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मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

शाहों के शाह, हमारे नौकरशाह! (कवि-मन कपिल सिब्बल जी की व्यथा)

(कहते हैं जब अपनी व्यथा किसी से न कह पायें तो कविता में उतार दें. यही कारण है कि आज तमाम नामचीन लोग कवितायेँ लिखते हैं, कोई चोरी-छुपे डायरी में तो कोई सभी के सामने अभिव्यक्त करता है. इन कवियों में अब मानव संसाधन मंत्री और संचार मंत्री कपिल सिब्बल जी का नाम भी शामिल हो गया है. उनकी इस कविता को पढ़ें, उनका दर्द समझें और कवि-मन से लुत्फ़ उठायें )

शाहों के शाह,
हमारे नौकरशाह!
पता नहीं इन्होंने
कहां से कौन सा ज्ञान
उधार लिया है,
कि न्यूटन के
प्रसिद्ध गति के नियम को भी
सुधार लिया है।
पाॅजिटिव कामों का
जरूर होना चाहिए विरोध,
ताकतवर निगेटिव प्रतिक्रिया से
बनाते हैं नए-नए अवरोध।
हर समस्या के लिए
सरकार के पास नीति है,
मंत्री के पास भी ज्ञान है
नीति को समझाने की रीति है।
जब उन्हें साफ-साफ अल्पफाज में
रास्ता बताया जाता है,
तो कुछ न कुछ
ऐसा लाया जाता है
जिससे दिखती है
उस कार्रवाई की सीमा,
और इस तरह
वे फाइलों की गति को
कर देते हैं धीमा।
शायद पड़ जाते हैं
गुरुत्वाकर्षण के
सिद्धांत के फेर में,
जिन फाइलों पर
तुरंत कार्रवाई की जरूरत हो
उन्हें सबसे नीचे जगह मिलती है
ढेर में।

(कपिल सिब्बल जी की पुस्तक ‘किस-किस की जय हो’से साभार)

20 टिप्‍पणियां:

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

कपिल सिब्बल जी ने अपने दर्द का चित्रण बखूबी किया है किन्तु मामला एकतरफा है | महोदय ने नेताओं-मंत्रियों को सर्वसक्षम बताते हुए नौकरशाही की आलोचना की है , अब जब तक कोई नौकरशाह कवि अपना दर्द नहीं उड़ेलेगा तब तक कविता पूर्णता को कैसे प्राप्त कर सकेगी ?

ज्योति सिंह ने कहा…

देते हैं धीमा।
शायद पड़ जाते हैं
गुरुत्वाकर्षण के
सिद्धांत के फेर में,
जिन फाइलों पर
तुरंत कार्रवाई की जरूरत हो
उन्हें सबसे नीचे जगह मिलती है
ढेर में।
laazwaab rachna

Sunil Kumar ने कहा…

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से रचना सार्थक है कपिल सिब्बल जी को बधाई

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

बहुत अच्छा किया आपने कपिल जी की इस कविता को यहाँ शेयर कर के.उन के मन की व्यथा यहाँ साफ़ झलक रही है.

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सार्थक और सटीक प्रस्तुति..

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत ही सार्थक सटीक रचना है। धन्यवाद कपिल सिब्बल जी को पढवाने के लिये।

OM KASHYAP ने कहा…

बेहतरीन रचना के लिए बधाई ।

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सार्थक और सटीक प्रस्तुति| धन्यवाद|

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

सार्थक रचना है , बधाई.

Learn By Watch ने कहा…

कपिल जी भी कविता कर लेते हैं, कमाल है
अपना ब्लॉग मासिक रिपोर्ट

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

वे फाइलों की गति को
कर देते हैं धीमा।
शायद पड़ जाते हैं
गुरुत्वाकर्षण के
सिद्धांत के फेर में,
जिन फाइलों पर
तुरंत कार्रवाई की जरूरत हो
उन्हें सबसे नीचे जगह मिलती है
ढेर में।bahut hi achchha tark diya hai sibbal sahab ne..........

मनोज कुमार ने कहा…

बिल्कुल सही कहा है आपने।

राज भाटिय़ा ने कहा…

हर समस्या के लिए
सरकार के पास नीति है,
मंत्री के पास भी ज्ञान है
नीति को समझाने की रीति है।

तभी तो देश मे चारो ओर खुशहाली हे, सब इन्हे कितना प्यार करते हे, बस एक बार आम लोगो के गले मिल कर तो देखे, ओर उन कॊ छोटी मोटी समस्या का हल भी निकाले जो इन्होने ही दी हे...... बेचारे कवि... कितना काम हे इन्हे

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत अच्छी रचना

नारी स्नेहमयी जननी

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

ये तो छिपे रूस्‍तम निकले।

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ब्‍लॉगवाणी: ब्‍लॉग समीक्षा का एक विनम्र प्रयास।

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

khoob kha ....

KK Yadav ने कहा…

हर किसी की अपनी व्यथा....सिब्बल साहब भी कवि हो गए हैं.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

ये शाहों के शाह।

Unknown ने कहा…

जिन फाइलों पर
तुरंत कार्रवाई की जरूरत हो
उन्हें सबसे नीचे जगह मिलती है
ढेर में।
...sundar kavita.

Unknown ने कहा…

यही तो इस देश का दुर्भाग्य है..सिब्बल जी काफी अच्छा लिखते हैं. पर एक वकील की तरह दोष भी दूसरों पर मढने पर माहिर हैं.