akanksha%2BYadav.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;ब्लागिंग जगत में आप सभी के स्नेह से सदैव अभिभूत रही हूँ. जीवन के हर पड़ाव पर आप सभी की शुभकामनायें और स्नेह की धार बनी रहेगी, इसी विश्वास के साथ.... !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-6615913251993648176?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/6615913251993648176/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=6615913251993648176' title='37 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6615913251993648176'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6615913251993648176'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/07/blog-post_29.html' title='फिर से हाज़िर...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-YaFOb-Uj1-0/TjEItkc4qRI/AAAAAAAAA_0/z9p-S8c44QY/s72-c/kk-akanksha%2Byadav.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>37</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-2467007128552793307</id><published>2011-07-18T09:22:00.000+05:30</published><updated>2011-07-18T09:22:42.793+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बाल-दुनिया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लेख'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='साभार'/><title type='text'>कहां खो गई दादा-दादी की कहानी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-K-sMX9Bazng/TiOtafmg6GI/AAAAAAAAA_c/YfeyT2hnd9g/s1600/children.png"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 270px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630534629814495330" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-K-sMX9Bazng/TiOtafmg6GI/AAAAAAAAA_c/YfeyT2hnd9g/s400/children.png" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;बचपन में स्कूल की छुट्टियों में ननिहाल जाने पर मेरी नानी हम सब बच्चों को अपने पास बिठाकर मजेदार कहानियां सुनाया करती थी। उनकी कहानियों का विषय राजा, राजकुमार, राजकुमारी व दुष्ट जादूगर हुआ करते थे। अकबर-बीरबल व विक्रम-बेताल के किस्से हमें अपने साथ बांधे रखते थे। कभी-कभार नानी हमें भारत विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आने के दौरान हुए मुश्किलों भरे सफर की जानकारी भी तपफसील से देती, जो उस समय हमारे लिए रोचक किस्सों से कम&lt;br /&gt;नहीं होता था। आज नानी नहीं रही, लेकिन दिमाग पर जोर डालते ही उसके किस्से-कहानियां ताजा हो उठती हैं। मेरी तरह वे सभी लोग खुशनसीब होंगे जिन्हें बचपन में अपने दादा-दादी, नाना-नानी के साथ इस तरह की बैठकों का अनुभव होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुछ दशक पहले ही बच्चों में काॅमिक्स बेहद लोकप्रिय थीं। इन काॅमिक्स के पात्रों में पैफंटम, चाचा चैधरी, लम्बू-मोटू, राजन-इकबाल, पफौलादी सिंह, महाबली शाका, ताऊजी, चाचा-भतीजा, जादूगर मैंड्रक, बिल्लू, अंकुर, पिंकी, रमन, क्रुकबांड सरीखे तमाम पात्रा बच्चों को अपने ही परिवेश के प्रतीत होते थे। जो उनमें पफैंटसी के अलावा रोमांच, चतुराई उभारते हुए उनकी कल्पनाशक्ति विकसित करते थे। अमर चित्रकथा ने भारतीय संस्कृति पर काॅमिक रचकर बच्चों का अपार ज्ञानवर्धन किया। इतना ही नहीं किशोरों के लिए साहस, रोमांच व ज्ञान से भरपूर पाॅकेट बुक्स भी प्रकाशित की गई। अस्सी-नब्बे के दशक में पाॅकेट बुक्स का जादू भी बाल पाठकों के दिलोदिमाग पर छाया रहा। डायमंड, मनोज, राजा, शकुन, पवन, साधना पाॅकेट बुक्स के अलावा अन्य जाने-माने प्रकाशनों ने बच्चों के लिए भरपूर छोटे उपन्यास प्रकाशित किए। उस समय बच्चों में भी यह क्रेज रहता था कि उन्होंने अपने पसंदीदा पात्रों की पाॅकेट बुक्स पढ़ी या नहीं। बच्चे आपस में अदल-बदल कर अपनी पसंदीदा किताबें पढ़ने से नहीं चूकते थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बालरुचि के अनुरूप ही मधु मुस्कान, लोटपोट, पराग, टिंकल, नंदन, बालमेला, चंपक, चंदामामा, चकमक, हंसती दुनिया, बालहंस, बाल सेतु, बाल वाटिका, नन्हे सम्राट, देवपुत्र, लल्लू जगधर, बालक, सुमन सौरभ जैसी बाल-पत्रिकाएं भी प्रकाशित हुई, जिनमें से कुछ आज भी बाल पाठकों को लुभा रही हैं। सरकारी तौर पर भी नन्हें तारे, बाल वाणी जैसी बाल-पत्रिकाएं शुरू की गई जो काल कलवित हो गई। अलबत्ता प्रकाशन विभाग की बाल भारती व नेशनल बुक ट्रस्ट की पाठक मंच बुलेटिन आज भी नियमित प्रकाशित हो रही हैं। यदि केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारें बाल-साहित्य प्रकाशन व प्रोत्साहन की दिशा में गंभीरता से रुचि ले तो यह भावी नागरिकों के हित में एक अच्छा कदम होगा। दैनिक समाचार-पत्रों में भी अपने बाल-पाठकों को खास ख्याल रखते हुए प्रायः रविवारीय विशेषांक में बाल-साहित्य को प्रमुखता से स्थान दिया जाता था। परन्तु बाजारवाद के मौजूदा दौर में बाल साहित्य अब केवल औपचारिकता बनकर रह गया है तथा सृजनात्मक साहित्य के स्थान पर बच्चों को ज्यादातर इंटरनेट की सामग्री परोसी जा रही है। रोचक-मजेदार बाल कथाओं का तो अब अभाव हो चला है। यही नहीं बाल-साहित्यकार भी खुद को उपेक्षित महसूस करते हुए साहित्य की अन्य विधाओं की ओर उन्मुख होते जा रहे हैं। यह स्थिति बाल-साहित्य के लिए बेहद घातक है। दूसरी तरफ आज के व्यस्तता भरे समय में जहां भौतिकवाद ने रिश्तों में दूरियां बना दी हैं, वहीं टेलीविजन तथा कम्प्यूटर ने बचपन को एक तरह से लील लिया है। मनोरंजन के नाम पर बच्चों के पास वीडियो गेम, कम्प्यूटर, इंटरनेट, केबल टीवी से लेकर मोबाइल जैसे तमाम उपकरण भले ही आ गए हों पर इनमें से कोई भी उन्हें स्वस्थ मनोरंजन दे पाने में सक्षम नहीं। वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि इंटरनेट, टीवी व वीडियो गेम बच्चों में तनाव, हिंसा, कुंठा व मनोरोगों को जन्म दे रहा है। इन उपकरणों से जुड़े रहने वाले बच्चों की आंखों पर मोटे-मोटे चश्मे भी देखे जा सकते हैं। पश्चिमी संस्कृति से प्रेरित कार्टून पिफल्में व अन्य डब किए गए कार्यक्रम बाल सुलभ मन में अश्लीलता व विकारों के बीज बो रहे हैं। उनकी भाषा भी व्यवहार की तरह संस्कारविहीन होती जा रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस परिस्थिति में बच्चों में नैतिकता, शिष्टाचार, ईमानदारी सहित अन्य सद्गुणों के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए जरूरी है कि हम सब बाल-साहित्य की प्रासंगिकता व उपादेयता को समझते हुए उसे बाल-जीवन में स्थान दें। बच्चों को संस्कारवान बनाने में गीताप्रेस-गोरखपुर का बाल साहित्य व अमर चित्राकथा बेजोड़ है। बाल साहित्यकारों को एक चुनौती की तरह भारतीय आधुनिक परिवेश के हिसाब से अपने साहित्य को विकसित करना चाहिए। अभिभावकों को भी बच्चों पर पढ़ाई का बोझ न लादते हुए कुछ समय स्वाध्याय के लिए प्रेरित करना चाहिए। साहित्य पठन के इन पलों में बच्चों का स्वस्थ मनोरंजन होने के साथ ही उनमें मानवीय गुण तो विकसित होंगे ही, एकाग्रता व शिक्षा के प्रति रूझान भी बढ़ेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;संदीप कपूर&lt;br /&gt;-88/1395, बलदेव नगर&lt;br /&gt;अंबाला सिटी-134007 (हरियाणा)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-2467007128552793307?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/2467007128552793307/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=2467007128552793307' title='11 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2467007128552793307'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/2467007128552793307'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html' title='कहां खो गई दादा-दादी की कहानी'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-K-sMX9Bazng/TiOtafmg6GI/AAAAAAAAA_c/YfeyT2hnd9g/s72-c/children.png' height='72' width='72'/><thr:total>11</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5640167098547709902</id><published>2011-07-13T12:03:00.001+05:30</published><updated>2011-07-13T12:19:59.997+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महत्वपूर्ण दिवस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सफरनामा'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जानकारी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ब्लागिंग की दुनिया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सम्मान-उपलब्धि'/><title type='text'>250 पोस्ट,  200 फालोवर्स ...</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-bYqQYgirtXs/Th0_RS2L23I/AAAAAAAAA_U/o75Aeou_qfs/s1600/KKyadav-akanksha-akshita-pakhi-andaman-cellular%2Bjail.JPG"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 320px; FLOAT: left; HEIGHT: 240px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5628724675632421746" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-bYqQYgirtXs/Th0_RS2L23I/AAAAAAAAA_U/o75Aeou_qfs/s320/KKyadav-akanksha-akshita-pakhi-andaman-cellular%2Bjail.JPG" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;आज जब 'शब्द-शिखर' पर 250 पोस्ट और 200 फालोवार्स का सफ़र पूरा हो चुका है, तो एक सुखद अनुभूति सी होती है. जब 20 नवम्बर, 2008 को जब पतिदेव &lt;a href="http://kkyadav.blogspot.com/"&gt;कृष्ण कुमार जी &lt;/a&gt;की प्रेरणा से इस ब्लॉग की पहली पोस्ट लिखी थी तो सोचा भी न था कि ब्लागर्स और पाठकों का इतना स्नेह मिलेगा, पर भविष्य किसने देखा है. आप सबके स्नेह ने 'शब्द-शिखर' को यहाँ लाकर खड़ा किया है. इस बीच बिटिया &lt;a href="http://www.pakhi-akshita.blogspot.com/"&gt;अक्षिता (पाखी) &lt;/a&gt;ने भी शरारतों के साथ-साथ काफी सहयोग किया, ताकि मैं कुछ लिख सकूँ. 8 जुलाई, 2011 को ब्लॉग पर &lt;a href="http://cmauniquecuta19.blogspot.com/"&gt;'नश्तरे अहसास' &lt;/a&gt;नाम से एक टिप्पणी प्राप्त हुई- ''आपके 200 फालोवर्स होने पर बधाई...वैसे हम आपके 200 वें फालोवर्स बन रहे हैं..बधाई !"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब इस लिंक पर जाकर देखा तो 'शब्द-शिखर' की यह 200 वीं फालोवर्स कानपुर की नेहा त्रिवेदी थीं. इनका &lt;a href="http://www.blogger.com/profile/12413478447349797313"&gt;परिचय&lt;/a&gt; देखना चाहा तो- ''कुछ खास नहीं बताने को अपने बारे में, बस इतना की ब्लॉगिंग की दुनिया में नयी-नयी आई हूँ. लिखने का तो शौक तो रखते थे,पर वह डायरी तक ही सीमित था. किसी दोस्त ने बताया ब्लॉग भी कुछ होता है, हमे लगा की क्यूँ न हम भी इस मंच पे जा कर अपनी रचनाओं को लोगों तक पहुंचाएं और ब्लॉग से जुड़े इतने बड़े-बड़े लेखकों को पढने का आनंद भी उठा सके. आप सभी बड़ों का आशीर्वाद चाहूंगी और हम-उम्र दोस्तों का प्रोत्साहन. यदि कुछ गलती हो जाये तो माफ़ कीजियेगा...............धन्यवाद!! :) नेहा त्रिवेदी.''&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नेहा की एक पोस्ट पर भी नजर डाल लें तो पता चलेगा कि ये कितनी दिल्लगी से लिखती हैं-&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-p25f0jpjdc8/Th066YFZ5oI/AAAAAAAAA_M/kzTqFEbWbUU/s1600/3674909642_ffe460ee5d_o.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 242px; FLOAT: right; HEIGHT: 320px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5628719883854931586" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-p25f0jpjdc8/Th066YFZ5oI/AAAAAAAAA_M/kzTqFEbWbUU/s320/3674909642_ffe460ee5d_o.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;&lt;br /&gt;मौसमें - सौगात&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस छोटी सी ज़िन्दगी में बहारे मौसम आ गई,&lt;br /&gt;बहारे मौसम आँचल में समेटे इक सौगात ला गई,&lt;br /&gt;तेरे इश्क का एहसास क्या हुआ&lt;br /&gt;मेरे बेज़ार पड़े दिल में जीने की ललक छा गई !!&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#336666;"&gt;........नेहा जी, 'शब्द-शिखर' की 200 वीं फालोवर्स बनने के लिए आभार और बधाई भी !!&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;...इस 250 वीं पोस्ट के माध्यम से आप सभी के स्नेह और प्रोत्साहन के लिए आभार, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाया. इस बीच 'शब्द-शिखर' ब्लॉग ने भी ढाई साल से ज्यादा का सफ़र पूरा कर लिया है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#993300;"&gt;........अभी तक प्रिंट-मिडिया में प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 बार 'शब्द-शिखर' से जुडी पोस्टों की चर्चा हुई है. इनमें दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला,राष्ट्रीय सहारा,राजस्थान पत्रिका, आज समाज, गजरौला टाईम्स, जन सन्देश, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, दस्तक, आई-नेक्स्ट, IANS द्वारा जारी फीचर शामिल हैं. इस समर्थन व सहयोग के लिए आभार!&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;एक बार पुन: आप सभी के सहयोग, प्रोत्साहन के लिए आभार. यूँ ही अपना सहयोग व स्नेह बनाये रखें !!&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;(चित्र में : सपरिवार सेलुलर जेल के समक्ष)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;-आकांक्षा यादव&lt;br /&gt;अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पोर्टब्लेयर&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5640167098547709902?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5640167098547709902/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5640167098547709902' title='49 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5640167098547709902'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5640167098547709902'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/07/250-200.html' title='250 पोस्ट,  200 फालोवर्स ...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-bYqQYgirtXs/Th0_RS2L23I/AAAAAAAAA_U/o75Aeou_qfs/s72-c/KKyadav-akanksha-akshita-pakhi-andaman-cellular%2Bjail.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>49</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-8989277516324024853</id><published>2011-07-11T09:44:00.000+05:30</published><updated>2011-07-11T09:45:16.879+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='विश्व जनसंख्या दिवस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नारी-जगत'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपनी बात'/><title type='text'>विश्व जनसंख्या दिवस : बेटियों की टूटती 'आस्था'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-bxEHrvESJKg/Thp1c2NkbLI/AAAAAAAAA-8/MVCe3gaksH0/s1600/1%2BArab%2BChild-1.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 370px; FLOAT: left; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5627939822802070706" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-bxEHrvESJKg/Thp1c2NkbLI/AAAAAAAAA-8/MVCe3gaksH0/s400/1%2BArab%2BChild-1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;आज विश्व जनसंख्या दिवस है. संयोगवश इस समय भारत में जनसंख्या का काम भी जोरों से चल रहा है. जनसंख्या के अंतरिम आंकडे आ चुके हैं, पर वास्तविक आंकड़े आने अभी भी शेष हैं. जनसंख्या सिर्फ कागजी न हो, बल्कि इससे लोगों के जीवन स्टार में भी सुधर आए, ऐसे में इसे इसे व्यापक और लोकप्रिय बनाने एवं लोगों से जोड़ने हेतु तमाम उपायों का सहारा लिया जाता है। माना जा रहा है कि वर्ष 2011 की जनगणना पर जितनी राशि और मानवीय संसाधन झोंके गए हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। यह जनगणना सिर्फ मानव जाति की गणना नहीं करती बल्कि मानव के समृद्ध होते परिवेश एवं भौतिक संसाधनों को भी कवर करती है। भारत दुनिया के उन देशों में से है, जहाँ सर्वाधिक तीव्र गति से जनसंख्या बढ़ रही है। फिलहाल चीन के बाद हम दुनिया में दूसरी सर्वाधिक जनसंख्या वाले राष्ट्र हैं। यह जनसंख्या ही भारत को दुनिया के सबसे बड़े बाजार के रूप में भी प्रतिष्ठित करती है। यही कारण है कि इससे जुड़े मुद्दे भी खूब ध्यान आकर्षित करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वर्ष 2011 की जनसंख्या के प्रारम्भिक आंकड़े बता रहे हैं की भारत में लड़कियों का लिंगानुपात घटा है. हर किसी को बस बेटा चाहिए, बेटियां भले ही एवरेस्ट की चोटी को दस दिन में दो बार नाप दें, पर समाज की मानसिकता में घुसा हुआ है कि सृष्टि को चलाने के लिए बेटा ही जरूरी है. याद कीजिए भारत में एक अरबवें मानवीय जन्म को। राजधानी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में 11 मई 2000 की सुबह 5 बजकर 5 मिनट पर आस्था नामक बच्ची के जन्म से उत्साहित देश के नीति-नियंताओं ने वायदों और घोषणाओं की झड़ी लगा दी थी। इनमें देश की तत्कालीन स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री श्रीमती सुमित्रा महाजन, दिल्ली के सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री श्री साहिब सिंह वर्मा के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के वरिष्ठ अधिकारीगण तक शामिल थे। इनमें बच्ची की मुफ्त शिक्षा, मुफ्त रेल यात्रा, मुफ्त मेडिकल सेवा से लेकर बच्ची के पिता को सरकारी नौकरी तक के वायदे शामिल थे। पर वक्त के साथ ही जैसे खिलौने टूट जाते है, इस एक अरबवें शिशु के प्रति किए गए सभी वायदे टूट गए। माता-पिता ने समझा था कि बिटिया अपने साथ सौभाग्य लेकर आई है, तभी तो इतने लोग उसे देखने व उसके लिए कुछ करने को लालायित हैं। शायद इसीलिए उसका नाम भी आस्था रखा। पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की इस एक अरबवीं बच्ची आस्था की किलकारियों को न जाने किसकी नजर गई कि आज 11 साल की हो जाने के बावजूद उसे कुछ नहीं मिला, सिवाय संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष द्वारा वायदानुसार दी गई दो लाख रूपये की रकम।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वाकई यह देश का दुर्भाग्य ही है कि हमारे नीति-नियंता बड़े-बड़े वायदे और घोषणाएं तो करते हैं, पर उन पर कभी अमल नहीं करते। 'आस्था' तो एक उदाहरण मात्र है जो आज दिल्ली के नजफगढ़ के हीरा पार्क स्थित अपने पैतृक आवास में माता-पिता और बड़े भाई के साथ रहती है। दुर्भाग्यवश इस गली में पानी व सीवर लाइन सहित तमाम सुविधाओं का अभाव है। इन सबके बीच माता-पिता इस गरीबी में कुछ पैसे जुटाकर खरीदी गई सेकण्ड हैण्ड साईकिल ही आस्था की खुशियों का संबल है। उसके माता-पिता भी उस दिन को एक दु:स्वप्न मानकर भूल जाना चाहते हैं, जब इस एक अरबवीं बच्ची के जन्म के साथ ही नेताओं-अधिकारियों-मीडिया की चकाचैंध के बीच दुनिया ने आस्था को सर आखों पर बिठा लिया था। 11 मई 2011 को आस्था पूरे 11 साल की हो गई, पर उसकी सुध लेने की शायद ही किसी को फुर्सत हो !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज विश्व जनसंख्या दिवस है. हमारे कर्णधार इस बात का रोना रो रहे हैं कि देश में बच्चियों का घटता अनुपात भविष्य के लिए संकट पैदा कर सकता है, पर क्या वाकई इस ओर वे गंभीरता से सोचते हैं. 'आस्था' का मसला तो सिर्फ एक उदाहरण मात्र है. ऐसी न जाने कितने आस्थाएं इस देश में रोज टूटती हैं और फिर बिखर जाती हैं !!&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-8989277516324024853?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/8989277516324024853/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=8989277516324024853' title='26 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8989277516324024853'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8989277516324024853'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html' title='विश्व जनसंख्या दिवस : बेटियों की टूटती &apos;आस्था&apos;'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-bxEHrvESJKg/Thp1c2NkbLI/AAAAAAAAA-8/MVCe3gaksH0/s72-c/1%2BArab%2BChild-1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>26</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-8622589450682501846</id><published>2011-07-09T19:53:00.003+05:30</published><updated>2012-01-02T18:24:05.527+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चर्चा में ब्लॉग/आकांक्षा'/><title type='text'>'जनसत्ता' के बहाने प्रिंट-मीडिया में 'शब्द-शिखर' की 27वीं चर्चा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-urwFxT5m4Mg/Thhi6G_nOkI/AAAAAAAAA-0/r8PT7hYfYL8/s1600/jansatta_9_july_2011.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 288px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5627356484848794178" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-urwFxT5m4Mg/Thhi6G_nOkI/AAAAAAAAA-0/r8PT7hYfYL8/s400/jansatta_9_july_2011.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;'शब्द शिखर' पर 1 जुलाई , 2011 को प्रस्तुत पोस्ट &lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/07/blog-post.html"&gt;'एक चवन्नी का जाना' &lt;/a&gt;को प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक अख़बार जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में आज 09 जुलाई , 2011 को 'अब जो नहीं है' शीर्षक से स्थान दिया गया है. जनसत्ता में चौथी बार मेरी किसी पोस्ट की चर्चा हुई है और इससे पूर्व 'शब्द शिखर' पर 26 अप्रैल, 2011 को प्रस्तुत पोस्ट &lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/04/blog-post_26.html"&gt;'मानव ही बन गया है खतरा... '&lt;/a&gt; को प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक अख़बार जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में 09 मई, 2011 को &lt;a href="http://blogsinmedia.com/wp-content/uploads/2011/05/blog-media-shabd-shikhar.jpg"&gt;'अस्तित्व का संकट' &lt;/a&gt;शीर्षक से, 21 अक्तूबर, 2010 को प्रस्तुत पोस्ट 'कहाँ गईं वो तितलियाँ' को जनसत्ता के ‘समांतर’ स्तम्भ में 7 दिसंबर, 2010 को 'गुम होती तितली' शीर्षक एवं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च, 2010) को प्रस्तुत पोस्ट 'महिला होने पर गर्व' को 12 मार्च, 2011 को 'किसका समाज' शीर्षक से स्थान दिया गया था. समग्र रूप में प्रिंट-मीडिया में 27वीं बार मेरी किसी पोस्ट की चर्चा हुई है.. आभार !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे पहले शब्द-शिखर और अन्य ब्लॉग पर प्रकाशित मेरी पोस्ट की चर्चा दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला,राष्ट्रीय सहारा,राजस्थान पत्रिका, आज समाज, गजरौला टाईम्स, जन सन्देश, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, दस्तक, आई-नेक्स्ट, IANS द्वारा जारी फीचर में की जा चुकी है. आप सभी का इस समर्थन व सहयोग के लिए आभार! यूँ ही अपना सहयोग व स्नेह बनाये रखें !! &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-8622589450682501846?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/8622589450682501846/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=8622589450682501846' title='9 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8622589450682501846'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8622589450682501846'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/07/27.html' title='&apos;जनसत्ता&apos; के बहाने प्रिंट-मीडिया में &apos;शब्द-शिखर&apos; की 27वीं चर्चा'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-urwFxT5m4Mg/Thhi6G_nOkI/AAAAAAAAA-0/r8PT7hYfYL8/s72-c/jansatta_9_july_2011.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5201842949134586309</id><published>2011-07-01T15:57:00.000+05:30</published><updated>2011-07-01T15:57:00.821+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपनी बात'/><title type='text'>एक चवन्नी का जाना...</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-fnRfKQUfDd8/Tg2EoLoFgbI/AAAAAAAAA-s/Jz24LANHlpQ/s1600/CAH5UR5HCAEGGPGZCAFEI2YOCAYEPCKTCA4ORBX0CAVGXNR7CAIP7350CAANHSKXCAE30RKQCAVLDSZ1CAFBL4ICCAJ3WKT4CARU2UBLCA0T01ZCCA4GM4RFCAA0RZU4CA54BJZACAXL8FO6CALZ12KVCA3YJBLX.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 225px; DISPLAY: block; HEIGHT: 225px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5624297335506174386" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-fnRfKQUfDd8/Tg2EoLoFgbI/AAAAAAAAA-s/Jz24LANHlpQ/s400/CAH5UR5HCAEGGPGZCAFEI2YOCAYEPCKTCA4ORBX0CAVGXNR7CAIP7350CAANHSKXCAE30RKQCAVLDSZ1CAFBL4ICCAJ3WKT4CARU2UBLCA0T01ZCCA4GM4RFCAA0RZU4CA54BJZACAXL8FO6CALZ12KVCA3YJBLX.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;चवन्नी 30 जून से इतिहास बन गई. पर जो लोग चवन्नी के साथ बड़े हुए हैं, क्या इसे भुला पायेंगें. एकन्नी-दुअन्नी-चवन्नी...न जाने इसको लेकर कितने मुहावरे हैं, मीठी यादें हैं. बचपन में यह चवन्नी ही बच्चों को चुप करने के लिए काफी होती थी, आखिर इतने में ही बिस्कुट-चाकलेट और मिठाइयाँ तक मिल जाती थीं. पर आज चवन्नी छोडिये पचास पैसे और एक रूपये का भी कोई मोल नहीं बचा. जब हम लोक स्कूल में पढ़ते थे तो किसी भी खेल-कूद प्रतियोगिता के लिए एक रूपये के सिक्के से टॉस किया जाता था और टास जीतने वाला उस एक रूपये से उस दौर में पूरे एक पैकेट ग्लूकोज बिस्किट खरीदकर अपनी टीम के सदस्यों को खिलाता था. एक रूपये का जेब-खर्च भी तब मायने रखता था, और आज भिखारी भी एक रूपये में नहीं मानता, चवन्नी-अठन्नी की तो बात ही दूर है. शादियों में दूल्हे की गाड़ी पर शगुन रूप में धान के लावे के साथ मिलाकर सिक्के फेंके जाते थे. बच्चों में यही क्रेज रहता था की किसने ज्यादा सिक्के बटोरे ? पर यह सब तो मानो, अब बाबा-आदम के ज़माने की बातें लगती हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब कृष्ण कुमार जी से मेरी शादी हुई तो एक दिन उन्होंने एक बड़ी सी पोटली मेरे सामने रखी. मैंने उत्सुकतावश खोला तो उसके ढेर सारे सिक्के थे. एक आने से लेकर न जाने किन-किन देशों के. पता चला कि ये बचपन से ही इन्हें एकत्र करने का शौक रखते हैं. इन सिक्कों की कीमत आज भी बाजार में काफी ज्यादा है, उस पर से मिलना तो दूभर ही है. बिटिया अक्षिता (पाखी) को बताया तो पहले चवन्नी शब्द ही सुनकर खूब हँसी, फिर चवन्नी दिखाने को कहा. जब किसी तरह चवन्नी मैनेज की तो बोली कि यह तो 25 पैसे हैं, इसे चवन्नी क्यों कहते हैं ? शायद नई पीढ़ी को आने का मतलब भी नहीं पता होगा, आखिर उनकी शुरुआत ही सैकड़ा से आरंभ होती है. जेब-खर्च भी भरी-भरकम हो गया है. गलती उनकी भी नहीं है, महंगाई जो न कराए.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चवन्नी की महिमा फिर भी कम नहीं हुई है. रिजर्व बैंक की माने तो पिछले वर्ष 31 मार्च, 2010 तक बाजार में पचास पैसे से कम मूल्य वाले कुल 54 अरब 73 करोड़ 80 लाख सिक्के प्रचलन में थे, जिनकी कुल कीमत 1,455 करोड़ रूपये मूल्य के बराबर है. बाजार में प्रचलित कुल सिक्कों का यह 54 फीसदी तक है. मतलब चवन्नी जैसे सिक्के भले ही प्रचलन से बाहर हो जाएँ, पर चवन्नी की वैल्यू बनी हुई है. अब तो चवन्नी एक तो ढूंढे नहीं मिलेगी, उस पर से संग्रहालय की वस्तु बन जाएगी. संग्राहक ज्यादा दाम देकर भी इसे अपने पास रखना चाहेंगें.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चवन्नी की महिमा अभी भी बरकरार है. चवन्नी के नाम पर कहावतें हैं, मुहावरें हैं, गालियां हैं, ब्लॉग हैं....पर बस नहीं है तो चवन्नी !! &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5201842949134586309?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5201842949134586309/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5201842949134586309' title='14 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5201842949134586309'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5201842949134586309'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/07/blog-post.html' title='एक चवन्नी का जाना...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-fnRfKQUfDd8/Tg2EoLoFgbI/AAAAAAAAA-s/Jz24LANHlpQ/s72-c/CAH5UR5HCAEGGPGZCAFEI2YOCAYEPCKTCA4ORBX0CAVGXNR7CAIP7350CAANHSKXCAE30RKQCAVLDSZ1CAFBL4ICCAJ3WKT4CARU2UBLCA0T01ZCCA4GM4RFCAA0RZU4CA54BJZACAXL8FO6CALZ12KVCA3YJBLX.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>14</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-430149782461707447</id><published>2011-06-26T08:00:00.001+05:30</published><updated>2011-06-26T08:00:00.364+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महत्वपूर्ण दिवस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लेख'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्वास्थ्य की बातें'/><title type='text'>स्वास्थ्य के बारे में सोचें, नशे को न कहें</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TCX-TBslDAI/AAAAAAAAAjM/SEwCg9tPMc0/s1600/300px-Smoking_Crack%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 300px; FLOAT: left; HEIGHT: 225px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5487071323847199746" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TCX-TBslDAI/AAAAAAAAAjM/SEwCg9tPMc0/s320/300px-Smoking_Crack%5B1%5D.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;मादक पदार्थों व नशीली वस्तुओं के निवारण हेतु संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसंबर, 1987 को प्रस्ताव संख्या 42/112 पारित कर हर वर्ष 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस मानाने का निर्णय लिया. यह एक तरफ लोगों में चेतना फैलाता है, वहीँ नशे के लती लोगों के उपचार की दिशा में भी सोचता है.इस वर्ष का विषय है- ''स्वास्थ्य के बारे में सोचें, नशे को न कहें." आजकी पोस्ट इसी विषय पर-&lt;br /&gt;**********************************************************************&lt;br /&gt;मादक पदार्थों के नशे की लत आज के युवाओं में तेजी से फ़ैल रही है. कई बार फैशन की खातिर दोस्तों के उकसावे पर लिए गए ये मादक पदार्थ अक्सर जानलेवा होते हैं. कुछ बच्चे तो फेविकोल, तरल इरेज़र, पेट्रोल कि गंध और स्वाद से आकर्षित होते हैं और कई बार कम उम्र के बच्चे आयोडेक्स, वोलिनी जैसी दवाओं को सूंघकर इसका आनंद उठाते हैं. कुछ मामलों में इन्हें ब्रेड पर लगाकर खाने के भी उदहारण देखे गए हैं. मजाक-मजाक और जिज्ञासावश किये गए ये प्रयोग कब कोरेक्स, कोदेन, ऐल्प्राजोलम, अल्प्राक्स, कैनेबिस जैसे दवाओं को भी घेरे में ले लेते हैं, पता ही नहीं चलता. फिर स्कूल-कालेजों य पास पड़ोस में गलत संगति के दोस्तों के साथ ही गुटखा, सिगरेट, शराब, गांजा, भांग, अफीम और धूम्रपान सहित चरस, स्मैक, कोकिन, ब्राउन शुगर जैसे घातक मादक दवाओं के सेवन की ओर अपने आप कदम बढ़ जाते हैं. पहले उन्हें मादक पदार्थ फ्री में उपलब्ध कराकर इसका लती बनाया जाता है और फिर लती बनने पर वे इसके लिए चोरी से लेकर अपराध तक करने को तैयार हो जाते हैं.नशे के लिए उपयोग में लाई जानी वाली सुइयाँ HIV का कारण भी बनती हैं, जो अंतत: एड्स का रूप धारण कर लेती हैं. कई बार तो बच्चे घर के ही सदस्यों से नशे की आदत सीखते हैं. उन्हें लगता है कि जो बड़े कर रहे हैं, वह ठीक है और फिर वे भी घर में ही चोरी आरंभ कर देते हैं. चिकित्सकीय आधार पर देखें तो अफीम, हेरोइन, चरस, कोकीन, तथा स्मैक जैसे मादक पदार्थों से व्यक्ति वास्तव में अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है एवं पागल तथा सुप्तावस्था में हो जाता है। ये ऐसे उत्तेजना लाने वाले पदार्थ है जिनकी लत के प्रभाव में व्यक्ति अपराध तक कर बैठता है। मामला सिर्फ स्वास्थ्य से नहीं अपितु अपराध से भी जुड़ा हुआ है. कहा भी गया है कि जीवन अनमोल है। नशे के सेवन से यह अनमोल जीवन समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में भारत हेरोइन का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है और ऐसा लगता है कि वह खुद भी अफीम पोस्त का उत्पादन करता है. गौरतलब है कि अफीम से ही हेरोइन बनती है. अपने देश के कुछ भागों में धड़ल्ले से अफीम की खेती की जाती है और पारंपरिक तौर पर इसके बीज 'पोस्तो' से सब्जी भी बने जाती है. पर जैसे-जैसे इसका उपयोग एक मादक पदार्थ के रूप में आरंभ हुआ, यह खतरनाक रूप अख्तियार करता गया. वर्ष 2001 के एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में भारतीय पुरुषों में अफीम सेवन की उच्च दर 12 से 60 साल की उम्र तक के लोगों में 0.7 प्रतिशत प्रति माह देखी गई. इसी प्रकार 2001 के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार ही 12 से 60 वर्ष की पुरुष आबादी में भांग का सेवन करने वालों की दर महीने के हिसाब से तीन प्रतिशत मादक पदार्थ और अपराध मामलों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय [यूएनओडीसी] की रिपोर्ट के ही अनुसार भारत में जिस अफीम को हेरोइन में तब्दील नहीं किया जाता उसका दो तिहाई हिस्सा पांच देशों में इस्तेमाल होता है। ईरान 42 प्रतिशत, अफगानिस्तान सात प्रतिशत, पाकिस्तान सात प्रतिशत, भारत छह प्रतिशत और रूस में इसका पांच प्रतिशत इस्तेमाल होता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2008 में 17 मीट्रिक टन हेरोइन की खपत की और वर्तमान में उसकी अफीम की खपत अनुमानत: 65 से 70 मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। कुल वैश्विक उपभोग का छह प्रतिशत भारत में होने का मतलब कि भारत में 1500 से 2000 हेक्टेयर में अफीम की अवैध खेती होती है, जो वाकई चिंताजनक है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नशे से मुक्ति के लिए समय-समय पर सरकार और स्वयं सेवी संस्थाएं पहल करती रहती हैं. पर इसके लिए स्वयं व्यक्ति और परिवार जनों की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण है. अभिभावकों को अक्सर सुझाव दिया जाता है कि वे अपने बच्चों पर नजर रखें और उनके नए मित्र दिखाई देने, क्षणिक उत्तेजना या चिडचिडापन होने, जेब खर्च बढने, देर रात्रि घर लौटने, थकावट, बेचैनी, अर्द्धनिद्राग्रस्त रहने, बोझिल पलकें, आँखों में चमक व चेहरे पर भावशून्यता, आँखों की लाली छिपाने के लिए बराबर धूप के चश्मे का प्रयोग करते रहने, उल्टियाँ होने, निरोधक शक्ति कम हो जाने के कारण अक्सर बीमार रहने, परिवार के सदस्यों से दूर-दूर रहने, भूख न लगने व वजन के निरंतर गिरने, नींद न आने, खांसी के दौरे पड़ने, अल्पकालीन स्मृति में ह्रास, त्वचा पर चकते पड़ जाने, उंगलियों के पोरों पर जले का निशान होने, बाँहों पर सुई के निशान दिखाई देने, ड्रग न मिलने पर आंखों-नाक से पानी बहने-शरीर में दर्द-खांसी-उल्टी व बेचैनी होने, व्यक्तिगत सफाई पर ध्यान न देने, बाल-कपड़े अस्त व्यस्त रहने, नाखून बढे रहने, शौचालय में देर तक रहने, घरेलू सामानों के एक-एक कर गायब होते जाने आदत के तौर पर झूठ बोलने, तर्क-वितर्क करने, रात में उठकर सिगरेट पीने, मिठाईयों के प्रति आकर्षण बढ जाने, शैक्षिक उपलब्धियों में लगातार गिरावट आते जाने, स्कूल कालेज में उपस्थिति कम होते जाने, प्रायः जल्दबाजी में घर से बाहर चले जाने एवं कपडों पर सिगरेट के जले छिद्र दिखाई देने जैसे लक्षणों के दिखने पर सतर्क हो जाएँ. यह बच्चों के मादक-पदार्थों का व्यसनी होने की निशानी है. यही नहीं यदि उनके व्यक्तिगत सामान में अचानक माचिस,मोमबत्ती,सिगरेट का तम्बाकू, 3 इंच लम्बी शीशे की ट्यूब,एल्मूनियम फॉयल, सिरिंज, हल्का भूरा सफेद पाउडर मिलता है तो निश्चित जान लें कि वह ड्रग्स का शिकार है और तत्काल इस सम्बन्ध में कदम उठाने की जरुरत है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मादक पदार्थों और नशा के सम्बन्ध में जागरूकता के लिए तमाम दिवस, मसलन- 31 मई को अंतर्राष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस, 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस, गाँधी जयंती पर 2 से 8 अक्टूबर मद्यनिषेध सप्ताह और 18दिसम्बर को मद्य निषेध दिवस के रूप में हर साल मनाया जाता है. मादक पदार्थों का नशा सिर्फ स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुँचाता बल्कि सामाजिक-आर्थिक-पारिवारिक- मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी इसका प्रभाव परिलक्षित होता है. जरुरत इससे भागने की नहीं इसे समझने व इसके निवारण की है. मात्र दिवसों पर ही नहीं हर दिन इसके बारे में सोचने की जरुरत है अन्यथा देश की युवा पीढ़ी को यह दीमक की तरह खोखला कर देगा. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-430149782461707447?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/430149782461707447/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=430149782461707447' title='12 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/430149782461707447'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/430149782461707447'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/06/blog-post_26.html' title='स्वास्थ्य के बारे में सोचें, नशे को न कहें'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TCX-TBslDAI/AAAAAAAAAjM/SEwCg9tPMc0/s72-c/300px-Smoking_Crack%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5404926259561844863</id><published>2011-06-24T12:32:00.000+05:30</published><updated>2011-06-24T12:32:54.420+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='यात्रा'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अजीबोगरीब बात'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लेख'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='काला पानी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अंडमान से'/><title type='text'>भारत में एक द्वीप सिर्फ तोतों के लिए</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;अंडमान में बहुत सी ऐसी चीजें हैं, जो प्राय: बहुत कम ही लोगों को पता होती हैं. इन्हीं में से एक है-पैरट-आइलैंड. पोर्टब्लेयर से बाराटांग की यात्रा में बहुत कुछ देखने को मिलता है. रास्ते में पाषाण कालीन सभ्यता में रह रहे तीर-धनुष से लैस जारवा आदिवासी, बाराटांग में कीचड़ के ज्वालामुखी, लाइम स्टोन केव. चारों तरफ घने वृक्षों से आच्छादित हरे-भरे जंगल और समुद्र की अठखेलियाँ. समुद्र का सीना चीरते हमारी स्टीमर-बोट शाम को साढ़े चार बजे आगे बढती है, साथ में मेरा परिवार और कुछेक स्टाफ के लोग.&lt;/div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-JEUUQqK0jOs/TgLpmGHBz0I/AAAAAAAAA5M/4Zi3AOxV7Ms/s1600/KKYadav-Akshita-Akanksha-Parrot%2BIsland-Andaman.JPG"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5621312125596192578" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-JEUUQqK0jOs/TgLpmGHBz0I/AAAAAAAAA5M/4Zi3AOxV7Ms/s400/KKYadav-Akshita-Akanksha-Parrot%2BIsland-Andaman.JPG" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;/a&gt;मैन्ग्रोव-क्रीक के बीच से गुजरते हुए शाम की समुद्री हवाएँ ठण्ड का अहसास कराती हैं. जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, आस-पास दसियों छोटे-छोटे द्वीप दिखने लगते हैं. मौसम सुहाना सा हो चला है. गंतव्य नजदीक है. आखिर हम पैरट-आइलैंड के करीब पहुँच ही जाते हैं. बोट को धीमे-धीमे वह किनारे लगाता है. उतरने की कोई जगह नहीं, बोट में बैठकर ही नजारा लेना है.&lt;/p&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-_J40jeshBH8/TgLmlyG24eI/AAAAAAAAA48/xgRfuL8MmLg/s1600/KKYadav-Parrot%2BIsland-Andaman.JPG"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5621308821691884002" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-_J40jeshBH8/TgLmlyG24eI/AAAAAAAAA48/xgRfuL8MmLg/s400/KKYadav-Parrot%2BIsland-Andaman.JPG" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;/a&gt;बिटिया पाखी चारों तरफ टक-टकी सी निगाह लगाए हुए है. बार-बार पूछती है कि तोते कब दिखेंगें. कानपुर में हमारे आवास-प्रांगन में एक विशाल वट वृक्ष था, शाम को उस पर अक्सर ढेर सारे तोते आते थे. तोतों की टें-टें सुनना मनोरंजक लगता था.&lt;/p&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-fKGWybljTVU/TgLv_ULLKCI/AAAAAAAAA5k/obOt2wKagAo/s1600/Akshita-Pakhi-Parrot%2BIsland-Portblair.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5621319155938175010" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-fKGWybljTVU/TgLv_ULLKCI/AAAAAAAAA5k/obOt2wKagAo/s400/Akshita-Pakhi-Parrot%2BIsland-Portblair.jpg" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;/a&gt;...चारों तरफ ठहरी हुई शांति, समुद्र भी मानो थक कर आराम कर रहो हो. एक-दो मछुहारे नाव के साथ मछली पकड़ते दिख जाते हैं. अचानक एक चीख सी पूरे माहौल का सन्नाटा तोड़ती है. हम चौंकते हैं कि क्या हुआ ? नाविक ने बताया कि जंगल में किसी ने हिरण का शिकार कर पकड़ लिया है. यद्यपि यहाँ हिरण को मारना जुर्म है, पर ये तथाकथित शिकारी जंगलों में कुत्तों के साथ जाते हैं और कुत्ते दौड़कर हिरण को पकड़ लेते हैं. अंडमान में अवैध रूप से हिरण के मांस की बिक्री कई बार सुनने को मिलती है. यह भी एक अजीब बात है की यहाँ के आदिवासी हिरणों को पवित्र आत्मा मानते हैं और उनका शिकार नहीं करते, पर बाहर से आकर बसे लोग हिरणों के शिकार में अवैध रूप से लिप्त हैं.&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-_RNdhC58Qd8/TgLnJJMKGfI/AAAAAAAAA5E/2gMzJrj0jag/s1600/KKyadav-Parrot%2BIsland2-Andaman.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5621309429183551986" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-_RNdhC58Qd8/TgLnJJMKGfI/AAAAAAAAA5E/2gMzJrj0jag/s400/KKyadav-Parrot%2BIsland2-Andaman.jpg" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;/a&gt;पैरट आईलैंड वास्तव में समुद्र के बीच मैंग्रोव की झाड़ियों पर अवस्थित है. यहाँ कोई जमीन नहीं, इसीलिए चाहकर भी बोट से नहीं उतर सकते. इन मैंग्रोव की झाड़ियों को तोतों ने कुतर-कुतर कर सम बना दिया है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो. दूर से देखने पर यह हरे रंग का गलीचा लगता है. न तो एक पत्ती ऊपर, न एक पत्ती नीचे. वाकई, प्रकृति का अद्भुत नजारा.&lt;/p&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-sO3Hrl0cHgI/TgLsMYr2IvI/AAAAAAAAA5U/OTibo8lA4TQ/s1600/Parrot%2BIsland-Andaman-KKYADAV.JPG"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5621314982440739570" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-sO3Hrl0cHgI/TgLsMYr2IvI/AAAAAAAAA5U/OTibo8lA4TQ/s400/Parrot%2BIsland-Andaman-KKYADAV.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;...तभी एक तोते की टें-टें सुनाई दी. वह चारों तरफ एक चक्कर मरता है, फिर आवाज़ देता है-टें-टें. यह इशारा था सभी तोतों को बुलाने का. तभी दूसरी दिशा से आते दो तोते दिखाई दिए..टें-टें. फिर तो देखते ही देखते चारों तरफ से तोतों का झुण्ड दिखने लगा. बमुश्किल 15 मिनट के भीतर हजारों तोते आसमान में दिखने लगे. आसमान में कलाबाजियाँ करते, विभिन्न तरह की आकृति बनाते, एक झुण्ड से दुसरे झुण्ड में मिलते और फिर बड़ा झुण्ड बनाते तोते मानो अपनी एकता और कला का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हों.&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5621317673203486306" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-CF9rYdCTTlg/TgLupAjrTmI/AAAAAAAAA5c/WVpppPFN2Sw/s400/Parrot%2BIsland%252C%2BAndaman-KK%2BYadav.JPG" /&gt; &lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;सबसे बड़ा अजूबा तो यह था कि कोई भी तोता मैंग्रोव पर नहीं बैठता, बस उसके चारों तरफ चक्कर लगाता और फिर आसमान में कलाबाजियाँ, मानो सब एक अनुशासन से बंधे हुए हों...और देखते ही देखते सारे तोते मैंग्रोव की झाड़ियों पर उतर गए. हरे रंग के मैंग्रोव पर हरे -हरे तोते, सब एकाकार से हो गए थे. चूँकि हमने उन्हें वहाँ उतरते देखा था, अत: उनकी उपस्थिति का भान हो रहा था. कोई सोच भी नहीं सकता कि मैंग्रोव की इन झाड़ियों पर हजारों तोते उपस्थित हैं. न जाने कितने द्वीपों से और दूर-दूर से ये तोते आते हैं और पूरी रात एक साथ बिताने के बाद फिर अगली सुबह मोती की तरह बिखरे द्वीपों की सैर पर निकल जाते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://kkyadav.blogspot.com/2011/06/blog-post_23.html"&gt;-कृष्ण कुमार यादव &lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5404926259561844863?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5404926259561844863/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5404926259561844863' title='8 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5404926259561844863'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5404926259561844863'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/06/blog-post_24.html' title='भारत में एक द्वीप सिर्फ तोतों के लिए'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-JEUUQqK0jOs/TgLpmGHBz0I/AAAAAAAAA5M/4Zi3AOxV7Ms/s72-c/KKYadav-Akshita-Akanksha-Parrot%2BIsland-Andaman.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-3685115373946089909</id><published>2011-06-16T17:00:00.001+05:30</published><updated>2011-06-16T17:00:00.121+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कविता'/><title type='text'>शब्दों की गति</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-mgFOMCnrUbg/TfYICX8jB2I/AAAAAAAAA-g/QDfrBCRnDRk/s1600/img1110202035_1_1.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 155px; DISPLAY: block; HEIGHT: 115px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5617686422072002402" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-mgFOMCnrUbg/TfYICX8jB2I/AAAAAAAAA-g/QDfrBCRnDRk/s400/img1110202035_1_1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;कनाडा से प्रकाशित हिंदी-चेतना के जनवरी-मार्च , 2011 अंक में मेरी कविता 'शब्दों की गति' प्रकाशित हुई. इस कविता को साभार &lt;a href="http://hindi.webdunia.com/miscellaneous/nri/nrilitrature/1102/02/1110202035_1.htm"&gt;'वेब दुनिया हिंदी' &lt;/a&gt;ने भी प्रकाशित किया है. आप भी पढ़ें-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;कागज पर लिखे शब्द&lt;br /&gt;कितने स्थिर से दिखते हैं&lt;br /&gt;आड़ी-तिरछी लाइनों के बी‍च&lt;br /&gt;सकुचाए-शर्माए से बैठे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर शब्द की नियति&lt;br /&gt;स्थिरता में नहीं है&lt;br /&gt;उसकी गति में है&lt;br /&gt;और जीवंतता में है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जीवंत होते शब्द&lt;br /&gt;रचते हैं इक इतिहास&lt;br /&gt;उनका भी और हमारा भी&lt;br /&gt;आज का भी और कल का भी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सभ्यता व संस्कृति की परछाइयों को&lt;br /&gt;अपने में समेटते शब्द&lt;br /&gt;सहते हैं क्रूर नियति को भी&lt;br /&gt;खाक कर दिया जाता है उन्हें&lt;br /&gt;यही प्रकृति की नियति।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कभी खत्म नहीं होते शब्द&lt;br /&gt;खत्म होते हैं दस्तावेज&lt;br /&gt;और उनकी सूखती स्याहियाँ&lt;br /&gt;पर शब्द अभी-भी जीवंत खड़े हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-3685115373946089909?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/3685115373946089909/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=3685115373946089909' title='13 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3685115373946089909'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3685115373946089909'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/06/blog-post_16.html' title='शब्दों की गति'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-mgFOMCnrUbg/TfYICX8jB2I/AAAAAAAAA-g/QDfrBCRnDRk/s72-c/img1110202035_1_1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>13</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-784076281692011595</id><published>2011-06-13T18:12:00.000+05:30</published><updated>2011-06-13T18:12:33.720+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अजीबोगरीब बात'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><title type='text'>कन्या-भ्रूण की हत्या कहाँ तक वैध ??</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;कन्याओं के प्रति विरक्ति सिर्फ भारत में हो, ऐसा नहीं है. यह रोग अन्य देशों में भी है. जो भारतीय अच्छी शिक्षा-दीक्षा पाकर विदेशों में बस गए, अभी भी अपनी रुढी मानसिकता से छुटकारा नहीं पा पा रहे हैं. तभी तो उनके लिए भी बेटा-बेटी का भेद बना हुआ है. गर्भ में बेटी के आते ही उसे ख़त्म कर देने में उनकी आत्मा कचोटती नहीं.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-iyBH4KqMQlg/TfYFWW697fI/AAAAAAAAA-Y/PLYWLjQO1aY/s1600/1219809602.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 360px; DISPLAY: block; HEIGHT: 383px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5617683466859441650" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-iyBH4KqMQlg/TfYFWW697fI/AAAAAAAAA-Y/PLYWLjQO1aY/s400/1219809602.jpg" /&gt; &lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अमेरिका में भारतीय मूल की महिलाएं पुत्र की चाह में कन्या भ्रूण हत्या करा रही हैं। अध्ययन के मुताबिक महिलाएं कृत्रिम प्रजनन तकनीक इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के दौरान सिर्फ नर भ्रूण को प्रत्यारोपित करा रही हैं। वह कन्या भ्रूण का गर्भपात करा देती हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शोधकर्ताओं ने कैलिफोर्निया, न्यूजर्सी और न्यूयार्क में 65 आप्रवासी भारतीय महिलाओं का साक्षात्कार लिया, जिन्होंने सितंबर 2004 से दिसंबर 2009 के बीच लिंग परीक्षण कराकर कन्या भ्रूण हत्याएं की। गौरतलब है कि भारत के विपरीत अमेरिका में लिंग निर्धारण वैध है। पर इस वैधता की आड में कन्या-भ्रूण की हत्या कहाँ तक वैध है, यह एक बड़ा सवाल जरुर है ?? &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-784076281692011595?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/784076281692011595/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=784076281692011595' title='15 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/784076281692011595'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/784076281692011595'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/06/blog-post.html' title='कन्या-भ्रूण की हत्या कहाँ तक वैध ??'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-iyBH4KqMQlg/TfYFWW697fI/AAAAAAAAA-Y/PLYWLjQO1aY/s72-c/1219809602.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>15</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-3321387729784213064</id><published>2011-05-18T10:02:00.000+05:30</published><updated>2011-05-18T10:02:45.896+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अजीबोगरीब बात'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बारिश के दिन'/><title type='text'>मेघा रे मेघा...</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TCItrf-LAZI/AAAAAAAAAi8/1m8v9eu0XRQ/s1600/2215235614_1231184b87[1][1][1].jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 320px; FLOAT: left; HEIGHT: 197px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5485997521430577554" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TCItrf-LAZI/AAAAAAAAAi8/1m8v9eu0XRQ/s400/2215235614_1231184b87%5B1%5D%5B1%5D%5B1%5D.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; गर्मी का प्रकोप जोरों पर है. तापमान 40-45 से ऊपर जा रहा है. यहाँ तक कि पहाड़ और समुद्र के किनारे बसे इलाके भी इसकी विभीषिका से जूझ रहे हैं. अंडमान में तो पहले अप्रैल से अक्तूबर तक घनघोर बारिश होती थी, पर सुनामी ने ऐसा कहर ढाया कि ऋतु-चक्र ही बदल गया. मई माह आधा बीतने वाला है, पर बमुश्किल 4-5 दिन बारिश हुई होगी. इसे पर्यावरण-प्रदूषण का प्रकोप कहें या पारिस्थितकीय असंतुलन। पर गर्मी की तपिश ने हर व्यक्ति को रूला कर रख दिया है. वरुण देवता तो मानो पृथ्वी से रूठे हुए हैं. मसूरी, शिमला, पचमढ़ी जैसी जिन जगहों को अनुकूल मौसम के लिए जाना जाता है, वहाँ भी गर्मी का प्रकोप दिखाई दे रहा है। पंखे छोडिये अब बिना ए. सी. के कम नहीं चलता.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसे में रूठे बादलों को मनाने के लिए लोग तमाम परंपरागत नुस्खों को अपना रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि बरसात और देवताओं के राजा इंद्र इन तरकीबों से रीझ कर बादलों को भेज देते हैं और धरती हरियाली से लहलहा उठती है। इसमें कितनी सच्चाई है, यह तो इन्द्र देवता ही बता पायेंगें. इनमें सबसे प्रचलित नुस्खा मेंढक-मेंढकी की शादी है। मानसून को रिझाने के लिए देश के तमाम हिस्सों में चुनरी ओढ़ाकर बाकायदा रीति-रिवाज से मेंढक-मेंढकी की शादी की जाती है। इनमें मांग भरने से लेकर तमाम रिवाज आम शादियों की तरह होते हैं। एक अन्य प्रचलित नुस्खा महिलाओं द्वारा खेत में हल खींचकर जुताई करना है। कुछ अंचलों में तो महिलाए अर्धरात्रि को अर्धनग्न होकर हल खींचकर जुताई करतीं हैं। बच्चों के लिए यह अवसर काले मेघा को रिझाने का भी होता है और शरारतें करने का भी। वे नंगे बदन जमीन पर लोटते हैं और प्रतीकात्मक रूप से उन पर पानी डालकर बादलों को बुलाया जाता है। एक अन्य मजेदार परम्परा में गधों की शादी द्वारा इन्द्र देवता को रिझाया जाता है। इस अनोखी शादी में इंद्र देव को खास तौर पर निमंत्रण भेजा जाता है। मकसद साफ है इंद्र देव आएंगे तो साथ मानसून भी ले आएंगे। गधे और गधी को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और शादी के लिए बाकायदा मंडप सजाया जाता है, शादी खूब धूम-धाम से होती है। बरसात के अभाव में मनुष्य असमय दम तोड़ सकता है, इस बात से इन्द्र देवता को रूबरू कराने के लिए जीवित व्यक्ति की शव-यात्रा तक निकाली जाती है। इसमें बरसात के लिए एक जिंदा व्यक्ति को आसमान की तरफ हाथ जोड़े हुए अर्थी में लिटा दिया जाता है। तमाम प्रक्रिया ‘दाह संस्कार‘ की होती है। ऐसा करके इंद्र को यह जताने का प्रयास किया जाता है कि धरती पर सूखे से यह हाल हो रहा है, अब तो कृपा करो।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन परम्पराओं से परे कुछेक परम्पराएँ वैज्ञानिक मान्यताओं पर भी खरी उतरती हैं। ऐसा माना जाता है कि पेड़-पौधे बरसात लाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसी के तहत पेड़ों का लगन कराया जाता है। कर्नाटक के एक गाँव में इंद्र देवता को मनाने के लिए एक अनोखी परंपरा है। यहां नीम के पौधे को दुल्हन बनाया जाता है और अश्वत्था पेड़ को दूल्हा। पूरी हिंदू रीति रिवाज से शादी संपन्न की जाती है, जिसमें गाँव के सैकड़ों लोग हिस्सा हिस्सा लेते हैं. नीम के पेड़ को बाकायदा मंगलसूत्र भी पहनाया जाता है। लोगों का मानना है कि अलग-अलग प्रजाति के पेड़ों की शादी का आयोजन करने से झमाझम पानी बरसता है। इस सम्बन्ध में कई मान्यताएं भी हैं. मसलन, कहते हैं जब धूप भी हो और बारिस भी हो रही हो तो उस समय सियार का विवाह होता है. पर अब तो ऐसे दिन देखने को ऑंखें ही तरस गई हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह भी अजीब बात है कि, यह ईश्वरीय और कर्मकांडी आस्था भी तभी प्रबल होती है, जब आदमी पर मुसीबत पड़ती है. मनुष्य यह नहीं सोचता कि यदि बारिश नहीं हो रही तो इसका कारण वह स्वयं है और जरुरत उसके निवारण की है. जब तक मानव, प्रकृति से शादी (तदाद्मय) नहीं करेगा, बरसात के लिए तरसेगा ही. अब इसे परम्पराओं का प्रभाव कहें या मानवीय बेबसी, पर अंततः कुछ दिनों के लिए बारिश होती है लेकिन हर साल यह मनुष्य व जीव-जन्तुओं के साथ पेड़-पौधों को भी तरसाती हैं। बेहतर होता यदि हम मात्र एक महीने सोचने की बजाय साल भर विचार करते कि किस तरह हमने प्रकृति को नुकसान पहुँचाया है, उसके आवरण को छिन्न-भिन्न कर दिया है, तो निश्चिततः बारिश समय से होती और हमें व्यर्थ में परेशान नहीं होना पड़ता। अभी भी वक्त है, यदि हम चेत सके तो इस पारिस्थिकीय-प्रकोप से बचा जा सकता है अन्यथा हर वर्ष इसी तरह इन्द्र देवता को मानते रहेंगें और इन्द्र देवता यूँ ही नखरे दिखाते रहेंगें !!&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-3321387729784213064?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/3321387729784213064/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=3321387729784213064' title='15 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3321387729784213064'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3321387729784213064'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/05/blog-post_18.html' title='मेघा रे मेघा...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/TCItrf-LAZI/AAAAAAAAAi8/1m8v9eu0XRQ/s72-c/2215235614_1231184b87%5B1%5D%5B1%5D%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>15</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-7985081780759263118</id><published>2011-05-09T12:36:00.003+05:30</published><updated>2011-07-09T19:58:03.582+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चर्चा में ब्लॉग/आकांक्षा'/><title type='text'>प्रिंट-मीडिया में 'शब्द-शिखर' की 25वीं चर्चा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-GnFgNKmCi0Q/TcePgUkNyFI/AAAAAAAAA9c/KEo1UYHTpqk/s1600/blog-media-shabd-shikhar.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 320px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5604606046725064786" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-GnFgNKmCi0Q/TcePgUkNyFI/AAAAAAAAA9c/KEo1UYHTpqk/s400/blog-media-shabd-shikhar.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;'शब्द शिखर' पर 26 अप्रैल, 2011 को प्रस्तुत पोस्ट &lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/04/blog-post_26.html"&gt;'मानव ही बन गया है खतरा... '&lt;/a&gt; को प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक अख़बार जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में आज 09 मई, 2011 को &lt;a href="http://blogsinmedia.com/wp-content/uploads/2011/05/blog-media-shabd-shikhar.jpg"&gt;'अस्तित्व का संकट' &lt;/a&gt;शीर्षक से स्थान दिया गया है. जनसत्ता में तीसरी बार मेरी किसी पोस्ट की चर्चा हुई है और इससे पूर्व 'शब्द शिखर' पर 21 अक्तूबर, 2010 को प्रस्तुत पोस्ट 'कहाँ गईं वो तितलियाँ' को जनसत्ता के ‘समांतर’ स्तम्भ में 7 दिसंबर, 2010 को 'गुम होती तितली' शीर्षक एवं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च, 2010) को प्रस्तुत पोस्ट 'महिला होने पर गर्व' को 12 मार्च, 2011 को 'किसका समाज' शीर्षक से स्थान दिया गया था. समग्र रूप में प्रिंट-मीडिया में 25वीं बार मेरी किसी पोस्ट की चर्चा हुई है.. आभार !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे पहले शब्द-शिखर और अन्य ब्लॉग पर प्रकाशित मेरी पोस्ट की चर्चा दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला,राष्ट्रीय सहारा,राजस्थान पत्रिका, आज समाज, गजरौला टाईम्स, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, दस्तक, आई-नेक्स्ट, IANS द्वारा जारी फीचर में की जा चुकी है. आप सभी का इस समर्थन व सहयोग के लिए आभार! यूँ ही अपना सहयोग व स्नेह बनाये रखें !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://blogsinmedia.com/2011/05/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%a4/#more-11764"&gt;चित्र साभार : http://blogsinmedia.com/&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-7985081780759263118?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/7985081780759263118/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=7985081780759263118' title='20 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/7985081780759263118'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/7985081780759263118'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/05/25.html' title='प्रिंट-मीडिया में &apos;शब्द-शिखर&apos; की 25वीं चर्चा'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-GnFgNKmCi0Q/TcePgUkNyFI/AAAAAAAAA9c/KEo1UYHTpqk/s72-c/blog-media-shabd-shikhar.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>20</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-6199195838803410591</id><published>2011-05-08T07:00:00.000+05:30</published><updated>2011-05-08T07:00:00.510+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महत्वपूर्ण दिवस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पुनरावृत्ति'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कविता'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपनी बात'/><title type='text'>मदर्स डे पर : माँ की याद में</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_2K8UDLclYQE/TChPaOAzdyI/AAAAAAAAAlQ/HQnjaOMH2_0/s1600/bi_mothersday_08_may_09_162509%5B1%5D%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 320px; FLOAT: left; HEIGHT: 214px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5487723457807611682" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_2K8UDLclYQE/TChPaOAzdyI/AAAAAAAAAlQ/HQnjaOMH2_0/s320/bi_mothersday_08_may_09_162509%5B1%5D%5B1%5D.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; आज सुबह कुछ पहले ही नींद खुल गई. मन किया कि बाहर जाकर बैठूं. अभी सूर्य देवता ने दर्शन नहीं दिए थे पर ढेर सारी चिड़िया कलरव कर रही थीं. मौसम में हलकी सी ठण्ड थी, शायद रात में बारिश हुई थी. अचानक दिमाग में ख्याल आया कि हम लोग भी घर से कितने दूर हैं. एक ऐसी जगह जहाँ सारे रिश्ते बेगाने हैं. एक-दो साल बाद हम लोग भी यहाँ से चले जायेंगे. इन सबके बीच घर की याद आई तो मम्मी का चेहरा आँखों के सामने घूम गया. कभी सोचा भी ना था की मम्मी से एक दिन इतने दूर जायेंगे, पर दुनिया का रिवाज है. शादी के बाद सबको अपनी नई दुनिया में जाना होता है, बस रह जाती हैं यादें. पर यादें जीवन भर नहीं छूटतीं , हमें अपने आगोश में लिए रहती हैं. ..पर आज पता नहीं क्यों सुबह-सुबह मम्मी की खूब याद आ रही थी. सोचा कि फोन करूँ तो याद आया कि वहाँ तो अभी सभी लोग सो रहे होंगे. सामने नजर दौडाई तो पतिदेव &lt;a href="http://www.kkyadav.blogspot.com/"&gt;कृष्ण कुमार जी&lt;/a&gt; का काव्य-संग्रह 'अभिलाषा' दिखी. पहला पन्ना पलटते ही 'माँ' कविता पर निगाहें ठहर गईं. एक बार नहीं कई बार पढ़ा. वाकई यह कविता दिल के बहुत करीब लगी. अंतर्मन के मनोभावों को बखूबी संजोया गया है इस अनुपम कविता में. सौभाग्यवश &lt;strong&gt;आज मई माह का दूसरा रविवार है और इसे दुनिया में मदर्स डे के रूप में मनाया जाता है. &lt;/strong&gt;तो आज इस विशिष्ट दिवस पर माँ को समर्पित यही कविता आप लोगों के साथ शेयर कर रही हूँ-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;मेरा प्यारा सा बच्चा&lt;br /&gt;गोद में भर लेती है बच्चे को&lt;br /&gt;चेहरे पर नजर न लगे&lt;br /&gt;माथे पर काजल का टीका लगाती है&lt;br /&gt;कोई बुरी आत्मा न छू सके&lt;br /&gt;बाँहों में ताबीज बाँध देती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बच्चा स्कूल जाने लगा है&lt;br /&gt;सुबह से ही माँ जुट जाती है&lt;br /&gt;चैके-बर्तन में&lt;br /&gt;कहीं बेटा भूखा न चला जाये।&lt;br /&gt;लड़कर आता है पड़ोसियों के बच्चों से&lt;br /&gt;माँ के आँचल में छुप जाता है&lt;br /&gt;अब उसे कुछ नहीं हो सकता।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बच्चा बड़ा होता जाता है&lt;br /&gt;माँ मन्नतें माँगती है&lt;br /&gt;देवी-देवताओं से&lt;br /&gt;बेटे के सुनहरे भविष्य की खातिर&lt;br /&gt;बेटा कामयाबी पाता है&lt;br /&gt;माँ भर लेती है उसे बाँहों में&lt;br /&gt;अब बेटा नजरों से दूर हो जायेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिर एक दिन आता है&lt;br /&gt;शहनाईयाँ गूँज उठती हैं&lt;br /&gt;माँ के कदम आज जमीं पर नहीं&lt;br /&gt;कभी इधर दौड़ती है, कभी उधर&lt;br /&gt;बहू के कदमों का इंतजार है उसे&lt;br /&gt;आशीर्वाद देती है दोनों को&lt;br /&gt;एक नई जिन्दगी की शुरूआत के लिए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;माँ सिखाती है बहू को&lt;br /&gt;परिवार की परम्परायें व संस्कार&lt;br /&gt;बेटे का हाथ बहू के हाथों में रख&lt;br /&gt;बोलती है&lt;br /&gt;बहुत नाजों से पाला है इसे&lt;br /&gt;अब तुम्हें ही देखना है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;माँ की खुशी भरी आँखों से&lt;br /&gt;आँसू की एक गरम बूँद&lt;br /&gt;गिरती है बहू की हथेली पर।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-6199195838803410591?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/6199195838803410591/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=6199195838803410591' title='17 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6199195838803410591'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6199195838803410591'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/05/blog-post_08.html' title='मदर्स डे पर : माँ की याद में'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_2K8UDLclYQE/TChPaOAzdyI/AAAAAAAAAlQ/HQnjaOMH2_0/s72-c/bi_mothersday_08_may_09_162509%5B1%5D%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>17</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-8926415690343097550</id><published>2011-05-02T14:41:00.000+05:30</published><updated>2011-05-02T14:41:58.526+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाखी की दुनिया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जानकारी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अंडमान से'/><title type='text'>हिंदी ब्लागिंग से आशाएं बढ़ा गया दिल्ली में हुआ ब्लागर्स सम्मलेन</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;ब्लागिंग को एक स्वतंत्र विधा के रूप में स्थापित करने में तमाम प्रक्रियाएं परिलक्षित हो रही हैं, इसी क्रम में हिंदी ब्लागिंग ने भी वर्ष 2003 में आरंभ होकर लगभग 8 वर्ष का सफ़र पूरा कार लिया है. आज 30,000 से ज्यादा लोग हिंदी ब्लागिंग से जुड़े हुए हैं. इनमें प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया से लेकर समाज के हर वर्ग, पेशे से जुड़े लोग अपनी भावनाओं को न सिर्फ चिट्ठों पर अभिव्यक्त कर रहे हैं, बल्कि उसे लोगों के साथ बाकायदा साझा करके नए विमर्शों को भी जन्म दे रहे हैं. ब्लागिंग और सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स का क्रेज इतना बढ़ चुका है कि वह तमाम देशों में चल रहे क्रांति और आंदोलनों को भी गंभीर धार दे रही है. हाल ही में भारत में अन्ना हजारे के आन्दोलन के दौरान भी इसकी प्रखर भूमिका देखने को मिली. ऐसे में ब्लागिंग से जुड़ा कोई भी कार्यक्रम अपने आप में महत्वपूर्ण हो जाता है.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-JGMeeg7vS8o/Tb5sWDD57lI/AAAAAAAAA8Q/sj9bdpV9XgQ/s1600/DSC_0061.JPG"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 268px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5602034112530083410" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-JGMeeg7vS8o/Tb5sWDD57lI/AAAAAAAAA8Q/sj9bdpV9XgQ/s400/DSC_0061.JPG" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;हिंदी साहित्य निकेतन की स्वर्ण जयंती पर हिंदी साहित्‍य निकेतन, &lt;a href="http://www.parikalpnaa.com/"&gt;परिकल्‍पना डॉट कॉम &lt;/a&gt;और&lt;a href="http://www.nukkadh.com/"&gt; नुक्‍कड़ डॉट कॉम &lt;/a&gt;की त्रिवेणी द्वारा हिंदी भवन, नई दिल्ली में 30 अप्रैल, 2011 को आयोजित कार्यक्रम को इसी सन्दर्भ में देखा जाना चाहिए. बतौर मुख्यमंत्री उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री डा0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने जब अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि, हिंदी भाषा जब चहुं ओर से तमाम थपेड़े खा रही हो, अपने ही घर में अपमानित हो रही हो और हिंदी में सृजन करने वाला अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहा हो, ऐसे में इस प्रकार के कार्यक्रम की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है, तो मुख्यमंत्री से परे वे एक साहित्यकार के रूप में ही अपना दुःख व्यक्त कर रहे थे. आखिर वे भी साहित्य में उसी भावभूमि के पोषक हैं, जिसका मानना है कि, कल्‍पना स्‍वर्ग की तरंगों का अहसास कराती है, वहीं सृजन हमारे सामाजिक सरोकार को मजबूती देता है। ऐसे में एक प्रभावी मंच से निशंक जी ने उक्त उद्गार व्यक्त कर हिंदी ब्लागिंग से नई आशाएं भी व्यक्त की हैं, जिनका कि सम्मान किया जाना चाहिए. &lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-aKUIyJVUboc/Tb5xXyNmtuI/AAAAAAAAA8w/qZJHFbP5wyk/s1600/inauguration.JPG"&gt;&lt;/p&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 268px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5602039639925241570" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-aKUIyJVUboc/Tb5xXyNmtuI/AAAAAAAAA8w/qZJHFbP5wyk/s400/inauguration.JPG" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;इस अवसर पर अविनाश वाचस्‍पति और रवीन्‍द्र प्रभात द्वारा संपादित हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की पहली मूल्‍यांकनपरक पुस्‍तक ‘हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग : अभिव्‍यक्ति की नई क्रांति’, का लोकार्पण जहाँ हिंदी ब्लागिंग को नए आयाम दिखता है, वहीँ यह भी सचेत करता है कि अभिव्यक्ति की इस नई क्रांति को अपने दलदलों से भी बचकर रहना होगा. क्योंकि इस विधा के उन्नयन के साथ ही इस पर हमले भी तेज हो रहे हैं. फ़िलहाल रवीन्द्र प्रभात जी की पुस्तक ''हिंदी ब्लागिंग का इतिहास'' का भी लोगों को इंतजार बना रहेगा, जिसके इस कार्यक्रम में दिखने की सम्भावना थी. &lt;/p&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 268px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5602038624426959778" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-sneYw74Zb8U/Tb5wcrL8o6I/AAAAAAAAA8o/DDDgKxc27hw/s400/book%2Brelease.JPG" /&gt; &lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;दो सत्रों में संपन्‍न इस कार्यक्रम का सशक्त पक्ष रहा, परिकल्‍पना डॉट कॉम की ओर से देश विदेश के 51 चर्चित और श्रेष्‍ठ तथा नुक्‍कड़ डॉट कॉम की ओर से हिंदी ब्‍लॉगिंग में विशिष्‍टता हासिल करने वाले 13 ब्‍लॉगरों को सारस्‍वत सम्‍मान प्रदान किया जाना. इससे यह कार्यक्रम और भी समावेशी और भागीदारीपूर्ण हो गया. जहाँ पहले सत्र की अध्‍यक्षता हास्‍य व्‍यंग्‍य के लोकप्रिय हस्‍ताक्षर एवं चर्चित ब्लागर अशोक चक्रधर ने की वहीँ मुख्‍य अतिथि का गुरुतर दायित्व संभाला वरिष्‍ठ साहित्‍यकार डॉ. रामदरश मिश्र ने और विशिष्‍ट अतिथि रहे प्रभाकर श्रोत्रिय। प्रमुख समाजसेवी विश्‍वबंधु गुप्‍ता और डायमंड बुक्‍स के संचालक नरेन्‍द्र कुमार वर्मा ने भी मंचासीन होकर कार्यक्रम की शोभा बढाई. &lt;/p&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 268px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5602034509455943778" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-AlE1npkxr0g/Tb5stJuZ6GI/AAAAAAAAA8Y/fpyt29RcVBw/s400/DSC_0179.JPG" /&gt; &lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;इस अवसर पर ब्लागिंग के बारे में भी गंभीर विमर्श हुआ. बकौल अशोक चक्रधर -''हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग ने सचमुच समाज में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है क्‍योंकि पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में साहित्‍य और संस्‍कृति के पेज संकुचित होते जा रहे हैं और उनकी अभिव्‍यक्ति को धार दे रही है हिन्‍दी ब्‍लॅगिंग। ऐसे कार्यक्रमों से निश्चित रूप से हिंदी का विकास होगा और हिन्‍दी अंतरराष्‍ट्रीय फलक पर अग्रणी भाषा के रूप में प्रतिस्‍थापित होगी।'' वहीँ डॉ. रामदरश मिश्र इस विधा के प्रति आशान्वित होते दिखे-''जब मैंने साहित्य सृजन करना शुरु किया था तो मैं यह महसूस करता था कि कलम सोचती है और आज़ हिन्दी ब्लोगिंग के इस महत्वपूर्ण दौर मे यह कहने पर विवश हो गया हूँ कि उंगलिया भी सोचती है।'' हिंदी के प्रखर साहित्यकार प्रभाकर श्रोत्रिय ने तो अभिव्यक्ति के इस नए माध्यम 'ब्लागिंग' को वर्तमान परिवेश और घटना क्रम में लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति से जोड़कर देखा और कहा कि हिंदी ब्लॉगिंग का तेजी से विकास हो रहा है, तमाम साधन और सूचना की न्यूनता के बावजूद यह माध्यम प्रगति पथ पर तीब्र गति से अग्रसर है, तकनीक और विचारों का यह साझा मंच कुछ बेहतर करने हेतु प्रतिबद्ध दिखाई दे रहा है । पूरे विमर्श के दौरान यह बात खुलकर सामने आई कि, हिंदी ब्‍लॉगिंग में सामाजिक स्‍वर और सरोकार पूरी तरह परिलक्षित हो रहा है। कई ऐसे ब्‍लॉगर हैं जो सामाजिक जनचेतना को हिंदी ब्‍लॉगिंग से जोड़ने का महत्‍वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। वस्तुत: यह दुनिया विचारों की दुनिया है और सभी ब्लागर्स की कोशिश होनी चाहिए कि विचार शून्य में नहीं, बल्कि आम आदमी से जुड़कर आगे आएं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस कार्यक्रम के लिए परिकल्पना और ब्लागोत्सव जैसी कल्पनाओं को मूर्त रूप देकर 'अनेक ब्लॉग नेक हृदय' की बात कहने वाले लखनऊ शहर के ब्लागर रवीन्द्र प्रभात और नुक्कड़ सहित तमाम ब्लॉगों के कर्ता-धर्ता अविनाश वाचस्पति और हिंदी साहित्य निकेतन के मालिक और 'शोध-दिशा' पत्रिका के संपादक डा. गिरिजा शरण अग्रवाल सहित उनकी पूरी टीम को साधुवाद ! आशा की जानी चाहिए कि इस तरह के कार्यक्रम/सम्मलेन भविष्य में भी होते रहेंगें और हिंदी ब्लागिंग को नए आयामों के साथ नई दिशा भी दिखाएंगें !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;****************************************************************&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इस अवसर पर हिन्दी ब्लॉगिंग के उत्‍थान में अविस्मरणीय योगदान हेतु 51 हिंदी ब्लॉगरों को ''हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान-2010'' से सम्मानित किया गया, जिसके अंतर्गत स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र, पुस्तकें और एक निश्चित धनराशि भी दी गई.&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1. वर्ष का श्रेष्ठ नन्हा ब्लॉगर – &lt;a href="http://www.pakhi-akshita.blogspot.com/"&gt;अक्षिता (पाखी), &lt;/a&gt;पोर्टब्लेयर&lt;br /&gt;2. वर्ष के श्रेष्ठ कार्टूनिस्ट – श्री काजल कुमार, दिल्ली&lt;br /&gt;3. वर्ष की श्रेष्ठ कथा लेखिका – श्रीमती निर्मला कपिला, नांगल (पंजाब)&lt;br /&gt;4. वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान कथा लेखक – डॉ. अरविन्द मिश्र, वाराणसी&lt;br /&gt;5. वर्ष की श्रेष्ठ संस्मरण लेखिका – श्रीमती सरस्वती प्रसाद, पुणे&lt;br /&gt;6. वर्ष के श्रेष्ठ लेखक – श्री रवि रतलामी, भोपाल&lt;br /&gt;7. वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (यात्रा वृतान्त) – श्रीमती शिखा वार्ष्णेय, लंदन&lt;br /&gt;8. वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (यात्रा वृतान्त) – श्री मनोज कुमार, कोलकाता&lt;br /&gt;9. वर्ष के श्रेष्ठ चित्रकार – श्रीमती अल्पना देशपांडे, रायपुर&lt;br /&gt;10. वर्ष के श्रेष्ठ हिन्दी प्रचारक – श्री शास्त्री जे.सी. फिलिप, कोच्ची, केरल&lt;br /&gt;11. वर्ष की श्रेष्ठ कवयित्री – श्रीमती रश्मि प्रभा, पुणे&lt;br /&gt;12. वर्ष के श्रेष्ठ कवि – श्री दिवि‍क रमेश, दिल्ली&lt;br /&gt;13. वर्ष की श्रेष्ठ सह लेखिका – सुश्री शमा कश्यप, पुणे&lt;br /&gt;14. वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार – श्री अविनाश वाचस्पति, दिल्ली&lt;br /&gt;15. वर्ष की श्रेष्ठ युवा गायिका – सुश्री मालविका, बैंगलोर&lt;br /&gt;16. वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक – श्री संजीव तिवारी, दुर्ग (म.प्र.)&lt;br /&gt;17. वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय कवि – श्री एम. वर्मा, वाराणसी&lt;br /&gt;18. वर्ष के श्रेष्ठ गजलकार – श्री दिगम्बर नासवा, दुबई&lt;br /&gt;19. वर्ष के श्रेष्ठ कवि (वाचन) – श्री अनुराग शर्मा, पिट्सबर्ग अमेरिका&lt;br /&gt;20. वर्ष की श्रेष्ठ परिचर्चा लेखिका – श्रीमती प्रीति मेहता, सूरत&lt;br /&gt;21. वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक – श्री दीपक मशाल, लंदन&lt;br /&gt;22. वर्ष की श्रेष्ठ महिला टिप्पणीकार – श्रीमती संगीता स्वरूप, दिल्ली&lt;br /&gt;23. वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार – श्री हिमांशु पाण्डेय, सकलडीहा (यू.पी.)&lt;br /&gt;24-25-26. वर्ष की श्रेष्ठ उदीयमान गायिका – खुशबू/अपराजिता/इशिता, पटना (संयुक्त रूप से)&lt;br /&gt;27. वर्ष के श्रेष्ठ बाल साहित्यकार – श्री जाकिर अली ‘रजनीश’, लखनऊ&lt;br /&gt;28. वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (आंचलिक) – श्री ललित शर्मा, रायपुर&lt;br /&gt;29. वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (गायन) – श्री राजेन्द्र स्वर्णकार, बीकानेर, राजस्थान&lt;br /&gt;30-31. वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार – डॉ. रूपचंद्र शास्त्री ‘मयंक’, खटीमा एवं आचार्य संजीव वर्मा सलिल, भोपाल (संयुक्त रूप से)&lt;br /&gt;32. वर्ष की श्रेष्ठ देशभक्ति पोस्ट – कारगिल के शहीदों के प्रति ( श्री पवन चंदन)&lt;br /&gt;33. वर्ष की श्रेष्ठ व्यंग्य पोस्ट – झोलाछाप डॉक्टर (श्री राजीव तनेजा)&lt;br /&gt;34. वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि – श्री ओम आर्य, सीतामढ़ी बिहार&lt;br /&gt;35. वर्ष के श्रेष्ठ विचारक – श्री जी.के. अवधिया, रायपुर&lt;br /&gt;36. वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक – श्री गिरीश पंकज, रायपुर&lt;br /&gt;37. वर्ष की श्रेष्ठ महिला चिन्तक – श्रीमती नीलम प्रभा, पटना&lt;br /&gt;38. वर्ष के श्रेष्ठ सहयोगी – श्री रणधीर सिंह सुमन, बाराबंकी&lt;br /&gt;39. वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (पुरूष) – डॉ. सुभाष राय, लखनऊ (उ0प्र0)&lt;br /&gt;40. वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (महिला) – श्रीमती संगीता पुरी, धनबाद&lt;br /&gt;41. वर्ष के श्रेष्ठ तकनीकी ब्लॉगर – श्री विनय प्रजापति, अहमदाबाद&lt;br /&gt;42. वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लॉगर – श्री खुशदीप सहगल, दिल्ली&lt;br /&gt;43. वर्ष के श्रेष्ठ नवोदित ब्लॉगर – श्री राम त्यागी, शिकागो अमेरिका&lt;br /&gt;44. वर्ष के श्रेष्ठ युवा पत्रकार – श्री मुकेश चन्द्र, दिल्ली&lt;br /&gt;45. वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लॉगर – श्री ज्ञानदत्त पांडेय, इलाहाबाद&lt;br /&gt;46. वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग शुभचिंतक – श्री सुमन सिन्हा, पटना&lt;br /&gt;47. वर्ष की श्रेष्ठ महिला ब्लॉगर – श्रीमती स्वप्न मंजूषा ‘अदा’, अटोरियो कनाडा&lt;br /&gt;48. वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉगर – श्री समीर लाल ‘समीर’, टोरंटो कनाडा&lt;br /&gt;49. वर्ष की श्रेष्ठ विज्ञान पोस्ट – भविष्य का यथार्थ (लेखक – जिशान हैदर जैदी)&lt;br /&gt;50. वर्ष की श्रेष्ठ प्रस्तुति – कैप्टन मृगांक नंदन एण्ड टीम, पुणे&lt;br /&gt;51. वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (हिन्दी चिट्ठाकारी विषयक पोस्ट) – श्री प्रमोद ताम्बट, भोपाल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इसके अलावा नुक्कड़ डाट काम की तरफ से भी 'हिन्‍दी ब्‍लॉग प्रतिभा सम्‍मान-2011' के अंतर्गत 13 विशिष्ट ब्लॉगरों को हिंदी ब्लॉगिंग में दिए जा रहे विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया-&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;(1) श्री श्रीश शर्मा (ई-पंडित), तकनीकी विशेषज्ञ, यमुनानगर (हरियाणा)&lt;br /&gt;(2) श्री कनिष्क कश्यप, संचालक ब्लॉगप्रहरी, दिल्ली&lt;br /&gt;(3) श्री शाहनवाज़ सिद्दिकी, तकनीकी संपादक, हमारीवाणी, दिल्ली&lt;br /&gt;(4) श्री जय कुमार झा, सामाजिक जन चेतना को ब्लॉगिंग से जोड़ने वाले ब्लॉगर, दिल्ली&lt;br /&gt;(5) श्री सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी, महात्मा गांधी हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा&lt;br /&gt;(6) श्री अजय कुमार झा, मीडिया चर्चा से रूबरू कराने वाले ब्लॉगर, दिल्ली&lt;br /&gt;(7) श्री रविन्द्र पुंज, तकनीकी विशेषज्ञ, यमुनानगर (हरियाणा)&lt;br /&gt;(8) श्री रतन सिंह शेखावत, तकनीकी विशेषज्ञ, फरीदाबाद (हरियाणा )&lt;br /&gt;(9) श्री गिरीश बिल्लौरे ‘मुकुल’, वेबकास्ट एवं पॉडकास्‍ट विशेषज्ञ, जबलपुर&lt;br /&gt;(10) श्री पद्म सिंह, तकनीकी विशेषज्ञ, दिल्ली&lt;br /&gt;(11) सुश्री गीताश्री, नारी विषयक लेखिका, दि‍ल्ली&lt;br /&gt;(12) श्री बी एस पावला,ब्लॉग संरक्षक, भिलाई (म.प्र.)&lt;br /&gt;(13) श्री अरविन्द श्रीवास्तव, समालोचना, मधेपुरा (बिहार)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;................सभी सम्मानित ब्लॉगरों को बधाई !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;(चित्र में : वर्ष का श्रेष्ठ नन्हा ब्लॉगर के तहत बिटिया &lt;a href="http://www.pakhi-akshita.blogspot.com/"&gt;अक्षिता (पाखी)&lt;/a&gt; की तरफ से सम्मान ग्रहण करते उनके चाचू श्री अमित कुमार यादव, जो की &lt;a href="http://www.yuva-jagat.blogspot.com/"&gt;'युवा-मन' ब्लॉग &lt;/a&gt;के संयोजक भी हैं.पायलटों की हड़ताल के चलते ऐन वक़्त पर अंडमान से फ्लाईट कैंसिल हो जाने के चलते हम कार्यक्रम में शामिल न हो सके. अत: अक्षिता की तरफ से यह सम्मान उनके चाचू श्री अमित कुमार ने ग्रहण किया.)&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-5IYQMl6gFyY/Tb5s91B4WjI/AAAAAAAAA8g/aIlx-G-Vk6Q/s1600/DSC_60.JPG"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 268px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5602034795958262322" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-5IYQMl6gFyY/Tb5s91B4WjI/AAAAAAAAA8g/aIlx-G-Vk6Q/s400/DSC_60.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="https://picasaweb.google.com/ppsingh8/Desktop03#"&gt;(अन्य फोटोग्राफ का नजारा यहाँ लें)&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-8926415690343097550?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/8926415690343097550/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=8926415690343097550' title='50 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8926415690343097550'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8926415690343097550'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title='हिंदी ब्लागिंग से आशाएं बढ़ा गया दिल्ली में हुआ ब्लागर्स सम्मलेन'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-JGMeeg7vS8o/Tb5sWDD57lI/AAAAAAAAA8Q/sj9bdpV9XgQ/s72-c/DSC_0061.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>50</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-3348041872298348508</id><published>2011-04-26T15:09:00.001+05:30</published><updated>2011-04-26T15:09:56.593+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अजीबोगरीब बात'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><title type='text'>मानव ही बन गया है खतरा...</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-maIIzRV2gOA/TbaSeFWXspI/AAAAAAAAA8I/E7Vo1DFVBIU/s1600/chitra_7.bmp.bmp" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="264" src="http://4.bp.blogspot.com/-maIIzRV2gOA/TbaSeFWXspI/AAAAAAAAA8I/E7Vo1DFVBIU/s400/chitra_7.bmp.bmp" width="400" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अस्तित्व की लड़ाई का सिद्धांत इस जग में बहुत पुराना है. एक तरफ प्रकृति का प्रकोप, वहीँ दूसरी तरफ सभ्यता का प्रकोप. वनमानुष, जिन्हें मानवों का पूर्वज मन जाता है अब मानव के चलते ही भय महसूस कर रहे हैं. एक तरफ मानव बेटियों को गर्भ में ख़त्म कर रहा हैं, वहीँ मानवी लालच के चलते अब पशु-पक्षी भी तंग हो चुके हैं. कोई अपना घोंसला उजड़े जाने से त्रस्त है तो कोई जंगल में सभ्यता की आड में फैलते दोहन से. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मेघालय के गारो हिल्स में हूलाॅक गिब्बन (वनमानुष) तो मन की इन्हीं करतूतों के चलते अपनी ममता का गला तक घोंट दे रहे&amp;nbsp; हैं। नए सदस्य के जन्म लेते ही पिता दिल पर पत्थर रख उसे जमीन पर पटक देता है। आखिर, दिनों-ब-दिन सिमटते जंगल और घटते भोजन पर नई पीढ़ी कैसे जिंदा रहेगी ? वनमानुषों ने इसी सवाल का यह निर्मम हल निकाला है। याद कीजिये कंस द्वारा कृष्ण की खोज में की गई हत्याएं, पर यहाँ तो अपने अस्तित्व पर ही खतरा महसूस हो रहा है. साल दर साल अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे वनमानुषों की संख्या पिछले 25 वर्ष में 90 फीसदी कम हो गई है। औलाद से अजीज कुछ नहीं, इंसान हो या जानवर संतान सुख का भाव सबमें एक है। परन्तु सभ्यता के नाम पर&amp;nbsp; मची विकास की अंधी होड़ से विनाश की कगार पर पहुंच चुके वनमानुष शायद जिंदगी की आस ही छोड़ चुके हैं। ऐसे में इस असुरक्षा के भाव ने ही उन्हें अपनी ही संतान की जान का दुश्मन बना दिया है. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;देहरादून स्थित प्राणि विज्ञान सर्वेक्षण विभाग की टीम हूलाॅक गिब्बन पर अब तो बाकायदा शोध कर रही है। शोध के नतीजे बताते हैं कि वनमानुषों के व्यवहार में आए इस परिवर्तन का असर उनकी प्रजनन दर पर भी पड़ा है। मेघालय के जंगलों में किए जा रहे अध्ययन के निष्कर्ष से साफ है कि तेजी से कट रहे जंगलों से वनमानुषों का रहन-सहन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।हूलाॅक गिब्बन की प्रजनन की रफ्तार घटने से उनके अस्तित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां तक कि वे अपने बच्चों के कातिल बन बैठे हैं। जन्म लेते ही नर नवजात की पटक कर हत्या कर देता है। वर्ष 1990 में असम में इनकी संख्या लगभग 130 थी, जबकी आज यह घटकर 80 हो गई है। पिछले आंकड़ों पर गौर करें तो मेघालय सहित पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्यों में 25 साल पहले करीब 70 हजार के आसपास वनमानुष थे, जो आज सिर्फ तकरीबन 600 रह गए हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;ऐसे में जरुरत है कि सभ्यता&amp;nbsp;की&amp;nbsp; आड में प्रकृति का अन्धादोहन करने से बचा जाय. आंगन की गौरैया, फूलों पर मंडराती तितलियाँ, पशु-लाशों पर इतराते गिद्ध से लेकर राष्ट्रीय पशु बाघ तक खतरे में हैं. हर रोज इनके कम होने या विलुप्त होने की ख़बरें आ रही हैं, पर हम हाथ पर हाथ धरे रहकर बैठे हैं. प्रकृति और पर्यावरण से मानव का अभिन्न नाता है. यदि प्रकृति का विकास चक्र यूँ ही गड़बड़ होता रहा तो न सिर्फ हम अपनी जैव-विविधता खो देंगें, बल्कि सुनामी, कटरीना के झंझावातों से भी रोज लड़ते रहेंगें. कंक्रीट के घरों में बैठकर चाँद को छूने की ख्वाहिश रखने वाला मानव यह क्यों भूल जाता है कि उसे अपने साथ ही पशु-पक्षियों-पेड़-पौधों के लिए भी सोचना चाहिए. इस जहान में प्रकृति ने उनके लिए भी जगह मयस्सर की है, और यदि ऐसे ही हम उनका हक़ छीनकर उन्हें मौत के मुंह में धकेलते रहेंगें तो मानवता को भी मौत में मुंह में जाने से कोई नहीं रोक सकता !!&amp;nbsp; &lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-3348041872298348508?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/3348041872298348508/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=3348041872298348508' title='26 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3348041872298348508'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3348041872298348508'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/04/blog-post_26.html' title='मानव ही बन गया है खतरा...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-maIIzRV2gOA/TbaSeFWXspI/AAAAAAAAA8I/E7Vo1DFVBIU/s72-c/chitra_7.bmp.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>26</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-3975023732166614127</id><published>2011-04-11T12:18:00.000+05:30</published><updated>2011-04-11T12:19:13.260+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपनी बात'/><title type='text'>किरण बेदी को क्यों छोड़ दिया अन्ना जी ??</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;पुण्य &lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5594210482453204466" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 219px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-eyzwTQ4dB38/TaKgy11jzfI/AAAAAAAAA7w/xKy7I8DqPTc/s320/anna-hazare-2011-4-9-7-40-43.jpg" border="0" /&gt; की गंगा बह रही है, लगे हाथ सभी लोग हाथ धोकर पुण्यात्मा बन गए. इससे पहले किये गए उनके सारे पाप धुल गए...कुछ ऐसे ही लगा अपनी पिछली पोस्ट &lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/04/blog-post_09.html"&gt;'कौन सी क्रांति ला रहे हैं अन्ना ?' &lt;/a&gt;पर लिखे कुछ कमेंटों को पढ़कर. कितनों ने तो बिना पढ़े ही ख़ारिज कर दिया और किसी ने नकारात्मक मानसिकता का आरोप जड़ दिया. &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;एक सज्जन ने कहा कि देशवासी परिवर्तन चाहते हैं और इसीलिये भारत से भ्रष्टाचार मिटाने की बात करने वाले सभी के साथ हैं।....शायद इन सज्जन को पता नहीं कि हर राजनैतिक दल नारों में भ्रष्टाचार मिटाने की बात करता है, पर मात्र बात करने से भ्रष्टाचार नहीं मिटता, उसके लिए वैसे कर्मों की भी जरुरत होती है. &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;एक सज्जन ने कहा कि, देश की स्वाधीनता के लिए भी लोग अपने पूर्व नेताओं को छोड़कर महात्मा गाँधी के पीछे लग गये थे--हुआ न चमत्कार!..एक अन्य सज्जन ने जोड़ा कि -'' पर ये मत भूलिये कि एक बार फ़िर एक बूढ़ा शरीर जीने की राह दे रहा है, उसने बता दिया किया कि बदलाव के लिये गाँधी कितने ज़रूरी थे हैं और रहेंगे !''.....शायद अपनी स्मरण शक्ति पर जोर दें तो पता चलेगा कि जो लोग 'गाँधी के पीछे लग गये थे' वे उन्हें ही पीछे छोड़कर आज तक उनके नाम पर राजनीति कर रहे हैं और उनके नाम की रोटी खा रहे हैं. गाँधी जी का बदलाव आज कहीं नहीं दिख रहा है. यही हाल तो जे.पी. के साथ भी हुआ था. अपनों ने ही वैचारिक रूप से पीठ में छुरा घोंप दिया. &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;एक सज्जन ने हुंकार भरी है कि-'' तथ्य यह है कि आम जनता नेता/आइ.ए.ऐस/आइ.पी.ऐस के निकम्मे, भ्रष्ट और प्रशासनहीनतंत्र से त्रस्त है और परिवर्तन चाहती है। रिश्वत से लेकर आतंकवाद तक, देश की अधिकांश समस्याओं की जड में सत्ता पर काबिज़ यही निकम्मा/भ्रष्ट वर्ग है।''...मानो ये नेता, अधिकारी आसमान से टपकते हैं या दूसरे देश से आयातित होकर आए हैं. किरण बेदी के बारे में क्या कहेंगें. जाति-धर्म-क्षेत्र-पैसा के नाम पर वोट देनी वाली जनता के बारे में इन सज्जन का मौन अखरता है. आखिर जब जड़ में ही दीमक लगे हुए हैं तो वृक्ष कहाँ से मजबूत होगा ? एक देशभक्त ने क्रांतिकारी लहजों में लिखा है कि- ''अगर हम सिर्फ सोचते ही रहे तो ये भ्रष्टाचार का दानाव इतना बड़ा हो जाएगा कि आने वाले कल हमारे ही बच्चों को निगल जाएगा .''...हम भी तो वही कह रहे हैं कि सोचिये नहीं कि कोई मसीहा आयेगा, खुद कदम उठाइए. &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;''अन्ना को व्यक्ति नहीं एक विचारधारा मानिए तो आपके आलेख का नजरिया बदल जायेगा...'' एक सलाह यह भी दी गई है, पर सवाल मानने का नहीं कुछ करने का है. दुर्भाग्यवश इस देश में हम सिर्फ मानते, जानते, चर्चा करते और लोगों की हाँ में हाँ मिलते हैं. एक सज्जन ने तर्क दिया है कि-'' लेकिन क्या ये पहली बार नहीं हुआ सरकार को जनता की आवाज़ के सामने घुटने टेकने पड़े.''...जनाब! हर पाँच साल बाद ये नेता हमारे सामने घुटने टेकते हैं, पर तब हम अपनी जाती-धर्म-स्वार्थ देखते हैं. उसी समय क्यों नहीं चेत जाते ? &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;एक आलोचक ने लिखा कि -''जिन्हें कोई काम करना नहीं आता वे आलोचक बन जाते हैं। समस्या का पता सबको है। समाधान खोजने की जहमत उठाना कम लोग चाहते हैं।''...आप भी तो मेरी ही बात दुहरा रहे हैं. समाधान खोजने की बजाय हम मसीहों की तलाश करते हैं कि एक दिन वो आयेगा और हमको मुक्ति दिला जायेगा. &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;..ऐसी ही ढेर सारी प्रतिक्रियाएं मेरी पोस्ट पर आईं, पर सबमें हुजूम की हाँ में हाँ मिलाने वाला देशभक्त, अन्यथा देशद्रोही जैसी भावना ही चमकी. बिना बात को समझे किसी ने नकारात्मकवादी तो किसी ने सहमति जताने वालों की ही उथले सोच का दर्शाकर अपना गंभीर परिचय दे दिया. सवाल अभी भी है की हम अन्ना की व्यक्ति पूजा कर रहे हैं या विचारधारा पर जोर दे रहे हैं. अपने बारे में सुनने में इतने अ-सहिष्णु तो गाँधी जी भी नहीं थे, फिर ये अन्ना के समर्थक ?? &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;************************************** &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;बाबा रामदेव ने कहा कि सिविल सोसाईटी के नाम पर जिन पाँच नामों को रखा गया है, उनमें पिता-पुत्र को रखना अनुचित है तो हंगामा मच गया..आखिर क्या गलत कहा बाबा रामदेव ने ? जिस समिति को 'समावेशी' की संज्ञा दी जा रही है उसमें किरण बेदी को रखने पर भला क्या आपत्ति थी. इस पूरी समिति में एक भी महिला का ना होना अखरता है. किरण बेदी को शामिल कर जहाँ इसे वास्तविक रूप में समावेशी बनाया जा सकता था, वहीँ ब्यूरोक्रेट के रूप में उन्हें अन्य सदस्यों से ज्यादा व्यावहारिक अनुभव भी है. अन्ना हजारे जी का यह कहना कि -''भ्रष्टाचार विरोधी कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए अनुभवी और क़ानूनी विशेषज्ञ कि आवश्यकता थी'', तो क्या किरण बेदी के अनुभवों पर बाप-बेटे का अनुभव भरी पड़ गया. दुर्भाग्यवश, अन्ना हजारे अपनी पहली ही कोशिश में विवादों में आ गए. एक महिला और अनुभवी व्यक्तित्व किरण बेदी की उपेक्षा कर और बाप-बेटे की जोड़ी को तरजीह देकर अन्ना किस भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से लड़ने जा रहे हैं. वह किस आधार पर दूसरों पर अंगुली उठायेंगें ? यह जरुर बहस का विषय बन गया है. उन्होंने बाप-बेटे कि जोड़ी को तरजीह देकर सोनिया गाँधी और तमाम नेताओं के के लिए इतनी तो सहूलियत पैदा कर दी कि उनके वंशवाद पर अन्ना द्वारा भविष्य में कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगने जा रहा ? दूसरे समिति का अध्यक्ष नागरिक समाज से होने कि बात अस्वीकार कर सरकार ने अपने संकट मोचक प्रणव मुखर्जी को अध्यक्ष बना दिया. वैसे भी प्रणब दा विवादों को सम्मानजनक ढंग से सुलझाने के लिए ही तो जाने जाते हैं. &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;एक सवाल उन लोगों से जिन्होंने मेरी इस बात पर आपत्ति दर्ज की की- 'आज अन्ना हट जाएँ तो हर कोई अपने बैनर और कैंडल उठाकर अपनी खोल में सिमट जायेगा. हम भीड़ का हिस्सा बनकर नारा लगाना जानते हैं, पर खुद क्यों कोई पहल क्यों नहीं करते ?'...आखिर क्यों अन्ना के अनशन ख़त्म करते ही वे हट गए. क्यों नहीं अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई लड़ने बैठ गए. अन्ना ने यदि अलख जगाई तो उस आन्दोलन का प्रभाव तब दिखता जब हर क्षेत्र -जनपद -राज्य में भ्रष्टाचार के विरोधी अन्ना के बिना भी इस मुहिम को आगे बढ़ाते. पर यहाँ तो राजनैतिक दलों की रैली की तरह अन्ना के उठते ही भीड़ अपना बोरिया-बिस्तर लेकर घर चले गए. यदि वाकई इस भीड़ में जन चेतना पैदा करने की ताकत होती तो वह रूकती नहीं बल्कि अन्ना की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज के निचले स्तर तक जाकर कार्य करती और जन-जागरूकता फैलाती. आन्दोलन के लिए निरंतरता चाहिए, न की तात्कालिकता. &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;वैसे भी इस देश में तमाम नियम-कानून हैं, एक कानून और सही ? कानूनों से यदि भ्रष्टाचार मिटता तो हमें यह दिन देखने को नहीं मिलता. अधिसूचना पर खुश होने वाले यह क्यों भूल रहे हैं कि हमारे यहाँ जब किसी प्रकरण को ख़त्म करना होता है तो समिति बना दी जाती है. अभी तक तो उन्हीं समितियों का नहीं पता जो पिछले सालों में गठित हुई थीं, फिर यह नई समिति, जिसकी रिपोर्ट शायद बाध्यकारी भी नहीं होगी. इस खुशफहमी में रहने की कोई जरुरत नहीं कि लोकपाल के पास ऐसी कोई जादुई छड़ी होगी कि वह उसे घुमायेगा और देश से भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा. कानूनों से भ्रष्टाचार नहीं ख़त्म होता, बल्कि इसके लिए इच्छा शक्ति की जरुरत होती है. जरुरी है कि लोग स्वत: स्फूर्त प्रेरित हों और वास्तविक व्यवहार में भी वैसा ही आचरण करें. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-3975023732166614127?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/3975023732166614127/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=3975023732166614127' title='33 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3975023732166614127'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/3975023732166614127'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/04/blog-post_11.html' title='किरण बेदी को क्यों छोड़ दिया अन्ना जी ??'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-eyzwTQ4dB38/TaKgy11jzfI/AAAAAAAAA7w/xKy7I8DqPTc/s72-c/anna-hazare-2011-4-9-7-40-43.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>33</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-6215653079262242241</id><published>2011-04-09T18:21:00.000+05:30</published><updated>2011-04-09T18:21:33.308+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोचें-विचारें'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपनी बात'/><title type='text'>कौन सी क्रांति ला रहे हैं अन्ना ??</title><content type='html'>आजकल अन्ना हजारे चर्चा में हैं और साथ ही भ्रष्टाचार और जन लोकपाल को लेकर उनका अभियान भी. चारों तरफ अन्ना के गुणगान हो रहे हैं, कोई उन्हें गाँधी बता रहा है तो कोई जे.पी. कोई कैंडल-मार्च निकाल रहा है तो कोई उनके पक्ष में धरने पर बैठा है. राजनेता से लेकर अभिनेता तक, मीडिया से लेकर युवा वर्ग तक हर कोई अन्ना के साथ खड़ा नजर आना चाहता है. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन क्या वाकई अन्ना के इस अभियान का कोई सार्थक अर्थ है ? इस मुहिम का कोई सकारात्मक अर्थ निकलने जा रहा है. इस देश में भ्रष्टाचार ही एक मुद्दा नहीं है, बल्कि कई और भी ज्वलंत मुद्दे हैं. क्या एक जन लोकपाल आ जाने से सारी समस्याएं छू-मंतर हो जायेंगीं, मानो इसके पास जादू की कोई छड़ी हो और छड़ी घुमाते ही सब रोग दूर हो जाय. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अन्य देशों में हुए आंदोलनों को देखकर इस भ्रम में रहने वाले कि अन्ना  के इस आन्दोलन के बाद भारत में भी क्रांति आ जाएगी, क्या अपनी अंतरात्मा पर हाथ रखकर बता सकेंगें कि वो जब मतदान करते हैं, तो किन आधारों पर करते हैं. चंद लोगों को छोड़ दें तो अधिकतर लोग अपनी जाति-धर्म-परिचय-राजनैतिक दल जैसे आधारों पर ही मतदान करते हैं. उनके लिए एक सीधा-साधा ईमानदार व्यक्ति किसी काम का नहीं होता, आखिरकार  वह उनके लिए थाने-कोर्ट में पैरवी नहीं कर सकता, किसी दबंग से लोहा नहीं ले सकता या उन्हें किसी भी रूप में उपकृत नहीं कर सकता.  जिस मीडिया के लोग आज अन्ना के आन्दोलन को धार दे रहे हैं, यही लोग उन्हीं लोगों के लिए पेड-न्यूज छापते हैं और उन्हें विभिन्न समितियों के सदस्य और मंत्री बनाने के लिए लाबिंग करते हैं, जिनके विरुद्ध अन्ना आन्दोलन कर रहे हैं. फ़िल्मी दुनिया से जुड़े लोगों का वैसे भी यह शगल है कि जहाँ चैरिटी दिखे, फोटो खिंचाने पहुँच जाओ. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कहते हैं साहित्य समाज को रास्ता दिखाता है, पर हमारे साहित्यजीवी तो खुद ही सत्ता से निर्देशित होते हैं. कोई किसी सम्मान-पुरस्कार के लिए, कोई संसद में बैठने के लिए तो कोई किसी विश्वविद्यालय का कुलपति बनने  के लिए या किसी अकादमी का अध्यक्ष-सदस्य बनने के लिए सत्ता की चारणी करते हैं. पर किसी के पक्ष में वक्तव्य देने में भी सबसे माहिर होते हैं ये कलमजीवी. अन्ना के इस आन्दोलन में भी उनकी भूमिका इससे ज्यादा नहीं है. दो-चार लेख लिखने और पत्र-पत्रिकाओं  के एकाध पन्ने भरकर ये अपने काम की इतिवृत्ति समझ लेते हैं. अदालत में सच को झूठ और झूठ को सच साबित करने वाले वकील भले ही अपने पेशेगत प्रतिबद्धतता की आड लें, पर पब्लिक सब जानती है. कितने लोग इस आन्दोलन के समर्थन में अपनी बैरिस्टरी छोड़ने को तैयार हैं ? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फेसबुक-ट्विटर-आर्कुट पर अन्ना के पक्ष में लिखने वाले कित्ते गंभीर हैं, यह अभी से दिखने लगा है. अभी कुछ दिनों पहले लोग बाबा रामदेव का गुणगान कर रहे थे, अब अन्ना का, फिर कोई और आयेगा, पर हम नहीं बदलेंगें. हम भीड़ का हिस्सा बनकर चिल्लाते रहेंगें कि गद्दी छोडो, जनता आती है (दिनकर) और लोग हमारे ही घरों पर कब्ज़ा कर बेदखल कर देंगें. एक शेषन जी भी आए थे. कहा करते थे राष्ट्रपति तो चोंगे वाला साधू मात्र है, उसे कोई भी शक्ति नहीं प्राप्त है, पर रिटायर्ड होते ही राष्ट्रपति का चुनाव लड़ बैठे. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गाँधी और जे.पी तो इस देश में मुहावरा बन गए हैं. हमारी छोडिये, जो उनकी बदौलत सत्ता की चाँदी काट रहे हैं वे भी  उन्हें जयंती और पुण्यतिथि में ही निपटा देते हैं. अन्ना के बहाने अपने को चर्चा में लाने की हर कोई कोशिश कर रहा है, पर सवाल है कि अन्ना के बिना इस आन्दोलन का क्या वजूद है...शायद कुछ नहीं. आज अन्ना हट जाएँ तो हर कोई अपने बैनर और कैंडल उठाकर अपनी खोल में सिमट जायेगा. हम भीड़ का हिस्सा बनकर नारा लगाना जानते हैं, पर खुद क्यों कोई पहल क्यों नहीं करते. हम कभी मुन्नाभाई से प्रेरित  होकर गांधीगिरी करते हैं, कभी दूसरे से. याद रखिये दूसरों की हाँ में हाँ मिलाकर और मौका देखकर भीड़ का हिस्सा बन जाने से न कोई क्रांति आती है और न कोई जनांदोलन खड़ा होता है.  इसके लिए जरुरी है कि लोग स्वत: स्फूर्त प्रेरित हों और वास्तविक व्यवहार में वैसा ही आचरण करें.  जिस दिन हम अपनी अंतरात्मा से ऐसा सोच लेंगें उस दिन हमें किसी बाहरी रौशनी (कैंडल) की जरुरत नहीं पड़ेगी.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-6215653079262242241?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/6215653079262242241/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=6215653079262242241' title='60 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6215653079262242241'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/6215653079262242241'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/04/blog-post_09.html' title='कौन सी क्रांति ला रहे हैं अन्ना ??'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><thr:total>60</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5969982126780741266</id><published>2011-04-04T12:10:00.001+05:30</published><updated>2011-12-30T18:32:56.279+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महत्वपूर्ण दिवस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नव वर्ष/ नव संवत्सर'/><title type='text'>नव संवत्सर से जुडी हैं कई महत्वपूर्ण घटनाएँ</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-HGQRb9Gmu_c/TZlmmjOjGKI/AAAAAAAAA7o/xbeu7-_QjBo/s1600/04_2008_16-sak4241-1_1206986430.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 250px; FLOAT: left; HEIGHT: 242px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5591613224834504866" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-HGQRb9Gmu_c/TZlmmjOjGKI/AAAAAAAAA7o/xbeu7-_QjBo/s400/04_2008_16-sak4241-1_1206986430.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है। भारत में नव वर्ष का शुभारम्भ वर्षा का संदेशा देते मेघ, सूर्य और चंद्र की चाल, पौराणिक गाथाओं और इन सबसे ऊपर खेतों में लहलहाती फसलों के पकने के आधार पर किया जाता है। इसे बदलते मौसमों का रंगमंच कहें या परम्पराओं का इन्द्रधनुष या फिर भाषाओं और परिधानों की रंग-बिरंगी माला, भारतीय संस्कृति ने दुनिया भर की विविधताओं को संजो रखा है। असम में नववर्ष बीहू के रुप में मनाया जाता है, केरल में पूरम विशु के रुप में, तमिलनाडु में पुत्थंाडु के रुप में, आन्ध्र प्रदेश में उगादी के रुप में, महाराष्ट्र में गुड़ीपड़वा के रुप में तो बांग्ला नववर्ष का शुभारंभ वैशाख की प्रथम तिथि से होता है। भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ लगभग सभी जगह नववर्ष मार्च या अप्रैल माह अर्थात चैत्र या बैसाख के महीनों में मनाये जाते हैं। पंजाब में नव वर्ष बैशाखी नाम से 13 अप्रैल को मनाई जाती है। सिख नानकशाही कैलेण्डर के अनुसार 14 मार्च होला मोहल्ला नया साल होता है। इसी तिथि के आसपास बंगाली तथा तमिल नव वर्ष भी आता है। तेलगू नव वर्ष मार्च-अप्रैल के बीच आता है। आंध्र प्रदेश में इसे उगादी (युगादि=युग$आदि का अपभ्रंश) के रूप मंे मनाते हैं। यह चैत्र महीने का पहला दिन होता है। तमिल नव वर्ष विशु 13 या 14 अप्रैल को तमिलनाडु और केरल में मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल 15 जनवरी को नव वर्ष के रुप में आधिकारिक तौर पर भी मनाया जाता है। कश्मीरी कैलेण्डर नवरेह 19 मार्च को आरम्भ होता है। महाराष्ट्र में गुडी पड़वा के रुप में मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाता है, कन्नड़ नव वर्ष उगाडी कर्नाटक के लोग चैत्र माह के पहले दिन को मनाते हैं, सिंधी उत्सव चेटी चंड, उगाड़ी और गुडी पड़वा एक ही दिन मनाया जाता है। मदुरै में चित्रैय महीने में चित्रैय तिरुविजा नव वर्ष के रुप में मनाया जाता है। मारवाड़ी और गुजराती नव वर्ष दीपावली के दिन होता है, जो अक्टूबर या नवंबर में आती है। बंगाली नव वर्ष पोहेला बैसाखी 14 या 15 अप्रैल को आता है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में इसी दिन नव वर्ष होता है। वस्तुतः भारत वर्ष में वर्षा ऋतु की समाप्ति पर जब मेघमालाओं की विदाई होती है और तालाब व नदियाँ जल से लबालब भर उठते हैं तब ग्रामीणों और किसानों में उम्मीद और उल्लास तरंगित हो उठता है। फिर सारा देश उत्सवों की फुलवारी पर नववर्ष की बाट देखता है। इसके अलावा भारत में विक्रम संवत, शक संवत, बौद्ध और जैन संवत, तेलगु संवत भी प्रचलित हैं, इनमें हर एक का अपना नया साल होता है। देश में सर्वाधिक प्रचलित विक्रम और शक संवत हैं। विक्रम संवत को सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने की खुशी में 57 ईसा पूर्व शुरू किया था। &lt;span style="color:#000099;"&gt;भारतीय नव वर्ष नव संवत्सर का आरंभ आज हो रहा है. ऐसी मान्यता है कि जगत की सृष्टि की घड़ी (समय) यही है। इस दिन भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना हुई तथा युगों में प्रथम सत्ययुग का प्रारंभ हुआ। ‘चैत्रे मासि जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि। शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति।।‘ &lt;/span&gt;अर्थात ब्रह्मा पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना चैत्र मास के प्रथम दिन, प्रथम सूर्योदय होने पर की। इस तथ्य की पुष्टि सुप्रसिद्ध भास्कराचार्य रचित ग्रंथ ‘सिद्धांत शिरोमणि‘ से भी होती है, जिसके श्लोक में उल्लेख है कि लंका नगर में सूर्योदय के क्षण के साथ ही, चैत्र मास, शुक्ल पक्ष के प्रथम दिवस से मास, वर्ष तथा युग आरंभ हुए। अतः नव वर्ष का प्रारंभ इसी दिन से होता है, और इस समय से ही नए विक्रम संवत्सर का भी आरंभ होता है, जब सूर्य भूमध्य रेखा को पार कर उत्तरायण होते हैं। इस समय से ऋतु परिवर्तन होनी शुरू हो जाती है। वातावरण समशीतोष्ण होने लगता है। ठंडक के कारण जो जड़-चेतन सभी सुप्तावस्था में पड़े होते हैं, वे सब जाग उठते हैं, गतिमान हो जाते हैं। पत्तियों, पुष्पों को नई ऊर्जा मिलती है। समस्त पेड़-पौधे, पल्लव रंग-विरंगे फूलों के साथ खिल उठते हैं। ऋतुओं के एक पूरे चक्र को संवत्सर कहते हैं। इस वर्ष नया विक्रम संवत 2068, अप्रैल 4, 2011 को प्रारंभ हो रहा है। &lt;span style="color:#660000;"&gt;संवत्सर, सृष्टि के प्रारंभ होने के दिवस के अतिरिक्त, अन्य पावन तिथियों, गौरवपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक घटनाओं के साथ भी जुड़ा है। रामचन्द्र का राज्यारोहण, धर्मराज युधिष्ठिर का जन्म, आर्य समाज की स्थापना तथा चैत्र नवरात्र का प्रारंभ आदि जयंतियां इस दिन से संलग्न हैं। इसी दिन से मां दुर्गा की उपासना, आराधना, पूजा भी प्रारंभ होती है। यह वह दिन है, जब भगवान राम ने रावण को संहार कर, जन-जन की दैहिक-दैविक-भौतिक, सभी प्रकार के तापों से मुक्त कर, आदर्श रामराज्य की स्थापना की। सम्राट विक्रमादित्य ने अपने अभूतपूर्व पराक्रम द्वारा शकों को पराजित कर, उन्हें भगाया, और इस दिन उनका गौरवशाली राज्याभिषेक किया गया। &lt;/span&gt;आप सभी को भारतीय नववर्ष विक्रमी सम्वत 2068 और चैत्री नवरात्रारंभ पर हार्दिक शुभकामनायें. आप सभी के लिए यह नववर्ष अत्यन्त सुखद हो, शुभ हो, मंगलकारी व कल्याणकारी हो, नित नूतन उँचाइयों की ओर ले जाने वाला हो !! &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5969982126780741266?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5969982126780741266/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5969982126780741266' title='17 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5969982126780741266'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5969982126780741266'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/04/blog-post_04.html' title='नव संवत्सर से जुडी हैं कई महत्वपूर्ण घटनाएँ'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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/&gt;&lt;/a&gt; &lt;strong&gt;यह जीत भी खूब रही. आखिर 28 साल बाद आया क्रिकेट में विश्व विजयी होने का सुनहरा पल. पहले आस्ट्रेलिया, फिर पाकिस्तान और अंतत: श्रीलंका...भारत ने दे ही दिया घुमा के. लीजिये इस ख़ुशी में मुंह मीठा कीजिये...!!&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-QPAZKj4MZjc/TZQv48eTjDI/AAAAAAAAA6w/3KjBF-uj_Mo/s1600/untitled.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5590145692826045490" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 316px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-QPAZKj4MZjc/TZQv48eTjDI/AAAAAAAAA6w/3KjBF-uj_Mo/s400/untitled.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#999900;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-1402701595776705937?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/1402701595776705937/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=1402701595776705937' title='11 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/1402701595776705937'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/1402701595776705937'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/04/blog-post.html' title='आखिर भारत ने दे ही दिया घुमा के...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' 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href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/8129602892689044586'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/03/blog-post_31.html' title='चक दे इण्डिया...अब दम दिखा दे और फ़ाइनल में दे घुमा के..!!'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-QPAZKj4MZjc/TZQv48eTjDI/AAAAAAAAA6w/3KjBF-uj_Mo/s72-c/untitled.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>11</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5383428378513469702</id><published>2011-03-25T09:02:00.000+05:30</published><updated>2011-03-25T09:02:00.465+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बाल-कविता'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाखी की दुनिया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महत्वपूर्ण दिवस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जन्म-दिन'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मेरा परिवार'/><title type='text'>बिटिया पाखी के जन्मदिन पर...</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-B4kk0BJWCNA/TYr00nciXzI/AAAAAAAAA6Q/ewLmaNeYais/s1600/sweet-birthday_cake.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5587547472485572402" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 359px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-B4kk0BJWCNA/TYr00nciXzI/AAAAAAAAA6Q/ewLmaNeYais/s400/sweet-birthday_cake.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;आज हमारी प्यारी बिटिया &lt;a href="http://pakhi-akshita.blogspot.com/"&gt;अक्षिता (पाखी)&lt;/a&gt; का जन्म-दिन है. अंडमान में हम दूसरी बार पाखी का जन्मदिन मना रहे हैं. अब तो पाखी की बहना तन्वी भी उसका जन्मदिन सेलिब्रेट करने के लिए आ गई हैं. पाखी के जन्मदिन पर उसके लिए एक प्यारी सी कविता लिखी है. पाखी यह कविता सुनकर बहुत खुश है, आप भी इसका आनंद उठायें और बिटिया पाखी को जन्मदिन पर अपना स्नेहिल आशीर्वाद दें-&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;आँखों में भविष्य के सपने&lt;br /&gt;चेहरे पर मधुर मुस्कान है&lt;br /&gt;अक्षिता को देखकर लगता है&lt;br /&gt;दिल में छुपाये कई अरमान है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अक्षिता के मन में इतनी उमंगें&lt;br /&gt;नन्हीं सी यह जान है&lt;br /&gt;प्यारी-प्यारी ड्राइंग बनाती&lt;br /&gt;देखकर सब हैरान हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ज्ञान पथ पर है तत्पर&lt;br /&gt;गुणों की यह खान है&lt;br /&gt;भोली सी सूरत इसकी&lt;br /&gt;हमें इस पर अभिमान है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-vKFBNgMdIB0/TYr1qbqPeVI/AAAAAAAAA6Y/2F61zkG9Mxc/s1600/DSC_5600.JPG"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5587548397034764626" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 268px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-vKFBNgMdIB0/TYr1qbqPeVI/AAAAAAAAA6Y/2F61zkG9Mxc/s400/DSC_5600.JPG" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#333333;"&gt;(चित्र में : तन्वी के आगमन पर आयोजित पार्टी में केक काटकर ख़ुशी का इजहार करती पाखी संग ममा-पापा और तन्वी)&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5383428378513469702?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5383428378513469702/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5383428378513469702' title='28 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5383428378513469702'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5383428378513469702'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/03/blog-post_25.html' title='बिटिया पाखी के जन्मदिन पर...'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-B4kk0BJWCNA/TYr00nciXzI/AAAAAAAAA6Q/ewLmaNeYais/s72-c/sweet-birthday_cake.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>28</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-1606485616260573301</id><published>2011-03-18T17:22:00.000+05:30</published><updated>2011-03-18T17:22:14.504+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बाल-कविता'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्व'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><title type='text'>बैंगन जी की होली</title><content type='html'>&lt;div align="center"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-nhyv7ShY9uQ/TYNGffC59BI/AAAAAAAAA58/vL2nU2D3pZY/s1600/bringle.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5585385469593121810" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 252px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-nhyv7ShY9uQ/TYNGffC59BI/AAAAAAAAA58/vL2nU2D3pZY/s400/bringle.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;टेढे़-मेढे़ बैंगन जी&lt;br /&gt;होली पर ससुराल चले&lt;br /&gt;लुढ़क-लुढ़क जाते हर पल&lt;br /&gt;एक मुसीबत पाल चले.&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;उनकी पत्नी भिण्डी जी&lt;br /&gt;बनी-ठनी तैयार मिलीं&lt;br /&gt;हाथ पकड़ करके उनका&lt;br /&gt;स्वागत में घर पार चलीं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;ससुरा कद्दू देख उन्हें&lt;br /&gt;रेड लाइट को लांघ चले&lt;br /&gt;टेढे़-मेढे़ बैंगन जी&lt;br /&gt;होली पर ससुराल चले.&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;उछल पड़ीं बल्लियों तभी&lt;br /&gt;लौकी सास निहाल हुईं&lt;br /&gt;तब तक मिर्ची साली जी&lt;br /&gt;मिलने को फिलहाल चलीं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;रंग भरी पिचकारी ले&lt;br /&gt;जीजा जी पर झपट पड़ीं&lt;br /&gt;बैंगन जी भी थाली में&lt;br /&gt;इधर-उधर बदहाल चले।&lt;br /&gt;टेढ़े-मेढ़े.......!!&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href="http://kkyadav.blogspot.com/"&gt;कृष्ण कुमार यादव &lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;!! होली पर्व पर आप सभी को रंग भरी शुभकामनायें !!&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-1606485616260573301?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/1606485616260573301/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=1606485616260573301' title='18 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/1606485616260573301'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/1606485616260573301'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/03/blog-post_18.html' title='बैंगन जी की होली'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-nhyv7ShY9uQ/TYNGffC59BI/AAAAAAAAA58/vL2nU2D3pZY/s72-c/bringle.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>18</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5755147900693819915</id><published>2011-03-12T16:07:00.001+05:30</published><updated>2011-03-12T16:13:44.207+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महिला दिवस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नारी-जगत'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नारी-सशक्तिकरण'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चर्चा में ब्लॉग/आकांक्षा'/><title type='text'>जनसत्ता में 'शब्द-शिखर' की पोस्ट</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-V-gLrGqisCA/TXtLqcTNbBI/AAAAAAAAA5k/S1iGkizRVTE/s1600/DPS.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5583139355579214866" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 240px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-V-gLrGqisCA/TXtLqcTNbBI/AAAAAAAAA5k/S1iGkizRVTE/s400/DPS.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;'शब्द शिखर' पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च, 2010) को प्रस्तुत पोस्ट &lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/03/blog-post_08.html"&gt;'महिला होने पर गर्व' &lt;/a&gt;को प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक अख़बार जनसत्ता के नियमित स्तंभ ‘समांतर’ में 12 मार्च, 2011 को 'किसका समाज' शीर्षक से स्थान दिया गया है. जनसत्ता में दूसरी बार मेरी किसी पोस्ट की चर्चा हुई है और इससे पूर्व 'शब्द शिखर' पर 21 अक्तूबर, 2010 को प्रस्तुत पोस्ट 'कहाँ गईं वो तितलियाँ' को जनसत्ता के ‘समांतर’ स्तम्भ में 7 दिसंबर, 2010 को &lt;a href="http://shabdshikhar.blogspot.com/2010/12/blog-post_09.html"&gt;'गुम होती तितली' &lt;/a&gt;शीर्षक से स्थान दिया गया था. समग्र रूप में प्रिंट-मीडिया में 24वीं बार मेरी किसी पोस्ट की चर्चा हुई है.. आभार !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे पहले शब्द-शिखर और अन्य ब्लॉग पर प्रकाशित मेरी पोस्ट की चर्चा दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला,राष्ट्रीय सहारा,राजस्थान पत्रिका, आज समाज, गजरौला टाईम्स, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, दस्तक, आई-नेक्स्ट, IANS द्वारा जारी फीचर में की जा चुकी है. आप सभी का इस समर्थन व सहयोग के लिए आभार! यूँ ही अपना सहयोग व स्नेह बनाये रखें !! &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7291505309636252413-5755147900693819915?l=shabdshikhar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/feeds/5755147900693819915/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7291505309636252413&amp;postID=5755147900693819915' title='22 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5755147900693819915'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7291505309636252413/posts/default/5755147900693819915'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shabdshikhar.blogspot.com/2011/03/blog-post_12.html' title='जनसत्ता में &apos;शब्द-शिखर&apos; की पोस्ट'/><author><name>Akanksha Yadav</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10606407864354423112</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='28' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-mQ5pbtPeVJ0/Tb-4R8Ntv8I/AAAAAAAAA84/0VUt1DplPOY/s220/Akanksha.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-V-gLrGqisCA/TXtLqcTNbBI/AAAAAAAAA5k/S1iGkizRVTE/s72-c/DPS.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>22</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7291505309636252413.post-5085535928422354684</id><published>2011-03-10T07:02:00.002+05:30</published><updated>2011-03-10T07:02:00.151+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चित्रों में'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='काला पानी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के.के. यादव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अंडमान से'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्वतंत्रता आन्दोलन'/><title type='text'>105 साल का हो गया सेलुलर जेल</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/S_yz6vfd1OI/AAAAAAAAAgI/XFJPGVEUwJM/s1600/Cellular+Jail+-+Akanksha+Yadav+-+KK+Yadav+-+Akshita.JPG"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5475449068737909986" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/S_yz6vfd1OI/AAAAAAAAAgI/XFJPGVEUwJM/s400/Cellular+Jail+-+Akanksha+Yadav+-+KK+Yadav+-+Akshita.JPG" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;यह तीर्थ महातीर्थों का है.&lt;br /&gt;मत कहो इसे काला-पानी.&lt;br /&gt;तुम सुनो, यहाँ की धरती के&lt;br /&gt;कण-कण से गाथा बलिदानी (गणेश दामोदर सावरकर) &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;आजकल अंडमान-निकोबार दीप समूह में हूँ. वही अंडमान, जो काला पानी के लिए प्रसिद्द है. आप भी सोचते होंगे कि भला काला-पानी का क्या रहस्य है. तो आइये आज आपको उसी काला पानी की सैर कराते हैं-&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/S_yw7-vhRUI/AAAAAAAAAfg/j4rIJdN7hxw/s1600/Cellular+Jail+-Akanksha+3.JPG"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5475445791476761922" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/S_yw7-vhRUI/AAAAAAAAAfg/j4rIJdN7hxw/s400/Cellular+Jail+-Akanksha+3.JPG" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;भारत का सबसे बड़ा केंद्रशासित प्रदेश अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह सुंदरता का प्रतिमान है और सुंदर दृश्यावली के साथ सभी को आकर्षित करता है। बंगाल कि खाड़ी के मध्य प्रकृति के खूबसूरत आगोश में 8249 वर्ग कि0मी0 में विस्तृत 572 द्वीपों (अंडमान-550, निकोबार-22) के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भले ही मात्र 38 द्वीपों (अंडमान-28, निकोबार-10) पर जन-जीवन है, पर इसका यही अनछुआपन ही आज इसे 'प्रकृति के स्वर्ग' रूप में परिभाषित करता है। निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप में ही भारत का सबसे दक्षिणी छोर 'इंदिरा प्वाइंट' भी अवस्थित है, जो कि इंडोनेशिया से लगभग 150 कि0मी0 दूर है। यहीं अंडमान में ही ऐतिहासिक सेलुलर जेल है. सेलुलर जेल का निर्माण कार्य 1896 में आरम्भ हुआ तथा 10 साल बाद &lt;strong&gt;10 मार्च 1906 को पूरा हुआ.&lt;/strong&gt; सेलुलर जेल के नाम से प्रसिद्ध इस कारागार में 698 बैरक (सेल) तथा 7 खण्ड थे, जो सात दिशाओं में फैल कर पंखुडीदार फूल की आकृति का एहसास कराते थे। इसके मध्य में बुर्जयुक्त मीनार थी, और हर खण्ड में तीन मंजिलें थीं। &lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;(इस दृश्य के माध्यम से इसे समझा जा सकता है)&lt;/span&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/S_ywaYavB7I/AAAAAAAAAfY/dgAIZd0kvUE/s1600/Cellular+Jail-+Akanksha+2.JPG"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5475445214253352882" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_KOWXNS-gPCM/S_ywaYavB7I/AAAAAAAAAfY/dgAIZd0kvUE/s400/Cellular+Jail-+Akanksha+2.JPG" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; अंडमान को काला पानी कहा जाता रहा है तो इसके पीछे बंगाल की खाड़ी और जेल की ही भूमिका है. अंग्रेजों के दमन का यह एक काला अध्याय था, जिसके बारे में सोचकर अभी भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. कहते हैं कि अंडमान का नाम हनुमान जी के नाम पर पड़ा. पहले भगवान राम ने लंक
