शब्द-शिखर

बुधवार, 31 दिसंबर 2008

नव वर्ष का प्रथम प्रभात

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  नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है, खुशियों की बस इक चाहत है।   नया जोश, नया उल्लास, खुशियाँ फैले, करे उजास।   नैतिकता के मूल...
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गुरुवार, 4 दिसंबर 2008

21वीं सदी की बेटी

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यूँ ही डायरी में अपने मनोभावों को लिखना मेरा शगल रहा है। ऐसे ही किसी क्षण में इन मनोभावों ने कब कविता का रूप ले लिया, पता ही नहीं चला। पर...
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गुरुवार, 27 नवंबर 2008

चित्र भी बोलते हैं...

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  चित्रों की अपनी अलग ही पहचान है. कभी-कभी चित्र भी बोलते हैं...शब्दों की जरुरत ही नहीं रहती. राष्ट्र-प्रेम और देश-भक्ति को दर्शाते ऐस...
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सोमवार, 24 नवंबर 2008

'सृजन' और 'सम्मान' की कड़ियाँ...

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सृजन से सम्मान का अटूट सम्बन्ध है. इस बीच हमारी तमाम रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं. इन स...
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शुक्रवार, 21 नवंबर 2008

'अमर उजाला' में आकांक्षा यादव का आलेख : वह तो झाँसी वाली रानी थी

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19 नवम्बर 2008 को रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर मेरा  एक लेख अंतर्जाल पत्रिका "साहित्य शिल्पी" पर "खूब लड़ी मरदानी, अरे झ...
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गुरुवार, 20 नवंबर 2008

'ब्लागिंग' और 'एस.एम.एस.'

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ब्लागिंग आज के दौर की विधा है. पत्र-पत्रिकाओं से परे ब्लॉग-जगत का अपना भरा-पूरा संसार है, रचनाधर्मिता है, पाठक-वर्ग है. कई बार बहुत कुछ ऐस...
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