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सोमवार, 24 जनवरी 2011

मैं अजन्मी...


मेरी यह कविता 'इण्डिया टुडे' पत्रिका के परिशिष्ट 'इण्डिया टुडे स्त्री' (3 मार्च, 2010) में प्रकाशित हुई थी। आज 'राष्ट्रीय बालिका दिवस' (24 जनवरी) पर उसे ही यहाँ प्रस्तुत कर रही हूँ-

मैं अजन्मी
हूँ अंश तुम्हारा
फिर क्यों गैर बनाते हो
है मेरा क्या दोष
जो, ईश्वर की मर्जी झुठलाते हो

मै माँस-मज्जा का पिण्ड नहीं
दुर्गा, लक्ष्मी औ‘ भवानी हूँ
भावों के पुंज से रची
नित्य रचती सृजन कहानी हूँ

लड़की होना किसी पाप की
निशानी तो नहीं
फिर
मैं तो अभी अजन्मी हूँ
मत सहना मेरे लिए क्लेश
मत सहेजना मेरे लिए दहेज
मैं दिखा दूँगी
कि लड़कों से कमतर नहीं
माद्दा रखती हूँ
श्मशान घाट में भी अग्नि देने का

बस विनती मेरी है
मुझे दुनिया में आने तो दो !!!

21 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर शब्दों से सन्देश दिया है

Kailash Sharma ने कहा…

मैं तो अभी अजन्मी हूँ
मत सहना मेरे लिए क्लेश
मत सहेजना मेरे लिए दहेज
मैं दिखा दूँगी
कि लड़कों से कमतर नहीं
माद्दा रखती हूँ
श्मशान घाट में भी अग्नि देने का


लाज़वाब..बहुत भावपूर्ण और सार्थक प्रस्तुति...निशब्द कर दिया...आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 25-01-2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.uchcharan.com/

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

बहुत ही मार्मिक कविता.

सादर
--------
क्या आज क़े नौजवान नेताजी का पुनर्मूल्यांकन करवा सकेंगे?

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हम सबकी यही प्रार्थना है।

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

मन को छूने वाली रचना .....

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

सशक्त सन्देश,बहुत सुन्दर.

मनोज कुमार ने कहा…

आज बालिका दिवस है। इस अवसर पर यह एक सार्थक पोस्ट है।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुन्दर सन्देश

Mithilesh dubey ने कहा…

लाज़वाब..बहुत भावपूर्ण और सार्थक प्रस्तुति...निशब्द कर दिया..

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

बहुत ही सुन्दर सन्देश इस कविता के माध्यम से...

Akanksha Yadav ने कहा…

आप सभी को यह कविता पसंद आई..इसके लिए बहुत-बहुत आभार !!

Akanksha Yadav ने कहा…

@ SAngita ji,

इस पोस्ट की चर्चा के लिए आभार. अपना स्नेह बनाये रहें.

vijai Rajbali Mathur ने कहा…

ह्रदयस्पर्शी,मर्मस्पर्शी कविता के भावों को लोग समझ कर पालन करें तो बहुत अच्छा हो

vandan gupta ने कहा…

सुन्दर संदेश देती मर्मस्पर्शी रचना।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बालिका दिवस पर सुन्दर,सही और सार्थक

Unknown ने कहा…

बस विनती मेरी है
मुझे दुनिया में आने तो दो !!! ...Man ko chuu gai.

Unknown ने कहा…

गणतंत्र दिवस की 62 वीं वर्षगाँठ पर आपको हार्दिक शुभकामनायें।

udaya veer singh ने कहा…

priya akanksha ji

sadar namskar

samaj ki vikrit soch ne hamen yah kahane ko badhya kiya hai .fark aaya hi kyon ? kisne kiya ? kyon kiya ?

meri ek rachna -" beti hi sansar "
ko jarur padhen . aabhar .

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

बड़ी मर्मस्पर्शी कविता...अच्छी लगी.

Roshi ने कहा…

अत्यंत सुंदर कविता भाव poord अभिव्यक्ति ...