शब्द-शिखर

गुरुवार, 31 मार्च 2011

चक दे इण्डिया...अब दम दिखा दे और फ़ाइनल में दे घुमा के..!!

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!!...चक दे इण्डिया...अब दम दिखा दे और फ़ाइनल में दे घुमा के..!!
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शुक्रवार, 25 मार्च 2011

बिटिया पाखी के जन्मदिन पर...

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आज हमारी प्यारी बिटिया अक्षिता (पाखी) का जन्म-दिन है. अंडमान में हम दूसरी बार पाखी का जन्मदिन मना रहे हैं. अब तो पाखी की बहना तन्वी भी उसका...
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शुक्रवार, 18 मार्च 2011

बैंगन जी की होली

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टेढे़-मेढे़ बैंगन जी होली पर ससुराल चले लुढ़क-लुढ़क जाते हर पल एक मुसीबत पाल चले. उनकी पत्नी भिण्डी जी बनी-ठनी तैयार मिलीं हाथ पकड़ करके उनक...
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शनिवार, 12 मार्च 2011

जनसत्ता में 'शब्द-शिखर' की पोस्ट

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'शब्द शिखर' पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च, 2010) को प्रस्तुत पोस्ट 'महिला होने पर गर्व' को प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक अख...
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गुरुवार, 10 मार्च 2011

105 साल का हो गया सेलुलर जेल

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यह तीर्थ महातीर्थों का है. मत कहो इसे काला-पानी. तुम सुनो, यहाँ की धरती के कण-कण से गाथा बलिदानी (गणेश दामोदर सावरकर) आजकल अंडमान-निकोबार दी...
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मंगलवार, 8 मार्च 2011

महिला होने पर गर्व (महिला दिवस पर विशेष)

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महिला-दिवस सुनकर बड़ा अजीब लगता है. क्या हर दिन सिर्फ पुरुषों का है, महिलाओं का नहीं ? पर हर दिन कुछ कहता है, सो इस महिला दिवस के मनाने की भ...
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बुधवार, 2 मार्च 2011

कहाँ गया फाउण्टेन पेन..

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पिछले दिनों आलमारी में रखा पुराना सामान उलट-पुलट रही थी कि नजर एक फाउण्टेन पेन पर पड़ी। वही फाउण्टेन पेन जो कभी अच्छी व स्टाइलिश राइटिंग का म...
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मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

शाहों के शाह, हमारे नौकरशाह! (कवि-मन कपिल सिब्बल जी की व्यथा)

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(कहते हैं जब अपनी व्यथा किसी से न कह पायें तो कविता में उतार दें. यही कारण है कि आज तमाम नामचीन लोग कवितायेँ लिखते हैं, कोई चोरी-छुपे डायरी ...
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शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

तुम्हारी ख़ामोशी

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तुम हो मैं हूँ और एक खामोशी तुम कुछ कहते क्यूँ नहीं तुम्हारे एक-एक शब्द मेरे वजूद का अहसास कराते हैं तुम्हारी पलकों का उठना व गिरना तुम्हारा...
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शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

प्रिया आ...

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वेलेण्टाइन डे का असर अभी से दिखने लगा है. चारों तरफ प्यार की धूम मची है. अब तो यह पूरा व्यवसाय हो गया है. हर कोई इसे अपने ढंग से यादगार ...
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मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

सखि वसंत आया...

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''सखि वसंत आया भरा हर्ष वन के मन नवोत्कर्ष छाया.'' (निराला) वसंत पंचमी का आगमन हो चुका है. एक तरफ वसंत का सुहाना आगमन, वहीँ...
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सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

क्या आप जानते हैं..

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क्या आप जानते है इंडिया का वह स्थान जहाँ सबसे सस्ता भोजन उपलब्ध है ? ............ चाय = 1 रूपया प्रति चाय सूप = 5.50 रुपये दाल = 1.50 ...
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शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

बिटिया रानी तीन माह की..

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वक़्त कितनी तेजी से बीतता है, पता ही नहीं चलता है. देखते ही देखते हमारी दूसरी बिटिया रानी तन्वी कल तीन माह की हो गईं. इनका ख्याल रखने के चक्...
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बुधवार, 26 जनवरी 2011

गणतंत्र दिवस की बधाईयाँ

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!! गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाईयाँ !!
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सोमवार, 24 जनवरी 2011

मैं अजन्मी...

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मेरी यह कविता 'इण्डिया टुडे' पत्रिका के परिशिष्ट 'इण्डिया टुडे स्त्री' (3 मार्च, 2010) में प्रकाशित हुई थी। आज 'राष...
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सोमवार, 17 जनवरी 2011

मत ढूंढो कविता इसमें : वंदना गुप्ता

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आज शब्द-शिखर पर प्रस्तुत है वंदना गुप्ता जी की एक कविता. वंदना अंतर्जाल पर जिंदगी एक खामोश सफ़र के माध्यम से सक्रिय हैं। दिल से निकले उदगारो...
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बुधवार, 12 जनवरी 2011

काश कि युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद से कुछ सीखती...

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आज 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती है. इस शुभ दिन पर उनका पुनीत स्मरण. स्वामी जी के बारे में हम सभी बचपन से ही पढ़ते आ रहे हैं. स्व...
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सोमवार, 10 जनवरी 2011

प्रेम गीत : यशोधरा यादव ‘यशो‘

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आपके दामन से मेरा, जन्म का नाता रहा है , प्यार की गहराइयों का, राज बतलाता रहा है। मौन मत बैठो कहो कुछ, आज मौसम है सुहाना, कलखी धुन ने बजाया,...
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गुरुवार, 6 जनवरी 2011

‘अहसास’ हूँ मैं

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आज 'शब्द-शिखर' पर प्रस्तुत है सुमन मीत जी की एक कविता. मीत, अंतर्जाल पर बावरा मन के माध्यम से सक्रिय हैं। एक अबोध श...
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सोमवार, 3 जनवरी 2011

मंथन

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आज शब्द-शिखर पर प्रस्तुत है वंदना गुप्ता जी की एक कविता. वंदना अंतर्जाल पर जिंदगी एक खामोश सफ़र के माध्यम से सक्रिय हैं। मंथन किसी का भी करो...
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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

'उल्लास'....नव वर्ष का

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नव वर्ष की बेला सामने आकर खड़ी है. न जाने कितने विचार आते हैं, जाते हैं. कुछ खोया तो कुछ पाया. नए साल को लेकर तमाम आकांक्षाएं उभरने लगती हैं...
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शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

क्रिसमस की धूम...

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क्रिसमस त्यौहार बड़ा अलबेला है.यहाँ अंडमान में तो इसे खूब धूम धाम के साथ मनाया जा रहा है. पहली बार इस त्यौहार को इतने नजदीक से महसूस कर रही ...
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रविवार, 19 दिसंबर 2010

वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण की अनुपम 'परिकल्पना'

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हिंदी ब्लागिंग में नित नए प्रयोग हो रहे हैं. कोई रचनाधर्मिता के स्तर पर तो कहीं विश्लेषण के स्तर पर. इन सबके बीच लखनऊ के ब्लागर रवीन्द्र प्...
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सोमवार, 13 दिसंबर 2010

भारत में फैलता एन0 जी0 ओ0 का बाजार

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आजकल भारत में एन0जी0ओ0 खोलना एक व्यवसाय हो गया है। हर व्यक्ति किसी-न-किसी बहाने एन0जी0ओ0 खोलता है और फंडिंग के लिए बड़े-बड़े दावे करता है। हाल...
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गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

जनसत्ता में 'शब्द-शिखर' की तितलियाँ

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'शब्द शिखर' पर 21 अक्तूबर, 2010 को प्रस्तुत पोस्ट 'कहाँ गईं वो तितलियाँ' को प्रतिष्ठित दैनिक अख़बार जनसत्ता के नियमित स्तंभ ...
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