शब्द-शिखर

गुरुवार, 25 जून 2009

सावन के बहाने कजरी के बोल

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मौसम में फिलहाल बेहद गर्मी है। हर किसी को सावन की रिमझिम फुहारों का इन्तजार है। इसके साथ ही चारों तरफ उल्लास छा जाता है। जहाँ प्रकृति नित ...
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सोमवार, 22 जून 2009

पंचतंत्र की कहानियों का उद्भव

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पंचतंत्र की कहानियाँ तो सभी ने सुनी और पढ़ी होंगी। इससे जुड़ी तमाम कहानियाँ पशु, पक्षी, पेड़, प्रकृति तथा राजा-रानी को आधार बना कर रची गयी हैं।...
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रविवार, 21 जून 2009

भारतीय पित्री-सत्तात्मक समाज में फादर्स-डे

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आज फादर्स डे है. माँ और पिता ये दोनों ही रिश्ते समाज में सर्वोपरि हैं. इन रिश्तों का कोई मोल नहीं है. पिता द्वारा अपने बच्चों के प्रति प्रेम...
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गुरुवार, 18 जून 2009

खूब लड़ी मरदानी, अरे झांसी वारी रानी (18 जून बलिदान दिवस पर विशेष)

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स्वतंत्रता और स्वाधीनता प्राणिमात्र का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसी से आत्मसम्मान और आत्मउत्कर्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। भारतीय राष्ट्रीयता को...
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मंगलवार, 16 जून 2009

ईव-टीजिंग और ड्रेस कोड

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कालेज लाइफ का नाम सुनते ही न जाने कितने सपने आँखों में तैर आते हैं। तमाम बंदिशों से परे वो उन्मुक्त सपने, उनको साकार करने की तमन्नायें, दोस्...
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सोमवार, 15 जून 2009

अमर उजाला में 'शब्द-शिखर' ब्लॉग की चर्चा

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''शब्द शिखर'' पर 13 जून 2009 को प्रस्तुत लेख ''सबसे बड़ा दान है देहदान, नेत्रदान'' को प्रतिष्ठित हिन्दी दैन...
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शनिवार, 13 जून 2009

सबसे बड़ा दान है देहदान, नेत्रदान

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दान से पुण्य कोई कार्य नहीं होता। दान जहाँ मनुष्य की उदारता का परिचायक है, वहीं यह दूसरों की आजीविका चलाने या किसी सामूहिक कार्य में संकल्पब...
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शुक्रवार, 5 जून 2009

पृथ्वी हो रही विकल (विश्व पर्यावरण दिवस पर)

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खत्म होती वृक्षों की दुनिया पक्षी कहाँ पर वास करें किससे अपना दुखड़ा रोयें किससे वो सवाल करें कंक्रीटों की इस दुनिया में ...
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शुक्रवार, 15 मई 2009

एक गाँव के लोगों ने दहेज़ न लेने-देने का उठाया संकल्प

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दहेज लेने के किस्से समाज में आम हैं। इस कुप्रथा के चलते न जाने कितनी लड़कियों के हाथ पीले होने से रह गये। प्रगतिशील समाज में अब तमाम ऐसे उदाह...
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सोमवार, 6 अप्रैल 2009

श्मशान

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कंक्रीटों के जंगल में गूँज उठते हैं सायरन शुरू हो जाता है बुल्डोजरों का ताण्डव खाकी वर्दियों के बीच दहशतजदा लोग निहारते हैं याचक मुद्रा में ...
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शनिवार, 28 मार्च 2009

ग्रेगोरियन कैलेण्डर से परे भी है नव-वर्ष

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मानव इतिहास की सबसे पुरानी पर्व परम्पराओं में से एक नववर्ष है। नववर्ष के आरम्भ का स्वागत करने की मानव प्रवृत्ति उस आनन्द की अनुभूति से जुड़ी ...
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मंगलवार, 10 मार्च 2009

होली के रंग-बिरंगे अनूठे पर्व की शुभकामनायें

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!!! होली के इस रंग-बिरंगे अनूठे पर्व की आप सभी को शुभकामनायें !!!
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शनिवार, 7 मार्च 2009

आजादी के आन्दोलन में भी अग्रणी रही नारी

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स्वतंत्रता और स्वाधीनता प्राणिमात्र का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसी से आत्मसम्मान और आत्मउत्कर्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। भारतीय राष्ट्रीयता को...
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बुधवार, 4 मार्च 2009

एक वृक्ष देता है 15.70 लाख के बराबर सम्पदा

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वृक्ष हैं तो जीवन है। वृक्षों के बिना धरती बंजर है। वृक्ष न सिर्फ धरती के आभूषण हैं बल्कि मानवीय जीवन का आधार भी हैं। वृक्ष हमें प्रत्यक्ष ...
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शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2009

अथर्ववेद के प्रेमगीत

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‘‘अभी से चढ़ने लगा वेलेण्टाइन-डे का खुमार‘‘ पोस्ट में हमने जिक्र किया था कि अथर्ववेद में समाहित प्रेम गीत भला किसको न बांध पायेंगे। जो लोग प्...
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गुरुवार, 12 फ़रवरी 2009

राष्ट्रीय सहारा में ‘शब्द शिखर‘ ब्लॉग की चर्चा

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'शब्द शिखर' पर 5 फरवरी 2009 को प्रस्तुत लेख 'अभी से चढ़ने लगा वेलेण्टाइन-डे का खुमार‘ को प्रतिष्ठित हिन्दी दैनिक पत्र ‘राष्ट्रीय ...
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शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2009

अभी से चढ़ने लगा वेलेण्टाइन-डे का खुमार

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वसंत का मौसम आ गया है। मौसम में रूमानियत छाने लगी है। हर कोई चाहता है कि अपने प्यार के इजहार के लिए उसे अगले वसंत का इंतजार न करना पड़े। सारी...
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गुरुवार, 5 फ़रवरी 2009

अमर उजाला में 'शब्द-शिखर' ब्लॉग की चर्चा

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''शब्द शिखर'' पर 3 फरवरी 2009 को प्रस्तुत लेख ''भारत में भी फैल रहा है वेडिंग-रिंग्स डे'' को प्रतिष्ठित हिन्...
21 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 3 फ़रवरी 2009

भारत में भी फैल रहा है ''वेडिंग-रिंग्स डे''

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संसार में कई चीजें ऐसी होती हैं, जो हमें यूँ ही भाने लगती हैं। भारतीय संस्कृति में अधिकतर चीजें हमारे रीति-रिवाजों एवं संस्कारों से उद्गारित...
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सोमवार, 26 जनवरी 2009

लोक चेतना में स्वाधीनता की लय

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स्वतंत्रता व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। आजादी का अर्थ सिर्फ राजनैतिक आजादी नहीं अपितु यह एक विस्तृत अवधारणा है, जिसमें व्यक्ति से लेकर रा...
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मंगलवार, 6 जनवरी 2009

सिमटता आदमी

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सिमट रहा है आदमी हर रोज अपने में भूल जाता है भावनाओं की कद्र हर नयी सुविधा और तकनीक घर में सजाने के चक्कर में देखता है दुनिया को टी0 वी0 चैन...
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बुधवार, 31 दिसंबर 2008

नव वर्ष का प्रथम प्रभात

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  नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है, खुशियों की बस इक चाहत है।   नया जोश, नया उल्लास, खुशियाँ फैले, करे उजास।   नैतिकता के मूल...
33 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 4 दिसंबर 2008

21वीं सदी की बेटी

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यूँ ही डायरी में अपने मनोभावों को लिखना मेरा शगल रहा है। ऐसे ही किसी क्षण में इन मनोभावों ने कब कविता का रूप ले लिया, पता ही नहीं चला। पर...
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गुरुवार, 27 नवंबर 2008

चित्र भी बोलते हैं...

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  चित्रों की अपनी अलग ही पहचान है. कभी-कभी चित्र भी बोलते हैं...शब्दों की जरुरत ही नहीं रहती. राष्ट्र-प्रेम और देश-भक्ति को दर्शाते ऐस...
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सोमवार, 24 नवंबर 2008

'सृजन' और 'सम्मान' की कड़ियाँ...

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सृजन से सम्मान का अटूट सम्बन्ध है. इस बीच हमारी तमाम रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं. इन स...
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