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गुरुवार, 20 मई 2010

नेताजी का अरमान

नेता-अभिनेता दोनों
हो गए एक समान
मंचों पर बैठकर गायें
एक दूजे का गान।

चिकनी चुपडी़ बातें करें
खूब करें अपना बखान
जनता का धन खूब लूटें
गायें मेरा भारत महान।

मँहगाई, बेरोजगारी खूब फैले
नेताजी सोते चद्दर तान
खुद खाएं मुर्ग मुसल्लम
जनता भुखमरी से परेशान।

कभी आंतक, कभी नक्सलवाद
ये लेते सबकी जान
नेताजी बस भाषण देते
शहीद होते जाबांज जवान।

चुनाव आया तो लंबे भाषण
खडे़ हो गए सबके कान
वायदों की पोटली से
जनता हो रही हैरान ।

संसद में पहुँच नेताजी
बघारते अपना ज्ञान
अगला चुनाव कैसे जीतें
बस यही रहता अरमान ।

(वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में भी पढ़ें)

30 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

अच्छी टांग खींची नेता-अभिनता की...सब हो गए एक सामान..शानदार प्रस्तुति के लिए बधाई.

संजीव शर्मा ने कहा…

अच्छा प्रयास है ...कम से कम लीक से हटकर कुछ तो है.
इक नज़र यहाँ भी मार लीजिये
www.jugaali.blogspot.com

दिलीप ने कहा…

bahut achcha vyang kasa aaj ke haalaaton par...

SANJEEV RANA ने कहा…

बहुत अच्छी रचना
आभार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

जी हाँ!
दोनों में कोई अन्तर नही है!

S R Bharti ने कहा…

मँहगाई, बेरोजगारी खूब फैले
नेताजी सोते चद्दर तान
खुद खाएं मुर्ग मुसल्लम
जनता भुखमरी से परेशान।

....Ab iske age kya kaha jay..bejod vyangya kavita.

हिंदी साहित्य संसार : Hindi Literature World ने कहा…

कभी आंतक, कभी नक्सलवाद
ये लेते सबकी जान
नेताजी बस भाषण देते
शहीद होते जाबांज जवान।
...बहुत समसामयिक व प्रासंगिक कटाक्ष...आकांक्षा यादव जी को शुभकामनायें.

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

शानदार व्यंग्य रचना...बधाई.

Bhanwar Singh ने कहा…

खूब कही....नेता-अभिनेता एक समान..मजा आ गया.

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

नेताओं की बात ही मत करें तो बढ़िया है....सब गोलमाल है.

शरद कुमार ने कहा…

नेताजी बस भाषण देते
शहीद होते जाबांज जवान।

अपने दंतेवाडा की यादें ताजा कर दीं.बहुत सुन्दर व्यंग्य.

Shyama ने कहा…

आकांक्षा जी, आपकी यह कविता तो सोचने पर मजबूर करती है. देखा नहीं चिदंबरम साहब कैसी एक्टिंग कर रहे हैं कि हमारे पास सीमित अधिकार हैं.

editor : guftgu ने कहा…

कभी आंतक, कभी नक्सलवाद
ये लेते सबकी जान
नेताजी बस भाषण देते
शहीद होते जाबांज जवान।

...यही तो देखकर दुःख होता है. कब तक इन बातों को मजाक में उड़ाते रहेंगे.

raghav ने कहा…

बहुत खूब. बढ़िया व्यंग्य किया आज की व्यवस्था पर...सार्थक व प्रभावशाली कविता ..बधाई.

Shahroz ने कहा…

चिकनी चुपडी़ बातें करें
खूब करें अपना बखान
जनता का धन खूब लूटें
गायें मेरा भारत महान।
..बहुत खूब आकांक्षा जी, मन कर रहा है ताली बजाओं इतनी सुन्दर बात के लिए.

Amit Kumar Yadav ने कहा…

नेता-अभिनेता ने मिलकर सारे देश को दूषित कर रखा है. पूरा अवमूल्यन...आपकी यह कविता समसामयिक लगी.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर लेख

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बढ़िया व्यंग है ।
हम तो यही कामना करते हैं कि :

नेताओं को मत मिले
पार्टियों को बहुमत मिले
जनता को चावल दाल मिले
और दो रूपये किलो हर माल मिले ।

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

कभी आंतक, कभी नक्सलवाद
ये लेते सबकी जान
नेताजी बस भाषण देते
शहीद होते जाबांज जवान।
बहुत सही.

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) ने कहा…

नेता-अभिनेता ने मिलकर सारे देश को दूषित कर रखा है. पूरा अवमूल्यन...आपकी यह कविता समसामयिक लगी.

प्रिया ने कहा…

Besharm log hain ye...kuch bhi karo kaho na hi sudharne waale

संजय भास्‍कर ने कहा…

.बहुत समसामयिक व प्रासंगिक कटाक्ष.

संजय भास्‍कर ने कहा…

... बेहद प्रभावशाली

KK Yadav ने कहा…

जमके बखिया उधेडी है...सटीक !!

Akshitaa (Pakhi) ने कहा…

...सही लिखा ममा.

मन-मयूर ने कहा…

अगला चुनाव कैसे जीतें
बस यही रहता अरमान ।
...एकदम सच कहा , गहरा कटाक्ष..बधाई.

Akanksha Yadav ने कहा…

आप सभी के स्नेह, प्रोत्साहन एवं प्रतिक्रियाओं के लिए आभार. अपना स्नेह यूँ ही बनाये रहें.

बेनामी ने कहा…

बहुत सुन्दर व्यंग्य रचा आकांक्षा जी. कड़ा कटाक्ष, खरी बातें..बेहद पसंद आयीं.

बेनामी ने कहा…

..देखा नहीं आजकल अमर सिंह एक फिल्म में डिम्पल कपाडिया के पति का रोल कर कितने खुश नजर आ रहें हैं...हा..हा..हा..

अरुणेश मिश्र ने कहा…

प्रशंसनीय ।