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शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

तुम्हारी ख़ामोशी


तुम हो
मैं हूँ
और एक खामोशी
तुम कुछ कहते क्यूँ नहीं
तुम्हारे एक-एक शब्द
मेरे वजूद का
अहसास कराते हैं
तुम्हारी पलकों का
उठना व गिरना
तुम्हारा होठों में ही
मंद-मंद मुस्कुराना
तुम्हारा बेकाबू होती
साँसों की धड़कनें
तुम्हारे शरीर की खुशबू
तुम्हारी छुअन का अहसास
सब कुछ
इस खामोशी को
झुठलाता है।

कृष्ण कुमार यादव

24 टिप्‍पणियां:

कविता रावत ने कहा…

सच ख़ामोशी खामोश रहकर भी बहुत कुछ बोल लेती हैं... बढ़िया अहसास ...शुभकामना

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

तुम हो
मैं हूँ
और एक खामोशी
तुम कुछ कहते क्यूँ नहीं
तुम्हारे एक-एक शब्द
मेरे वजूद का
अहसास कराते हैं...
....बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति.

vandan gupta ने कहा…

खामोशी भी बोला करती है
इसकी भी जुबान होती है
बिन कहे जो बात होती है
बस उस वक्त ही बात होती है

बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति।

Sunil Kumar ने कहा…

दिल क़ी गहराई से लिखी गयी एक रचना , बधाई

Kailash Sharma ने कहा…

सच है खामोशी की भी एक जुबां होती है..बेहद संवेदनशील प्रस्तुति..

आपका अख्तर खान अकेला ने कहा…

aakaanksha bhn aapke bolg pr krshn kant ji ki yeh rchnaa lekin bhut bhut jivnt alfaaz he mubark ho . akhtar khan akela kota rajsthan

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुंदर अभिव्यक्ति.

Amit Chandra ने कहा…

कई बार कुछ कहने से बेहतर खामोशी होती है। खामोशियों को खामोशी से समझो ये बहुत कुछ कहती है।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत भावपूर्ण!!!

Unknown ने कहा…

बेहतरीन कविता , कही गहरे तक उतर कर लिखी गयी का अहशास कराती पंक्तिया है आपकी बधाई कृष्ण जी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरती से खामोशी को अभिव्यक्त किया ..सुन्दर रचना

Amit Kumar Yadav ने कहा…

....बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति.दिल क़ी गहराई से लिखी गयी एक रचना , बधाई

Bhanwar Singh ने कहा…

तुम्हारे शरीर की खुशबू
तुम्हारी छुअन का अहसास
सब कुछ
इस खामोशी को
झुठलाता है।

....बहुत सुन्दर शब्दों में सहेजा भावों को...बधाई.

Bhanwar Singh ने कहा…

साहित्य का प्रकाश यूँ ही चारों तरफ फैलाते रहें
कृष्ण बनकर जग का अँधियारा भगाते रहें.

भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2010‘‘ से सम्मानित होने पर श्री कृष्ण कुमार यादव जी को हार्दिक शुभकामनायें और बधाइयाँ.

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

यह खामोशी ऐसे ही कायम रहे।

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ब्‍लॉगवाणी: ब्‍लॉग समीक्षा का एक विनम्र प्रयास।

OM KASHYAP ने कहा…

sunder bhav
khamoshi
wah ye dastak kaisi

KK Yadav ने कहा…

आप सभी को मेरी यह कविता पसंद आई..आप सभी का आभार. यूँ ही अपना स्नेह बनाये रखें.

KK Yadav ने कहा…

@ Bhanvar ,

सम्मान पर आपकी शुभकामनाओं के लिए बहुत-बहुत आभार.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 22- 02- 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.uchcharan.com/

वाणी गीत ने कहा…

जब ख़ामोशी इतना कुछ बोलती है तो उससे शिकवा कैसा !

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

बेहतरीन गीत...बधाई.

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत ही उम्दा रचना , बधाई स्वीकार करें .
आइये हमारे साथ उत्तरप्रदेश ब्लॉगर्स असोसिएसन पर और अपनी आवाज़ को बुलंद करें .कृपया फालोवर बनकर उत्साह वर्धन कीजिये

ज्योति सिंह ने कहा…

khamoshi bhi jaan leva ban jaati kabhi kabhi ,sundar .

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मौन कितना कुछ कह सकता है।