आपका समर्थन, हमारी शक्ति

बुधवार, 4 सितंबर 2013

'मजदूर' की बेटी, पर 'मजबूर' नहीं, 7 साल में हाईस्कूल, 13 साल में एमएससी

प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, वह अपना रास्ता खुद ही बना लेती है। तभी तो महज सात साल की उम्र में हाईस्कूल पास कर रिकॉर्ड बनाने वाली वंडर गर्ल के नाम से मशहूर लखनऊ की सुषमा वर्मा अब 13 साल की उम्र में लखनऊ विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ साइंस (एमएससी) में दाखिला लेने के बाद एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सुषमा वही होनहार लडकी है जिसने सिर्फ़ 7 साल की उम्र में 10वीं और 9 साल की उम्र में 12वीं पास कर देश भर में सुर्ख़ियाँ बटोरी थी. सुषमा ने कहा कि वह एम.बी.बी.एस. कोर्स ज्वाइन करना चाहती थी. लेकिन, 17 वर्ष की उम्र प्राप्त करने से पहले वह ऐसा नहीं कर सकती. अतः वह लखनऊ विश्वविद्यालय में एम.एस-सी. कोर्स ज्वाइन कर रही है.

लखनऊ के कृष्णानगर निवासी श्रमिक तेज बहादुर वर्मा की बेटी सुषमा ने महज सात साल की उम्र में हाईस्कूल, नौ साल की उम्र में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की है। उसने सिटी मान्टेसरी स्कूल (सीएमएस) डिग्री कॉलेज से इसी साल बीएससी की डिग्री हासिल की। अब वह तेरह साल की उम्र में लखनऊ विश्वविद्यालय में एमएससी करने जा रही है। उसने एमएससी माइक्रोबायलॉजी में दाखिला लिया है। सुषमा इन दिनों लखनऊ विश्वविद्यालय के दूसरे छात्रों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है। उसके तमाम सहपाठी लगभग दोगुने उम्र के हैं। ऐसे में हर छात्र सुषमा से उसकी कामयाबी की कहानी सुनना चाहते हैं। छात्रों का कहना है कि सुषमा हमारे लिए एक मिसाल है, जिससे हमें चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

बेहद गरीब परिवार से संबंध रखने वाली सुषमा का नाम एमएससी माइक्रोबायोलॉजी में दाखिले की कटऑफ सूची में आने के बाद एडमिशन फीस भरने में अड़चने आईं। लेकिन होनहार सुषमा की मदद के लिए कई हाथ आगे बढ़े। लखनऊ विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर डॉ़ मनोज दीक्षित का कहना है कि सुषमा किसी चमत्कार से कम नहीं। ऐसे में समाज की जिम्मेदारी बनती है कि इसकी हर तरह से मदद की जाए। उन्होंने बताया कि गीतकार जावेद अख्तर और अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट में कार्यरत अनिवासी भारतीय रफत सरोस ने सुषमा की पढ़ाई में आने वाले खर्च में मदद का भरोसा दिया है। 

सुषमा के पिता तेज बहादुर कहते हैं कि घर की माली हालत ठीक न होने की वजह से मुझे अपनी बेटी को पढ़ाने में दिक्कतें आ रही थीं, लेकिन मैं उन सभी लोगों का बहुत आभारी हूं जिन्होंने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। बहादुर ने कहा कि बिना लोगों की मदद के मैं अपनी बेटी की फीस भरकर उसे एमएससी में दाखिला नहीं दिला सकता था। सुलभ इंटनेशनल के प्रमुख बिंदेश्वरी पाठक ने भी सुषमा की पढ़ाई में मदद के लिए पांच लाख रुपये देने की बात कही है। अगले सप्ताह वह स्वयं लखनऊ आकर सुषमा के पिता को पांच लाख रुपये देंगे।

सुषमा कहती है कि लखनऊ विश्वविद्यालय से माइक्रोबायलॉजी के बाद पीएचडी करना चाहती हूं और 18 साल की होने पर सीपीएमटी की परीक्षा दूंगी। घर की हालत देखते हुए अभी तक यह सब बहुत मुश्किल लग रहा था, लेकिन लोगों की मदद से उम्मीद जगी है कि मैं अपना मुकाम हासिल कर लूंगी। अपनी प्रतिभा के झंडे गाड़ने वाली सुषमा को बी एस अब्दुर्रहमान विश्वविद्यालय, चेन्नई की तरफ से मुफ्त एमएससी की पढ़ाई का भी ऑफर मिला है।

एक टिप्पणी भेजें