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सोमवार, 17 जनवरी 2022

विश्व हिंदी दिवस : तीन पीढ़ियों संग हिंदी के विकास में जुटा एक परिवार

हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करने और हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करने हेतु प्रति वर्ष 'विश्व हिन्दी दिवस' 10 जनवरी को मनाया जाता है। हिंदी को लेकर तमाम संस्थाएँ, सरकारी विभाग व विद्वान अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं। इन सबके बीच उत्तर प्रदेश में वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव का अनूठा परिवार ऐसा भी है, जिसकी तीन पीढ़ियाँ हिंदी की अभिवृद्धि के लिए  न सिर्फ प्रयासरत हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कई देशों में सम्मानित हैं।

वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव के परिवार में उनके पिता श्री राम शिव मूर्ति यादव के साथ-साथ पत्नी सुश्री आकांक्षा यादव और दोनों बेटियाँ अक्षिता व अपूर्वा भी हिंदी को अपने लेखन से लगातार नए आयाम दे रही हैं। देश-दुनिया की तमाम पत्रिकाओं में प्रकाशन के साथ श्री कृष्ण कुमार यादव की 7 और पत्नी आकांक्षा की 3 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। हिंदी ब्लॉगिंग के क्षेत्र में इस परिवार का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अग्रणी है।

'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दम्पति' सम्मान से विभूषित यादव दम्पति को नेपाल, भूटान और श्रीलंका में आयोजित 'अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मेलन' में 'परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान' सहित अन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। जर्मनी के बॉन शहर में ग्लोबल मीडिया फोरम (2015) के दौरान 'पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड' श्रेणी में सुश्री आकांक्षा यादव के ब्लॉग 'शब्द-शिखर' को हिंदी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है।

सनबीम स्कूल, वरुणा, वाराणसी में अध्ययनरत इनकी दोनों बेटियाँ अक्षिता (पाखी) और अपूर्वा भी इसी राह पर चलते हुए अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई के बावजूद हिंदी में सृजनरत हैं। अपने ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' हेतु अक्षिता को भारत सरकार द्वारा सबसे कम उम्र में 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' से सम्मानित किया जा चुका है, वहीं अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मेलन, श्रीलंका (2015) में भी अक्षिता को “परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान” से सम्मानित किया गया। अपूर्वा ने भी कोरोना महामारी के दौर में अपनी कविताओं से लोगों को सचेत किया।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव का कहना है कि, सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से हिंदी दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। डिजिटल क्रान्ति के इस युग में हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। वहीं, सुश्री आकांक्षा यादव का मानना है कि हिन्दी भाषा भारतीय संस्कृति की अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ-साथ भारत की भावनात्मक एकता को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है। आप विश्व में कहीं भी हिन्दी बोलेगें तो आप एक भारतीय के रूप में ही पहचाने जायेंगे।  









Live Vns : विश्व हिंदी दिवस : तीन पीढ़ियों से हिंदी के विकास में लगा है पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव का परिवार

पत्रिका : विश्व हिंदी दिवस : तीन पीढ़ियों संग हिंदी के विकास में जुटा है पोस्टमास्टर जनरल का परिवार

हिंदुस्तान : आदर्श हिंदी सेवक है पोस्टमास्टर जनरल का परिवार

गुरुवार, 16 दिसंबर 2021

भारत की सबसे लंबे बालों वाली महिला आकांक्षा यादव

बाल किसी महिला की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं। जितने लंबे, घने बाल महिला उतनी ज्यादा खूबसूरत दिखती है, लेकिन ये तोहफा हर किसी को नहीं मिलता। दोस्तों, भारत ही नहीं दुनिया में ऐसी लाखों, करोड़ों महिलाएं हैं जो अपने बाल न बढ़ने की समस्या से परेशान हैं। महंगे तेल और अन्य तरह के प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने पर भी उनकी यह समस्या जस की तस रहती है। लेकिन मुंबई  की रहने वाली आकांक्षा यादव के साथ ऐसा नहीं है। आकांक्षा के बाल 1,2,3...5 नहीं पूरे 9 फीट और 10.5 इंच लंबे हैं। मीटर में बात करें तो उनके बालों की लंबाई 3.01 मीटर है। जी हां दोस्तों। इतना ही नहीं अकांक्षा को भारत में सबसे लंबे बालों वाली महिला के रूप में चुना गया है। उनकी इस उपलब्धि के लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।

2019 से कोई नहीं तोड़ पाया आकांक्षा का रिकॉर्ड 

मुंबई की आकांक्षा यादव को यह खिताब ऐसे ही नहीं मिला, इसके पीछे उनकी वर्षों की मेहनत है। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस के 30वें संस्करण में उनका नाम भारत के सबसे लंबे बाल वाली महिला के रूप में दर्ज किया गया है। आकांक्षा अपनी इस उपलब्धि के लिए फूली नहीं समा रही हैं। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स 2020-2022 के आधिकारिक पत्र के मुताबिक साल 2019 से आकांक्षा का सबसे लंबे बालों वाली महिला होने का रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया है।

लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है नाम 

आकांक्षा यादव ने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने पर खुशी जाहिर करते हुए  कहा कि इस राष्ट्रीय खिताब को पाना ही अपने आप में बड़ी बात है। यह खिताब हासिल कर में बहुत खुश हूं।

क्या है आकांक्षा के लंबे बालों का राज 

बता दें कि आकांक्षा यादव एक फार्मास्युटिकल और मैनेजमेंट प्रोफेसनल है। सबसे लंबे बालों के लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। जब उनसे उनके लंबे बालों का राज पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह ईश्वर का आशीर्वाद है। आकांक्षा से जब पूछा गया कि वह इतने लंबे बालों की देखरेख कैसे करती हैं। तो आकांक्षा ने हैरानी भरा जबाव दिया। उन्होंने कहा कि वह पूरे दिन में अपने बालों को धोने से लेकर उन्हें कंघी करने तक केवल 20 मिनट का समय खर्च करती हैं।


(यूँ  ही गूगल पर सर्च करते हुए अपने नाम पर जाकर अटक गई, अपने हमनाम आकांक्षा यादव की उपलब्धि के बारे में जानकर अच्छा लगा....हार्दिक बधाई !! )

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2021

साहित्यकार एवं ब्लॉगर आकांक्षा यादव ‘वृक्ष रत्न’ सम्मान से सम्मानित

स्वदेशी समाज सेवा समिति के 11वें स्थापना दिवस पर अग्रणी महिला ब्लॉगर, लेखिका एवं साहित्यकार आकांक्षा यादव को 'वृक्ष रत्न' सम्मान से अलंकृत किया गया। संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष एवं उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश के पूर्व सदस्य प्रो.अजब सिंह यादव और रुद्राक्ष मैन विवेक यादव के संयोजकत्व में फिरोजाबाद में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान पर्यावरण संबंधी लेखन और पर्यावरण संरक्षण व वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए दिया गया। कॉलेज में प्रवक्ता रहीं आकांक्षा यादव को इससे पूर्व भी देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा जर्मनी, श्रीलंका, नेपाल तक में सम्मानित किया जा चुका है। आकांक्षा यादव वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव की पत्नी हैं, जो स्वयं साहित्य और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में चर्चित नाम हैं।

गौरतलब है कि कालेज में प्रवक्ता रहीं आकांक्षा यादव फ़िलहाल साहित्यिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई हैं। देश-विदेश की शताधिक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित आकांक्षा यादव की आधी आबादी के सरोकार, चाँद पर पानी, क्रांति-यज्ञ: 1857-1947 की गाथा इत्यादि पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। देश के साथ-साथ विदेशों में भी सम्मानित आकांक्षा यादव को उ.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा ’’अवध सम्मान’’, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉगर दम्पति’’ सम्मान, अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मेलन, काठमांडू में ’’परिकल्पना ब्लाग विभूषण’’ सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका में ’’परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान’’, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डॉक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ’’ डॉ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान’’, ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘‘ व ’’भगवान बुद्ध राष्ट्रीय फेलोशिप अवार्ड’’, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’’भारती ज्योति’’, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान  द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”,  निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली द्वारा ‘‘मनोहरा देवी सम्मान‘‘, साहित्य भूषण सम्मान, भाषा भारती रत्न, राष्ट्रीय भाषा रत्न सम्मान, साहित्य गौरव सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु 50 से ज्यादा सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं । जर्मनी के बॉन शहर में ग्लोबल मीडिया फोरम (2015) के दौरान 'पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड' श्रेणी में  आकांक्षा यादव के ब्लॉग 'शब्द-शिखर'  को हिंदी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है।

11 पत्रकारों, समाजसेवी, साहित्यकार, पर्यावरणविदों को किया गया सम्मानित 

संत जानू बाबा डिग्री कॉलेज, फिरोजाबाद  में आयोजित  कार्यक्रम में आकांक्षा यादव के अलावा  संत जयकृष्ण दास, राष्ट्रीय अध्यक्ष यमुना रक्षक दल वृंदावन, उमाशंकर यादव, संस्थापक अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल अहमदाबाद, डॉ आरएन सिंह, समाजसेवी फरीदाबाद, मुकेश नादान, संस्थापक प्रकृति फाउंडेशन मेरठ, ममता नोगरैया, अध्यक्षा महिला साहित्य मंच बदायूं, रमेश गोयल, राष्ट्रीय अध्यक्ष पर्यावरण प्रेरणा सिरसा, हरियाणा प्रताप सिंह पोखरियाल, पर्यावरण प्रेमी उत्तरकाशी उत्तराखंड, नंदकिशोर वर्मा, अध्यक्ष नीला जहान फाउंडेशन लखनऊ, प्रदीप सारंग, बाराबंकी, हरे कृष्ण शर्मा आजाद, अध्यक्ष वसुंधरा श्रृंगार युवा मंडल भिंड मध्यप्रदेश सहित कुल 11 लोगों को 'वृक्ष रत्न' से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी हरिदास,  मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार व लेखक डॉक्टर अरुण प्रकाश, संचालन डॉ मुकेश उपाध्याय और आभार ज्ञापन समिति के सचिव रुद्राक्ष मैन विवेक यादव ने किया।







सोमवार, 6 अप्रैल 2020

Fight against Corona : प्रधानमंत्री के आह्वान पर जगमगाया दीप

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अपील पर हमने भी सपरिवार 5 अप्रैल, 2020 को अपने आवास की बालकनी में खड़े होकर शाम को 9 बजे, 9 मिनट तक मोमबत्ती जलाकर रोशनी की। वैश्विक आपदा की इस घड़ी में कोरोना महामारी को  खत्म करने हेतु ईश्वर से प्रार्थना भी की।
(चित्र में : मैं आकांक्षा यादव, बेटियां अक्षिता व अपूर्वा, जीवन साथी कृष्ण कुमार यादव जी ( निदेशक डाक सेवाएँ, लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र)





सोमवार, 23 मार्च 2020

कोरोना के कर्मवीरों को किया सलाम

कोरोना वायरस की इस आपदा में आज सारे राष्ट्र ने एक साथ उन कर्मवीरों को सलाम किया, जो अपनी जान की परवाह किये बने लोगों की सेवा में लगे हैं। इसी क्रम में हमने भी सपरिवार उन कर्मवीरों के जज्बे को नमन किया। अलीगंज, लखनऊ स्थित पोस्ट एंड टेलीग्राफ़स ऑफिसर्स संचार कॉलोनी में हमने अपने परिवार संग शाम 5 बजे बॉलकनी में खड़े होकर ताली, थाली और घंटी बजाकर आपात और आवश्यक सेवाओं में लगे लोगों के जज्बे को सलाम किया। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील के साथ ही, कोरोना वायरस से लड़ने के इस मुश्किल वक़्त में मुस्तैदी से जुटे कर्मियों के जज्बे को सलाम करने की अपील की थी।






(चित्र में : मैं आकांक्षा यादव, बेटियां अक्षिता व अपूर्वा, जीवन साथी कृष्ण कुमार यादव जी ( निदेशक डाक सेवाएँ, लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र)

मंगलवार, 16 अप्रैल 2019

साहित्यकार व ब्लॉगर आकांक्षा यादव "स्त्री अस्मिता सम्मान-2019" से सम्मानित

हिंदी साहित्य और लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए युवा साहित्यकार व ब्लॉगर आकांक्षा यादव को "रेयान स्त्री अस्मिता सम्मान-2019" से  सम्मानित किया गया। कैफ़ी आज़मी एकेडमी, लखनऊ में रेयान मंच एवं देव एक्सेल फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आकांक्षा यादव को उक्त सम्मान आई.ए. एस. डॉ. हरिओम, लखनऊ परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव, डॉ. मालविका हरिओम, कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. अनीता श्रीवास्तव एवं अनीता राज ने 12 अप्रैल, 2019 को प्रदान किया। 
सामाजिक और साहित्यिक विषयों के साथ-साथ नारी-सशक्तिकरण पर प्रभावी लेखन करने वाली आकांक्षा यादव  की  तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।  प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लेखन के साथ वे ब्लॉग और सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी रचनाधर्मिता को प्रस्फुटित करते हुये व्यापक पहचान बना चुकी  हैं। भारत के अलावा जर्मनी, श्रीलंका और नेपाल इत्यादि देशों में भी सम्मानित हो चुकी हैं। आकांक्षा यादव लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ  कृष्ण कुमार यादव की पत्नी हैं, जो कि स्वयं चर्चित साहित्यकार और ब्लॉगर हैं।
कार्यक्रम के आरम्भ में अतिथियों ने दीप-प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी की गई, जिसने सबका मन मोह लिया। 




मंचासीन अतिथियों आई.ए. एस. डॉ. हरिओम, लखनऊ परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव और गायिका  डॉ. मालविका हरिओम को स्मृति चिन्ह देकर और शाल ओढ़ाकर कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. अनीता श्रीवास्तव एवं अनीता राज ने सम्मानित  किया। 
दूसरे सत्र में बारह महिलाओं को रेयान स्त्री अस्मिता सम्मान-2019 सम्मान दिया गया। अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं में आकांक्षा यादव के अलावा  सरोज सिंह, माला चौबे, सीमा अग्रवाल, शशि सिंह, मधु सुभाष, विजय पुण्यम, ओम सिंह, वर्षा श्रीवास्तव, रूबी राज सिंह, अंतरा श्रीवास्तव, रोली शंकर और गृहिणी सम्मान कीर्ति अवस्थी को दिया गया। डॉ. अनीता श्रीवास्तव ने बताया कि समाज में अपने दम पर अलग मुकाम बनाने वाली व दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बनने वाली 12 महिलाओं को प्रतिवर्ष सम्मानित किया जाता है। 




इससे पूर्व भी उत्कृष्ट साहित्य लेखन हेतु आकांक्षा  यादव को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पचास से अधिक सम्मानों से विभूषित किया जा चुका है। इनमें उ.प्र. के मुख्यमंत्री  द्वारा ’’अवध सम्मान’’,  विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डॉ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती ज्योति‘‘, ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉगर दम्पति’’ सम्मान, अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मेलन, काठमांडू में ’’परिकल्पना ब्लाग विभूषण’’ सम्मान,  अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका में ’’परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान’’,  ‘‘एस.एम.एस.‘‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार, निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली द्वारा ‘‘मनोहरा देवी सम्मान‘‘, साहित्य भूषण सम्मान, भाषा भारती रत्न, राष्ट्रीय भाषा रत्न सम्मान, साहित्य गौरव इत्यादि शामिल हैं।












रविवार, 24 मार्च 2019

शब्दों में भावों की आकांक्षा : कलम और कला के अंतर्गत दैनिक जागरण में चर्चा

मैं मांस, मज्जा का पिंड नहीं
दुर्गा, लक्ष्मी और भवानी हूँ 
 भावों से पुंज से रची
 नित्य रचती सृजन कहानी हूँ ..
कॉलेज में प्रवक्ता और फिर साहित्य, लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में प्रवृत्त आकांक्षा यादव बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। नारी, बाल विमर्श और सामाजिक मुद्दों से सम्बंधित विषयों पर प्रमुखता से लेखन और साहित्य की विभिन्न विधाओं में उनकी रचनाओं का फलक उनके भावों और विचारों के वैविध्य का परिचायक है।  
जीवन में शुरू से ही कुछ अलग करने  की ख्वाहिश रखने वाली आकांक्षा यादव ने इसके लिए अपनी कलम को चुना। देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर प्रकाशित होने वाली आकांक्षा यादव की विभिन्न विधाओं में अब तक तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं- 'आधी आबादी के सरोकार' (2016), 'चाँद पर पानी' (बाल-गीत संग्रह-2012) एवं 'क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा' (संपादित, 2007), तो सोशल मीडिया पर एक पुस्तक प्रकाशनाधीन है । 60 से अधिक पुस्तकों/संकलनों  में रचनाएँ प्रकाशित होने के साथ-साथ आकाशवाणी से भी रचनाएँ, वार्ता आदि का  प्रसारण होता रहता है। 

ब्लॉग लेखन में सक्रिय :
स्त्री चेतना, समानता, न्याय और सामाजिक सरोकारों से जुड़ीं आकांक्षा यादव अग्रणी ब्लॉगर भी हैं। नवम्बर 2008 से हिंदी ब्लॉगिंग में सक्रिय हैं। व्यक्तिगत रूप से ‘शब्द-शिखर’ और युगल रूप में ‘बाल-दुनिया’, ‘सप्तरंगी प्रेम’ व ‘उत्सव के रंग’ ब्लॉगों का संचालन इनके द्वारा किया जाता है। जर्मनी के बॉन शहर में ग्लोबल मीडिया फोरम (2015) के दौरान 'पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड' श्रेणी में  इनके ब्लॉग 'शब्द-शिखर' (http://shabdshikhar.blogspot.com) को हिंदी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है। ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉगर दंपती’’ सम्मान के अलावा  अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मेलन, काठमांडू में ’’परिकल्पना ब्लाग विभूषण’’ सम्मान और  अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका में ’’परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान’’ से सम्मानित हो चुकी  हैं। 


प्रतिभा का सम्मान :
विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक, साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और सतत् साहित्य सृजनशीलता के लिए आकांक्षा यादव को पचास से अधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं। इनमें उ.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा ’’अवध सम्मान’’, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डॉ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘‘ व ’’भगवान बुद्ध राष्ट्रीय फेलोशिप अवार्ड’’, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती ज्योति‘‘, ‘‘एस.एम.एस.‘‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार, निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली द्वारा ‘‘मनोहरा देवी सम्मान‘‘, मौन तीर्थ सेवा फाउंडेशन, उज्जैन द्वारा "मानसश्री सम्मान", साहित्य भूषण सम्मान, भाषा भारती रत्न, राष्ट्रीय भाषा रत्न सम्मान, साहित्य गौरव सहित तमाम  सम्मान शामिल हैं।

लेखनी से कुप्रथाओं पर चोट :
आकांक्षा यादव की सृजनधर्मिता सिर्फ पन्नों तक सीमित  नहीं है, बल्कि इसने लोगों के जीवन को भी छुआ है। लेखनी से कुप्रथाओं पर चोट के साथ नए विचार भी दिए। बिना लाग-लपेट के सुलभ भाव-भंगिमा सहित जीवन के कठोर सत्य उभरें, यही इनकी  लेखनी की विशिष्टता है। 

लखनऊ का अहम स्थान :
वह कहती हैं, लखनऊ का मेरी जिंदगी में अहम स्थान है। नवंबर 2004 में शादी के बाद लखनऊ आना हुआ।  पति कृष्ण कुमार यादव लखनऊ में ही डाक विभाग में कार्यरत थे। लिखने-पढ़ने का शौक तो पहले से ही था, पर बात कभी डायरी के पन्नों से आगे नहीं बढ़ी। संयोगवश, पति कृष्ण कुमार अच्छे साहित्यकार भी हैं, ऐसे में जोड़ी अच्छी जमी। लखनऊ तो शुरू से ही साहित्य और संस्कृति का केंद्र रहा है, ऐसे में यहाँ का प्रभाव पड़ना लाजिमी भी था। लखनऊ में रहते हुए ही मेरी आरम्भिक कविताएँ दैनिक जागरण, कादम्बिनी, गृह शोभा इत्यादि में प्रकाशित हुईं और फिर तो ये सिलसिला बढ़ता गया। 

भावों और विचारों का वैविध्य, विभिन्न विधाओं में लेखन के साथ अग्रणी ब्लॉगर भी 
शब्दों में भावों की आकांक्षा 

("कलम और कला" के अंतर्गत प्रतिष्ठित अख़बार 'दैनिक जागरण', 9 मार्च 2019  में चर्चा) 

मंगलवार, 5 जून 2018

विश्व पर्यावरण दिवस : एक पौधा ज़रूर लगाएं

विश्व पर्यावरण दिवस पर कोई बड़ा संकल्प भले न लें, पर एक पौधा ज़रूर लगाएं। ज़मीन में नहीं तो गमलों में ही सही..... और जो पहले लगाए थे, उनमें पानी भी दे आयें! 

यकीन मानिए, आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए कल ये ही छाँव देंगे। 
अधिकांश लोग सोशल मीडिया पर पेड़ लगाने में इतने व्यस्त रहेंगे कि धरा पर पेड़-पौधे लगाना भूल जाएंगे।
 बात अगर वैश्व‍िक संकट की हो तो भले ही किसी एक व्यक्त‍ि का निर्णय बहुत छोटा लगता है, लेकिन जब अरबों लोग एक ही मकसद से आगे बढ़ते हैं, तो बड़ा परिवर्तन आता है। आज 'विश्व पर्यावरण दिवस' है, आइए संकल्प करें एक वृक्ष लगाने का ......विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए आइए हम सभी संकल्प लेते है कि हम सब अपने परिवेश को कचरा मुक्त,प्लास्टिक मुक्त,गंदगी मुक्त कर साफ-स्वच्छ और हरा-भरा बनायेंगें। आज की हमारी छोटी कोशिश भी आने वाले कल को स्वर्णिम बना सकती है।

 सांसे हो रही हैं कम
आओ पेड़ लगाएँ हम

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गुज़रो जो बाग़ से तो दुआ माँगते चलो
जिसमें खिले हैं फूल वो डाली हरी रहे।
-निदा फाजली



रविवार, 27 मई 2018

सीबीएसई (CBSE) बोर्ड के नतीज़ों में बेटियाँ अव्वल, पर कैरियर में क्यों नहीं ??

सीबीएसई (CBSE) बोर्ड के कक्षा 12 वीं के नतीज़ों में बेटियाँ फिर से अव्वल। यही साल क्यों, प्रायः हर साल इन रिजल्ट्स में बेटियाँ अव्वल रहती हैं। बेटियाँ लगातार छठवें साल अव्वल रहीं। 
लड़कियों ने इस बार भी लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया। इनका उत्तीर्ण प्रतिशत 88.31 वहीं लड़कों का उत्तीर्ण प्रतिशत 78.99 रहा। 
नोएडा के स्टेप बाई स्टेप स्कूल से मानविकी विषय की छात्रा मेघना श्रीवास्तव ने 99.8 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉप किया है। उन्हें 500 अंकों में से 499 मिले हैं।  मेघना ने अंग्रेजी (कोर) में 99, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान में 100-100 अंक हासिल किए हैं। गाजियाबाद की अनुष्का चंद्रा ने 500 में से 498 नंबर हासिल कर दूसरे नंबर पर बाज़ी मारी है। 

 कमाल की बात यह है कि तीसरे नम्बर पर 1 या 2 नहीं इस बार 7 बच्चे हैं, जिन्होंने 500 में से 497 नंबर प्राप्त किए।  इन सात में से पांच लड़कियां हैं।  इन सबके नाम हैं चाहत बोधराज, आस्था बंबा, तनुजा कपरी, सुप्रिया कौशिक और अनन्या सिंह, वहीं दो लड़कों के नाम हैं नकुल गुप्ता और क्षितिज आनंद। 

एक तरफ यह रिजल्ट देखकर बेहद ख़ुशी होती है।  "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" से लेकर बालिका-सशक्तिकरण जैसे तमाम दावों के बावजूद कक्षा 12 के बाद ये बेटियाँ कहाँ चली जाती हैं ? यह एक अजीब विडंबना है कि शैक्षणिक (Academics) में बहुत अच्छा परफार्म करने वाली ये बेटियाँ कैरियर बनाने में पीछे रह जाती हैं या कैरियर की ऊंचाइयों पर नहीं पहुँच पाती। मां-बाप के लिए उनके कैरियर से ज्यादा उनकी शादी अहम हो जाती है। 

आख़िर, इस समाज में रोज बेटियों को अपने अस्तित्व की दुहाई देनी पड़ती है। समाज के नजरिये में आज उस बदलाव की भी जरूरत है जहाँ ये बेटियाँ पढ़ाई पूरी होने के बाद अपना मनचाहा कैरियर बना सकें और वहाँ भी सर्वोच मुकाम हासिल कर सकें।

-आकांक्षा यादव @ शब्द-शिखर