'चेन्नई एक्सप्रेस' की धूम है। चारों तरफ इसके सौ करोड़ क्लब में शामिल होने की चर्चाएँ जोरों पर है, पर आश्चर्य इस बात पर हो रहा है कि सारा श्रेय शाहरुख़ खान को दिया जा रहा है। मीडिया से लेकर समीक्षक तक शाहरुख़ खान के गुण-गान गा रहे हैं, जबकि इस फिल्म को सुपर-डुपर हिट बनाने और इस मुकाम तक ले जाने में दीपिका पादुकोण की भी उतनी ही भूमिका है। दीपिका पादुकोण का रोल फिल्म में कहीं से भी शाहरुख़ खान से उन्नीस नहीं है, फिर सारा यश और श्रेय खान को ही क्यों ?
शाहरुख़ ने फिल्म की कास्टिंग में भले ही अभिनेत्री दीपिका का नाम हीरो से पहले दिखाकर शाहरुख़ ने पब्लिसिटी हासिल की हो, पर जब वास्तव में श्रेय देने का समय आया तो शाहरुख़ ने दीपिका का नाम लेना भी मुनासिब न समझा और मीडिया से लेकर समीक्षक तक भी इसका श्रेय देने के लिए खान की जय-जयकार में लगे हुए हैं !
ऐसे दोहरे मापदंड यही दर्शाते हैं कि हिंदी फिल्म जगत वालीवुड भले ही प्रगतिशीलता का आवरण ओढ़ ले, पर अभी भी वह पुरुषवादी मानसिकता से ग्रस्त है !!
आजकल आप जो ब्लॉग - फेसबुक पर लिखते हैं, उसे प्रिंट मीडिया में भी जगह मिल रही है। 'वालीवुड की दोहरी मानसिकता' पर प्रकाशित हमारी पोस्ट को अन्य लोगों की पोस्ट के साथ जनसंदेश टाइम्स (17 अगस्त, 2013 ) में प्रकाशित किया गया है ....आभार !!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें