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गुरुवार, 5 नवंबर 2015

अब भगवान भी दौरे पर

अब भगवान जी भी दौरे करने लगे हैं।  विश्वास नहीं हो रहा न, पर यह सच है। 50 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के साथ देश के सबसे अमीर भगवान तिरुपति बालाजी इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। ये पहला मौका है जब वे अपने पूरे दलबल के साथ आंध्रप्रदेश से बाहर किसी दूसरे राज्य में पहुंचे हैं। दरअसल, दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में 8 नवंबर तक ‘वैभवोत्सम’का आयोजन किया जा रहा है। यहां भगवान बालाजी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। यद्यपि मुख्य कार्यक्रम 7 नवंबर को है। लेकिन हर दिन यहां उसी तरह पूजा पाठ हो रहा है, जैसी तिरुपति बालाजी में होता है। मंदिर और दर्शन को विश्वसनीय बनाने के लिए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। टीटीडी ही श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी उठाता है।

 पूजा पाठ का सामान 25 ट्रकों में भरकर दिल्ली लाया गया है। पूजा-अनुष्ठानों के लिए 35 पुजारियों सहित 250 मंदिर स्टाफ भी भगवान बालाजी के साथ आए हैं। मंदिर को सजाने वाले कारीगर भी तिरुमला से ही आए हैं। भगवान की मूर्तियों के अलावा, पर्दे भी तिरुमला मंदिर से लाए गए हैं। तिरुपति भोग का मशहूर लड्डू और प्रसाद तैयार करने की सामग्री भी तिरुमला से ही मंगवाई जा रही है। यहाँ तक कि भगवान की मूर्तियों के लिए फूल भी तिरुमला और बेंगलुरु से मंगवाए गए हैं। ‘वैभवोत्सम’को इस तरह मंदिर परिसर से बाहर आयोजित करने की योजना स्वर्ण भारत ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी और भाजपा नेता वेंकैया नायडू की बेटी दीपा वैंकट की है। दिल्ली दौरे के दौरान न केवल सर्वदर्शन मुफ्त हैं बल्कि सभी दैनिक सेवाएं व सोमवार की विशेष पूजा से लेकर पूराभिषेकम तक सभी वारोत्सव नेहरू स्टेडियम में खुले में आयोजित किए जा रहे हैं। यहां कुर्सी से लेकर जमीन में बैठने की व्यवस्था की गई है। किसी भी दर्शन के लिए कोई फीस नहीं है। यहां तक कि यदि पुरुष धोती और महिलाएं साड़ी या सलवार सूट पहने हैं तो उन्हें बालाजी के बिल्कुल करीब जाने का मौका भी मिल रहा है। हर शाम को प्रांगण में ही निकलने वाली शोभायात्रा में भी सब शामिल हो सकते हैं और पालकी को श्रद्धा से छू भी सकते हैं। ऐसा तिरुपति में कतई संभव नहीं हो पाता है।

उत्सव के लिए तिरुपति बालाजी की मूर्ति को तिरुपति बालाजी से विशेष गरुड़ वाहन से लाया गया है। मूल प्रतिमा वहीं विराजमान है। टीडीडी की योजना है कि सभी राज्यों की राजधानियों में एक-एक देवस्थानम स्थापित किया जाए। ताकि जो लोग तिरुपति नहीं जा सकते, उन तक बालाजी पहुंच जाएं। इसकी योजना बनाई जा रही है।

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