
ऐसे में यह जानना अचरज भरा लगेगा कि दुनिया का सबसे पुराना पत्र बेबीलोन के खंडहरों से मिला था, जो कि मूलत: एक प्रेम-पत्र था. बेबीलोन की किसी युवती का प्रेमी अपनी भावनाओं को समेटकर उससे जब अपने दिल की बात कहने बेबीलोन तक पहुँचा तो वह युवती तब तक वहां से जा चुकी थी। वह प्रेमी युवक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाया और उसने वहीं मिट्टी के फर्श पर खोदते हुए लिखा-
''मैं तुमसे मिलने आया था, तुम नहीं मिली।''
यह छोटा सा संदेश विरह की जिस भावना से लिखा गया था, उसमें कितनी तड़प शामिल थी। इसका अंदाजा सिर्फ वह युवती ही लगा सकती थी जिसके लिये इसे लिखा गया। भावनाओं से ओत-प्रोत यह पत्र 2009 ईसा पूर्व का है और आज हम वर्ष 2011 में जी रहे हैं. ...तो आइये पत्रों के इस सफर का स्वागत करते हैं और अपने किसी को एक खूबसूरत पत्र लिखते हैं !!
- कृष्ण कुमार यादव
12 टिप्पणियां:
बहुत महत्वपूर्ण जानकारी...अद्भुत !!
बहुत महत्वपूर्ण जानकारी...अद्भुत !!
तब भी यही होता था...
'मैं तुमसे मिलने आया था, तुम नहीं मिलीं।' इस एक वाक्य में प्रेमी ने अपनी सम्पूर्ण विरह पीड़ा को उड़ेल कर रख दिया है। आपके द्वारा दी गई यह जानकारी मेरे लिए नई है। इसके लिए आपका बहुत बहत धन्यवाद।
नई जानकारी,आभार.
हम तो आज भी पत्र लिखते हैं. पत्रों की आत्मीय दुनिया बड़ी सुखद लगती है.
दुनिया का पहला पत्र हम सभी के साथ शेयर करने के लिए के.के. जी और आकांक्षा जी का धन्यवाद.
पत्रों की पुरानी दुनिया में खोना..लाजवाब !!
http://meri-avivyakti.blogspot.com/2011/10/blog-post_15.html
ise plzzz visit karen
बहुत महत्वपूर्ण जानकारी
रोचक और दिलचस्प पत्र.
यह छोटा सा संदेश विरह की जिस भावना से लिखा गया था, उसमें कितनी तड़प शामिल थी। इसका अंदाजा सिर्फ वह युवती ही लगा सकती थी जिसके लिये इसे लिखा गया।...SAhi likha.
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