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गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

हिंदी ब्लागिंग की 13वीं वर्षगाँठ : हिन्दी ब्लॉगिंग में एक परिवार के तीन सदस्यों ने बनाया कीर्तिमान

आज हिंदी ब्लागिंग की 13 वीं वर्षगाँठ है। यद्यपि वर्ष 1999 में आरम्भ हुआ ब्लॉग वर्ष 2016 में 17 साल का सफर पूरा कर चुका है। वर्ष 2003 में यूनीकोड हिंदी में आया और तद्नुसार हिन्दी ब्लॉग का भी आरम्भ हुआ। यद्यपि इससे पूर्व विनय जैन ने 19 अक्टूबर 2002 को अंग्रेजी ब्लॉग पर हिन्दी की कड़ी सर्वप्रथम आरंभ कर इसका आगाज किया था, पर पूर्णतया हिन्दी में ब्लॉगिंग आरंभ करने का श्रेय आलोक को जाता है, जिन्होंने 21 अप्रैल 2003 को हिंदी के प्रथम ब्लॉग ’नौ दो ग्यारह’ से इसका आगाज किया। यहाँ तक कि ‘ब्लॉग‘ के लिए ‘चिट्ठा‘ शब्द भी उन्हीं का दिया हुआ है। आज उन सभी लोगों को याद करते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हिंदी ब्लागिंग को इस मुकाम तक पहुँचाया !! 

हैप्पी बर्थ-डे टू हिन्दी ब्लॉगिंग......इस अवसर पर उत्तर प्रदेश और राजस्थान के विभिन्न अख़बारों में प्रकाशित खबरों को भी आप सभी के साथ शेयर कर रही हूँ। 

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न्यू मीडिया के इस दौर में ब्लाॅगिंग लोगों के लिए अपनी बात कहने का सशक्त माध्यम बन चुका है। राजनीति की दुनिया से लेकर फिल्म जगत, साहित्य से लेकर कला और संस्कृति से जुड़े तमाम नाम ब्लॉगिंग से जुडे हुए हैं।  आज ब्लाॅग सिर्फ जानकारी देने का माध्यम नहीं बल्कि संवाद, प्रतिसंवाद, सूचना विचार और अभिव्यक्ति का भी सशक्त ग्लोबल मंच है।

यदयपि ब्लागिंग का आरंभ  1999 से माना  जाता है पर हिंदी में ब्लागिंग का आरम्भ वर्ष 2003 में हुआ। आज हिंदी में करीब एक लाख से ज्यादा ब्लॉग हैं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग बखूबी इसके माध्यम से सक्रिय हैं। इनमें एक परिवार ऐसा भी है, जिसके सभी सदस्य हिंदी ब्लॉगिंग से जुड़े हुए हैं।  चर्चित हिंदी ब्लॉगर एवं सम्प्रति राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के  निदेशक  डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव बताते हैं कि पूर्णतया हिन्दी में ब्लाॅगिंग आरंभ करने का श्रेय आलोक को जाता है, जिन्होंने 21 अप्रैल 2003 को हिंदी के प्रथम ब्लॉग ’नौ दो ग्यारह’ से इसका आगाज किया। सार्क देशों के सर्वोच्च 'परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान' से सम्मानित एवं नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित तमाम देशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले श्री यादव जहाँ अपने साहित्यिक रचनाधर्मिता हेतु "शब्द-सृजन की ओर" (http://kkyadav.blogspot.in/) ब्लॉग लिखते हैं, वहीं डाक विभाग को लेकर "डाकिया डाक लाया" (http://dakbabu.blogspot.in/) नामक उनका ब्लॉग भी चर्चित है। श्री यादव का पूरा परिवार ही हिंदी ब्लॉगिंग से जुड़ा हुआ है।

वर्ष 2015 में हिन्दी का सबसे लोकप्रिय ब्लाॅग 'शब्द-शिखर' (http://shabdshikhar.blogspot.com) को चुना गया और इसकी मॉडरेटर आकांक्षा यादव को  हिन्दी में ब्लाॅग लिखने वाली शुरूआती महिलाओं में गिना जाता है। ब्लॉगर दम्पति कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव को  'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दम्पति',  'परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान' के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा नवम्बर, 2012 में ”न्यू मीडिया एवं ब्लाॅगिंग” में उत्कृष्टता के लिए ”अवध सम्मान से भी विभूषित किया जा  चुका  है। इस दंपती ने वर्ष 2008 में ब्लाॅग जगत में कदम रखा और  विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लाॅग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लाॅगिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लाॅगिंग को भी नये आयाम दिये।

नारी सम्बन्धी मुद्दों पर प्रखरता से लिखने वालीं आकांक्षा यादव का मानना है कि न्यू मीडिया के रूप में उभरी ब्लाॅगिंग ने नारी-मन की आकांक्षाओं को मुक्ताकाश दे दिया है। आज एक लाख से भी ज्यादा हिंदी ब्लाॅग में लगभग एक तिहाई ब्लाॅग महिलाओं द्वारा लिखे जा रहे  हैं। बकौल आकांक्षा, ये महिलाएं अपने अंदाज में न सिर्फ ब्लाॅगों पर सहित्य-सृजन कर रही हैं  बल्कि तमाम राजनैतिक-सामाजिक-आर्थिक मुददों से लेकर घरेलू समस्याओं, नारियों की प्रताड़ना से लेकर अपनी अलग पहचान बनाती नारियों को समेटते विमर्श, पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण से लेकर  पुरूष समाज की नारी के प्रति दृष्टि, जैसे तमाम विषय ब्लाॅगों पर चर्चा का विषय बनते हैं।

ब्लॉगर दम्पति यादव की 9 वर्षीया सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को भारत की सबसे कम उम्र की ब्लॉगर माना जाता है, जो कि वर्तमान में हैप्पी आवर्स स्कूल, जोधपुर में कक्षा 4 की छात्रा हैं। अक्षिता की प्रतिभा को देखते हुए भारत सरकार ने  वर्ष 2011 में उसे "राष्ट्रीय बाल पुरस्कार" से सम्मानित किया, वहीं पिछले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका में उसे  "परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान" से भी सम्मानित किया गया। इसके 'पाखी की दुनिया'  (http://pakhi-akshita.blogspot.in/) ब्लॉग को 100 से ज्यादा देशों में देखा-पढा जाता है और लगभग 450 पोस्ट वाले इस ब्लॉग को 260 से ज्यादा लोग नियमित अनुसरण करते हैं।

हिंदी ब्लॉगिंग की दशा और दिशा पर पुस्तक लिख रहे चर्चित ब्लॉगर कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि,  आज हिन्दी ब्लाॅगिंग में हर कुछ उपलब्ध है, जो आप देखना चाहते हैं। हर ब्लॉग का अपना अलग जायका है। यहाँ खबरें हैं, सूचनाएं हैं, विमर्श हैं, आरोप-प्रत्यारोप हैं और हर किसी का अपना सोचने का नजरिया है। तेरह सालों के सफर में हिंदी ब्लागिंग ने एक लम्बा मुकाम तय किया है। आज हर आयु-वर्ग के लोग इसमें सक्रिय हैं, शर्त सिर्फ इतनी है कि की-बोर्ड पर अंगुलियाँ चलाने का हुनर हो ।










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