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सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

रचनाधर्मी का 'शब्द-शिखर'

जब से ब्लॉग राइटिंग का ट्रेंड  शुरू हुआ है, लोगों की लेखन में दिलचस्पी बढ़ गई है। कुछ लोग कभी-कभार अपने ब्लॉग पर पोस्ट करते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं, जो ब्लॉग को नियमित रूप से अपडेट करते रहते हैं । इसमें  कोई दो राय नहीं हैं कि  ब्लॉग ने उन लोगों को लिखने का मंच दिया हैं, जिनके मन में विचार तो कुलबुलाते रहते थे, लेकिन उन्हें अभिव्यक्त करने का कोई जरिया उनके पास नहीं था । ऐसे में ब्लॉग उनके लिए एक वरदान के रूप में सामने आया । यही वजह है कि अब वे ब्लॉग पर रोजमर्रा के छोटे–मोटे अनुभवों को साझा करने से लेकर अंतर्राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक मुद्दों पर भी बेबाक राय प्रकट कर रहे हैं । जिन्हें कहानी, कविताएँ, गीत, गज़ल, नज़्म, आदि लिखने का शौक है, वे भी अपनी रचनाओं को ब्लॉग के माध्यम  से दूसरों तक पहुँचा रहे हैं । 

आज जो ब्लॉग चुना है, उसकी ब्लॉगर आकांक्षा यादव भी ब्लॉगिंग में काफी सक्रिय हैं। वे अपने ब्लॉग ‘शब्द-शिखर’ पर हर छोटे-बड़े फ़ेस्टिवल्स  पर कविताएँ लिखती हैं तो समाज से जुड़े विषयों पर भी अपनी राय प्रकट करती हैं। यही नहीं, देश-विदेश की कई छोटी-बड़ी खबरों को भी ब्लॉग पर साझा करती हैं। ब्लॉग पर नज़र डालें तो ‘वे कैसे लोग होते  हैं, जो बम बनाते हैं, उनसे बेहतर तो वो कीड़े होते हैं, जो रेशम बनाते हैं !!’ जैसी पंक्तियाँ लोगों को एक नई राह दिखाती हैं और भाईचारे से रहने का संदेश देती हैं।  फ़ेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग के बेटी के जन्म की खुशी में  शेयर्स दान करने की घोषणा, राजनीति में बढ़ती महिलाओं की भागीदारी, अब महिलाएं भी उड़ाएंगी लड़ाकू विमान जैसी खबरों को भी ब्लॉगर ने प्रमुखता से साझा किया है। बिना लाग–लपेट के सुलभ भाव-भंगिमा से जीवन की सच्चाई को बयां करने को वे अपनी लेखनी की शक्ति मानती हैं। 

ब्लॉग का पता है - http://shabdshikhar.blogspot.in/
-आर्यन शर्मा

(21 फ़रवरी, 2016 को राजस्थान पत्रिका के साप्ताहिक स्तंभ me.next के नियमित स्तंभ web blog में 'शब्द शिखर' की चर्चा। इससे पूर्व भी इसी कॉलम में  6 जुलाई 2013 को  'बदलाव की एक लहर' शीर्ष से 'शब्द-शिखर' ब्लॉग की चर्चा की जा चुकी है। .... आभार !!)

रविवार, 14 फ़रवरी 2016

यही प्यार है......



दो अजनबी निगाहों का मिलना 
मन ही मन में गुलों का खिलना 
हाँ, यही प्यार है............ !! 

आँखों ने आपस में ही कुछ इजहार किया 
हरेक मोड़ पर एक दूसरे का इंतजार किया 
हाँ, यही प्यार है............ !! 

आँखों की बातें दिलों में उतरती गई 
रातों की करवटें और लम्बी होती गई 
हाँ, यही प्यार है............ !! 

सूनी आँखों में किसी का चेहरा चमकने लगा 
हर पल उनसे मिलने को दिल मचलने लगा 
हाँ, यही प्यार है............ !! 

चाँद व तारे रात के साथी बन गये 
न जाने कब वो मेरी जिन्दगी के बाती बन गये 
हाँ, यही प्यार है............ !!


(डायरी के पुराने पन्नों को पलटिये तो बहुत कुछ सामने आकर घूमने लगता है. ऐसे ही इलाहाबाद विश्विद्यालय में अध्ययन के दौरान प्यार को लेकर यह कविता जीवन साथी कृष्ण कुमार यादव जी ने लिखी थी. यहाँ पर आप सभी के साथ शेयर कर रही  हूँ)



शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

अब घर की बड़ी बिटिया होगी परिवार की मुखिया

नारी सशक्तिकरण अब सिर्फ एक जुमला भर नहीं है, बल्कि व्यवहारिक जीवन में भी इसे प्रभावी माना जाने लगा है। जब महिलाएं घर से लेकर बाहर तक के कार्यों को करने से नहीं हिचकतीं और तमाम प्रतिष्ठित पदों पर विराजमान होकर नेतृत्व कर रही हैं, फिर भला उन्हें घर में कैसे रोक जा सकता है। इसी तर्ज पर सामाजिक बदलाव की दिशा में बेमिसाल फैसला देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि, जिस घर में बड़ी बेटी होगी, वही घर की 'कर्ता धर्ता' होगी। कोर्ट ने कहा- 'मुखिया की गैर मौजूदगी में घर में जो सबसे बड़ा होगा वही उस घर का कर्ता होगा। फिर चाहे वह बेटी ही क्यों न हो.' कोर्ट ने अपने फैसले में 'कर्ता' यानी मुखिया शब्द का इस्तेमाल किया है.

बराबरी का हक
सामाजिक बदलाव का फैसला जस्टिस नाजमी वजीरी ने सुनाया.  कोर्ट ने कहा, 'यदि पहले पैदा होने पर कोई पुरुष मुखिया के कामकाज संभाल सकता है तो ठीक ऐसा ही औरत भी कर सकती है. हिंदू संयुक्त परिवार की किसी महिला को ऐसा करने से रोकने वाला कोई कानून भी नहीं है.'

पुरुष सत्ता पर चोट
कोर्ट ने माना कि मुखिया की भूमिका में रहते हुए पुरुषों के जिम्मे बड़े-बड़े काम आ जाते हैं. इतना ही नहीं, वे प्रॉपर्टी, रीति-रिवाज और मान्यताओं से लेकर परिवार के जटिल और अहम मुद्दों पर भी अपने फैसले लागू करने लगते हैं. इस लिहाज से यह फैसला पितृसत्तात्मक समाज की उस धारा पर चोट करता है और उसे तोड़ने वाला है.

बड़ी बेटी ने ही किया था केस
हाई कोर्ट ने यह फैसला दिल्ली के एक कारोबारी परिवार की बड़ी बेटी की ओर से दाखिल केस पर सुनाया. उसने पिता और तीन चाचाओं की मौत के बाद केस दायर कर दावा किया था कि वह घर की बड़ी बेटी है. इस लिहाज से मुखिया वही हो. उसने याचिका में अपने बड़े चचेरे भाई के दावे को चुनौती दी थी, जिसने खुद को कर्ता घोषित कर दिया था.

क्यों अहम है यह फैसला?

2005 में हिंदू उत्तराधिकार कानून  में संशोधन कर धारा 6 जोड़ी गई थी. इसके जरिए महिलाओं को पैतृक संपत्ति में बराबर का हक दिया गया था. पर घर के फैसले करने का हक अब मिला.

फैसले के बाद अब बड़ी बेटी के हाथ में न सिर्फ पैतृक संपत्ति और प्रॉपर्टी से जुड़े हक होंगे, बल्कि वह घर-परिवार के तमाम मुद्दों पर अपनी बात कानूनी हक के साथ रख पाएगी.

फैसला सामाजिक बदलाव का प्रतीक है, मिसाल है. बताता है कि जो बेटी पिता को कंधा दे सकती है, वह पिता की भूमिका में भी हो सकती है और किसी बेटे से कमतर नहीं है.

पुराने जमाने से ही परंपरा रही है कि घर का कर्ता यानी मुखिया पुरुष रहता आया है. फिर चाहे वह घर में सबसे छोटा ही क्यों न हो. यह फैसला इस परंपरा को तोड़ने वाला है.

'आत्मनिर्भरता की मिसाल है औरत'

फैसला सुनाते वक्त जस्टिस वजीरी ने कहा कि कानून के मुताबिक सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं. फिर न जाने अब तक महिलाओं को 'कर्ता' बनने लायक क्यों नहीं समझा गया? जबकि आजकल की महिलाएं हर क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं और आत्मनिर्भता की मिसाल हैं. ऐसी कोई वजह नहीं है कि महिलाओं को घर की मुखिया बनने से रोका जाए. 1956 का पुराना कानून 2005 में ही बदल चुका है. अब जब कानून बराबरी का हक देता है तो अदालतों को भी ऐसे मामलों में सतर्कता बरतते हुए फैसला करना चाहिए.



शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

भारत में अर्द्धसैनिक बल की कमान पहली बार महिला को : अर्चना रामासुंदरम बनीं सशस्त्र सीमा बल की डायरेक्टर जनरल


 देश में पहली बार किसी अर्द्धसैनिक बल की कमान किसी महिला को सौंपी गयी है। तमिलनाडु कैडर की वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी अर्चना रामासुंदरम को 1 फरवरी, 2016  को सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) का डायरेक्टर जनरल  नियुक्त किया गया है। गौरतलब है कि देश में पांच अर्द्धसैनिक बल- एसएसबी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) हैं। इनमें कभी कोई महिला प्रमुख नहीं रहीं।

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 58 वर्षीय अर्चना रामासुंदरम फिलहाल राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की निदेशक हैं। उन्हें अगले साल 30 सितंबर को उनके सेवानिवृत्त होने तक एसएसबी प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया गया है। एसएसबी पर नेपाल और भूटान से लगे देश के सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

तमिलनाडु कैडर की अधिकारी अर्चना रामासुंदरम 2014 में उस समय खबरों में रहीं थीं, जब उन्हें सीबीआई में अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गयी थी, जिसके बाद उन्हें एनसीआरबी का प्रमुख बना दिया गया था।

अर्चना रामासुंदरम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के  बलिया जनपद की रहने वाली हैं। उनके पिता जयपुर में न्यायिक सेवा में कार्यरत थे। अर्चना के मुताबिक अगर वह एक साधारण परिवार से उठकर पुलिस के शीर्ष पद तक पहुंच सकती हैं तो कोई भी लड़की यह काम कर सकती है।अर्चना का मानना है कि यह एक सच्चाई है कि वह इस स्तर तक पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ महिला होने के नाते वह इस स्तर तक पहुंची हैं। इसके लिए वह पूरे कैरियर में कठिन समय से भी
गुजरी हैं। उनके पति तमिलनाडु से हैं और उसी कैडर में आईएसएस अधिकारी रहे हैं। रामसुंदरम 1980 बैच की केरल कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। अर्चना रामासुंदरम ने कहा कि अब हरेक स्तर पर आम राय है कि सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागेदारी बढ़े। यह युवा लड़कियों के आगे आने का सुनहरा दौर है। उन्हें उनके पिता ने आईपीएस बनने के लिए खूब प्रोत्साहित किया था। अपने पुश्तैनी शहर बलिया का जिक्र करते हुए रामसुंदरम के कहा कि वहां की आज की लड़कियों को देख कर लगता है कि उन्हें भी कैरियर के सभी विकल्प आजमाने का पूरा मौका मिलना चाहिए।

मंगलवार, 26 जनवरी 2016

गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई


 जब हम तिरंगे के नीचे खड़े होते हैं
तो हमारे ऊपर बस एक झंडा नहीं होता,

हमारे ऊपर होते हैं 121 करोड़ धड़कते दिल,

और वो सारे चेहरे
जो कभी हमने देखे हैं,

हमारे ऊपर होते हैं
वो कुछ मुट्ठी भर लोग
जिनकी वजह से आज हम
आजाद हवा में सांस लेते है,

और कुछ सपने
कुछ हसरतें,
जो जनम लेती हैं
उसी तिरंगे तले

ये तीन रंग के कपड़े का बस एक टुकड़ा भर नहीं है
ये तिरंगा दरअसल एक ज़िंदा इतिहास है,

एक इतिहास
जो धड़कते दिलों के एहसासों से लिखा गया है।

तभी तो किसी ने बहुत खूबसूरती से लिखा है -

ज़माने भर में मिलते हैं आशिक कई,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता !
नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हैं कई,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता !!


67 वें गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें !!
जय हिन्द ! जय भारत !!

- आकांक्षा यादव @ शब्द-शिखर 
Akanksha Yadav @ http://shabdshikhar.blogspot.in/

शनिवार, 23 जनवरी 2016

चपरासी की बेटी बनी टॉपर, पीएम मोदी ने किया सम्मानित

प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती और न ही किसी भी तरह का रोड़ा उसकी तरक्की के रास्ते को रोक सकता है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बाबा भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी (बीबीएयू), लखनऊ  की छात्र रत्ना रावत ने. एमसीए स्टूडेंट रत्ना रावत के पिता बीबीएयू में ही चपरासी हैं और अब रत्ना ने एमसीए में टॉप कर अपने पिता का सिर गर्व से उंचा कर दिया है.  रत्ना के पिता बृज मोहन बीबीएयू में ही चपरासी के पद पर कार्यत हैं. उन्हें अपनी बेटी पर बेहद गर्व है. और हो भी क्यों न क्योंकि अब यूनिवर्सिटी में बृजमोहन को लोग चपरासी के तौर पर नहीं बल्कि टॉपर रत्ना रावत की बेटी के तौर पर जानते हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी को रत्ना को  गोल्ड मेडल से सम्मानित किया। 

 रत्ना का यह सफर इतना आसान भी नहीं रहा।  इस मुकाम तक पहुँचना कम कठिनाइयों से भरा नहीं था. रायबरेली रोड स्थित कल्लीपूरव गांव के एक छोटे से मकान में रहने वाली रत्ना कहती हैं कि उनके इलाके में बिजली की बहुत समस्या है, ऐसे में  उन्हें अपनी पढ़ाई मोमबत्ती की रोशनी में करनी पड़ी.

शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

बम या रेशम

 वे कैसे लोग होते हैं, 
जो बम बनाते हैं,
उनसे बेहतर तो,
वो कीड़े होते हैं, 
जो रेशम बनाते हैं !!



गुरुवार, 14 जनवरी 2016

सूर्य देव के उत्तरायण पर्व मकर संक्रांति पर शुभकामनाएं


मकर संक्रांति की हर्षित बेला पर,
खुशियां मिले अपार। 
यश, कीर्ति, सम्मान मिले, 
और बढे सत्कार। 
शुभ-शुभ रहे हर दिन हर पल,
शुभ-शुभ रहे विचार। 
उत्साह बढ़ेे चित चेतन में,
निर्मल रहे आचार। 
सफलतायें नित नयी मिले,
बधाई बारम्बार। 
मंगलमय हो काज आपके,
सुखी रहे परिवार।  

आप सभी को मकर संक्रान्ति पर्व पर हार्दिक शुभकामनायें। सूर्य देव के उत्तरायण होने पर भारतवर्ष के उजाले में वृद्धि के प्रतीक पर्व "मकर संक्रान्ति" पर आप सब के जीवन भी प्रकाशमान हों, ऐसी शुभेच्छा के साथ आप सभी को मंगलकामनाएं एवं बधाई !!

शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

नव वर्ष-2016 का हार्दिक अभिनन्दन



एक-खूबसूरती...! 
एक-ताजगी..! 
एक-सपना..! 
एक-सचाई..! 
एक-कल्पना..! 
एक-अहसास..! 
एक-आस्था..! 
एक-विश्वास..!

(नव वर्ष पर सूरज की नई किरणों के साथ बिटिया अपूर्वा का बाल-मन प्रफुल्लित) 

यही है एक अच्छे साल की शुरुआत।

नव वर्ष-2016 का हार्दिक अभिनन्दन। 

!! नया साल आप सभी के जीवन में नया उल्लास और नई खुशियाँ लेकर आए !!

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

निर्भया का कातिल अभी जिन्दा है

निर्भया को 3 साल बाद भी इंसाफ नहीं मिला । कानून की आड़ में नाबालिग बलात्कारी जेल से रिहा हो गया । मोमबत्तियां जलती रहीं, बयानबाजी होती रही, न्यायिक सक्रियता से लेकर मन की बात होती रही, बेटी बचाओ जैसे जुमले हवा में तैरते रहे....पर सब मिलकर भी एक बलात्कारी को जेल के अंदर नहीं रख सके। और जब तक संसद ने कानून पास किया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। ....निर्भया की माँ ने बहुत सही कहा कि जब बलात्कार करने वाला यह नहीं देखता कि सामने 5 साल की बच्ची है या 65 साल की बूढ़ी औरत...तो फिर कानून रेप करने वाले की उम्र क्यों देखता है ?


इसी बात पर पतिदेव कृष्ण कुमार जी के फेसबुक वाल से भी कुछेक प्रासंगिक बातें -

सहिष्णुता-असहिष्णुता के नाम पर सैकड़ों सम्मान लौटा दिए गए, पर एक बिटिया निर्भया का गुनहगार छूट गया, किसी ने सरकारी सम्मान लौटाने की जहमत नहीं जुटाई। आख़िर कैसी संवेदनशीलता है यह।

सहमी सी हैं तितलियां सभी 
खौफ में हर परिन्दा है
नकाब इन्सां का चेहरे पे 
यहां हर शख्स दरिन्दा है
निर्भया माफ कर देना 
कि हम बहुत शर्मिन्दा हैं
बेटियों घर से जरा 
संभलकर निकलना 
कि अभी निर्भया का 
कातिल जिन्दा है !!

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

फेसबुक के CEO मार्क जुकरबर्ग बेटी के जन्म की ख़ुशी में दान करेंगे अपने 99% शेयर्स

बेटियाँ अपने यहाँ लक्ष्मी का रूप मानी जाती हैं।  अपने देश भारत में यह बात भले ही लोगों को किताबी लगती हो पर दुनिया की सबसे मशहूर  सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के को-फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग इसे पूरी तरह मानते और पालन करते हैं।  तभी तो अपनी बेटी मैक्स के जन्म लेने की खुशी में उन्होंने  बड़ी चैरिटी का एलान किया है । यानी फेसबुक में अपने और पत्नी प्रिसिला चान के नाम जितने शेयर हैं, उसका 99 फीसदी हिस्सा आने वाले वर्षों में वे डोनेट करेंगे।

जुकरबर्ग अपनी बेटी के लिए दुनिया को बेहतर जगह बनाने के मकसद से शेयर डोनेट करना चाहते हैं। इस चैरिटी का नाम होगा चान-जुकरबर्ग इनिशिएटिव। जुकरबर्ग ने यह एलान अपने फेसबुक पेज पर किया। इस मैसेज को अब तक 3.60 लाख से ज्यादा लाइक मिल चुके हैं। बता दें कि जुकरबर्ग ने पहले ही ‘गिविंग प्लेज’ साइन किया था। ‘गिविंग प्लेज’ यानी दुनिया के अमीर लोगों की वह प्रतिबद्धता जिसके तहत वे अपनी आधी से ज्यादा दौलत दान करेंगे।
वर्तमान में  फेसबुक की कुल पूंजी 303 अरब डॉलर यानी 19 लाख करोड़ रुपए है। इनमें से जुकरबर्ग के पास 54 फीसदी शेयर हैं। इन 54 फीसदी में से 99 फीसदी शेयर अर्थात 45 अरब डॉलर यानि 2.85 लाख करोड़ रूपये वे डोनेट करने वाले हैं। गौरतलब है कि यह रकम  नेपाल, अफगानिस्तान और साइप्रस जैसे देशों की जीडीपी का दोगुना है।  तीनों देशों की जीडीपी 20 अरब डॉलर के आसपास है। जुकरबर्ग अपने शेयरों का उतना हिस्सा डोनेट करेंगे, जितना दुनिया के 106 देशों की जीडीपी भी नहीं है। आईएमएफ वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 106 देशों की जीडीपी 45 अरब डॉलर से कम है।

फेसबुक के मार्क जकरबर्ग अपनी इस अनूठी पहल से  दुनिया के सबसे कम उम्र के दानदाता बन गए हैं। वे मात्र 31 साल के हैं। उनसे पहले बर्कशायर हैथवे के वॉरेन बफेट ने 2006 में गेट्स फाउंडेशन को 31 अरब डॉलर का डोनेशन देने का फैसला किया था। तब बफेट 76 साल के थे। इसी प्रकार माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने 2000 में जब बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की शुरुआत की थी, तब उनकी उम्र 45 साल थी।



फेसबुक में ऐसा नियम है कि यहां काम करने वाला कोई भी अमेरिकी कर्मचारी मैटरनिटी और पैटरनिटी के लिए चार महीने का अवकाश ले सकता है। पत्नी प्रिसिला के गर्भवती होने के बाद जुकरबर्ग ने भी दो महीने की छुट्टी लेने का फैसला किया था। हालांकि, कंपनी के नियम के मुताबिक, वे चार महीने की छुट्टी भी ले सकते थे।

फ़िलहाल, अपनी बेटी के जन्म की जानकारी  जुकरबर्ग ने वाइफ प्रिसिला और बेटी मैक्स के साथ फेसबुक पर फोटो शेयर करके की। उन्होंने बेटी के नाम एक प्यारा सा पत्र भी लिखा। उसका हिंदी रूपांतरण कुछ यूँ होगा -


डियर मैक्स,
तुम्हारी मां और मेरे पास यह बताने के लिए लफ्ज नहीं हैं कि तुमने हमारे फ्यूचर के लिए कितनी उम्मीदें दे दी हैं। तुम्हारी नई जिंदगी वादों से भरी है। हमें उम्मीद है कि तुम खुश रहोगी, सेहतमंद रहोगी, ताकि दुनिया को पूरी तरह एक्सप्लोर कर सकोगी। तुमने हमें दुनिया को उम्मीद के साथ देखने की एक वजह दे दी है।

सभी पेरेंट्स की तरह हम भी चाहते हैं कि तुम हमसे ज्यादा बेहतर तरीके से जिंदगी बिताओ। सुर्खियां भले ही ये बताती हों कि क्या-कुछ गलत हो रहा है, लेकिन दुनिया बेहतर होती जा रही है। हेल्थ सुधर रही है। गरीबी कम हो रही है। नॉलेज बढ़ रहा है। लोग आपस में जुड़ रहे हैं। हर फील्ड में हो रही टेक्नोलॉजी की प्रोग्रेस यह बताती है कि तुम्हारी जिंदगी आज की हमारी जिंदगी से कहीं बेहतर होगी।

हम इसके लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे। और यह सिर्फ इसलिए नहीं होगा कि हम तुम्हें प्यार करते हैं, बल्कि यह इसलिए हाेगा, क्योंकि अगली जनरेशन के सभी बच्चों की मॉरल रिस्पॉन्सिबिलिटी हम पर है।

हम मानते हैं कि सभी की जिंदगी एक जैसी है। हमारी सोसाइटी की जिम्मेदारी है कि वह सिर्फ अभी जी रहे लोगों के लिए नहीं, बल्कि इस दुनिया में आने वाले लोगों की जिंदगी सुधारने के लिए इन्वेस्ट करे।
- मार्क
-आकांक्षा यादव @ शब्द-शिखर 
Akanksha Yadav@ http://shabdshikhar.blogspot.in/

सोमवार, 30 नवंबर 2015

ईश्वर के दरवाजे पर अभी भी महिलाओं से भेदभाव क्यों

21वीं सदी में जब हम लिंग-समता, नारी-सशक्तिकरण, मानवीय सौहार्द और सहिष्णुता की बात करते हैं और दूसरी तरफ कुछेक मन्दिरों में अभी भी महिलाओं के प्रवेश और पूजा-पाठ करने पर तमाम बंदिशें देखते हैं तो सवाल उठना लाजिमी है कि ईश्वर के दरवाजे पर अभी भी भेदभाव और छुआछूत क्यों ? देश के सबसे बड़े शनि मंदिर शिंगणापुर धाम में एक महिला द्वारा शनिदेव को तेल चढाने के बाद शुद्धिकरण किया गया. आखिर यह दोहरापन क्यों ? ऐसा नहीं है कि यह अकेला मंदिर है जो महिलाओं  में प्रवेश और पूजा-पाठ करने पर तमाम बंदिशें लगाता है, बल्कि देश में तमाम ऐसे मंदिर हैं, जहाँ इस प्रकार की रोक है.

वस्तुत: महाराष्ट्र के शनि शिं‍गणापुर मंदिर में एक महिला के शनिदेव को तेल चढ़ाने से विवाद शुरू हो गया है. खबरों के मुताबिक, 400 वर्षों से इस मंदिर के भीतर महिला के पूजा की परंपरा नहीं रही है, ऐसे में महिला द्वारा मंदिर के चबूतरे पर चढ़कर शनि महाराज को तेल चढ़ाने पर पुजारियों ने मूर्ति को अपवित्र घोषि‍त कर दिया. मंदिर प्रशासन ने 6 सेवादारों को निलंबित कर दिया है और मूर्ति का शुद्धि‍करण किया गया है.जानकारी के मुताबिक, महिला द्वारा पूजा करने की तस्वीरें सीसीटीवी में कैद हैं, जिसे देखने के बाद मंदिर में जमकर हंगामा हुआ. बढ़ते विवाद को देखते हुए जहां पूजा करने वाली महिला ने यह कहते हुए प्रशासन से माफी मांगी है कि उसे परंपरा की जानकारी नहीं थी, वहीं मूर्ति को अपवित्र मानते हुए मंदिर प्रशासन ने शनिदेव का दूध से प्रतिमा का अभिषेक किया है. यही नहीं, पवित्रता के लिए पूरे मंदिर को भी धुला गया है.ट्रस्ट का दावा है कि मुंबई हाई कोर्ट ने भी पहले इस परंपरा को सही ठहराया था.गौरतलब है कि 15 साल पहले भी शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी का विरोध हुआ था, तब जानेमाने रंगकर्मी डॉ. श्रीराम लागू भी महिलाओं के पक्ष में मुहिम से जुड़े थे. मंदिर प्रशासन के ताजा कदम की तमाम बुद्धिजीवियों ने निंदा की है. अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की सदस्य रंजना गवांदे ने कहा कि महिला की हिम्मत का हम स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा, 'जब देश में महिला-पुरुषों को बराबरी हासिल है तो कई मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी क्यों है? शनि शिंगणापुर में यह क्रांतिकारी घटना हुई है. इस पर राजनीति न हो और मंदिर को महिलाओं के लिए खोला जाए.'

यह विचारणीय है कि एक तरफ हमारे धर्मग्रन्थ 'यत्र नारी पूजयंते रमंते तत्र देवता' की बात कहते हैं, वहीँ उसी नारी  के प्रवेश से मंदिर और मूर्तियाँ अपवित्र हो जाती हैं, भला ऐसे कैसे सम्भव है. इस प्रकार के दोहरे मानदंडों को ख़त्म  करने की जरूरत है. अन्यथा नारी-समता और  नारी-सशक्तिकरण जैसी बातें पन्नों में ही रह जाएँगी।

-आकांक्षा यादव @ शब्द-शिखर 

शनिवार, 28 नवंबर 2015

पहला प्यार

पहली बार
इन आँखों ने महसूस किया
हसरत भरी निगाहों को

ऐसा लगा
जैसे किसी ने देखा हो
इस नाजुक दिल को
प्यार भरी आँखों से

न जाने कितनी
कोमल और अनकही भावनायें
उमड़ने लगीं दिल में

एक अनछुये अहसास के
आगोश में समाते हुए
महसूस किया प्यार को

कितना अनमोल था
वह अहसास
मेरा पहला प्यार !!









वक्त बदला, तारीखें बदली
ना बदला वो एहसास व प्यार !!
...... बस 11 साल ही तो हुए उस दिन को, जब हम बँधे थे इक बंधन में।  




फेसबुक पर रत्नेश कुमार मौर्य जी ने कुछ इस तरह से दुआएँ दीं -

इस सफर में आप दोनों के लिए बस एक ही दुआ। 
आगे के सफर में भी यूँ ही प्रीति बनाये रहना सदा। 
...... खूबसूरत जोड़ी को किसी की नजर न लगे !!



आप सभी की शुभकामनाओं और स्नेह के लिए आभार !!


मंगलवार, 10 नवंबर 2015

पावन पर्व दीवाली का



पावन पर्व दीवाली का,
दीपों की बारात लाए।
तारों सी टिमटिमाती रोशनी,  
खुशियों की सौगात लाए।

तोरण द्वार पर सजे अल्पना,
ज्योति का पुंज-हार लाए।
खील-लड्डू का चढ़े प्रसाद,
दिलों में सबके प्यार लाए।

है शुभ मंगलकारी पर्व यह,
इस दिन अयोध्या राम आए।
जल उठी दीपों की बाती,
पुलकित मन पैगाम लाए।

अमावस्या का तिमिर चीरकर,
रोशनी का उपहार लाए।
चारों तरफ सजे रंगोली,
लक्ष्मी-गणेश भी द्वार आए।



दीपावली पर एक सन्देश बिटिया पाखी की तरफ से भी -
ऐसे मनाएं दीवाली : गरीबी और अशिक्षा का अँधियारा मिटायें 

दीपावली रोशनी का त्यौहार है, न कि पटाखों का। इस मौके पर हम खूब दीये जलाएंगे और परिवार के साथ इसका आनंद उठाएंगे। पटाखों से तो बिलकुल दूर रहूँगी। पटाखों से निकली चिंगारी से तो कई बार लोगों की आँखों की रोशनी भी चली जाती है। इससे प्रदूषण भी बहुत फैलता है। ऐसे में मैंने संकल्प लिया है कि इस दीपावली पर पटाखों से दूर रहूँगी। जो पैसे हम पटाखों पर खर्च करते हैं, उनसे किसी गरीब या जरूरतमंद की सहायता कर उनके जीवन में रोशनी फैलाएंगे। 

- अक्षिता (पाखी)
(राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता)

प्रकाश का पर्व दीपावली आप सभी के जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाये। 
अँधेरे से अँधेरे माहौल में भी दिल में आशा की एक लौ जलती रहे।
 दीपोत्सव पर्व की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं !!

गुरुवार, 5 नवंबर 2015

अब भगवान भी दौरे पर

अब भगवान जी भी दौरे करने लगे हैं।  विश्वास नहीं हो रहा न, पर यह सच है। 50 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के साथ देश के सबसे अमीर भगवान तिरुपति बालाजी इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। ये पहला मौका है जब वे अपने पूरे दलबल के साथ आंध्रप्रदेश से बाहर किसी दूसरे राज्य में पहुंचे हैं। दरअसल, दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में 8 नवंबर तक ‘वैभवोत्सम’का आयोजन किया जा रहा है। यहां भगवान बालाजी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। यद्यपि मुख्य कार्यक्रम 7 नवंबर को है। लेकिन हर दिन यहां उसी तरह पूजा पाठ हो रहा है, जैसी तिरुपति बालाजी में होता है। मंदिर और दर्शन को विश्वसनीय बनाने के लिए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। टीटीडी ही श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी उठाता है।

 पूजा पाठ का सामान 25 ट्रकों में भरकर दिल्ली लाया गया है। पूजा-अनुष्ठानों के लिए 35 पुजारियों सहित 250 मंदिर स्टाफ भी भगवान बालाजी के साथ आए हैं। मंदिर को सजाने वाले कारीगर भी तिरुमला से ही आए हैं। भगवान की मूर्तियों के अलावा, पर्दे भी तिरुमला मंदिर से लाए गए हैं। तिरुपति भोग का मशहूर लड्डू और प्रसाद तैयार करने की सामग्री भी तिरुमला से ही मंगवाई जा रही है। यहाँ तक कि भगवान की मूर्तियों के लिए फूल भी तिरुमला और बेंगलुरु से मंगवाए गए हैं। ‘वैभवोत्सम’को इस तरह मंदिर परिसर से बाहर आयोजित करने की योजना स्वर्ण भारत ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी और भाजपा नेता वेंकैया नायडू की बेटी दीपा वैंकट की है। दिल्ली दौरे के दौरान न केवल सर्वदर्शन मुफ्त हैं बल्कि सभी दैनिक सेवाएं व सोमवार की विशेष पूजा से लेकर पूराभिषेकम तक सभी वारोत्सव नेहरू स्टेडियम में खुले में आयोजित किए जा रहे हैं। यहां कुर्सी से लेकर जमीन में बैठने की व्यवस्था की गई है। किसी भी दर्शन के लिए कोई फीस नहीं है। यहां तक कि यदि पुरुष धोती और महिलाएं साड़ी या सलवार सूट पहने हैं तो उन्हें बालाजी के बिल्कुल करीब जाने का मौका भी मिल रहा है। हर शाम को प्रांगण में ही निकलने वाली शोभायात्रा में भी सब शामिल हो सकते हैं और पालकी को श्रद्धा से छू भी सकते हैं। ऐसा तिरुपति में कतई संभव नहीं हो पाता है।

उत्सव के लिए तिरुपति बालाजी की मूर्ति को तिरुपति बालाजी से विशेष गरुड़ वाहन से लाया गया है। मूल प्रतिमा वहीं विराजमान है। टीडीडी की योजना है कि सभी राज्यों की राजधानियों में एक-एक देवस्थानम स्थापित किया जाए। ताकि जो लोग तिरुपति नहीं जा सकते, उन तक बालाजी पहुंच जाएं। इसकी योजना बनाई जा रही है।

शनिवार, 31 अक्टूबर 2015

राजनीति में बढ़ती महिलाओं की भागीदारी : विद्या भंडारी बनीं नेपाल की पहली महिला राष्ट्रपति

भारतीय उपमहाद्वीप में विद्या भंडारी के नेपाल की राष्ट्रपति निर्वाचित होते ही एक नया रिकार्ड बन गया। राजशाही वाले भूटान को छोड़ दें तो यहाँ के हर देश में राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के रूप में महिलाएँ नेतृत्व के शीर्ष पर विराजमान होने का सौभाग्य प्राप्त कर चुकी। इनमें भारत में  इंदिरा गांधी (प्रधानमंत्री), प्रतिभा पाटील (राष्ट्रपति),  पाकिस्तान में  बेनजीर भुट्टो (प्रधानमंत्री), बांग्लादेश में  शेख हसीना वाजेद, खालिदा जिया (दोनों प्रधानमंत्री) श्रीलंका में  सिरिमाओ भंडारनायके (प्रधानमंत्री), चंद्रिका कुमारतुंगा (प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति) और अब नेपाल में विद्या देवी भंडारी (राष्ट्रपति) हैं। 

कौन हैं विद्या भंडारी : 

नेपाल की संसद ने बुधवार को CPN-UML पार्टी की लीडर विद्या भंडारी को अपना नया राष्ट्रपति चुना। देश में राजशाही खत्म होने के बाद भंडारी लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गईं दूसरी राष्ट्रपति हैं, जबकि नया संविधान लागू होने के बाद वह देश की पहली राष्ट्रपति हैं। किसी समय हिंदू राष्ट्र नेपाल में महिला अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने वाली विद्या देवी का जन्म जून 1961 में भोजपुर के पांडे परिवार में हुआ। भंडारी कम्युनिस्ट लीडर मदन भंडारी की विधवा हैं। मदन की 1993 में संदिग्ध हालात में एक रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। भंडारी CPN-UML पार्टी की डिप्टी लीडर हैं। नेपाल के नए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पार्टी के अध्यक्ष हैं। गौरतलब है कि नेपाल के लोकतंत्र की राह पर बढ़ने के बाद यह दूसरा राष्ट्रपति चुनाव था। इससे पहले 2008 में संविधान सभा के चुनाव के बाद राम बरन यादव राष्ट्रपति चुने गए थे।


दुनिया की महाशक्तियों की बात करें तो आज तक अमेरिका, रूस, फ्रांस में कोई महिला राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री नहीं बनी। ब्रिटन में मार्गरेट थैचर लौह महिला के रूप में प्रधानमंत्री रहीं, जबकि चीन में 1981 में केवल 12 दिन के लिए सोंग किंगलिंग मानद राष्ट्रपति रहीं। अमेरिका के 226 साल के इतिहास में कोई महिला राष्ट्रपति नहीं रही।  हिलेरी क्लिंटन 2008 में राष्ट्रपति पद का टिकट हासिल करने में नाकाम रहीं, वे 2016 में फिर टिकट पाने की दौड़ में हैं।

दुनिया के अन्य देशों की बात करें तो, अभी ये हैं कुछ प्रमुख महिला राष्ट्रपति - 

दक्षिण कोरिया: पार्क गुन हे
मॉरीशस: बीवी अमीना गरीब
क्रोएशिया: कोलिंडा ग्रैबर
माल्टा: मैरी लुइसी कोलेरो
चिली: मिशेल ब्लैंचेट
ब्राजील: डिल्मा रूसेफ
मध्य अफ्रीकी गणराज्य: कैथरीन सैंबा पेंजा
लाइबेरिया: एलन जॉनसन सरलीफ
कोसोवो: अतीफेत जहजागा

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2015

करवा चौथ के बहाने...

करवाचौथ तो बहाना है,
असली मकसद तो पति को याद दिलाना है...

कि कोई है,
जो उसके इंतजार में दरवाजे पर
टकटकी लगाए रहती है,
पति के इंतज़ार में.
सदा आँखें बिछाए रहती है...

वैलेंटाईन ड़े, रोज़ ड़े
इन सब को वो समझ नहीं पाती है....
प्यार करती है दिल की गहराईयों से,
पर कह नहीं पाती है....

सुबह से भूखी है,
उसका गला भी सूखा जाता है....
इस पर उसका कोई ज़ोर नहीं,
उसे प्यार जताने का
बस यही तरीका आता है....

खुलेआम किस करना हमारी संस्कृति में नहीं,
'आई लव यू' कहने में वो शर्माती है....
वो चाहती है बहुत कुछ कहना,
पर 'जल्दी घर आ जाना'
बस यही कह पाती है....

फेसबुक, ट्वीटर से मतलब नहीं उसे,
ना फोन पे वाट्सैप चलाना आता है....
यूँ तो कोई जिद नहीं करती,
पर प्यार से रूठ जाना आता है...

उसका समर्पण,
और हमारे परिवार पर लुटाया हुआ प्यार....
ऐसी प्रिया को,
है सम्मान का, प्यार का अधिकार !!

-आकांक्षा यादव @ शब्द-शिखर : Akanksha Yadav @ www.shabdshikhar.blogspot.com/