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शनिवार, 23 अप्रैल 2016

''शब्द-शिखर'' पर ब्लॉगिंग का सफरनामा : पाँच शतक का आँकड़ा पार

हिंदी ब्लॉगिंग ने अपना एक लम्बा सफर तय किया है। कभी दो-चार पंक्तियों से आरम्भ हुए हिंदी ब्लॉग ने वक़्त के साथ रफ़्तार पकड़ी और आम जन के साथ तमाम नामी-गिरामी लोगों के लिए अपनी बात कहने का माध्यम बन गया हिंदी ब्लॉग। यह संयोग ही हैं कि अभी 21 अप्रैल, 2016 को हिंदी ब्लॉग ने 13 साल पूरे किये हैं और ठीक उसके एक दिन बाद 22 अप्रैल, 2016 को हमने अपने ब्लॉग शब्द-शिखर पर प्रकाशित पोस्टों का पाँच शतक पूरा किया है अर्थात शब्द-शिखर पर पाँच सौ पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं।  

20  नवंबर, 2008 को आरम्भ हुआ शब्द-शिखर ब्लॉग भी लगभग साढ़े सात साल का सफर तय कर चुका है।आज शब्द-शिखर ब्लॉग पर 500 पोस्ट प्रकाशित हैं, जिन पर 6,700 से ज्यादा प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। कुल पृष्ठ दृश्य 2 लाख से भी ज्यादा हैं। दुनिया के लगभग 100 से ज्यादा देशों से किसी न किसी रूप में लोगों ने शब्द-शिखर ब्लॉग को देखा-पढ़ा या विजिट किया है। शब्द-शिखर को  363 लोग फॉलो करते हैं और इसे और भी समृद्ध बनाते हैं।  इसमें कोई शक नहीं कि इस ब्लॉग ने हमें बहुत सम्मान दिया। उस दौर में जबकि फेसबुक के पदार्पण के बाद हर कोई हिंदी ब्लॉग को बीते हुए दौर की बात मानकर, इसका मोह छोड़ रहा था, उस दौर में भी हम इससे अपना मोह नहीं छुड़ा पाये। बीच में एक दौर ऐसा भी आया कि कुछेक पोस्टों पर प्रतिक्रियाएं लगभग शून्य ही थीं और ब्लॉग की पठनीयता भी घट रही थी। पर ज्यादा दिन नहीं बीता, और धीरे-धीरे सब कुछ सहज हो गया।



"शब्द-शिखर" ब्लॉग की तमाम पोस्टों को जहाँ दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला,राष्ट्रीय सहारा, राजस्थान पत्रिका, आज समाज, गजरौला टाईम्स, जन सन्देश, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, दस्तक, आई-नेक्स्ट, IANS द्वारा जारी फीचर में स्थान दिया गया, वहीं इस ब्लॉग से तमाम रचनाएँ लेकर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं ने प्रकाशित भी कीं। 

अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, लखनऊ (27 अगस्त, 2012) में हिंदी ब्लॉग के एक दशक पूरा होने पर परिकल्पना समूह द्वारा जहाँ ’दशक के श्रेष्ठ ब्लागर दम्पत्ति' के रूप में हमें (कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव) सम्मानित किया गया, वहीँ अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, काठमांडू, नेपाल (13-14 सितंबर 2013) में  ”परिकल्पना ब्लॉग विभूषण सम्मान” और श्री लंका में आयोजित पंचम अंतर्राष्ट्रीय ‪ब्लॉगर‬ सम्मेलन (23-27 मई 2015) में "परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान" से सम्मानित किया गया।  

‘न्यू मीडिया एवं ब्लागिंग’ में उत्कृष्टता के लिए  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने 1 नवम्बर, 2012 को हमें ( आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव) अवध सम्मान से विभूषित किया। जी न्यूज़ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ताज होटल, लखनऊ में किया गया था, जिसमें विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया, पर यह पहली बार हुआ जब किसी दम्पति को युगल रूप में यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया। 


ब्लॉगिंग के चलते ही हमें हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड के लिए भी नामांकित किया गया, जहाँ फिल्म अभिनेत्री शबाना आज़मी, संगीतकार वाजिद खान, सांसद डिम्पल यादव ने सम्मानित किया। 



इसी क्रम में डॉयचे वेले की बॉब्स - बेस्ट ऑफ ऑनलाईन एक्टिविज्म प्रतियोगिता-2015  में इंटरनेट यूजरों ने  'पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड' श्रेणी में  'शब्द-शिखर' (www.shabdshikhar.blogspot.in/) ब्लॉग  को हिंदी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग के रूप में चुना। हिंदी सहित 14 भाषाओं में पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड के तहत एक-एक सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग चुना गया, जिसमे कुल मिला कर करीब 30,000 वोट डाले गए। ज्यूरी ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि, ''आकांक्षा यादव साहित्य, लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं।  उन्हें हिन्दी में ब्लॉग लिखने वाली शुरुआती महिलाओं में गिना जाता है।  आकांक्षा महिला अधिकारों पर लिखना पसंद करती हैं।  अपने ब्लॉग में वह अपने निजी अनुभव और कविताएं भी शामिल करती हैं।''  विजेताओं को 23 जून को जर्मनी के बॉन शहर में होने वाले ग्लोबल मीडिया फोरम के दौरान पुरस्कृत किया गया।  

निश्चितत:, यह आप सभी का स्नेह ही है जो कि "'शब्द-शिखर" ब्लॉग को जीवंत और समृद्ध बनाए हुए है। आज हम उन सभी लोगों को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने हिंदी ब्लागिंग में शब्द-शिखर को इस मुकाम तक पहुँचाया !! 

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आज के दिन 20 नवंबर, 2008  को लिखी अपनी पहली पोस्ट 'ब्लागिंग' और 'एस.एम.एस.'  को पुन: प्रकाशित कर रही हूँ, जहाँ से हमने ब्लॉगिंग का शुभारम्भ किया था -

ब्लॉगिंग आज के दौर की विधा है. पत्र-पत्रिकाओं से परे ब्लॉग-जगत का अपना भरा-पूरा संसार है, रचनाधर्मिता है, पाठक-वर्ग है. कई बार बहुत कुछ ऐसा होता है, जो हम चाहकर भी पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से नहीं कह पाते, ब्लॉगिंग  उन्हें स्पेस देता है. कहते हैं ब्लॉगिंग एक निजी डायरी की भांति है, एक ऐसी डायरी जहाँ आप अपनी भावनाएं सबके समक्ष रखते हैं, उस पर तत्काल प्रतिक्रियाएँ प्राप्त करते हैं और फिर संवाद का दायरा बढ़ता जाता है. संवाद से साहित्य और सरोकारों में वृद्धि होती है. जरूरी नहीं कि हम जो कहें, वही सच हो पर कहना भी तो जरूरी है. यही तो लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया है. ब्लॉगिंग  भी उस लोकतंत्र की दिशा में एक कदम है, जहाँ हम अपने भाव बिना किसी सेंसर के, बिना किसी एडिटिंग के, बिना किसी भय के व्यक्त कर सकते हैं...पर साथ ही साथ यह भी जरूरी है कि इसका सकारात्मक इस्तेमाल हो. हर तकनीक के दो पहलू होते हैं- अच्छा और बुरा. जरुरत अच्छाई की हैं, अन्यथा अच्छी से अच्छी तकनीक भी गलत हाथों में पड़कर विध्वंसात्मक रूप धारण कर लेती है.

इसी क्रम में मैं आज ब्लॉगिंग  में कदम रख रही हूँ. मेरी कोशिश होगी कि एक रचनाधर्मी के रूप में रचनाओं को जीवंतता के साथ सामाजिक संस्कार देने का प्रयास करूँ. यहाँ बिना लाग-लपेट के सुलभ भाव-भंगिमा सहित जीवन के कठोर सत्य उभरें, यही मेरी लेखनी और ब्लॉगधर्मिता की शक्ति होगी.

 मैंने अपने ब्लॉग का नाम 'शब्द-शिखर' रखा है, क्योंकि शब्दों में बड़ी ताकत है. ये शब्द ही हमें शिखर पर भी ले जाते हैं. शब्दों का सुन्दर चयन और उनका सुन्दर प्रयोग ही किसी रचना को महान बनता है. मेर इस ब्लॉग पर होंगीं साहित्यिक रचनाएँ, मेरे दिल की बात-जज्बात, सरोकार, वे रचनाएँ भी मैं यहाँ साभार प्रकाशित करना चाहूँगीं, जो मुझे अच्छी लगती हैं.

-आकांक्षा यादव @ शब्द-शिखर 
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