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शनिवार, 28 नवंबर 2015

पहला प्यार

पहली बार
इन आँखों ने महसूस किया
हसरत भरी निगाहों को

ऐसा लगा
जैसे किसी ने देखा हो
इस नाजुक दिल को
प्यार भरी आँखों से

न जाने कितनी
कोमल और अनकही भावनायें
उमड़ने लगीं दिल में

एक अनछुये अहसास के
आगोश में समाते हुए
महसूस किया प्यार को

कितना अनमोल था
वह अहसास
मेरा पहला प्यार !!









वक्त बदला, तारीखें बदली
ना बदला वो एहसास व प्यार !!
...... बस 11 साल ही तो हुए उस दिन को, जब हम बँधे थे इक बंधन में।  




फेसबुक पर रत्नेश कुमार मौर्य जी ने कुछ इस तरह से दुआएँ दीं -

इस सफर में आप दोनों के लिए बस एक ही दुआ। 
आगे के सफर में भी यूँ ही प्रीति बनाये रहना सदा। 
...... खूबसूरत जोड़ी को किसी की नजर न लगे !!



आप सभी की शुभकामनाओं और स्नेह के लिए आभार !!


शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

काश समय एक बार मुड़कर फिर वहीँ चला जाये


शादी की दसवीं सालगिरह। काश समय एक बार मुड़कर फिर वहीँ चला जाये, जहाँ से हमने शुरुआत की थी। एक बार फिर से उन दिनों को जीने का जी चाहता है। 






जीवन-साथी कृष्ण कुमार जी के विचार अच्छे लगे। इन्होंने लिखा -''जीवन में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव। दाम्पत्य जीवन का एक दशक आज पूरा हुआ। यहाँ पाश्चात्य विचारक फ्रैंज स्कूबर्ट के शब्द याद आ रहे हैं, ’’जिसने सच्चा दोस्त पा लिया, वह सुखी है। लेकिन उससे भी सुखी वह है जिसने अपनी पत्नी में सच्चा मित्र पा लिया है।’’ हमारा यह प्यार, यह साथ यूँ ही चलता रहे।  

आप सभी की शुभकामनाओं और स्नेह के लिए आभार। 

गुरुवार, 15 मई 2014

अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस : परिवार की महत्ता

परिवार की महत्ता से कोई भी इंकार नहीं कर सकता।  रिश्तों के ताने-बाने और उनसे उत्पन्न मधुरता, स्नेह और प्यार का सम्बल ही परिवार का आधार है।  परिवार एकल हो या संयुक्त, पर रिश्तों की ठोस बुनियाद ही उन्हें ताजगी प्रदान करती है।  आजकल रिश्तों को लेकर मातृ दिवस, पिता दिवस और भी कई दिवस मनाये जाते हैं, पर आज इन सबको एकीकार करता हुआ ''अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस'' मनाया जाता है।  परिवार का साथ व्यक्ति को सिर्फ भावनात्मक रूप से ही नहीं बल्कि नैतिक और सामाजिक दृष्टि से भी मजबूत रखता है। परिवार के सदस्य  ही व्यक्ति को सही-गलत जैसी चीजों के बारे में समझाते हैं।  

परिवार की इसी महत्ता को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1993 में एक प्रस्ताव पारित कर प्रत्येक वर्ष 15 मई को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।  वस्तुत : अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस परिवारों से जुड़े मसलों के प्रति लोगों को जागरुक करने और परिवारों को प्रभावित करने वाले आर्थिक, सामाजिक दृष्टिकोणों के प्रति ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है.

उपभोक्तावाद एवं अस्त-व्यस्त दिनचर्या के इस दौर में जहाँ कुछ लोग अपने को एकाकी समझकर तनाव, डिप्रेशन और कभी-कभी तो आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं, वहीँ कुछ लोग अपने काम को इतनी प्राथमिकता देने लगते हैं कि परिवार के महत्व को ही पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं।  एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में वे ना तो अपने माता-पिता को समय दे पाते हैं और ना ही अपने वैवाहिक जीवन के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम होते हैं। 

ऐसे में एक तरफ जहाँ  परिवार के लोगों की वैयक्तिक जरूरतों के साथ सामूहिकता का तादात्मय परिवार को एक साथ रखने के लिए बेहद जरूरी है, वहीँ  परिवार और काम के बीच का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति के लिए उसका परिवार बहुत महत्वपूर्ण होता है। व्यक्ति के जीवन को स्थिर  और खुशहाल बनाए रखने में उसका परिवार बेहद अहम भूमिका निभाता है।  

सो, आप सभी लोग अपने परिवार के साथ विशेष रूप से आज का दिन इंजॉय करें और wish Happy family !!

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

रिश्ता जन्मों-जन्मों का : वसंत, वेलेंटाइन और 'वर्ल्ड मैरिज डे'

हर दिन अपने में खास होता है।  रिश्तों को सेलिब्रेट करने का  चाहिए। यह सही है कि किसी रिश्ते या भावना को एक दिन विशेष में नहीं बाँधा जा सकता, पर किसी दिन विशेष पर मौका मिले तो सेलिब्रेट करने में हर्ज भी क्या ? जीवन की इस आपाधापी और दौड़भाग में रिश्तों की अहमियत किसी सी नहीं छुपी है।  ऐसे में आज एक खूबसूरत रिश्ते को सेलिब्रेट करने का एक और सु-अवसर है । आज 9 फरवरी को  'वर्ल्ड मैरिज डे' है । 'हैपिली मैरिड' का कॉन्सेप्ट भी इसी थीम पर टिका है, जहां आप दूसरे को इस हद तक स्वीकार करें कि उसकी कमियों के साथ चलने में  कोई समस्या न हो। तभी तो कहते हैं, ये रिश्ता जन्मों-जन्मों का। तेरा साथ है तो, फिर क्या कमी ......!  

फरवरी के हर द्वितीय रविवार को 'वर्ल्ड मैरिज डे' मनाया जाता है। यह भी अजीब संयोग है कि यह समय होता है वसंत की रुमानियत का, जिसे पश्चिमी देशों में वेलेंटाइन उत्सव के रूप में मनाया जाता  है। इस दौरान खूब शादियां होती हैं, मुहूर्त का भी कोई झंझट नहीं। यूँ ही नहीं कहा गया है कि यौवन हमारे जीवन का वसंत है तो वसंत इस सृष्टि का यौवन है। चरक संहिता में कहा गया है कि वसंत के दौरान कामिनी और कानन में अपने आप यौवन फूट पड़ता है। यही कारण है कि वसंत पंचमी का उत्सव मदनोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है और तदनुसार  वसंत के सहचर कामदेव तथा रति की भी पूजा होती है। इस अवसर पर ब्रजभूमि में भगवान्‌ श्रीकृष्ण और राधा के आनंद-विनोद का उत्सव मुख्य रूप से मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण इस उत्सव के अधिदेवता हैं।  'वर्ल्ड मैरिज डे' का कांसेप्ट भले ही पाश्चात्य देशों से आया है, पर वसंत पर्व में इसकी परंपरा अपने भारत देश में बहुत पुरानी रही है। 

वर्ल्ड मैरिज डे को पति-पत्नी के मधुर सम्बन्धों के लिए मनाया जाता है। विवाह का रिश्ता हमारे समाज का सशक्त आधार है। इसकी थीम है 'लव वन-अनदर' यानी एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करके अपने जीवन साथी  को प्यार करना। समाज में तमाम बदलावों के साथ रिश्तों की कसौटियां भी परिवर्तित हुई हैं। जाहिर है कि विवाह को भी हम इससे बचाकर नहीं चल सकते। तनाव, कमिटमेंट से घबराहट, करियर में आगे बढ़ने की चाह जैसे तमाम कारण हैं, जो लोगों को शादी में व्यवस्थित होने नहीं दे रहे हैं।  ऐसे में 'वर्ल्ड मैरिज डे' का कॉन्सेप्ट अपनी एक विशिष्ट  जगह रखता है, ताकि लोग प्यार की अगली कड़ी यानी शादी को भी सफल बना सकें। 

गुरुवार, 28 नवंबर 2013

आज ही तो इक बंधन में बंधे थे हम

28 नवम्बर का दिन हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. आखिर इसी दिन हमारी शादी जो हुई थी.  28 नवम्बर, 2004 (रविवार) को हम कृष्ण कुमार जी के साथ जीवन के इस अनमोल पवित्र बंधन में बंधे थे. आज हमारी शादी के नौ साल पूरे हो गए। वक़्त कितनी तेजी से करवटें बदलता रहा, पता ही नहीं चला। कहते हैं समायोजन निश्चय ही सुखी वैवाहिक जीवन का आधार होता है और हमारे जीवन में भी यही पारस्परिक भाव है. फेसबुक और  पर तमाम मित्रों ने इस शुभ दिन पर हमें बधाइयाँ और शुभकामनायें दी हैं, उन सभी का इस स्नेह के लिए आभार। चलते-चलते डा लाल रत्नाकर जी की  कुछेक पंक्तियाँ और चित्र :



आपके सुखद, सौभाग्यशाली, सुरुचि संपन्न एवं साहित्य समृद्ध जोड़ी के नव वर्ष के पूर्ण होने पर मेरी बहुतेरी हार्दिक शुभ कामनाएं स्वीकारें, आपका यही माधुर्य हमेशा प्रवाहित होता रहे, "न जाने कितने सिविल सर्विसेज  के लोग अवाम से अलग अपनी दुनिया बना लेते हैं'' लेकिन जो अवाम के मध्य अपना माधुर्य बिखेरते हैं उससे उन्हें तो ख़ुशी मिलती ही है साथ ही साथ जन सामान्य भी गौरवान्वित और प्रसन्न होता है. एक कलाकार के नाते हमेशा आपकी भावनाएं हमें उत्साहित करती हैं, उम्र में आधिक होने के बावजूद हमने हमेशा कई बातें सीखने, वरतने आदि का प्रयास किया है. आज मुझे और प्रसन्नता है कि 'आकांक्षा' विगत नव वर्षों से आपकी 'संगती' में निरंतर आपके साहित्यिक सहयात्री के रूप में खड़ी रही हैं. मैं अपनी कुछ रेखाएं आपको इस अवसर पर 'भेंट' करता हूँ.


बुधवार, 1 दिसंबर 2010

जीवन पुन: अपने रौब में....

आखिरकार एक लम्बे अन्तराल पश्चात् पुन: सपरिवार पोर्टब्लेयर में. इस अन्तराल के दौरान जहाँ एक बार पुन: मत्रितव सुख का सौभाग्य प्राप्त हुआ, वहीँ हमारी शादी की छठवीं सालगिरह भी पूरी हो गई. 27 अक्तूबर, 2010 की रात्रि 11: 10 पर बनारस के हेरिटेज हास्पिटल में बिटिया का जन्म हुआ और 27 नवम्बर को वह एक माह की हो गई. ठीक उसके अगले दिन 28 नवम्बर को हमारी शादी की की सालगिरह थी और अब हमारी शादी के छ: साल पूरे हो गए। 28 नवम्बर को ही हम लोग आजमगढ़ से बनारस पहुंचे और फिर विमान द्वारा सीधे कोलकाता. यह भी एक सौभाग्य रहा की सालगिरह विमान में ही सेलिब्रेट हो गया. खैर अगले दिन, 29 नवम्बर की सुबह हम पोर्टब्लेयर में थे. इक सुखद और खुशनुमा एहसास. ठण्ड का नामलेवा नहीं, तापमान 32 डिग्री सेल्सियस. पर्यटकों के लिए अंडमान का यह समय किसी जन्नत से कम नहीं होता है. इस समय पोर्टब्लेयर में जितनी हलचल दिखती है, वह वाकई देखने लायक होती है. एक लम्बे अन्तराल पश्चात् जीवन पुन: अपने रौब में लौट कर आ गया है. इस बीच बिटिया के जन्म और शादी की सालगिरह पर आप सभी की शुभकामनाओं, बधाई और स्नेह के लिए हार्दिक आभार. अब ब्लॉग पर निरंतरता बनी रहेगी....!!

रविवार, 28 नवंबर 2010

आज हमारी शादी की सालगिरह है..


28 नवम्बर का दिन हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. आज हमारी शादी की सालगिरह है. इस वर्ष हमारी शादी के छ: साल पूरे हो गए। 28 नवम्बर, 2004 (रविवार) को मैं और कृष्ण कुमार जी जीवन के इस अनमोल पवित्र बंधन में बंधे थे. पर वक़्त कितनी तेजी से करवटें बदलता रहा, पता ही नहीं चला. फ़िलहाल आज हम लोग बनारस से कोलकात्ता पहुंचेंगें और अगले दिन पोर्टब्लेयर. सालगिरह का इससे अच्छा तोहफा क्या हो सकता है कि इक लम्बे समय बाद हम एक साथ होंगें !!

शनिवार, 12 दिसंबर 2009

पाँच वर्षों का यह सुखद सफर !!


28 नवम्बर, 2009 को हमारे वैवाहिक जीवन की पाँचवी वर्षगाँठ थी. हम दोनों उस दिन दो भिन्न जगहों पर थे और नेट से भी दूर थे. पर इस सुखद पल की यादों को सँजोने हेतु पतिदेव श्री कृष्ण कुमार यादव जी ने अपने ब्लॉग "शब्द सृजन की ओर" पर कुछ शब्द लिखे हैं, उन्हें यहाँ साधिकार (साभार नहीं) प्रस्तुत कर रही हूँ-



28 नवम्बर का दिन हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. इस वर्ष इस तिथि को सबसे महत्वपूर्ण बात रही कि हमारी शादी के पाँच साल पूरे हो गए। 28 नवम्बर, 2004 (रविवार) को मैं और आकांक्षा जीवन के इस अनमोल पवित्र बंधन में बंधे थे. वक़्त कितनी तेजी से करवटें बदलता रहा, पता ही नहीं चला. सरकारी भाषा में कहें तो एक पंचवर्षीय योजना मानो पूरी हो गई. सुख-दुःख के बीच सफलता के तमाम आयाम हमने छुए. कभी जिंदगी सरपट दौड़ती तो कई बार ब्रेक लग जाता. पिछले साल का हादसा अभी भी नहीं भूलता. जब शादी की सालगिरह के अगले दिन ही मेरा एक एक्सिडेंट हुआ और बाएं हाथ
का आपरेशन करना पड़ा. एक सप्ताह के लिए मैं हॉस्पिटल में भी रहा. इस बार भी शादी की सालगिरह पर हम साथ नहीं थे, मैं ट्रेनिंग के सिलसिले में बाहर था....पता नहीं यह कैसा संयोग है, पर पाँच साल के इस सफ़र में सालगिरह का दिन हमारे लिए बहुत अजीब रहा. दो बार ट्रेनिंग, एक बार बॉस के साथ एक मीटिंग में काफी रात हो जाना, एक बार सालगिरह के अगले दिन एक्सिडेंट....कुल मिला-जुलाकर अब तक एक ही सालगिरह हम लोग कायदे से उसी दिन सेलिब्रेट कर पाए हैं. हमेशा अपनी सालगिरह सेलिब्रेट करने के लिए हमें किसी अगली तिथि का चुनाव करना पड़ता है, पर वह दिन सिर्फ हमारा होता है. कई बार हम लोग मजाक में कहते भी हैं की विभाग वालों ने हमारी सालगिरह की तारीख नोट कर रखी है, कोई भी ट्रेनिंग और महत्वपूर्ण मीटिंग इसी दिन होगी.


ऐसा ही अजीब संयोग हमारी शादी के बारे में भी है. मैं जहाँ भी पोस्टिंग पर जाता, वहाँ आकांक्षा जी के भ्राता श्री लोगों की भी पोस्टिंग होती. जब मैं पोस्टल स्टाफ कालेज, गाज़ियाबाद में ट्रेनिंग कर रहा था तो इनके बड़े भ्राता श्री नोएडा में एक मल्टीनेशनल कंपनी में थे, पहली पोस्टिंग पर सूरत गया तो इनके भ्राता श्री गुजरात कैडर के IAS अधिकारी थे, वहां से ट्रांसफर होकर लखनऊ में असिस्टेंट पोस्टमास्टर जनरल बना तो इनके एक भ्राता श्री वहां पुलिस उपाधीक्षक थे.....फिर ये रिश्ता होने से कौन रोक सकता था. खैर हम लोगों की शादी 28 नवम्बर, 2004 को धूमधाम के साथ सारनाथ-बनारस में हुई, एक साथ भगवान शंकर जी और भगवान बुद्ध जी का आशीर्वाद मिला। कानपुर में पोस्टिंग के दौरान वर्ष 2006 में प्यारी बिटिया अक्षिता का जन्म हुआ.

एक-दूसरे के साथ बिताये गए ये पाँच साल सिर्फ इसलिए नहीं महत्वपूर्ण हैं कि हमने पति-पत्नी का सम्बन्ध निभाया, बल्कि इसलिए भी कि हमने एक-दूसरे को समझा, सराहा और संबल दिया. अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच कैसे समय निकल लेते हैं तो इसके पीछे आकांक्षा जी का ही हाथ है. यदि उन्होंने मेरी रचनात्मकता को सपोर्ट नहीं किया होता तो मैं आज एक अदद सिविल सर्वेंट मात्र होता, लेखक-कवि-साहित्यकार के तमगे मेरे साथ नहीं लगे रहते. यह हमारा सौभाग्य है कि हम दोनों साहित्य प्रेमी हैं और कई सामान रुचियों के कारण कई मुद्दों पर खुला संवाद भी कर लेते हैं।

शादी की सालगिरह पर तमाम मित्रजनों-सम्बन्धियों की शुभकामनायें तमाम माध्यमों से प्राप्त हुई...आप सभी का आभार. हिंदी ब्लॉगरों के जन्मदिन ब्लॉग पर भी इस दिन शुभकामनायें दी गईं, आभारी हैं हम दोनों। आप सभी का स्नेह बना रहे ....!!