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शुक्रवार, 13 मार्च 2015

आकांक्षा यादव को ब्लॉगिंग के लिए परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान

अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका  में 'परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान' दिए जाने की घोषणा को इलाहाबाद और हमारे गृह-नगर गाजीपुर में समाचार पत्रों ने हाथों-हाथ लिया और विभिन्न अख़बारों में इससे संबंधित ख़बरें प्रकाशित हुईं।  कुछेक की कतरनें आप सभी के साथ शेयर कर रही हूँ !!










Blogger Akanksha Yadav to be awarded Parikalpana SAARC Summit Award 







आकांक्षा यादव को ब्लॉगिंग के लिए श्रीलंका में मिलेगा परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान

(आकांक्षा यादव को ब्लॉगिंग के लिए परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान)

मंगलवार, 10 मार्च 2015

इलाहाबाद की आकांक्षा यादव को ''परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान''

इधर हम ‪लोग कृष्ण कुमार जी के इलाहाबाद‬ से ‪जोधपुर‬ स्थानांतरण पर पैकिंग में व्यस्त थे और उधर अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन के संयोजक रवीन्द्र प्रभात जी ने जाते-जाते हमें "परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान" दिए जाने की घोषणा कर विदाई का नायब तोहफा भी दे दिया। प्रभात जी ने सूचित किया है कि आगामी 23 से 27 मई 2015 को श्री लंका में आयोजित पंचम अंतर्राष्ट्रीय ‪ब्लॉगर‬ सम्मेलन में इस सम्मान के तहत अंगवस्त्र, सम्मान पत्र, प्रतीक चिन्ह और 21,000/- की धनराशि प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभात जी !!


इलाहाबाद की आकांक्षा यादव को परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान 
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जैसा कि आप सभी को विदित है कि हर वर्ष, 8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। परिकल्पना सार्क सम्मान चयन समिति के द्वारा कल एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुये शेष बचे दो परिकल्पना सार्क सम्मान और एक परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान इस बार महिलाओं को ही देने का निर्णय लिया गया है, जिसकी बारी-बारी से उद्घोषणा की ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी गयी है।

तो चलिये शेष बचे दो सार्क सम्मनों की उद्घोषणा से पूर्व उद्घोषित करते हैं सबसे पहले परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान की। इस वर्ष के "परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान" विजेताओं की फेहरिस्त में पहला नाम घोषित हुआ है इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) की ब्लॉगर-लेखिका आकांक्षा यादव जी का, जिन्हें आगामी 23 से 27 मई 2015 को श्री लंका में आयोजित पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में अंगवस्त्र, सम्मान पत्र, प्रतीक चिन्ह और 21000/- की धनराशि प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है।

आकांक्षा जी ने वर्ष 2008 में ब्लाॅग जगत में कदम रखा और विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लाॅग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लाॅगिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लाॅगिंग को भी नये आयाम दिये। नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रुचि रखने वाली आकांक्षा यादव अग्रणी महिला ब्लॉगर हैं और इनकी रचनाओं में नारी-सशक्तीकरण बखूबी झलकता है।


रविवार, 8 मार्च 2015

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : बदलाव जरुरी है

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हर साल बहुत कुछ लिखा-कहा जाता है।  हमेशा नई उम्मीदें, नए सपने, नई बातें, नया कुछ कर गुजरने का जज्बा। पर कई बार इसमें एक ठहराव सा भी लगता है।  तमाम बातों के बाद हर साल निर्भया और दामिनी कांड होते हैं, बस नाम बदल जाते हैं।  पिछले दिनों बीबीसी द्वारा प्रदर्शित डाक्यूमेंटरी में जिस तरह से एक वहशी रेपिस्ट ने इंटरव्यू में अपनी कुत्सित मानसिकता को प्रदर्शित किया है, वह आँखें खोलने वाला है। यह हमारे सिस्टम की पोल भी खोलता है। सिस्टम से लेकर व्यक्ति तक हर किसी की सोच एक जैसी नहीं हो सकती, पर कुछ लोगों की सोच पूरे समाज को शर्मनाक स्थिति में खड़ा कर देती है।  दुर्भाग्य यह कि हर गलत चीज के पैरवीकार भी यहाँ बैठे हैं, किसी को पैसा चाहिए तो किसी को नाम। वाकई हमारा समाज संक्रमणकालीन दौर से गुजर रहा है। हर जरूरत शांत होकर बैठने की नहीं, बल्कि अपनी आवाज़ को बुलंद किये रहने की है, क्योंकि  बदलाव जरुरी है !!  


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : बदलते दौर में स्त्री 

बदलना जरुरी है : शब्दों से बदलाव की कोशिश 

क्या नारी अब भी अबला है ?

विश्व महिला दिवस : स्त्री का समुद्र आकाश 
महिलाओं की भागीदारी 


इण्डिया टुडे : तीन कविताएं- 21 वीं सदी की बेटी, मैं अजन्मी, एक लड़की

(उपरोक्त : विश्व महिला दिवस पर प्रकाशित आकांक्षा यादव की कुछेक रचनाएँ)

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हाइकु रचनाएँ

जाग उठी है
आज शिक्षित नारी
हक लेने को।

अबला नहीं
संवेदना की स्रोत
जानिए इसे।

रिश्तों की डोर
सहेजती ये नारी
रुप विभिन्न।

नारी की शक्ति
पहचानिए इसे
दुर्गा-भवानी।

हर क्षेत्र में
रचे नया संसार
आज की नारी।

बाधाएँ तोड़
आसमां के सितारे
छू रही नारी।

नारी सशक्त
समाज बने सुखी
समृद्ध राष्ट्र।





मंगलवार, 3 मार्च 2015

होली के रंग कुछ कहते हैं

होली का त्यौहार करीब है।  बिना रंगों के होली का कोई अर्थ नहीं।  ये रंग हमारे जीवन में बड़े महत्वपूर्ण हैं। ये हमारे स्वास्थ्य और मूड को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। हमारे आसपास यूं तो कई रंग हैं, पर ये चाहे-अनचाहे हम पर अपना असर डालते ही हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इस मामले पर कई शोध किए हैं और पाया है कि रंग इतने प्रभावशाली हैं कि बीमारियों की रोकथाम तक में सहायक हैं। तभी तो कलर थेरेपी आज इतनी कारगर सिद्ध हो रही है। तो आप भी अपने जीवन को इन रंगों को भर लीजिए और उठाइए इन रंगों का लाभ:

लाल रंग

लाल रंग के फल-सब्जियों में यह रंग लाइकोपीन नाम के पोषक तत्व के कारण आता है। यह कैंसर की रोकथाम में सबसे अधिक कारगर है। इसके लिए सेब, स्ट्राबेरी, लाल मिर्च, बेरी, टमाटर, तरबूज आदि का सेवन करें। संतरी या पीले रंग वाली फल-सब्जियां बेटा-केरोटीन से युक्त होती हैं। यह आंखों और त्वचा के लिए अच्छे माने जाते हैं। गाजर, आम, शकरकंद, कद्दू, पपीता, पाइनएपल, पीच आदि को भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। हरे रंग के फल-सब्जियों में एंटीऑक्सिडेंट्स और फोटोकेमिकल्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो कैंसर की रोकथाम में सहायक हैं। इसके लिए ब्रोकली, पालक, बंदगोभी, शिमला मिर्च, बीन्स आदि का सेवन करें।

पश्चिम में लाल रंग को प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसे सेक्सुअल कलर माना जाता है। लेकिन हमारे देश में यह रंग मां दुर्गा का रंग है। उन्हें हमेशा लाल रंग की साड़ी में ही दिखाया जाता है। यह पवित्रता का सूचक है। इसे विवाह के लिए उपयुक्त माना जाता है। लाल रंग का सिंदूर भी तो पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते का सूचक होता है। लिपस्टिक, नेल पॉलिश में इसका प्रयोग लोकप्रिय है। इसे पहनने से आप भीड़ से अलग नजर आएंगी।

पीला रंग
पीला रंग उल्लास और ऊर्जा का प्रतीक है। पर इस रंग की खासियत है इसका हीलिंग पॉवर। हल्दी जो पीली होती है, उसे हमारे देश में सौंदर्य बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। इससे दिमाग अधिक क्रियाशील रहता है। यह रंग ध्यान आकर्षित करता है। आप पीला रंग न पहनना चाहें तो किसी अन्य रंग के साथ कांबीनेशन में इसे पहन सकती हैं।

नीला रंग

नीला रंग तो शक्ति और जीवन का प्रतीक है। चूंकि पानी भी पारदर्शी होता है इसलिए नीले रंग को पारदर्शी रंग माना जाता है। भगवान कृष्ण का यह मनपसंद रंग रहा है और इस साल यह रंग सबसे ज्यादा फैशन में है। तो इस रंग को अपने वॉर्डरोब का हिस्सा बनाने से हिचके नहीं। इस रंग को पहनकर आप स्टाइलिश भी दिखेंगी और खूबसूरत भी।

हरा रंग

हरा रंग प्रकृति का रंग है। यह आंखों को सुकून प्रदान करता है। आप गर्मी के मौसम में हरा रंग खूब पहनें। 

ये भी आजमा सकती हैं .

आप एक्सेसरीज के रूप में भी तरह-तरह के रंगों को अपने वॉर्डरोब का हिस्सा बना सकती हैं। आप एक गाढ़े रंग का बैग लें। ऐसा बैग जो आपकी पर्सनैलिटी से सूट करता हो। इस समय फैशन में नीला, ब्राइट ब्राउन और काला रंग है। गर्मियां आ रही हैं। इसलिए आपका सनग्लास ज्वेल टोन शेड वाला जैसे पर्पल, ब्ल्यूबेरी या  आरेंज रंग में हो सकता है। पैंट्स, लैगिंग्स, स्कर्ट आदि के साथ ब्राइट रंग के सैंडिल्स पहनें। आजकल लांग बूट्स भी फैशन में हैं। रंगों के साथ प्रयोग करने में हिचके नहीं। हिचक टूटेगी और आप फैशनेबल दिखेंगी।

जीवन में ऐसे भरे नए रंग

अगर काम की व्यस्तता के बीच आप दोनों एक-दूसरे को समय नहीं दे पाते, हैं तो एक दिन सारे काम छोड़कर बाहर घूमने जाएं। सिर्फ आप दोनों। क्योंकि आपको एक-दूसरे की पसंद-नापसंद पता है इसलिए सरप्राइज प्लान कर सकती हैं। ज्यादा कुछ नहीं करना चाहती हैं तो फिल्म देखने और साथ शॉपिंग करने से भी बात बन सकती है। एक-दूसरे से जब भी बात करें, तो उसमें शिकवे-शिकायतों को न आने दें। हंसी-मजाक हो, तारीफ हो। अगर कभी कोई बात बुरी लगती है तो उसे हल्के में लें। जीवन को भारी-भरकम बनाकर जीने से क्या फायदा? दिल में कोई बात है तो उसे हल्के माहौल में शेयर करें। रोमांस न खत्म होने दें। प्यार बना रहेगा तो ही रिश्ता खूबसूरत लगेगा। इसलिए रोमांस के लिए समय तो आपको खुद ही निकालना होगा। साथ बैठकर बातें करें। हर मसले पर बात करें। भविष्य की योजनाओं से लेकर आज की कशमकश तक। अगर बातचीत होती रही तो एक-दूसरे को ज्यादा समझेंगी और रिश्ते में दूरियां नहीं आएंगी। नौकरीपेशा हैं तो परिवार के साथ भी इस साल ज्यादा समय बिताएं। बच्चों के साथ घूमने जाएं और उनसे बातें करें। अगर बच्चे बड़े हैं तो आप उनसे अपनी समस्याओं को शेयर कर सकती हैं। इससे बच्चे और आपके बीच का रिश्ता और मजबूत होगा। आपसी विश्वास बढ़ेगा और जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा रंगीन हो जाएगी।


रंगों का महत्व
लाल रंग को सभी रंगों में से सबसे अधिक चटक रंग माना जाता है। व्यायाम के समय इस रंग के कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह स्फूर्ति प्रदान करने वाला रंग माना जाता है। लेकिन इस रंग के अत्यधिक प्रयोग के कई खराब परिणाम हो सकते हैं जैसे तनाव या गुस्सा। 

ज्यादातर स्माइली पीले रंग की ही होती हैं। इसका कारण यह है कि पीला रंग हमारे दिमाग में सेरोटोनिन नामक केमिकल बनने के लिए जिम्मेदार है, जिससे हम खुश रहते हैं। कई शोध यह साबित करते रहे हैं कि पीला रंग हमारी एकाग्रता को बढ़ाता है पर इसके अत्यधिक प्रयोग से हमें चक्कर आ सकता है और जहां इसका ज्यादा प्रयोग हुआ हो, वहां लोगों को अधिक गुस्सा आता देखा गया है। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है।
नीले रंग का प्रयोग रचनात्मकता को बढ़ाता है। यह दिमाग में ऐसे केमिकल रिलीज करने में मददगार है, जिससे हम रिलैक्स होते हैं। यह भोजन का रंग नहीं है, इसलिए कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि इस रंग का खाना परोसने पर लोगों को खाने की इच्छा ही नहीं हुई। यानी रचनात्मकता बढ़ाने के लिए इस रंग को अपनाएं।

काला रंग शक्ति और स्वामित्व का प्रतीक है। यह ज्ञान और बुद्धिमता को दर्शाने वाला है। यह फैशन इंड्रस्टी का प्रमुख रंग है। हालांकि इसे गुस्से वाला रंग माना जाता रहा है।

सफेद रंग को सबसे प्राकृतिक रंग माना जाता है। ज्यादातर बच्चों के उत्पाद इसी रंग में आते हैं। इसे मासूमियत और सफाई का प्रतीक माना जाता है। इस रंग को डॉक्टर प्रयोग करते हैं।

हरे रंग को प्रकृति का रंग माना जाता है। यह तनाव कम करने वाला और राहत देने वाला रंग है। यह हाइजीन और जल्द रिकवरी करने वाला माना जाता है इसलिए अधिकतर अस्पतालों में हरे रंग का प्रयोग दिखता है। आंखों को भी यह रंग सुकून देता है।

रविवार, 1 मार्च 2015

स्वाइन फ्लू से बचाव


'स्वाइन फ्लू' का भय इस समय चारों तरफ व्याप्त है। हल्की सी खांसी और बुखार हुआ तो फ्लू का डर सताने लगता है। डॉक्टर्स का मानना है कि इसकी कोई अचूक दवा नहीं है, पर इससे बचने के लिए तमाम तरह के प्रयोग बताये जा रहे हैं। एलोपैथिक से लेकर आयुर्वेदिक और देशी नुस्खे तक अपनाये और बताये जा रहे हैं। 

देश के सभी राज्यों से स्वाइन फ्लू से बीमार होने के मामले तेजी से आ रहे हैं यही नहीं फ्लू में मौजूद एच1एन1 वायरस से होने वाली मौतों में भी इजाफा हो रहा है। तो ऐसे में हम सबको सावधान रहना बेहद जरुरी है । क्योंकि अगर आप लोगों के साथ उठ-बैठ रहे हैं, बस, ट्रेन, आदि में सफर कर रहे हैं, अगर आपके बच्चे स्कूल जा रहे हैं, तो आप या परिवार के सदस्य इस वायरस की चपेट में आसानी से आ सकते हैं।

क्या है स्वाइन फ्लू? 
स्वाइन इंफ्लुएंज़ा, इसे पिग इंफ्लुएंज़ा, स्वाइन फ्लू, होग फ्लू, पिग फ्लू या एच1एन1 वायरस भी कहा जाता है। यह तमाम प्रकार के स्वाइन इंफ्लुएंज़ा वायरसों में से किसी भी एक वायरस से फैल सकता है। इंसानों को होने वाले सामान्य फ्लू वायरस या बर्ड फ्लू के वायरस की चपेट में जब सुअर आता है, तब सुअर के शरीर के अंदर एच1एन1 वायरस का जन्म होता है। जब उस बीमार सुअर की चपेट में कोई इंसान आता है, तब उसे स्वाइन फ्लू हो जाता है। और फिर जब उस बीमार व्यक्त‍ि का इलाज अगर सही से नहीं हुआ और उसके संपर्क में अन्य लोग आये, तो उन लोगों तक भी यह वायरस फैल जाता है। यह वायर बहुत तेज गति से फैलता है। 2009 में एच1एन1 पूरी दुनिया में फैला था, तब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे महामारी घोष‍ित किया था। 

 कैसे फैलता है यह वायरस?
यह वायरस सुअर से आता है। अगर आप यह सोच रहे हैं कि आप तो कभी सुअर के करीब तक नहीं जाते इसलिये आप सुरक्ष‍ित हैं, तो आप गलत हैं। क्योंकि यह वायरस अब इंसानों में फैल चुका है। भारत में अध‍िकांश लोग बुखार आने के तीन दिन तक इंतजार करते हैं। यह देखते हैं कि साधारण पैरासिटामोल से बुखार उतर रहा है या नहीं, उसके बाद कोई एंटीबायोटिक दवा ले लेते हैं, वो भी डॉक्टर से बिना सलाह लिये। ऐसे लोग बीमारी की हालत में भी अपने परिवार के बेहद करीब रहते हैं, क्योंकि उन्हें पता नहीं होता है कि उन्हें साधारण फ्लू है या स्वाइन फ्लू। और अगर दुर्भायवश स्वाइन फ्लू है और वो उसी बस में यात्रा कर रहे हैं, जिसमें आप सवार हैं, तो आप तक उस वायरस के पहुंचने की प्रबलता बहुत ज्यादा है।

स्वाइन फ्लू से  बचाव 
स्वाइन फ्लू से  बचाव हेतु कपूर और इलायची के चूर्ण को कपडे में बाँध कर सूंघने का भी एक उपाय बताया गया है । पुराने समय में भी वातावरण को शुद्ध करने के लिए हमारे ऋषि-मुनि हवन किया करते थे । हवन में डाली जाने वाली सामग्री में औषधिय गुण होते हैं ।

संयोगवश, 5 मार्च को होली है । ऐसे में होलिका दहन को लोग हवन की तरह उपयोग कर सकते हैं । होलिका दहन में कपूर की 2-3 टिकिया जरूर डालें । एक परिवार से 2-3 टिकिया, एक जगह की होली में लगभग 20 परिवार कपूर की टिकिया होली में डालें और इसी प्रकार हर स्थान पर जलने वाली होली में किया जाये । होलिका दहन सभी स्थानों पर एक ही मुहूर्त में होता है , जब एक साथ इतने स्थानों पर इस प्रकार का धुआं उठेगा तो वातावरण में से कीटाणुओं का नाश होगा और वातावरण शुद्ध होगा ।

इस बात को सरलता से समझने के लिए 'कृष' फिल्म का उदाहरण लेते है। फिल्म कृष 3 में एक शहर एक खतरनाक वायरस से संक्रमित हो जाता है। लोगों को वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए जल्द से जल्द एंटी डोज़ देना जरूरी होता है। इतने कम समय में पूरे शहर के लोगो को एंटी डोज़ संभव नहीं होने पर उस दवा यानि एंटी डोज़ को हवा के माध्यम से ही लोगो में पहुचाया जाता है। बस कुछ ऐसा ही समझ लें और आपके परिवार/मित्रों में जो भी होलिका पूजन के लिए जाएँ, उन्हें बताएँ कि होलिका दहन में कपूर जरूर से डालें। 


रविवार, 22 फ़रवरी 2015

हिंदी काव्य साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय साहित्य सृजन के लिए आकांक्षा यादव 'मनोहरा देवी सम्मान' से सम्मानित

निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली द्वारा युवा साहित्यकार और ब्लॉगर आकांक्षा यादव को मातृभाषा हिंदी काव्य साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय साहित्य सृजन के लिए निराला जयंती के पावन अवसर पर 21 फरवरी, 2015 को 'मनोहरा देवी सम्मान' से अलंकृत किया गया। यह सम्मान निराला जी की पत्नी की स्मृति में दिया जाता है।  उनकी अनुपस्थिति में यह सम्मान उनके पतिदेव एवं  वरिष्ठ साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएं, इलाहाबाद परिक्षेत्र ने ग्रहण किया । इस अवसर पर पुष्पहार, शाल, प्रशस्ति-पत्र और पाँच हजार की नकद राशि देकर उन्हें सम्मानित किया गया। 

इस अवसर  पर निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली  द्वारा  श्रीमती आकांक्षा यादव (इलाहाबाद) को 'मनोहरा देवी स्मृति सम्मान' के अलावा  श्री अनूप अशेष (सतना, म.प्र.)  को 'निराला सम्मान', डा. धनन्जय सिंह (गाजियाबाद)  को 'प्रजा वत्सल राजा डालदेव स्मृति सम्मान' एवं डा. संतलाल विश्वकर्मा (रायबरेली) को 'मुल्ला दाउद सम्मान' से एक भव्य कार्यक्रम में सम्मानित-विभूषित किया गया।  

 समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं एडिशनल कमिश्नर, सेल टैक्स, बरेली  श्री कमलेश भट्ट कमल, अध्यक्षता डा. ओ.पी. सिंह एवं विशिष्ट अतिथि डा. चम्पा श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, फिरोज गाँधी पीजी कालेज, रायबरेली ने समारोह को गौरवान्वित किया। इस अवसर पर 'महाप्राण -2015' वार्षिकांक का लोकार्पण भी किया गया। इसके प्रधान संपादक श्री राजाराम भारतीय व संपादक श्री राम निवास पंथी हैं।  




प्रस्तुति :
-रत्नेश कुमार मौर्य
संयोजक - ’शब्द साहित्य’,  इलाहाबाद 






शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2015

आकांक्षा यादव को निराला स्मृति संस्थान, द्वारा ‘मनोहरा देवी स्मृति सम्मान’

युवा साहित्यकार एवं ब्लाॅगर आकांक्षा यादव को निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली द्वारा निरालाजी की धर्मपत्नी की स्मृति में दिये जाने वाले सम्मान “मनोहरा देवी स्मृति सम्मान“ के लिए चुना गया है। उक्त सम्मान निराला जयन्ती के अवसर पर 21 फरवरी 2015 को मनोहरा देवी के जन्म स्थान मुराई का बाग, डलमऊ, रायबरेली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया जायेगा। आकांक्षा यादव को यह सम्मान अनवरत साहित्य सेवा एवं अपनी रचनाओं में नारी सशक्तीकरण पर प्रमुखता से लिखने के लिए प्रदान किया जायेगा। आकांक्षा यादव इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव की पत्नी हैं। श्री यादव भी हिंदी की युवा पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उक्त जानकारी निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली के संयोजक श्री राम निवास पंथी ने दी। 

गौरतलब है कि आकांक्षा यादव एक लम्बे समय से साहित्य और ब्लाॅगिंग से अनवरत जुड़ी हुई हैं। आकांक्षा यादव की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर प्रकाशित होती रहती है। आकांक्षा यादव की 2 कृतियाँ ”चाँद पर पानी” (बालगीत संग्रह) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” प्रकाशित हैं। पत्र-पत्रिकाओं के साथ-साथ इंटरनेट पर भी सक्रिय आकांक्षा यादव की रचनाएँ तमाम वेब/ई-पत्रिकाओं, सोशल मीडिया और ब्लॉगों पर भी पढ़ी-देखी जा सकती हैं। नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रुचि रखने वाली आकांक्षा यादव की रचनाओं में नारी-सशक्तीकरण बखूबी झलकता है।

इससे पूर्व भी आकांक्षा यादव को विभिन्न साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। इनमें उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा ’’अवध सम्मान’’, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लाॅगर दम्पति’’ सम्मान, ”परिकल्पना ब्लॉग विभूषण सम्मान”, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘डाॅ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘ व ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’भारती ज्योति’, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, ‘‘एस.एम.एस.‘‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु दर्जनाधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं ।








सोमवार, 2 फ़रवरी 2015

बेहद शर्मनाक ! ये तो हद हो गई

एक तरफ हम 21 वीं सदी में अंतरिक्ष नापने से लेकर हाईटेक व्यक्तियों और स्मार्ट सिटी की बात कर रहे हैं, वहीँ इसी भारत देश में ऐसी घटनाएँ भी हो रही हैं कि सारी मानवता तार-तार हो जाती है। उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के रानीपुर के नगपुर गांव में खाना बनाते समय पत्नी का पल्लू उसके सिर से सरक गया तो इससे उसका पति इतना आगबबूला हो गया कि उसकी जमकर पिटाई कर दी। इससे भी मन नहीं भरा तो बाजार से ब्लेड खरीदकर ले आया और जबरदस्ती पत्नी के सिर के बाल साफ कर दिया। पत्नी गिड़गिड़ाती रही, माफी भी मांगी लेकिन वह नहीं पसीजा। हद तो तब हो गई जब उसे इसी हालत में सरे बाजार घुमाया। मामला  का है। रविवार को हुई इस घटना के दौरान सबसे शर्मनाक यह रहा कि पूरा गांव इस घटना को देखता रहा लेकिन बचाने कोई नहीं आया। अलबत्ता जानकारी मिलने पर पुलिस ने पति को हिरासत में ले लिया। 

शुक्रवार, 30 जनवरी 2015

बेटी की आँखों में आंसू, दिल में जज्बा ..... सलाम !

उत्तर प्रदेश का गाजीपुर ज़िला अपनी तमाम शौर्य-गाथाओं के लिए जाना जाता है। वीर अब्दुल हमीद से लेकर जम्‍मू-कश्‍मीर के त्राल में शहीद हुए कर्नल मुनीन्द्र नाथ राय तक यहाँ की एक दीर्घ ओजस्वी परम्परा रही है। मूलतः उत्तर प्रदेश के गाजीपुर ज़िला के डेढ़गाँवा ग्राम निवासी, 39 साल के मुनीन्द्र नाथ राय 42वीं राष्ट्रिय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) थे। उन्हें गुरुवार को दिल्ली कैंट में अंतिम विदाई दी गई। इस मौके पर हर आंख नम थी। शहीद कर्नल की बेटी ने बिलखते हुए पिता को सलामी देकर अंतिम श्रद्धांजलि दी। सलामी देते वक्त कर्नल राय की बेटी ने बहादुरी दिखाते हुए गोरखा राइफल्स का युद्धघोष 'होके के होई ना, होना ही परचा' अर्थात 'होगा कि नहीं होगा, होके ही रहेगा' बोला तो हर आंख छलक आई। बेटी की आँखों में आंसू, दिल में जज्बा ..... सलाम !! 

गुरुवार, 22 जनवरी 2015

हिंदी ब्लॉगिंग का विस्तृत होता दायरा

हिंदी ब्लॉगिंग का दायरा सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी तेजी से फ़ैल  रहा है।  इसी क्रम में 15 से 18 जनवरी 2015 तक भूटान की राजधानी थिम्पू और सांस्कृतिक राजधानी पारो में  चतुर्थ ‘‘अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन‘‘ का आयोजन किया गया। सम्मेलन के दौरान वैश्विक परिप्रेक्ष्य विशेषकर सार्क देशों में हिन्दी के पठन-पाठ्न, हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार, न्यू मीडिया के रूप में ब्लॉगिंग के विभिन्न आयामों एवं बदलते दौर में सोशल मीडिया की भूमिका इत्यादि विषयों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भूटान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव श्री फूब शृंग ने कहा कि भूमण्डलीकरण के इस दौर में विभिन्न देशों के साहित्य, संस्कृति एवं परिवेश को ब्लागिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से न सिर्फ महसूस किया जा सकता है बल्कि उसे विस्तार भी दिया जा सकता है। उन्होंने  भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रपति की हालिया भूटान यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भूटान में अंतर्राष्ट्रीय  ब्लागर सम्मेलन को भी उसी कड़ी  में देखने की जरूरत है। सार्क समिति के महिला विंग  की अध्यक्ष श्रीमती थिनले ल्हाम ने कहा कि नारी सशक्तीकरण पर आज विश्व भर में चर्चा हो रही है और ऐसे में सार्क देशों में ब्लागिंग से जुडी तमाम महिलाओं को देखना एक सुखद एहसास देता है। 

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ और ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि ब्लॉगिंग  न सिर्फ देशों और भाषाओं के बीच दूरियाॅं कम करती है बल्कि यह विभिन्न प्लेटफार्म पर काम कर रहे लोगों के विचारों को एकाकार रूप में देखने की सहूलियत भी देती है । ब्लागिंग व सोशल मीडिया के समाजिक सरोकारों पर चर्चा करते हुए इसे उन्होंने  दूर दराज के इलाकों तक भी जोडने की बात कही। असम विश्वविद्यालय सिल्चर के भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर नित्यानन्द पाण्डेय  ने कहा कि हिन्दी को समृद्ध करने में ब्लागिंग का महत्वपूर्ण योगदान है और इसके माध्यम से दुनिया भर के लोग हिन्दी से जुड रहे हैं। वरिष्ठ व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने अपने उद्बोधन में हिंदी ब्लॉगिंग के विभिन्न पहलुओं की चर्चा करते हुए इसे पुस्तकाकार रूप में भी लिपिबद्ध करने की बात कही। 

सम्मेलन के संयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि भूटान में अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मलेन आयोजित करने के पीछे उद्देश्य हिंदी संस्कृति को भूटानी संस्कृति के करीब लाना और हिंदी भाषा को यहाँ के वैश्विक वातावरण में प्रतिष्ठापित करना है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन का मूल उद्देश्य दक्षिण एशिया में ब्लॉग के विकास हेतु पृष्ठभूमि तैयार करना, हिंदी-संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना, भाषायी सौहार्द्रता एवं सांस्कृतिक अध्ययन-पर्यटन का अवसर उपलब्ध कराना है। 

‘‘अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन‘‘ के दौरान  उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से ब्लॉगर और साहित्यकार एवं निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव, हैदराबाद की सम्पत देवी मुरारका और रायपुर छतीसगढ़ के ललित शर्मा को  सर्वोच्च 'परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान' से नवाजा गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें 25,000 की धनराशि, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। साथ ही महाराष्ट्र के औरंगाबाद की अनुवादक सुनीता प्रेम यादव को परिकल्पना सार्क सम्मान प्रदान किया गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें पाँच  हजार की धनराशि, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के जनपदों मसलन सुल्तानपुर के डॉ राम बहादुर मिश्र को परिकल्पना साहित्य भूषण सम्मान, बाराबंकी के  एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन व डॉ विनय दास को क्रमशः परिकल्पना सोशल मीडिया सम्मान और परिकल्पना कथा सम्मान, लखनऊ की कुसुम वर्मा को परिकल्पना लोक-संस्कृति सम्मान, बहराइच के डॉ अशोक गुलशन को परिकल्पना हिन्दी गौरव सम्मान, रायबरेली से सूर्य प्रसाद शर्मा को परिकल्पना साहित्य सम्मान तथा हैदरगढ के ओम प्रकाश जयंत व विष्णु कुमार शर्मा को क्रमशः को परिकल्पना साहित्य श्री सम्मान व परिकल्पना सृजन श्री सम्मान तथा उन्नाव के विश्वंभरनाथ अवस्थी को परिकल्पना नागरिक सम्मान प्रदान किए गए। इसके अलावा इंदौर के प्रकाश हिन्दुस्तानी, रायपुर के गिरीश पंकज, अल्पना देशपांडे, अदिति देशपांडे, दिल्ली की सर्जना शर्मा और निशा सिंह, मुंबई से आलोक भारद्वाज, सिल्चर की डॉ शुभदा पाण्डेय आदि के साथ-साथ  देश-विदेश के लगभग तीस ब्लॉगर्स को विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए परिकल्पना सम्मान से नवाजा गया। 

इस अवसर पर पांच पुस्तकों क्रमशः संपत देवी मुरारका की यात्रा वृत्त तृतीय भाग, कुसुम वर्मा की ह्रदय कँवल, सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर की संघर्षों का खेल, विष्णु कुमार शर्मा की दोहावली, अशोक गुलशन की क्या कहूँ किससे कहूँ और परिकल्पना समय पत्रिका के जनवरी अंक के विमोचन के साथ-साथ परिकल्पना कोश  वेबसाईट का लोकार्पण हुआ, वहीं रायपुर छत्तीसगढ़ की अल्पना देशपांडे और अदिति देशपांडे की कलाकृतियों की प्रदर्शनी का लोकार्पण संपन्न हुआ।  इस अवसर पर कुसुम वर्मा के अवधी लोकगीतों की खुशबू में नहाई भूटान की एक शाम। डॉ राम बहादुर मिश्र के कुशल संचालन में सुर सरस्वती और संस्कृति की त्रिवेणी प्रवाहित करती काव्य संध्या और ब्लॉग पर हाशिए का समाज परिचर्चा में शामिल हुए भारत और भूटान के एक दर्जन से ज्यादा ब्लोगर्स। कार्यक्रम का  संचालन महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी श्रीमती सुनीता प्रेम यादव ने किया।

शुक्रवार, 2 जनवरी 2015

वर्ष नव, हर्ष नव



वर्ष नव,
हर्ष नव,
जीवन उत्कर्ष नव।

नव उमंग,
नव तरंग,
जीवन का नव प्रसंग।

नवल चाह,
नवल राह,
जीवन का नव प्रवाह।

गीत नवल,
प्रीत नवल,
जीवन की रीति नवल,
जीवन की नीति नवल,
जीवन की जीत नवल!

(नव वर्ष पर हरिवंश राय बच्चन जी की यह कविता साभार। 
इसे जितनी बार भी पढ़िए, जीवन में नई स्फूर्ति देती है।  )






नव वर्ष पर सपरिवार आप सभी को बहुत-बहुत बधाई और हार्दिक शुभ कामनाएँ। नव वर्ष 2015 आप सभी के जीवन में सुख, शांति, खुशहाली एवं समृद्धि लाए !!




गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

वास्तविक भारत 'रत्नों' की पहचान जरुरी

अटल बिहारी वाजपेयी  और मदन मोहन मालवीय  को भारत रत्न की घोषणा पर मन में एक सवाल जरूर कौंधा कि आखिर सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न इतना जल्दी मिल गया और अटल जी व मालवीय जी जैसे लोगों को इतना इंतज़ार क्यों करना पड़ा ? मालवीय जी की चौथी पीढ़ी जन्म ले चुकी है और अटल जी अपनी अस्वस्थता के चलते शायद ही कोई प्रतिक्रिया दे सकें। यह सवाल बार-बार उठता है कि आखिर भारत रत्न के लिए किसी के अंतिम दिनों का इंतज़ार क्यों किया जाता है।  अभी भी देश में तमाम ऐसी विभूतियाँ हैं और कई तो इस लोक को छोड़ चुकी हैं, जिन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए …पर उन्हें इस सर्वोच्च सम्मान से विभूषित करने में या तो राजनीति आड़े आ जाती है या उनकी पैरवी करने वाला कोई नहीं है।  बेहतर होगा कि हम देश के इस शीर्षस्थ नागरिक सम्मान को राजनीति और संकुचित आयामों से परे ले जाकर सोचें ताकि वास्तविक भारत 'रत्नों' को इसके लिए तरसना न पड़े !!