आपका समर्थन, हमारी शक्ति

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

महिलाओं से इतना डर क्यों


महिलाओं से इतना डर क्यों लगने लगा है इस देश के सम्प्रभुओं को?  फारुख अब्दुल्ला साहब अपना दुःख बयां कर रहे हैं, कि महिलाओं से इतना डर लगने लगा है कि उन्हें पीए बनाने से पहले भी सोचें ?  जस्टिस गांगुली से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर जवाब देते हुए फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि अब लड़कियों से बात करने में भी डर लगता है, और हालत ये हो गई है कि अब हम लोग महिला पीए भी नहीं रखेंगे। क्या पता कब जेल जाना पड़ जाए। फारुख जी तो सिर्फ किसी के बहाने बयान दे रहे हैं, पर शायद यही आवाज़ राजनेताओं से लेकर संत, पत्रकार, जज, अधिकारी तक अपने मन में दबा कर बैठे हैं.…सवाल है कि आखिर क्यों ? 

लड़कियाँ/महिलाएं खुलकर विरोध करने लगीं कि कैसे उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, कैसे उनके सीनियर्स ने  उनका फायदा उठाया तो कुछेक लोग जेल की  सलाखों के पीछे पहुँच गए और कुछ लोग कभी भी जेल जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.…। आखिर ये सम्प्रभु लोग यह क्यों नहीं सोचते कि महिलाओं का अपना भी स्वतंत्र अस्तित्व है, सम्मान है, निजता है, आप उसके साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। 

महिलाएं कोई गूंगी गुड़िया नहीं हैं, जिसे जहाँ चाहें फिट कर दें. उनमें भी स्पंदन होता है, चीजों का विरोध होता है, उन्हें आप लम्बे समय तक दबा कर नहीं रख सकते। आखिर, अपनी मानसिकता बदलने की  बजाय यह कहना कि हम महिलाओं के साथ काम नहीं कर सकते, उनसे डर लगता है .... कभी इसे महिलाओं के भी एंगल से सोचिए ?? हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि किन विपरीत परिस्थितियों में महिलाओं ने समाज और व्यवस्था में अपना स्थान बनाया है और आज यदि उसी महिला से लोग डरने की  बात कर रहे हैं तो यह महिलाओं से नहीं बल्कि खुद से डरना है, क्योंकि शायद आपका अपने ऊपर नियंत्रण ही नहीं है. 

आखिर, सम्प्रभु लोग यह क्यों सोचते हैं कि महिलाएं उनकी पीए बनें, बॉस नहीं। कहीं न कहीं यह दोहरापन भी  इन सबकी जड़ में है. यदि लोग यह  सोचते हैं कि महिलाओं के साथ रेप होता रहे, छेड़छाड़ होती रहे और आप कैंडल जलाकर सदभावना और श्रद्धांजलि अर्पित करते रहेंगे तो इस ग़लतफ़हमी को निकाल डालिए। महिलाओं की सौम्यता को उनकी कमजोरी नहीं समझिये, नहीं तो रणचंडी बनने में कितनी देरी लगती है. फिर बड़ा से बड़ा अपने को भगवान समझने वाला संत और बड़े से बड़े लोगों की तहलका मचाकर बखिया उघेड़ने वाले भी अर्श से फर्श पर आ जाते हैं !!

- आकांक्षा यादव @ www.shabdshikhar.blogspot.com/ 
एक टिप्पणी भेजें