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गुरुवार, 22 जुलाई 2010

एस. एम. एस.


अब नहीं लिखते वो ख़त
करने लगे हैं एस. एम. एस.
तोड़-मरोड़ कर लिखे शब्दों के साथ
करते हैं खुशी का इजहार
मिटा देता है हर नया एस. एम. एस.
पिछले एस. एम. एस. का वजूद
एस. एम. एस. के साथ ही
शब्द छोटे होते गए
भावनाएं सिमटती गई
खो गई सहेज कर रखने की परम्परा
लघु होता गया सब कुछ
रिश्तों की क़द्र का अहसास भी !!

25 टिप्‍पणियां:

sanu shukla ने कहा…

sahi chitran kiya hai....!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सच को बताती रचना....एहसास ही कहाँ रहे...

कडुवासच ने कहा…

...बेहतरीन!!!

Randhir Singh Suman ने कहा…

nice

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बड़ी त्रासद स्तिथि है...एस एम् एस में वो बात कहाँ जो चिठ्ठी में हुआ करती थी...
नीरज

अंजना ने कहा…

सुंदर रचना...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मोबाइल से पत्रों का रोमांच चला गया।

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

आप की रचना 23 जुलाई, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
http://charchamanch.blogspot.com

आभार

अनामिका

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर जी

मनोज कुमार ने कहा…

शब्द छोटे होते गए,
भावनाएं सिमटती गई!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सच है । अब तो लोग चैट भी करते हैं तो बिना मूंह खोले ।

रंजन (Ranjan) ने कहा…

enjoy the changes..

past is always beautiful..

but the present will be past one day and we will thought how beautiful that time was!!

एक विचार ने कहा…

बेहतरीन

Akanksha Yadav ने कहा…

@ Anamika Ji,

चर्चा के लिए आभार.

KK Yadav ने कहा…

लघु होता गया सब कुछ
रिश्तों की क़द्र का अहसास भी.

...बेहतरीन अभिव्यक्ति....बधाई.

Unknown ने कहा…

खतों की बात ही कुछ और है...मेल और समस सूचना दे सकते हैं, संवेदना और भाव नहीं.

Unknown ने कहा…

खतों की बात ही कुछ और है...मेल और समस सूचना दे सकते हैं, संवेदना और भाव नहीं.

Unknown ने कहा…

खतों की बात ही कुछ और है...मेल और समस सूचना दे सकते हैं, संवेदना और भाव नहीं.

Unknown ने कहा…

खतों की बात ही कुछ और है...मेल और समस सूचना दे सकते हैं, संवेदना और भाव नहीं.

Unknown ने कहा…

खतों की बात ही कुछ और है...मेल और समस सूचना दे सकते हैं, संवेदना और भाव नहीं.

Unknown ने कहा…

There is something problem in Comments-posting..

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

SMS कविता अज के समाज का चेहरा दिखाती है. यह सही है की SMS के साथ ही भावनाएं भी सिमटती गयीं और रिश्ते भी..पर इलेक्ट्रॉनिक दौर में भावनाओं का कितना मोल बचा है, यह भी एक बहस का विषय है?

Akanksha Yadav ने कहा…

आप सभी ने इस पोस्ट को पसंद किया..आभार. अपना स्नेह यूँ ही बनाये रहें.

Bhanwar Singh ने कहा…

मिटा देता है हर नया एस. एम. एस.
पिछले एस. एम. एस. का वजूद

सही कहा आपने ...अच्छा लगा पढ़कर

दीनदयाल शर्मा ने कहा…

शब्द छोटे होते गए
भावनाएं सिमटती गई
खो गई सहेज कर रखने की परम्परा
लघु होता गया सब कुछ
रिश्तों की क़द्र का अहसास भी !!
...सच है..सब कुछ सिमट गया है...भावनाएं और संबंधों का एहसास भी...